Long Sex Kahani सोलहवां सावन
07-06-2018, 01:48 PM,
#21
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
“दीदी, तुम कहो तो मैं भी कुछ इसकी ट्रेनिंग करवा दूं…” पूरबी मेरी भाभी से मुश्कुरा के बोली। 
“और क्या, तुम ससुराल से इत्ती प्रैक्टिस करके आयी हो, और… आखिर ये तुम्हारी भी तो ननद है…” भाभी बोलीं। 
हमलोग झूले के लिये निकलने ही वाले थे की जमकर बारिश शुरू हो गयी और हमारा प्रोग्राम धरा का धरा रह गया। 

बारिश खूब देर तक चली और बारिश के कारण चन्दा भी नहीं आ पायी। पर पूरबी, गीता, कामिनी भाभी के साथ खूब चुहलबाजी हुई, सब शर्म छोड़कर, और खास कर तो पूरबी मेरे पीछे ही पड़ी थी। जब कोई भाभी उसे चिढ़ाते हुये पूछती- “लगाता है, खूब स्तन मर्दन हुआ है, तुम्हारी चोली तंग हो गयी है…” 
तो वह चोली के ऊपर से ही मेरे जोबन दबा के दिखाते हुये कहती- “हां भाभी वो ऐसे ही दबाते थे…” 
पूरबी तो मेरे पीछे थी ही, पर जिस तरह कामिनी भाभी मुझे मीठी तिरछी निगाहों से देख रहीं थी, मैं समझ गयी कि उनके भी इरादे कम खतरनाक नहीं। दो-तीन घंटे में मैं पूरबी और कामिनी भाभी से काफी खुल गयी। जब शाम होने को थी तब बारिश बंद हुई और सब लोग जा रहे थे की चन्दा आयी। चलते समय, कामिनी भाभी मुझसे गले मिली और बोली- “ननद रानी मैं तो तुम्हें इतना एक्सपर्ट बना दूंगी कि जितना चार-चार बच्चों की मां नहीं होती…” 



..............


फिर बारिश ,झमाझम






चन्दा ने मुझे नीचे से ऊपर तक देखा, और धीरे से बोली- “इतना श्रिंगार, किसी के पास जाने वाली थी क्या…” 
मैं भी उसी सुर में बोली- “तुम्हारे बिना कौन ले जाने वाला है…” 

“उसी लिये तो आयी हूँ सुबह तुमने किसी से वादा किया था…” मेरे गाल पर कस के चिकोटी काटती वो बोली। 

“भाभी, जरा इसको मैं बाहर की हवा खिला लाऊँ, गांव के बाग बगीचे दिखा लाऊँ…” वह चम्पा भाभी से बोली। 

“ले जाओ, बेचारी सुबह से घर में बैठी है, बरसात के चक्कर में झूला भी नहीं जा पायी…” चम्पा भाभी ने इजाजत दे दी। 

हम दोनों तेजी से घर के बाहर निकले। मैं चन्दा से भी तेज चल रही थी। 

“हे बहुत बेकरार हो रही हो यार से मिलने के लिये…” चन्दा ने मुझे छेड़ा। 

“और क्या…” मैं भी उसी अंदाज में बोली। 


बरसात के बाद जमीन से जो भीनी-भीनी सुगंध निकल रही थी, ठंडी मदमस्त सावन की बयार बह रही थी, हरी कालीन की तरह धान के खेत बिछे थे, झूलों पर से कजरी गाने की आवाजें आ रही थीं, मौसम बहुत ही मस्त हो रहा था। चन्दा मेरा हाथ पकड़कर एक आम के बाग में खींच ले गयी। 

बहुत ही घना बाग़ था और अंदर जाने पर एक अमराई के झुंड के अंदर वो मुझे ले गई।



कोई सोच भी नहीं सकता था कि वहां कोई कमरा होगा। शायद बाग के चौकीदार का हो। पर तबतक चन्दा मेरा हाथ पकड़कर कमरे के अंदर ले गयी और जब तक मेरी आँखें उसके अंधेरे की अभ्यस्त होतीं, उसने अंदर से सांकल लगा दी। अंदर पुवाल के एक ढेर पे सुनील और रवी लेटे थे, और एक बोतल से कुछ पी रहे थे। दोनों के पाजामे में तने तंबू बता रहे थे कि इंतजार में उनकी क्या हालत हो रही है। 


