Sex Kahani आंटी और माँ के साथ मस्ती
06-13-2019, 12:45 PM,
#1
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आंटी और माँ के साथ मस्ती


ये बात आज के कई साल पहले की है,जब मेरे फादर का ट्रान्स्फर किसी बड़े सहर मे हुआ था,जब मे स्कूल मे ही था ,.हम लोग कंपनी के क्वाटर्स मे रहते थे,इसलिए वहाँ आपस मे औरते एक दूसरे से मिल जुल कर रहती थी,इसलिए जैसे ही हम आए ,जब उन्हे पता चला कि हम नये आए है सब हमारे घर आकर मिलने लगे,कुछ दिनो तक ऐसा ही चलता रहा,फिर कुछ महीने बाद एक मुस्लिम आंटी(हम लोग मुस्लिम आंटी को चाची बुलाते है)उनसे बहुत मिलना जुलना हो गया,मतलब कि मेरी मम्मी ऑर चाची बिना किसी काम के ही एक दूसरे से मिलने घर जाने लग गयी थी.मे नही जाता था उनके घर ,ऑर वैसे ज़्यादातर चाची ही हमारे घर आती थी.मुझे बड़ी गान्ड बहुत पसंद है,खास कर मेरी माँ की.मेरी माँ की उमर 45 साल है,ऑर उनकी गान्ड बहुत फैल गयी है,जिससे देख कर लगता है अभी जाकर गान्ड मसल दूं,पर डर लगता है,ऑर उस समय मेरी उमर भी इतनी नही थी कि मे जान सकूँ चुदाई का मज़ा क्या होता है,मैं बस यूँ कह सकता हूँ ,मुझे बड़ी गान्ड की तरफ आकर्षण बहुत थी,मेरी माँ की हाइट ज़्यादा नही थी,पर गान्ड फैली हुई थी,ऑर चाची जिनकी हाइट अच्छी थी उस हिसाब से उनकी गान्ड इतनी चौड़ी नही लगती जितनी मेरी माँ की लगती है,पर चाची की हाइट होने के कारण उनकी गान्ड बहुत सुडोल लगती है

हमारे घर मे कंप्यूटर ऑर इंटरनेट होने के कारण मैं बहुत पॉर्न देखने लग गया था(ये बात उस समय की है जब लोगो के घर मे कंप्यूटर ऑर इंटरनेट बहुत कम हुआ करता था)

ऑर चाची का हमारे घर ज़्यादा आने जाने के कारण मे उनकी गान्ड की तरफ बहुत आकर्षित होने लग गया था,ऑर मैं बाद मे उनके जाने के बाद बाथरूम मे जाकर अपना लंड हिलाने लग गया था,ऑर मुझे हिलाने मे बहुत दर्द होता था ,फिर भी मज़े के लिए मे हिलाया करता था.ओर जब जब चाची घर आती थी मे उनकी केवल गान्ड ही देखता था,ऑर बस मन मे सोचता काश ये गान्ड मसल्ने को मिल जाए,ऑर ये दिनचर्या ऐसे ही चलती रही,ऑर मुझे पता ही नही चला मे कब गान्ड मराई के वीडियो(अनल पॉर्न) देखने लग गया

मे अब केवल वो ही वीडियो देखता था जिसमे पोर्न्स्टार की गान्ड मारी जाती है.
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06-13-2019, 12:46 PM,
#2
RE: Sex Kahani आंटी और माँ के साथ मस्ती
एक दिन जब मे चाची के आने का इंतज़ार कर रहा था ,उस दिन चाची आई,उन्होने डोर बेल बजाई,अक्सर मे ही दरवाज़ा खोलता था,जिस कुछ देर के लिए ही बात चीत हो सके,मुझे आज ही याद है चाची हरा(ग्रीन)सलवार सूयीट पहन रखा था,मे तो खुशी मे पागल हो गया,चाची क्या लग रही थी,मे ये कह सकता हूँ कि मेरा पहला प्यार चाची ही थी,मेरी मम्मी किचन मे काम कर रही थी ,चाची ने मुझ से पूछा कहा है मम्मी ,मेरे बोलने पर कि वो किचन मे है चाची किचन की ओर चल पड़ी,चाची किचेन के अंदर जाने की बजाए दरवाज़े पे खड़ी हो गयी,जिससे उनकी सुडोल गान्ड उभर कर बाहर आ रही थी,मेरा दिल तो एक दम थम सा गया,मेरे मन मे आया अभी लंड निकाल लूँ सीधा चाची की गान्ड मे जाकर घुसा दूं,ऑर पता नही उस समय इतनी हिम्मत भी कहाँ से आ गयी,मे चल पड़ा चाची की गान्ड को छूने,मेने अपनी किस्मत को मान लिया था,जो होगा देखा जाएगा,लेकिन पास जाकर मे पीछे हट गया

लेकिन पता नही मुझे क्यो ऐसा लगा कि उन्होने मेरी गतिविधियो पे नज़ा रख रखी है,मे काफ़ी करीब तक पहुच गया था,लेकिन मे पीछे हट गया,लेकिन जैसे ही मे पीछे हटा,चाची ने मेरी तरफ सिर घुमाया ऑर मुस्कुराइ,लगा यूँ बोल रही हो जैसे बोल रही है मुझे सब पता है कि तुम मेरी गान्ड को छूने की कॉसिश कर रहे हो

मेने जब चाची को देखा कि चाची मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही है मे थोड़ा डर गया ऑर वहाँ से भाग गया,मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था जैसे,लेकिन एक ऐसी खुशी थी कि जैसे चाची को चोदकर आ रहा हूँ.ऑर उस रात जब मे बिस्तेर मे गया ,ऑर चाची के बारे मे सोचने लगा ,उनकी गान्ड का मन मे सोचकर उस दिन बहुत उत्तेजित हुआ,ऑर उस दिन लंड हिलाने मे बहुत मज़ा आया,ऑर फिर पता नही चला मुझे कब नींद आ गयी,अगले दिन सुबह उठा तो एक अज़ीब सी खुशी थी
ऑर फिर पढ़ने बैठ गया,,आदत अनुसार मे पापा के ज़ाने का इंतज़ार करने लगा,मेरे पापा 9:30 बजे निकल जाते ,वहाँ क़्वार्टर मे रहने वाले लगभग सभी इस समय ही निकलते है,तो चाची अपना घर का काम ख़तम करके लगभग 11 बजे तक आती है,मे चाची का इंतज़ार कर रहा था,जब डोर बेल बजाई ,मेने दरवाजा खोला ,आज मेरी हिम्मत इतनी बढ़ गयी थी चाची के अंदर जाते वक्त मैं अपने शरीर को उनके शरीर के टच करने की कॉसिश करने लगा,चाची एक बार फिर मुस्कुरा गयी जब उन्होने देखा कैसे मेने नाकाम कॉसिश की उनसे टच होने की.

रोज इसी तरह चलने लगा ,चाची आती ऑर मे उनके शरीर को टच करने की कॉसिश करता,ऑर हमेशा फैल हो जाता ,चाची भी थोड़ी चालाक थी वो हमेशा जानबूझ कर मुझे उनसे टच नही होने देती,मे जानता था ये कोई उनकी उनके पति के तरफ वफ़ाई नही थी , वो बस मुझे ऑर तड़पाना चाहती थी

सब कुछ ऐसे ही चल रहा था ,एक दिन कुछ अलग हुआ ,चाची आई ऑर वो कुर्सी के पीछे खड़ी होकर उससे सहारा लेकर खड़ी हो गयी ,उस समय उनकी गान्ड ऐसे नज़र आ रही थी जैसे रेगिस्तान पर एक प्यासे को पानी दिख जाता है,मे भी नही जानता मेने कैसे अपने आपको कंट्रोल किया ,मे बस चाची को पीछे से पकड़कर अपना लंड उनकी गान्ड पे घिसना चाहता था.ऑर उस रात मे बहुत पछताया क्यो मेने ये मोका खो दिया,चाहे इसके बदले मुझे कुछ भी चुकाना पड़ता .