“हे, दोनों… तुमने तो कहा था कि…” शिकायत भरे स्वर में मैंने चन्दा की ओर देखा। 


तब तक सुनील ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी गोद में खींच लिया, और जब तक मैं सम्हलती उसके बेताब हाथ मेरी चोली के हुक खोल रहे थे। 
“अरे एक से भले दो… आज दोनों का मजा लो…” चन्दा भी उनके पास सटकर बैठकर बोली। 

“अरे लड़कियां बनी इस तरह होती हैं, एक-एक गाल चूमे और दूसरा, दूसरा…” यह कहकर उसने मेरा गाल कस के चूम लिया। 

“और एक-एक चूची दबाये और दूसरा, दूसरा…” ये कहते हुए सुनील ने कस के मेरी एक चूची अधखुली चोली के ऊपर से दबायी और रवी ने चोली
खोल के मेरा दूसरे जोबन का रस लूटा। 


मैं समझ गयी की आज मैं बच नहीं सकती इसलिये मैंने बात बदली- “ये तुम दोनों क्या पी रहे थे, कैसी महक आ रही थी…” 


अभी भी उसकी तेज महक मेरे नथुनों में भर रही थी। 


“अरे चन्दा, जरा इसको भी चखा दो ना…” सुनील बोला। मैं उसकी गोद में पड़ी थी। मेरा एक हाथ रवी ने कस के पकड़ा और दूसरा चन्दा ने। चन्दा ने बोतल उठाकर मेरे मुँह में लगायी पर उसकी महक या बदबू इतनी तेज थी कि मैंने कसकर दोनों होंठ बंद कर लिये। 

पर चन्दा कहां मानने वाली थी, उसने कस के मेरे गाल दबाये और जैसे ही मेरा मुँह थोड़ा सा खुला, बोतल लगाकर उड़ेल दी। तेज तेजाब जैसे मेरे गले से लेकर सीधे चूत तक एक आग जैसी लग गयी। थोड़ी देर में ही एक अजीब सा नशा मेरे ऊपर छाने लगा। 

“अरे गांव की हर चीज ट्राई करनी चाहीये, चाहे वह देसी दारू ही क्यों ना हो…” चन्दा हँसते हुये बोली। पर चन्दा ने दुबारा बोतल मेरे मुँह को लगाया तो मैंने फिर मुँह बंद कर लिया। अबकी सुनील से नहीं रहा गया, और उसने मेरे दोनों नथुने कस के भींच दिये। 

“मुझे मुँह खुलवाना आता है…” सुनील बोला। 

मजबूरन मुझे मुँह खोलना पड़ा और अबकी चन्दा ने बोतल से बची खुची सारी दारू मेरे मुँह में उड़ेल दी। मेरे दिमाग से लेकर चूत तक आग सी लगा गयी और नशा मेरे ऊपर अच्छी तरह छा गया। सुनील और रवी ने मिलकर मेरी चोली अलग कर दी थी और दोनों मिलकर मेरे जोबन की मसलायी, रगड़ायी कर रहे थे। 
“हे तुमने कहा था… की…” मैंने शिकायत भरे स्वर में सुनील की ओर देखा। 


सुनील ने मेरे प्यासे होंठों पर एक कसकर चुम्बन लेते हुये, मेरे निपल को रगड़ते हुये बोला- “तो क्या हुआ, रवी भी मेरा दोस्त है, और तुम भी… और वह बेचारा भी मेरी तरह तुम्हारे लिये तड़प रहा है, और इसके बाद तो मैं तुमको चोदूंग ही, बिना चोदे थोड़े ही छोड़ने वाला हूँ मैं। तुम मेरे दोस्त की प्यास बुझाओ तब तक मैं तुम्हारी सहेली की आग बुझाता हूं, चलो चन्दा…” और वह चन्दा को पकड़कर वहीं बगल में लेट गया। 


“हे ये क्या यहीं… मेरे सामने मुझे शर्म लगेगी…” मैंने मना किया। 


“अरे रानी चोदवाने में… लण्ड घोंटने में शर्म नहीं और सामने शर्मा रही हो…” 