एक दिन मेरी मम्मी ने मुझे कुछ दिया ऑर कहा जा चाची को दे आ,मे चाची के घर गया ,ऑर डोर बेल बजाई,चाची ने दरवाज़ा खोलने से पहले ही कहा ,ऑर मोहित क्या हाल है ,आज तो बहुत दिन बाद आया घर ,मेने कहा हाँ चाची कभी काम ही नही पड़ा

चाची:तो काम पड़ेगा तभी आएगा

मे:नही ऐसी कोई बात नही

चाची:मे भी तो आती हूँ तुम्हारे घर

मे:अब चाची बिना काम के आना अच्छा नही लगता,मतलब कि मे बिना काम कैसे आउ,आप ग़लत तो नही समझ रही

चाची:अरे नही ,चलो अंदर आओ

मे अंदर आ गया

चाची:क्या लाए हो

मे:मम्मी ने समोसे बनाए थे

चाची:ओह अच्छा है,

मे:समोसे देते हुए,आज मेरी कॉसिश कामयाब हो गयी,आज मेने चाची के हाथों को टच कर ही लिया

इस बात पर चाची भी मुस्कुरा गयी

चाची:तुम घर आते जाते रहा करो,मेरा बेटा भी सुबह काम पे निकल जाता है,ऑर दिन मे तुम्हारी मम्मी भी अपनी सहेली से मिलने चली जाती है,तुम आ जाया करो

मे:जी मे आपके के साथ क्या बात करूगा

चाची:टीवी ही देख लेना

मे:ठीक है चाची एक दिन आप आ जाना एक दिन मे आ जाउन्गा

अगले दिन चाची 11 बजे ना आकर 2 बजे आई,क्योकि चाची भी जानती थी ,मेरी मम्मी 1 बजे के आस पास दूसरी कॉलोनी मे एक सहेली रहती है उनसे मिलने चली जाती है,मेरा दिल बहुत ज़ोर से धक,धक कर रहा था,उस दिन मे बस चाची के होंठो को ही देखे जा रहा था,मन मे आया बस चाची को पकड़ लूँ ऑर अपने होंठ उनके होंठो पे रख के सारा रस पी जाउ

मे:चाची एक बात कहूँ आप बुरा तो नही मनोगी

चाची:हाँ ज़रूर बोलो,

मे:मे बाद मे बताउन्गा

चाची:बता दो

मे:ऐसी कुछ बात नही है

चाची मुस्कुराइ ऑर चली गयी

अब मे कल का इंतज़ार करने लगा

अगले दिन मे जब मे चाची के घर गया तब

चाची:आओ मोहित,दरवाजा खुला ही है,मे अंदर आ गया

उस समय टीवी पे दयावान मूवी आ रही थी एंटर 10 चॅनेल पे
ऑर कुछ 20 मिनट ही निकले थे,वो किस वाला सीन आ गया,मे थोड़ा शरमाहट महसूस कर रहा था,लेकिन मे जानता था वो किस सीन काट दिया जाएगा.लेकिन ऐसा हुआ नही,मे नीचे देखने लग गया
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06-13-2019, 12:46 PM,
#3
RE: Sex Kahani आंटी और माँ के साथ मस्ती
चाची: क्या हुआ तुम किस सीन नही देखते,मुझे पता है तुम छुप छुप कर किस सीन का बहुत आनद उठाते हो

मे:कुछ नही बोला ,(आज कहाँ फस गया)

चाची:क्यो तुम्हे किस करने का मन नही होता

मे:जी.नही

चाची:नही..क्यो झूठ बूल रहे हो,कभी किस किया है

मे:नही

चाची:तो तुम कैसे कह सकते हो तुम्हे किस करना पसंद नही है बोलो

चाची:मे तुम्हे एक मोका दे सकती हूँ,पर मेरी एक शर्त है

मे:क्या

चाची:वो मे बाद मे बताउन्गी,पर तुम मना नही करोगे

मे:मेने आपकी कोई बात को कभी मना किया..........

इसके आगे बोलता उससे पहले ही चाची ने मुझे खिचा ऑर अपने होंठ मेरे होठ पे रख दिए,मेरी आँखे खुली की खुली रह गयी,चाची लगातार मेरे होंठो को चूस रही थी

मे कुछ समझ नही पा रहा था ये क्या हो रहा है, कुछ पल के बाद जब मुझे पता चला कि चाची मुझे किस कर रही है मे चाची के किस का साथ देने लगा,बदले मे मैं भी चाची के होंठो को चूसने लगा,क्या स्वाद आ रहा था चाची के होंठो का,मे तो बस ये सोच रहा था कि ये पल ऐसे ही चलते रहे,मे बस जिंदगी भर चाची के होंठो को चूसे जाउ,अब मे कंट्रोल मे आ गया था ,पहले चाची मेरे होंठो को चूस रही थी अब मे चाची के कभी उपर वाले होठ तो कभी नीचे वाले होठ को चूस रहा था.
लेकिन मे पॉर्न टाइप किस चाह रहा था कि मे भी किसी पोर्न्स्टार की तरह किस करूँ अभी जो किस चल रहा था वो थोड़ा सूखा(ड्राइ)रूप मे चल रहा था,तो जैसे ही मेने अभी जीब चाची के मूह मे डाली चाची ने किस तोड़ दिया ,मुझे थोड़ा बुरा लगा ,लेकिन मेने अपने आपको को संतुष्ट किया कि जो मिला वो बहुत है

चाची:सब कुछ आज की करोगे

मे:कुछ नही बोला

चाची:तुमने कहाँ से सीखा किस करते हुए जीब एक दूसरे के मूह मे डालते है

मे:जी वो ,मे क्या बताऊ,मुझे थोड़ी शर्म आती है

चाची:शर्म?ऑर अभी तो तुम थोड़ी देर पहले कर रहे थे तब तुम्हे शर्म नही आती,तुम तो एक नॉर्मल किस के आगे भी जाने मे नही शरमाये,चलो बताओ,कहाँ से सीखा

मे:जी ब्लू फिल्म से

चाची:मे जानती थी,पर मे तुम्हारे मूह से सुनना चाह रही थी . अच्छा ये बताओ,तुम्हे किस टाइप की मूवी पसंद है

मे:जी सभी मूवी जिनमे सेक्स होता है,क्या बताऊ

चाची:मतलब मूवी का कॉन्सा पार्ट तुम्हे अच्छा लगता है,

मे:मुझे मम्मी याद कर रही होगी,मुझे काफ़ी देर हो गयी

चाची:अगली बार मिलोगे तो बताओगे

मे:मुझे पता नही इतनी हिम्मत कहाँ से आ गयी, ...........अगली बार मुझे किस करने दोगे

चाची:चल बदमाश ,बड़ा आतुर हो रहा है किस करने को,चल ठीक है

मे:मे वहाँ से चला गया,ऑर शायद वो दिन मेरी जिंदगी का सबसे बेकार दिन था,क्यो कि उस दिन एक सेकेंड भी एक घटना जैसे लग रहा था,क्यो कि मे जानता था कल चाची को ऑर किस करने को मिलेगा

ऑर गूगल पे किस करने के तरीके देखने लगा,लेकिन बाद मे पॉर्न मूवी मे आ गया,मेने तो ये सोच रखा था कि जब कल चाची को किस करूगा तो अबकी बार छोड़ुगा नही पूरा रस पी लुगा चाहे मेरी जान ही क्यो ना निकल जाए
जैसे तैसे मेने दिन निकाला

अगले दिन जब मे सुबह उठा तो बहुत ख़ुसी हुई,क्योकि आज तो चाची की किस करने को मिलेगा
उस दिन पढ़ा भी नही ऑर में सुबह से ही ब्लू फिल्म देखे जा रहा था,ऑर मे उस दिन केवल किस ख़तम होने तक की ही मूवी देख रहा था

चाची सुबह 11 बजे नही आई ,मुझे ये बात पता थी,अब मे मम्मी के बाहर जाने का इंतज़ार करने लगा,उस दिन अगर मम्मी शायद नही जाती तो शायद मे खुद को मार देता,पर अच्छा हुआ मम्मी चली गयी

चाची 1:30 बजे आई,मे उछल पड़ा
मेने दरवाज़ा खोला ऑर अंदर आते ही चाची के ऊपर टूट पड़ा ऑर चाची को किस करने लगा

चाची:अरे इतनी जल्दी ही लग गये,इतनी जल्दी करना सही नही

मे:अब मे ऑर नही रुक सकता,चाची के सामने हाथ जोड़कर बोलता हुआ,प्लीज़ चाची किस करने दो ना

चाची:सोफे पे बैठते हुए,चलो ठीक है लेकिन.........

चाची की बात पूरी होती इससे पहले ही मे चाची पे टूट पड़ा तो चाची के होंठो को चूसने लगा,आज तो में अपनी पूरी जीब चाची के मूह मे डाल कर चाची के पूरे मूह का जाएजा ले रहा था,में चाची की जीब को,उनके मूह के अंदर उनके थूक को चूस रहा था,मुझे बहुत मज़ा आ रहा था

आज चाची की बारी थी चखने की ,क्योकि आज मे उनके मूह को चूसे जा रहा था,मेरे पास साँस लेने तक का टाइम नही था,मे रगड़ रगड़ कर चाची के मूह रस का आनंद ले रहा था,अब चाची का मूह दुखने लगा था ऑर मेरा भी पर मे तो उतेज़ित था पर चाची को अनुभव था अब चाची चाहती थी कि मे किस ख़तम करूँ ,पर मे उन्हे किस करे जा रहा था ,चाची के होठ पूरे लाल पड़ गये ,ऑर इतने सुज़ गये कि कभी भी खून निकल सकता हो,मेने चाची पे कोई रहम नही किया ,में भी अपना मूह का थूक निकाल कर चाची के मूह मे डाल कर उनके मूह के थूक से मिक्स करके किस कर रहा था
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06-13-2019, 12:47 PM,
#4
RE: Sex Kahani आंटी और माँ के साथ मस्ती
चाची ने थोड़ा मूह बिगाड़ा ,शायद चाची को मेरा थूक उनके मूह मे पसंद नही आया,अब हमारे होंठो से थूक नीचे गिरने लगा ,कई मिनिट तक ये खेल ऐसे ही चलता रहा ,ऑर चाची ना चाहते हुए भी मजबूरी मे इस भयानक किस मे साथ दे रही थी ,मे जब तक रगड़ रगड़ के उनके होंठो को चूस रहा था जब तक कि उनके होंठो से खून नही निकलता हुआ दिखा

चाची:अरे बाप रे ये क्या था,तुमने तो खून निकाल दिया

मे:चाची मुझे पता नही चला,कब खून आ गया

चाची:कोई इतना भयानक किस करता है क्या,तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी

मे:सॉरी चाची ,आगे से नही करूगा

चाची:इतनी बुरी तरह तो किसी ने भी किस नही किया आज तक मुझे,तुमने तो मेरी हालत खराब कर दी,ऐसा लगा कि मेरी तो जान निकल जाने वाली है

चाची:ये देखो क्या हाल किया है तुमने मेरे होंठो का,देखो सूज़ गये है खेर अच्छा है,एक नया अनुभव तो हुआ ,एक जोरदार किस किसे कहते है,लेकिन अब कुछ दिन तक मुझे किस करने की बोलना मत

मे:सॉरी चाची आगे से आराम से करूगा किस

चाची:अब कुछ दिनो बाद देखेगे

मे:मन मे(आज तो मज़ा आ गया चाची के होंठो को पूरा चूस डाला, चाची अकड़ती भी थी अब पता चला कि किससे से पंगा लिया है

चाची :क्या सोच रहे हो मन मे,नही बताया तो कभी किस नही करने दुगी,मे झूठ पकड़ लेती हूँ

मे:मुझे खुशी हो रही थी कि मेने आपके होंठो को रगड़ रगड़ के चूसा

चाची:अच्छा ,तो तुम्हे मुझे रगड़ रगड़ के किस करने मे मज़ा आया ,ऑर जो तुमने मेरी हालत की है उसका क्या

मे:मे आगे से आपको आराम से किस करूगा

चाची:नही रहने दो,ग़लती मेरी है ,मे इतनी उमर के होने के बावजूद मे तुम्हारे किस का साथ नही दे पाई,तुम तो अपने ज़ोर पे किस कर रहे थे,मुझसे ज़ोर नही लगा

मे:खुशी से,अच्छा चाची,थॅंक यू चाची

चाची:कोई नही,अब मे चलती हूँ

मे:ठीक है चाची ,कल मिलते है



चाची के जाने के बाद

आज तो मज़ा आ गया,क्या किस किया था चाची को,उनको नानी याद आ गयी,बहुत दिनो से पागल कर रखा था ,आज जा कर शांति मिली है

अब मेने गूगल पे सर्च किया कि किसी को सेक्स के लिए कैसे तैयार करे ,तो बहुत पढ़ने के बाद ये रिज़ल्ट आया कि किस करते हुआ हाथ बूब्स ऑर गान्ड पे ले जाओ,अगर हो सके तो वही सहलाते रहो

अब मे अगले दिन का इंतज़ार कर रहा था ,अब मेरा माइंड बहुत तेज़ी से काम कर रहा था,अब मेरी यही प्लॅनिंग चल रही थी कि चाची को कैसे राज़ी करे सेक्स के लिए,

चाची:पीछे मुड़कर स्माइल देती हुई,ऑर कुछ नही कहा

आज मम्मी कहीं नही गयी,मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था कि क्या करूँ,मुझे तो बस चाची के बदन को छूना था .अब मे परेशान हुए जा रहा था,तभी मेने थोड़ी हिम्मत करके एक बहाना बनाया ऑर मम्मी से कहा कि......

मे:मम्मी ,आज चाची ने बुलाया था ,उनके कंप्यूटर पे थोड़ी मिस्टेक आ रही है,इसलिए मे वहाँ जा रहा हूँ ,थोड़ा समय लग सकता है

मम्मी :चाची ने तो मुझे नही कहा

मे:मुझे कहा था

मम्मी:ठीक हाँ जा ,पर जल्दी आ जाना

मे:मुझे विस्वास नही हो रहा था कि मुझे इतनी जल्दी मोका मिल गया चाची के घर जाने का

मे अपने फ्लॅट से नॉर्मली निकला ,ऑर फिर इतना तेज भागा की जितना शायद ही भागा होगा,मे एक सेकेंड भी गवाना नही चाहता था

मेने डोर बेल बजाई

चाची:तुम आ ही गये


मे:अरे चाची आज मम्मी से झूठ बोल कर आया हूँ कि आपका कंप्यूटर ठीक करने जा रहा हूँ, थोड़ा समय लग सकता है

चाची:तुमने अपनी मम्मी से झूट बोला

मे:चाची आपको पाने के लिए कुछ भी कर सकता हूँ

चाची:किसी ने ठीक ही कहा है कि दूसरो की मम्मियों के साथ संबंध बनाने मे लोग कुछ भी कर सकते है

मे:जी क्या कहा चाची आपने(चाची ने बात बात थोड़ी धीरे कही थी)

चाची:कुछ नही
चाची:तो क्या करना है

मे:चाची आपके होंठो के रस का आनंद लेना है,शक्कर भी फीकी पड़ जाती है आपके मूह का रस के सामने