“नहीं नहीं अबकी नहीं…” मैं मना करती रही। 

“चलो अबकी तो मान जाती हूँ पर ये शरम वरम का चक्कर छोड़ो, अगली बार से मेरे सामने ही चुदवाना पड़ेगा…” चन्दा बोली। 
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07-06-2018, 01:48 PM,
#22
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
“चलो अबकी तो मान जाती हूँ पर ये शरम वरम का चक्कर छोड़ो, अगली बार से मेरे सामने ही चुदवाना पड़ेगा…” चन्दा बोली। 


“ये साली, शरम छोड़… वरना तुम्हारी गाण्ड में डाल दूंग…” 

सुनील पूरी तरह नशे में लगा रहा था।

वह चन्दा को लेकर दूसरे कोने में चला गया, पुआल के पीछे, जहां वो दोनों नहीं दिख रहे थे। 

अब रवी ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। मैं अपने घाघरे को ऊपर करने लगी पर “उंह” कहकर उसने सीधे घाघरे का नाड़ा खोल दिया और उसके बाद साये को भी। उसने दोनों को उतारकर उधर ही फेंक दिया जहां मेरी चोली पड़ी थी, और अब उसने मेरे प्यासे होंठों को चूमना शुरू कर दिया। उसे कोई जल्दी नहीं लगा रही थी। पहले तो वो धीरे-धीरे मेरे होंठों को चूमता रहा, फिर उसने अपने होंठों के बीच दबाकर रस ले-लेकर चूसना शुरू कर दिया। उसके हाथ प्यार से जोबन को सहला रहे थे और मैं अपना गुस्सा कब का भूल चुकी थी। 


मेरे निपल खड़े हो गये थे। उसके होंठ अचानक मेरे जोबन के बेस पे आ गये और उसने वहां से उन्हें चूमते हुए ऊपर बढ़ना शुरू किया। मेरे निपल उसका इंतजार कर रहे थे, पर उसकी जुबान मुझे, मेरे खड़े चूचुक को तरसाती, तड़पाती रही। अचानक जैसे कोई बाज चिड़िया पर झपट्टा मारे उसने अपने दोनों होंठों के बीच मेरे निपल को कस के भींच लिया और जोर से चूसने लगा। 


“ओह… ओह… हां बहुत… अच्छा लगा रहा है, बस ऐसे ही चूसते रहो। हां हां…” मैं मस्ती में पागल हो रही थी।


थोड़ी देर के बाद उसने मेरी दोनों चूंचियां कस के सटा दीं और अपनी जीभ से दोनों निपल को एक साथ फ्लिक करने लगा। मस्ती में मेरी चूचियां खूब कड़ी हो गयी थीं। वह तरह-तरह से मेरे रसीले जोबन चूसता चाटता रहा। जब मैं नशे में पागल होकर चूतड़ काटक रही थी, वह अचानक नीचे पहुँच गया और मेरी दोनों जांघों को किस करने लगा। 

मेरी जांघें अपने आप फैलने लगी और उसके होंठ मुझे तड़पाते हुये मेरी रसीली चूत तक पहुँच गये। बगल से सुनील और चन्दा की चुदाई की आवाजें आ रहीं थीं। उसकी जीभ मेरे भगोष्ठों के बगल में चाट रही थी। मस्ती से मेरी चूत एकदम गीली हो रही थी। धीरे से उसने मेरे दोनों भगोष्ठों को जीभ से ही अलग किया और अपनी जुबान मेरी चूत में डालकर हिलाने लगा। मेरी चूत के अंदरूनी हिस्से को उसकी जीभ ऐसे सहला, रगड़ रही थी कि मैं मस्ती से पागल हो रही थी।

मेरी आँखें मुंदी जा रही थीं, मेरे चूतड़ अपने आप हिल रहे थे, मैं जोश में बोले जा रही थी- “हां रवी हां… बस ऐसे ही चूस लो मेरी चूत और कस के… बहुत मज़ा आ रहा है…” 


और रवी ने एक झटके में मेरी पूरी चूत अपने होंठों के बीच कस के पकड़ ली और पूरे जोश से चूसने लगा। उसकी जीभ मेरी चूत का चोदन कर रही थी और होंठ चूत को पूरी ताकत से दबा के ऐसे चूस रहे थे कि बस… मैं अपनी कमर जोर-जोर से हिला रही थी, चूतड़ काटक रही थी और झड़ने के एकदम कगार पर आ गयी थी- 