चाची:अपनी तारीफ सुनके थोड़ा शर्मा गयी,बोली नही नही,तुम ख़तरनाक किस करते हो,

मे:आज नही करूगा

चाची:मेरी तरफ घूमकर खड़ी हो गयी,ऑर बोली नही मुझे तुम पे विस्वास नही

मे:मे चाची के पीछे गया ऑर तुरंत चाची के सिर को घुमा कर अपने होठ चाची के होंठो पे रख दिए

चाची:आखो मे थोड़ा गुस्सा दिखा कर मुझे रूकने के लिए बोला,पर शारारिक विरोध नही किया
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06-13-2019, 12:47 PM,
#5
RE: Sex Kahani आंटी और माँ के साथ मस्ती
आज मैं भर भर के अपना थूक चाची के मूह मे डाल रहा था ,ऑर अपनी पूरी जीब चाची मे मूह डाल रखी थी,आज तो चाची भी मेरा साथ दे रही थी ,आज मे आराम से किस कर रहा था,आज बहुत सारा थूक हमारे मूह से निकल कर चाची के बूब्स पे गिर रहा था,अब चाची भी अपना थूक मेरे मूह डाल रही थी ,आज हम बहुत देर तक किस करते रहे ,चाची मेरी जीब को चूस रही थी ,मे चाची की जीब को चूस रहा था,मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मे चाची के थूक को निगल रहा था,फिर मुझे याद आया कि चाची को सेक्स के लिए मनाने के लिए उनको गरम करने की ज़रूरत है,अब मेने किस करते हुए अपने हाथ चाची की पीठ पे चलाना शुरू कर दिए, मैने उनके मूह के मूव्मेंट के चेंज होने से ये अंदाज़ा लगा लिया कि चाची गरम हो रही है,अब चाची ने भी अपने हाथ मेरी पीठ पे चलाने शुरू कर दिए

हम दोनो लगातार किस करे जा रहे थे ,अब हमारे होठ भी ज़्यादा देर गीले रहने के कारण नरम पड़ गये थे,आज ज़्यादा जोरदार तरीके से किस नही किया था ,नही तो चाची भी जानती थी कि ,अगर पहले वाला जैसा किस होता तो उनकी हालत आधे मे ही ऐसी हो जाती कि अगले दिन तक किसी को अपने होठ दिखाती ती तो सामने वाला ये कहने मे देर नही लगाता कि आपके होंठो को किसी ने बहुत बुरी तरह चूसा है

अब किस तोड़ते हुए

चाची:आज तो मज़ा आ गया ,क्या किस किया है.ऐसा किस तो मेने पूरी जिंदगी मे भी नही किया

मे:हाँ चाची ,बहुत मज़ा आया,पर मुझे जोरदार किस करने मे मज़ा आता है

चाची:मेने कब मना किया ,बस थोड़ा रुक जाओ,जिससे मुझे भी आदत हो जाए,

मे:अच्छा चाची,मुझे एक बात ऑर कहनी थी

चाची:क्या

मे:अगर मना कर दिया या बुरा मान गयी तो मे तो जी भी नही पाउगा,मेने ये मन मे सोचा

चाची :कहो

मे:मेने थोड़ा सोच समझ कर कहा ----- चाची आइ लव यू
ऑर ये कहकर मे चाची के गले लग गया,ऑर इस बार होंठ की जगह चाची की गर्दन पे रख दिए

चाची:के मूह से आह निकल गयी

मे:मेने अब जीब निकल कर चाची की गर्दन की चॅम्डी को चाटना शुरू कर दिया

चाची तो मदहोश हो गयी थी ,मेने अपना एक हाथ चाची की सुडोल गान्ड मे रख दिया ऑर सहलाने लगा

चाची:आह मोहित,रूको मत मोहित

मे:मे समझ गया कि चाची गरम हो चुकी है,अब मेने दोनो हाथ चाची की गान्ड पे रख दिए ऑर अब मे सहलाने की बजाए अब दबाने लग गया,अब मे ज़ोर ज़ोर से चाची की गान्ड दबा रहा था

चाची:आह मोहित,प्लीज़ रुकना मत ऐसे ही करते रहो

चाची अपने कंट्रोल से बाहर जा चुकी थी ,उनकी आँखे बंद हो चुकी थी ऑर एक तरह से मुझे पर्मिशन दे दी थी कि मे कुछ भी कर सकता हूँ

अब मेने एक हाथ चाची की गान्ड से हटा कर चाची के बूब्स पे रख दिया,मे डर रहा था चाची कही मुझे रोक नही दे,पर चाची ने कुछ नही किया,मे एक हाथ से चाची की गान्ड मसल रहा था ऑर एक हाथ से चाची के बूब्स मसल रहा था,मे तो बस चाची के भरे हुए बदन का आनंद ले रहा था,ऐसा पल तो कभी ख़तम ना हो मे बस यही प्रार्थना कर रहा था

अब मेने हिम्मत करके अपना मूह चाची के बूब्स पे रख दिया ऑर सलवार के उपर से ही चूस रहा था ,ऑर एक हाथ मेने चाची के सूट मे घुसा दिया ,चाची ने पैंटी नही पहनी थी,इसलिए मेरा हाथ सीधा चाची की उस सुडोल गान्ड पे पड़ा जिसने मेरी नींद हराम कर रखी थी,अब पूरी ताक़त से चाची की गान्ड दबा रहा था,मेने अपना हाथ चाची की गान्ड की खाई मे घुसने लग गया,उनकी गान्ड इतनी सुडोल थी उनकी गान्ड की दरार के बीच हाथ घुसाने की कॉसिश करी तो यू लगा कि गान्ड मेरे हाथ पे ज़ोर लगा रही है,मेने मन ही मन कहा क्या गान्ड है चाची की ,बिल्कुल गोल मटोल ऑर कसी हुई,चाहे कुछ भी हो जाए ,चाची की गान्ड ज़रूर मारूगा चा हे मुझे जान देनी पड़े या किसी की जान लेनी पड़े

मे चाची की सुडोल गान्ड पे हाथ फेर रहा था,अब मेने अपना हाथ चाची की गान्ड की दरार मे डालना शुरू किया ,उनकी दरार मे हाथ डालना अससन नही था,बड़ी गान्ड होने के कारण ऑर उपर से सुडोल होने के कारण दोनो गान्ड के हिस्से एक दूसरे से जुड़ रहे थे,ओर अब अपने उस रास्ते को ढूँडने लगा,जो मुझे खुशी ऑर प्यार ऑर चाची के शरीर को पाने की इच्छा को पूरा करेगा,मतलब चाची का गुदा मार्ग,मतलब गान्ड का वो छेद जिसे सब लोग अपने शरीर की गंदगी निकालने के लिए काम मे लेते है लेकिन आज कल बहुत लोग इसमे अंदर डालकर खुशी पाते है,ऑर उन लोगो मे एक मैं था जो इस कदर पागल था अपना हथियार इस गान्ड के छेद घुसाने को कि इसके लिए किसी का भी मर्डर कर सकता था,
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06-13-2019, 12:47 PM,
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RE: Sex Kahani आंटी और माँ के साथ मस्ती
कुछ देर तक की कॉसिश के बाद मुझे वो द्वार मिल ही गया,जैसे ही मेरी उंगली चाची की गान्ड के छेद के उपर गयी मेरी खुशी का ठिकाना नही रहा,अब मे गान्ड के छेद के आस पास की जगह पे उंगली घुमा रहा था,कुछ देर बाद जैसे ही मेने चाची के गुदा द्वार पे उंगली रख कर थोड़ा ज़ोर लगाया ,मेरी उंगली गप्प के साथ चाची के गुदा द्वार मे घुस गयी

चाची:दर्द भरी आआज़ मे आआअहह,चाची को होश आया ,ऑर बोली ये क्या कर रहे थे तुम

मे:चाची वो ....

चाची :गुस्से मे क्या?/?

मे:वो अपने आप हो गया

चाची:तुम मेरी इज़्ज़त के साथ खेल रहे थे ,मेने तुम्हे बच्चा समझ कर किस करने की इज़ाज़त दी तुम मेरी इज़्ज़त के साथ खेलने लग गये . चल निकल जा मेरे घर से ऑर मुझे धक्का दे दिया

मे:चाची के पाँव मे पड़ गया ऑर रोने लगा

चाची: छोड़ो मुझे ,थोड़ा नरम होते हुए

मे:चाची मुझे माफ़ कर दो

चाची:चलो हटो,नही तो मे तुम्हे माफ़ नही करूगी

मे:सीधा किचन मे गया वहाँ से चाकू ले आया,ऑर अपने हाथ पे रख कर कहा
.....चाची मुझे माफ़ कर दो ,नही तो मे अपनी नसें काट लूँगा

चाची:थोड़ा चिंता करते हुए ,अरे नही नही ,क्या पागलो जैसी हरकते कर रहे हो

मे:चाची आपको मुझे माफ़ करना ही होगा

मेरी ये हालत देखकर चाची का दिल भी पिघल गया,चलो ठीक है मेने तुझे माफ़ किया
ये कहते हुए चाची ने मुझे गले लगाया,जैसे ही मेरा शरीर चाची के शरीर से टच हुआ मेरे हाथ अपने आप चाची की गान्ड पे चले गये ऑर चाची को अपनी तरफ खींचा चाची की गान्ड पे ज़ोर लगाकर,इस कारण मेरा जो लंड था जो पूरी तरह खड़ा था मेरे पाजामे मे सीधा चाची की चूत से जा टकराया ,

चाची को कुछ देर तक समझ नही आया कि क्या करे ,क्यो कि उनके शरीर ने उनके दिमाग़ की बाद मानने से मना कर दिया था ,अब मे लगातार चाची की गान्ड पे ज़ोर डाल कर चाची की चूत का दबाव मेरे लंड पे बढ़ा रहा था,ऑर मे भी अपने शरीर को आगे धकेल रहा था ,

चाची की चूत बहुत सारा पानी छोड़ रही थी उनकी चूत के आस पास के हिस्सा पूरा गीला हो गया था ,चाची ने कोई विरोध नही किया ,अब मे समझ चुका था ,अगर आज मे चाची को नही फसा पाया तो कही चाची मुझे हमेशा के लिए अलग ना हो जाए

इसलिए मेने चाची को बिना पता चले ही अपना लंड पाजामे से बाहर निकाला ऑर चाची का पाजामा भी खोल दिया ,चाची को पता नही चले इसलिए मेने चाची के होंठो को चूसना शुरू कर दिया था ऑर पीछे से गान्ड दबा रहा था ,अब मेने अपने हाथ चाची गान्ड पे घुमाना बंद कर दिए ,ऑर पूरा लंड एक बार मे ही चूत घुसाने के लिए हाथ से चाची की गान्ड को जकड मे लिया ,ऑर मेने अपना लंड जैसे ही चाची की चूत पे रखा ,चाची को कुछ पता चलता इससे पहले ही मेने पूरी ताक़त से चाची की गान्ड को पकड़ कर अपने लंड की ओर ज़ोर दिया ऑर अपनी गान्ड का ज़ोर भी चाची की चूत की ज़ोर लगाया
एक तरफ मेरे हाथो का ज़ोर जो चाची की गान्ड पे पर रखे जिसके कारण चाची की चूत का दबाव मेरे लंड पे लगा ऑर दूसरा मेरे शरीर का ज़ोर जिससे मेरे लंड पे ज़ोर लगा ,इस कारण दोनो ताक़त का ज़ोर लगने कर कारण चाची की चूत का द्वार मेरे लंड को झेल नही पाया ऑर ना चाहते हुए भी मेरे लंड को रास्ता देना पड़ा (हम दोनो खड़े थे ,ऑर इस पोज़िशन मे चूत बहुत टाइट हो जाती है),लेकिन इस कारण मेरा लंड पक्क के साथ चाची की चूत घुस गया ,ऑर ये सब इतना कम समय मे हुआ कि चाची को जब तक पता चलता कि मेरा लंड उनकी चूत मे घुस चुका था,नही तो शायद मुझे अपना लंड उनकी चूत मे घुसाने नही देती ,या फिर शायद इतनी आसानी से नही करनी देती,

जैसे ही मेरा लंड चाची की चूत घुसा ,चाची की आखे पूरी खुल गयी,हम दोनो किस कर रहे थे इसलिए मे चाची के आँखो को देख पा रहा था,एक पल के लिए समय रुक गया हो ,ऑर हम दोनो की आँखे पूरी खुली हुई,ऑर दोनो की आँखो मे आश्चर्य कि "ये क्या हो रहा है" ऑर अगले ही पल दोनो चिल्ला उठे,

चाची:आहह मार डाला रे ,खड़े खड़े ही घुसा दिया,कम से कम बता तो देता इतना दर्द नही होता
जब तक चाची की आँखो से आसू निकल चुके थे,चाची की आवाज़ मे अब भी दर्द था

मे भी दर्द से चिल्ला उठा ऑर अपना लंड पकड़कर नीचे वही बैठ गया

चाची:क्या हुआ
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अब मुझे हर दिन निकालना बहुत भारी पड़ रहा था,जब से चाची ने कहा है ,कि मे तेरी माँ को राज़ी कर लुगी तेरे से सेक्स करने के लिए बस कुछ दिन इंतज़ार कर

लेकिन मुझे एक बात परेशान कर रही थी कि ,चाची ने ये भी कहा था ,कि तेरी माँ की गान्ड पहले मेरा बेटा सलीम ही खोलेगा उसके बाद ही उस गान्ड पे तेरा हक होगा गान्ड मारने मे

मेने पूछा था चाची से कि चाची गान्ड खोलना क्या चीज़ होता है चाची बस केवल मुस्कुराइ ओर मेरे गालो को खिचकर बोली ,समय आने पर अपने आप जान जाएगा

गान्ड के बारे इतना सोचकर मुझे गान्ड मारने की बहुत उतेजना चढ़ चुकी थी ,अगले दिन मे समय मिलते ही मे चाची के घर जा पहुचा,

चाची:क्या बात है,आज बहुत उत्सुक लग रहे हो

मे:नही चाची ऐसी कोई बात नही,

चाची:मे तेरा चेहरा देखकर बता सकती हूँ,चल बता नही तो कुछ करने नही दूँगी

मे:नही नही चाची,वो मुझे गान्ड मारनी थी,आपकी गान्ड मुझे बहुत पसंद है

चाची:तुझे मेरी गान्ड मारने की बड़ी जल्दी है

मे:हाँ चाची,मुझे आपकी गान्ड खोलनी है

चाची: मज़ाक मे तुझे मेरी गान्ड खोलनी है,बेटा मेरी गान्ड तो कब ही खुल चुकी है

मे(मे अब तक सोचता था,केवल गुदा द्वार मे लंड डाल के गुदा मैथुन करते है उसे गान्ड खोलना कहते है,

तो फिर गान्ड खोलना किसे कहते है

चाची:जब गान्ड के छेद को पहली बार चौड़ा करते है,ऑर जब तक सेक्स करते है जब तक गान्ड का छेद लंड निगल लेने के बाद खुला रह जाता हो ऑर बाद मे फिर कभी गान्ड इतनी टाइट नही हो पाती जितनी चुदाई से पहले थी,उसके बाद गान्ड चुदाई मे ज़्यादा तकलीफ़ नही होती उसे कहते है