“रवी हां बस ऐसे ही झाड़ दो मुझको ओह्ह्ह… ओह्ह्ह… हां…” 


पर उसी समय रवी मुझे छोड़कर अलग हो गया। मैं शिकायत भरी निगाह से उसे देख रही थी और वह शरारत से मुश्कुरा रहा था। 


जब मेरी गरमी कुछ कम हुई तो उसने फिर मेरी चूत को चूमना, चाटना, चूसना शुरू कर दिया। वह थोड़ी देर चूत को चूमता और फिर उसके आसपास… एक बार तो उसने मेरे चूतड़ उठाकर मेरे लाख मना करने पर भी पीछे वाले छेद के पास तक चाट लिया। उसकी जीभ की नोक लगभग मेरी गाण्ड के छेद तक जाकर लौट गयी और फिर उसने खूब कस के मेरी चूत चूसनी शुरू कर दी। मेरी हालत फिर खराब हो रही थी। अबकी रवी वहीं नहीं रुका। वह अपनी जुबान से मेरी क्लिट दबा रहा था और थोड़ी ही देर में उसे कस-कस के चूसने लगा। 

मैं अब नहीं रुक सकती थी और मस्ती से पागल हो रही थी- 


“हां हां… चूस लो, चाट लो, काट लो मेरी क्लिट, मेरी चूत मेरे राजा, मेरे जानम… ओह… ओह… झड़ने ले मुझे…” 
मेरे चूतड़ अपने आप खूब ऊपर-नीचे हो रहे थे पर उसी समय वह रुक गया। 

“ओह क्यों रूक गये करो ना… प्लीज…” मैं विनती कर रही थी। 

“अभी तो तुम इतने नखड़े दिखा रही थी, कि तुम सुनील से चुदवाने आयी हो… मुझसे नहीं करवाओगी…” अब रवी के बोलने की बारी थी। 

मैं नशे से इत्ती पागल हो रही थी कि मैं कुछ भी करवाने को तैयार थी- “मैं सारी बोलती हूं। मेरी गलती थी अब आगे से तुम जब चाहो… जब कहोगे तब चुदाऊँगी, जितनी बार कहोगे उतनी बार…” 

“अब फिर कभी मना तो नहीं करोगी…” रवी बोला। 
“नहीं कभी नहीं प्लीज बस अब चूस लो, चोद दो मुझको…” मैं कमर उठाती बोली। 

रवी ने जब अबकी चूसना शुरू किया तो वह इतनी तेजी से चूस रहा था कि मैं जल्द ही फिर कगार पे पहुँच गई, अब उसकी उंगलियां भी मुझे तंग करने में शामिल थीं, कभी वह मेरी निपल को पुल करतीं कभी क्लिट को और जब वह मेरी क्लिट को चूसता तो वह चूत में घुसकर चूत मंथन करतीं। अबकी जब मैं झड़ने के निकट पहुँची तो उसने शरारत से मेरी ओर देखा।


और मैं चिल्ला उठी- “नहीं, प्लीज़, अबकी मत रुकना तुम जिस तरह जब कहोगे मैं तुम चुदवाऊँगी… प्लीज…” 


रवी मेरी क्लिट चूस रहा था, उसने कस के पूरी ताकत से मेरी क्लिट को चूमा और उसे हल्के से दांत से काट लिया। मेरे पूरे शरीर में लहर सी उठने लगी और उसी समय रवी ने मेरी दोनों जांघों को फैलाकर पूरी ताकत से अपना लण्ड मेरी चूत में पेल दिया और कमर पकड़कर पूरे जोर से ऐसे धक्के लगाये कि 3-4 धक्कों में ही उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में था। जैसे ही मेरी चूत को रगड़ता उसका लण्ड मेरी चूत में धंसा, मैं झड़ने लगी… और मैं झड़ती रही… झड़ती रही… 