मे:चाची ,मुझे भी गान्ड खोलनी है,

चाची:तो पटा किसी को ,तेरे नीचे वाले फ्लॅट मे शर्मा की वाइफ रहती है ना निकिता उसको पटा ,क्या मस्त फिगर है उसका ,सुबह शाम एक्सर्साइज़ करती है

मे:मे कैसे पटाऊ

चाची:जैसे मे ऑर मेरा बेटा पता रहा है तेरी माँ को

मे:चाची मुझे मेरी माँ की गान्ड खोलने दो ना प्लीज़
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06-13-2019, 12:47 PM,
#7
RE: Sex Kahani आंटी और माँ के साथ मस्ती
चाची:अब बहुत देर हो गयी है,तू जब तक तेरी माँ को सेक्स के लिए नही बोल सकता जब तक मेरा बेटा तेरी माँ के साथ सेक्स नही कर लेता,ऑर मेरा बेटा तो है ही गान्ड का दीवाना,जब से तेरी माँ की गान्ड देखी है,तब से पागल है गान्ड मारने को,तेरी माँ की गान्ड है ही ऐसी,इतनी बड़ी गान्ड मे बड़ा लंड डालकर दमदार चुदाई ना करो ये डूब मरने वाली बात है

मे:चाची ,कुछ करो मुझे भी गान्ड खोलनी है

चाची:अभी तेरी उमर ही क्या है,एक दो बार सेक्स किया है मेरे से ऑर तेरा लंड अभी सही नही हुआ,अभी सेक्स करेगा तो घाव पड़ सकता है,

मे:मे तो आपकी गान्ड मारने आया था

चाची:प्यार से,चल तेरा लंड मे शांत करती हूँ,ऑर चाची नीचे बैठ गयी ,मेरा लंड पाजामे से बाहर निकाला ,ऑर मूह मे ले लिया

मे:आह चाची,(मे सब कुछ भूल गया)मज़ा आ गया ,

अब मे आगे पीछे करने काग़ा तो चाची ने लंड बाहर निकाल के बोला अभी घाव भरा नही है ,10-15 दिन बाद तेरी मर्ज़ी हो तब सब कर लेना

ऑर फिर चाची फिर से लंड चूसने लगी ,ऑर मे उनके अनुभव के सामने नही टिक पाया ऑर मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया,जिसे चाची पी गयी,

चाची:मज़ा आया

मे:हाँ चाची, ऑर फिर मे वापस घर आके सो गया

मुझे बहुत मज़ा आया कारेब 20 दिन बिना मूठ मारे कैसे रहा ये मे ही जानता हूँ,हालाँकि इसी बीच बहुत सारी ग़लतियाँ हुई,(जो मे यहाँ बता नही सकता ,अल्लाउ नही है,ऑर कुछ लोग को पसंद नही है)

अगले दिन जब उठा तो मे खुश था लेकिन इतना खुश नही था क्योकि मुझे आज पता चला चाची कैसे मेरी माँ की गान्ड खुलवाएगी अपने बेटे से ऑर मे कुछ नही कर पा रहा था सच ये था मे चाची की सहायता के बिना माँ से सेक्स नही कर सकता ,मे इस बात से भी दुखी नही था कि चाची का बेटा सलीम मेरी माँ के साथ चुदाई करेगा,दुखी था तो बस केवल इस बात से कि मुझे गान्ड पसंद है ,ऑर जिस गान्ड को मे दुनिया से सबसे जाड़ा पसंद करता हूँ,उसी गान्ड को कोई ऑर खोले ,मुझे ये मंजूर नही था,

अब केवल एक ही काम रह गया था ,कैसे सलीम से पहले माँ की गान्ड मारी जाए,लेकिन ये होगा कैसे मुमकीन,क्योकि चाची ही एक रास्ता है मुझे मेरी माँ तक पहुचाने के लिए,ऑर चाची के बिना ये संभव नही था,

मेरा माइंड बहुत तेज़ी से काम कर रहा था ,अब जानता था चाची की मदद की ज़रूरत पड़ेगी ,अब मे सोच रहा था कैसे चाची को बेवखूफ़ बनाया जाए कि मे माँ के साथ सेक्स कर लूँ सलीम से पहले ,इसके लिए पहले मुझे ये बात माँ को बिना बताए कैसे भी बतानी होगी कि उनका बेटा उनके साथ सेक्स करना चाहता है,उस दिन बस मे यही सोचता रहा ऑर कब पूरा दिन निकल गया ,पता नही चला

अगले दिन

मुझे मेरी माँ को मेरी सेक्स इच्छा के बारे मे बताने के लिए मुझे किसी ऐसे की ज़रूरत होगी जो मेरी मदद कर सकता है

मेरा दिमाग़ तेज़ी से दौड़ने लगा कि कॉन हो सकता है,तब मुझे याद आया सलीम किसी की बात कर रहा था ,नाम था मनोहर रेगर,वो हमारे कॉंपाउंड मे सॉफ सफाई करने का काम करता है ऑर अपनी फॅमिली के साथ रहता था,

ऑर कुछ दिन पहले उसका सलीम के साथ उसका झगड़ा हो गया था ,ऑर उनके बीच बोल चाल बंद थी

सलीम ने बताया था कि वो उसकी माँ ऑर बहन को जमकर चोदता है,ऑर उसका लंड उस से मोटा ऑर लंबा है ऑर दिन भर मेहनत करने के कारण कई घटे तक वो बिना झड़े चोद सकता है,

ऑर उसने कई मालकिनो को चोदा है,क्योकि अधिकतर मालिक काम पे चले जाते है ऑर वो अपनी बीवी को संतुष्ट नही कर पाते ,इस मोके का फ़ायदा उठा कर वो बहुत सी औरतो को अपनी गुलाम बना चुका है

मुझे इस बात की खुशी थी कि वो गान्ड को ज़्यादा पसंद नही करता था,लेकिन कभी कभार मार लेता था,वो बिल्कुल बेशर्म था,वो अपने ऑर अपनी माँ के बीच सेक्स को खुलकर बताता था,यही चीज़ दिखाने मुझे सलीम उसके पास ले गया था,(जब हम एक दूसरे को थोड़ा बहुत जानते थे)
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06-13-2019, 12:47 PM,
#8
RE: Sex Kahani आंटी और माँ के साथ मस्ती
कुछ महीने पहले की घटना


मे ऑर सलीम बियर की बोतल के साथ उसके घर चले गये थे,हमने एक एक बॉटल पी ,ओर फिर मनोहर उठा,अपनी माँ को पुकारा,जैसे ही माँ उस कमरे मे आई जहाँ हम थे ,माँ को बाहों मे पकड़ लिया,ऑर उठा के साइड के कमरे मे ले गया

उसके बाद उसकी माँ ने जो चीखे निकाली वो अगले घंटे तक निकलती रही,मे सलीम की ओर देखे जा रहा था,कि कोई इतना चोद सकता है क्या बस यही सोचकर मेरा सिर चकरा रहा था

अंदर से आवाज़ आ रही थी,,""आह ,मार डाला रे,साले कमिने ,मुझे दारू पी के मत चोदा कर ,तू दारू पीने के बाद जानवर बन जाता है,कोई ऐसे चोदता है अपनी माँ को

मनोहर:मुझे माफ़ कर दो माँ,तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो,मुझे पता नही क्या हो जाता है दारू पीने के बाद,मुझे बस अपनी माँ की चूत ही दिखाई देती

मनोहर की माँ- अच्छा मस्का लगाता है,कोई अपनी माँ को पटाना, तुझसे से जाने,साले कैसे प्यार प्यार से मेरे करीब आकर कब तूने उस चूत मे लंड डाल दिया जहाँ से तू निकला था पता ही नही चला

हर माँ को तेरे जैसा बेटा हो चाहिए, तो चोद दिया,मे कहाँ मूह मारती ,लेकिन तूने मेरा ख़याल रखा,मेरी ज़रूरत को पूरा किया

मनोहर:माँ मे तेरे लिए जान भी दे सकता हूँ,ऑर फिर माँ के होंठो पे अपने होठ रख के कुछ देर तक किस करता रहता है,ऑर फिर बाहर आने लगता है तब

मनोहर की माँ:पूरा कचूमर निकाल दिया तूने मेरी चूत का,देख मुझे चला भी नही जा रहा,


मे:कोई इतना कैसे चोद सकता है,मेने सलीम की ओर देखते हुए धीरे से कहा

सलीम :बेटा जब बात अपनी माँ की हो ,रात भर चोदने के बाद भी मन नही भरता

जब मेने अपनी माँ को चोदा था ,तो मेने भी माँ की रातभर जमकर चुदाई की थी,ऑर अगले दिन तक बेड से माँ की उठने की हालत नही थी,

ऑर तू मनोहर से भी पूछ सकता है,जब उसने पहली बार अपनी माँ की चुदाई की थी तो कितना चोदा था

मे:बाद मे पूछ लूँगा

ऑर हम कुछ देर ऐसे ही बात करते रहे ऑर फिर मनोहर आ गया

उसके आने के बाद हमने ऑर बियर पी ,फिर सलीम एक सिगरेट लाया,(मे कभी कभी सिगरेट पी लेता था) ऑर बोला देख जन्नत का मज़ा दिलाने वाली चीज़ लाया हूँ,

मे:क्या है,केवल सिगरेट ही तो है

सलीम:मनोहर की ओर देखकर मुस्कुराता हुआ,एक बार पी तो सही

मे:सिगरेट देखने मे अलग थी,उपर से मोटी थी नीचे से पतली,ओर उसमे भरा जरदा अलग ही दिखाई दे रहा था

जैसे ही मेने पिया मेरा सिर घूम गया ,उसके बाद मुझे पता नही चला ऑर शाम को नींद खुली

नींद खुलते ही मे घर गया ,जहाँ माँ ने पूछा कहाँ गया था

मे:सलीम के यहाँ गया था पढ़ने के लिए

माँ:ठीक है,आगे से बता कर जाया कर




अब मे सोच से बाहर निकला
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06-13-2019, 12:48 PM,
#9
RE: Sex Kahani आंटी और माँ के साथ मस्ती
अब मुझे यूँ लग रहा था ,कि मनोहर के पास जाउ ऑर पुछु कि यार कैसे पटाऊ मे अपनी माँ को,

लेकिन पता नही मेरा मन यही कह रहा था उस समय के हालात देखते हुए ,कि मुझमे इतनी हिम्मत नही कि मे अपने दम पे माँ को पटा सकूँ ऑर माँ को चोद सकूँ,मुझे किसी मदद चाहिए थी

ऑर मुझे इससे फ़र्क नही पड़ता था कि कोई मेरी माँ को मेरे से पहले चोदे,मे बस अपनी माँ की गान्ड को खोलके उस पर ठप्पा लगाना चाहता था कि ये गान्ड उसके बेटे की लिए है,यानी कि मेरी माँ की गान्ड को चोदने वाला मे पहला इंसान बनना चाहता था


तो मेरे प्लान मे अब माँ की चूत को किसी से चुदवाना शामिल था,लेकिन मुझे ये डर था कहीं चूत चोदने वाला माँ की गान्ड ना मार दे,जहाँ मुझे सलीम का बिल्कुल भरोसा नही था क्योकि वो तो मेरी माँ की गान्ड के पीछे हाथ धो के पड़ा है,जैसे ही मोका मिलेगा वो अपने लंड को मेरी माँ की गान्ड मे डालने का कोई अवसर नही छोड़ेगा

ऑर वही मनोहर ,जो की दमदार चुदाई करता है,मे नही चाहता कि कोई रेगर मेरी माँ की उस चूत मे अपना लंड डाले जहाँ से मे निकला हूँ,ऑर दूसरी बात जब से मेने मनोहर ऑर उसकी माँ के बीच की चुदाई देखी है तब से मेरे मन मे संकोच है कि चाहे कुछ भी हो किसी को मेरी माँ को इस तरह नही चोदने दूँगा जैसे मनोहर ने अपनी माँ की हालत खराब कर दी थी


मेरे कुछ समझ मे नही आ रहा था कि क्या करूँ,यही भी डर प्लान बनाने मे ज़्यादा डर हो गया तो कहीं चाची अपने प्लान मे शामिल ना हो जाए,ऑर मेरी माँ की गान्ड अपने बेटे सलीम के द्वारा खुलवा दे

क्योकि मे सलीम की ताक़त को जानता था ,वो अगर मेरी माँ को चोदेगा तो मेरी माँ की हालत बहुत बुरी होने वाली थी ऑर जहाँ वो माँ की गान्ड के पीछे पड़ा है,उस हिसाब से माँ 2 दिन तक अपने बेड से नही उठने वाली थी,

मुझे ये सोचकर ही मुझे बहुत गुस्सा आने लगा ,ओर मेने खुद से कहा """"मेरी माँ की गान्ड पे मेरा हक है,ऑर मे इससे लेकर रहूँगा,चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े""""

लेकिन मेरे पास चुदाई का एक्सपीरियेन्स नही था,मेने चाची को ज़्यादा देर तक नही चोद पाया था ,मुझे अपने आप को दमदार बनाना था ,इस हद तक कि किसी को भी चोदु तो वो हाथ जोड़ने लग जाए


सच कहूँ तो मे अपनी माँ को मनोहर जैसे ही चोदना चाहता था,लेकिन मेरे पास दम नही था,

चुदाई का अनुभव लेने के लिए मुझे चुदाई करनी थी,मेरे पास 2 ही ऑप्षन थे,चाची के साथ सेक्स,जहाँ मुझे अपनी माँ गान्ड पे दाव लगाना पड़ता है,ऑर ये डर रहता है,कि कही मे माँ की गान्ड हार ना जाउ

ऑर दूसरी ओर मनोहर की माँ के साथ चुदाई,लेकिन इसके लिए पैसे देने पड़ते हैं,जो मेरे पास है नही

मुझे पता था मनोहर ने उसकी माँ के साथ चुदाई के 1500 रात भर के लिए,ऑर मुझे कम से कम चुदाई मे दमदार होने के लिए बहुत सेक्स की ज़रूरत पड़ेगी,,मे निराश हो गया कि क्या करूँ,ले दे कर चाची ही एक मात्र सहारा दिख रही थी*

मेरी ये सोच थी अगर मे चुदाई मे दमदार नही हो पाया तो क्या मतलब मेरी माँ की गान्ड को चोदने का जहाँ मेरा 2 मिनिट मे निकल जाएगा,ऐसे मे मुझे ऑर मेरी माँ को भी दुख हो सकता है कि ""नामर्द बेटा पैदा किया है"" मे यही सोच कर घबरा गया,

क्योकि अगर मेरी माँ ये कह दे कि मे नामर्द हूँ ,इससे बढ़िया मे मर जाना पसंद करूगा ,ऑर मर जाने से अच्छा है मे मेरी माँ की गान्ड का पीछा करना छोड़ दूं,ऑर सलीम को गान्ड मारने दूं कम से कम माँ की गान्ड तो मार पाउन्गा

मे बहुत ही निराश होने लगा,क्योकि मुझे अपनी माँ की गान्ड खोने का डर लगने लगा था,ऑर मे अपनी माँ की गान्ड को अपने से दूर जाते हुए देख रहा था

मे सोच रहा था कि मे अपनी मदद के लिए किसके पास जाउ , चाची के पास या मनोहर के पास.

मे हर चीज़ बहुत बारीकी से सोच रहा था ,कि कही कोई रास्ता मिल जाए

अगर मे मनोहर के पास जाता हूँ मदद के लिए,तो हो सकता है सलीम चाची को मुझ से हमेशा के दूर कर दे,ऑर मनोहर का भरोसा नही है कि वो मेरी माँ को चोद पाए या नही,अगर नही चोद पाता है तो मेरी वॉट लग गयी वही अगर बात चाची की है तो ,मुझे चाची का शरीर हमेशा हाजिर रहेगा,मे जब चाहूं ,मे चाची की चूत मार सकता हूँ,चाची की गान्ड मार सकता हूँ,मूह चोद सकता हूँ,ऑर चाची ने माँ के साथ लेज़्बीयन सेक्स करने के कारण पूरी संभावना है कि मे माँ को चोद सकूँ,इसके बाद पास चाची ऑर माँ दोनो के शरीर पे पूरा हक होगा,बस बदले मे माँ की सबसे पहले गान्ड नही मार पाउन्गा,मुझे बस यही बात अखर रही थी कि मे ना चाहते हुए भी अपनी माँ की गान्ड को सलीम के देनी पड़ रही है
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06-13-2019, 12:48 PM,
#10
RE: Sex Kahani आंटी और माँ के साथ मस्ती
अब मुजसे ओर बर्दास्त नही हो रहा था,मुझे मेरी मा को जल्दी से छोड़ना था,इसलिए मेने हार मान कर ये पक्का कर लिया कि कल मे चाची के पास जा रहा हूँ कि मुझे मंजूर है,सलीम को जल्दी भेज दो मेरी माँ की गान्ड मारने ,ऑर फिर मुझसे चुदवा दो ,मे ये सोचकर सो गया


जब सुबह उठा ,माँ ने मुझे चाइ दी,ऑर फिर मुड़कर जाने लगी,माँ की बड़ी गान्ड मॅक्सी मे बहुत ही शानदार लग रही थी,मेने सोचा ,सलीम भी बेचारा क्या करे ,इतनी मस्त गान्ड को कॉन सबसे पहले नही चोदना चाहेगा

माँ की गान्ड उपर नीचे हो रही थी जब माँ चल रही थी,मेने कल्पना कि कैसे सलीम का 10 इंच का लंड माँ की गान्ड के अंदर बाहर हो रहा है,यही सोचकर मेरा भी खड़ा हो गया,ऑर अपने लंड से बोला,बस थोडा सब्र रख ,बहुत जल्द तू भी माँ गान्ड मे होगा,मे नही चाहता कि माँ की गान्ड मे बिना सेक्स अनुभव के डालकर जल्दी पानी निकालने मे माँ को हीन भावना हो महसूस हो कहीं उनका बेटा नामर्द तो नही ,इससे बढ़िया है थोड़ा अनुभव लेकर माँ की गान्ड मस्त तरीके से मारी जाए जिससे माँ भी खुश मे भी खुश,


11 बजे मे फिर चाची के पास पहुँच गया

मे:चाची,आज मे आपकी गान्ड मारूगा,चाहे कुछ भी हो जाए

चाची:अरे क्या हुआ,इतना उत्सुक क्यो है गान्ड मारने मे,ज़रूर माँ की गान्ड देखकर आया होगा,

मे:कुछ भी हो आज तो आपकी गान्ड मरूगा ही

चाची:ऐसा क्या हुआ ,बता तो सही

मे:मे चाहता हूँ कि जब मे माँ की गान्ड मारु ,तो दमदार तरीके से मारु,

चाची:अच्छा तो ये बात है,अच्छा पहले चाइ पी लेते है

मे:नही चाची ,मुझे बस गान्ड मारनी है

चाची:अरे बेटा मार लेना,मे कब मना कर रही हूँ,पहले चाइ पी लेते है(ये कहकर चाची किचन की ओर जाती है)

मे:मुझसे रहा नही जाता,मे चाची के पीछे किचन मे चला जाता हूँ,ऑर सीधा उन्हे पीछे से पकड़ लेता हूँ,चाची ने अभी तक मॅक्सी पहनी हुई थी ऑर अंदर पैंटी नही पहन रखी थी ,मेरा लंड सीधा माँ की गान्ड के सुराख पे लग जाता है,ऑर मे चाची को अपने दोनो हाथ आगे करके जकड लेता हूँ जिससे मेरे बुरी तरह गान्ड मे फस जाता है,

मेरा लंड चाची की गान्ड मे इतना दबाव बना रहा था कि अगर मॅक्सी नही होती तो चाची की गान्ड मे घुस जाता

चाची:इतनी जल्दी किसलिए कर रहे हो

मे:मुझे गान्ड मारनी है

चाची:कहीं पागल तो नही हो गये

मे:हो गया अभी माँ की गान्ड के लिए,आपकी गान्ड के लिए

मेने चाइ भी नही बनाने दी चाची ने केवल दूध ही डाला था ,लेकिन मेरी उत्सुकता के सामने उन्होने हार मान ली ऑर गॅस बंद कर दिया ऑर अपने आप को ढीला छोड़ दिया,मेने तुरंत चाची की मॅक्सी उपर की,जिससे उनकी गान्ड मुझे दिख गयी ,मेरा लंड तो पानी छोड़ने ही वाला था ,बस मेने कैसे भी करके रुक लिया,ऑर मेने अपना मूह गान्ड मे डाल दिया,

मज़ा आ गया था जब मेने अपना मूह चाची की गान्ड मे डाला,चाची के मूह से भी आह निकल गयी थी मेने सोचा भी नही कि मे कभी जिंदगी मे किसी गान्ड के छेद मे मूह रखुगा,मुझे अपने आप पे विस्वास नही हो रहा था कि मे चाची की गान्ड मे अपना मूह डाल दूँगा,मुझे मेरे शरीर पे कंट्रोल नही था,मुझे नही पता था कॉन क्या करवा रहा है मुझसे,मे बस करे जा रहा हूँ जो मन कह रहा था

मेने अपनी जीब चाची की गान्ड के छेद पे लगाई

चाची-- आह मोहित बहुत अच्छा लग रहा है

मे चाची के छेद को चाटे जा रहा था,चाची की गान्ड का छेद अब बिल्कुल चिकना हो गया था, अब मेने एक उंगली डाली ,मेरी उंगली बिना किसी परेशानी के चाची की गान्ड के छेद मे चली गयी,चाची ने हल्की की आह निकाली

मे:चाची ,क्या गान्ड है तुम्हारी,उंगली डालने मे ही इतना मज़ा आ रहा है,जब लंड डालुगा तो कितना मज़ा आएगा

चाची:मोहित,गान्ड चीज़ ही ऐसी होती है,एक बार जिसको चस्का चढ़ जाए वो बिना गान्ड मारे नही रहता,जैसे मेरे बेटे सलीम को देखो ,जब भी मेरे साथ सेक्स करता है तो मेरी गान्ड ज़रूर मारता है,

मे:चाची फिर भी आपकी गान्ड टाइट है,वो कैसे

चाची:वो मे थोड़े भरे शरीर की हूँ ऑर सलीम ने 3 दिन से मेरी गान्ड भी नही मारी

ऑर तू जानता क्या है गान्ड के बारे मे,तुझे कैसे पता कि मेरी गान्ड टाइट है या नही

मे:वो चाची उंगली डाली तो गान्ड मे

चाची:तो क्या,मेरी गान्ड को सलीम ने चोद चोद कर पूरा खोल दिया है,तू क्या जाने कुवारि गान्ड के बारे मे,

कुवारि गान्ड मे तो एक उंगली डालने मे पानी आ जाता है

वो कुवारि गान्ड को यूही कोई लंड नही खोल सकता,उसके लिए तगड़ा लंड चाहिए होता है,जैसे मेरे बेटे सलीम का है,तेरा लंड तो घुस भी ना पाए ,
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