लेकिन वह रुका नहीं। उसके शरारती होंठ मेरे निपल को चूम चूस रहे थे।


मैं थोड़ी देर निढाल पड़ी रही पर, उसके होंठ, उंगलियां और सबसे बढ़कर मेरे चूत के अंत तक घुसा उसका मोटा लण्ड, थोड़ी ही देर में मैं फिर उसका साथ दे रही थी। अब उसने मेरी लम्बी गोरी टांगें उठाके अपने कंधे पे रख रखीं थीं। दोनों हाथों से मेरे भरे-भरे जोबन पकड़ के वह धक्के लगा रहा था।


बाहर फिर सावन की झड़ी चालू हो गयी थी और उसकी फुहारें हम दोनों के बदन पर भी पड़ रहीं थीं। मेरी चौड़ी चांदी की पाजेब के घुंघरू उसके हर धक्के के साथ बज रहे थे और जब मैंने उसकी ओर देखा तो मेरे पैरों का महावर भी उसके माथे को लग गया था। कभी वह कस के मेरे जोबन दबाता, कभी मेरे निपल खींच देता, उसके होंठ मेरे होंठों का रस पी रहे थे। कई बार वह मुझे कगार पे ले आया और फिर वह रुक जाता और फिर थोड़ी देर में दुबारा पूरी जोश से चोदना चालू कर देता… बहुत देर तक… 


मैं मस्ती से पागल हो रही थी- “हां रवी… प्लीज मुझे झड़ने दो ना… रुको नहीं… नहीं… हां करते रहो… हां… पूरे जोर से हां…” 


अबकी रवी नहीं रुका और पूरे जोर से धक्के लगाता रहा। जब मैंने झड़ना शुरू किया तो उसके लण्ड का बेस मेरी क्लिट को कस के रगड़ रहा था। मेरी आँखें बंद हो गयी थी, मेरी चूत कस-कस के बार-बार रवी के लण्ड को भींच सिकोड़ रही थी। और रवी भी मेरे साथ-साथ झड़ने लगा। 

बहुत देर तक उसके लण्ड से बहते वीर्य को मैं अपने अंदर महसूस कर रही थी। 
जब मेरी आँख खुली तो चन्दा और सुनील मेरे सामने खड़े थे। सुनील ने मुश्कुराकर मुझसे पूछा-

“क्यों मजा आया मेरे यार से चुदवाने का…” 


मैं क्या बोलती, बस मुश्कुराकर रह गयी। 
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07-06-2018, 01:48 PM,
#23
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
मैं क्या बोलती, बस मुश्कुराकर रह गयी। 
चन्दा ने हँसकर कहा- “हम लोगों ने बहुत कुछ सुना और थोड़ा देखा भी कि रानी जी कैसे मस्त होकर चुदवा रहीं थीं…” 


मैं बड़ी मुश्किल से उठकर खड़ी हुई और चन्दा से बोली- “क्यों चलें…” पर तब तक मैंने देखा की चन्दा ने मेरी चोली, घाघरा और साया उठाकर अपने कब्जे में कर रखा है। 
सुनील ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और बोला- “कहां चली, अभी मेरा नंबर तो बाकी है…” 


चन्दा मेरे कपड़े दिखाती बोली- “नहीं नहीं… अगर ये ऐसे ही जाना चाहें तो जाय, कहो तो सांकल खोल दूं…” 


मैं समझ गयी थी की बिना चुदवाये कोई बचत नहीं है। और सुनील का फिर से उत्थित होता लण्ड देखकर मेरा मन भी बेकाबू होने लगा था। सुनील ने मुझे पकड़ के अपनी गोद में बिठा लिया और अपना लण्ड मेरे गोरे मेंहदी लगे हाथों में दे दिया। मैं अपने आप उसे आगे पीछे करने लगी। 


सामने रवी ने चन्दा को अपनी गोद में बिठा लिया था और एक हाथ से उसकी चूची दबा रहा था और दूसरा, उसकी चूत में उंगली कर रहा था। 

जल्द ही सुनील का लण्ड फुफ्कार मारने लगा था और मेरी मुट्ठी से बाहर हो रहा था। 

पर मेरे कोमल किशोर हाथों को उसके मोटे कड़े लोहे की तरह सख्त लण्ड का स्पर्श इतना अच्छा लग रहा था कि उसी से मेरे चूचुक खड़े हो रहे थे। 


सुनील मेरी फैली हुई जांघों के बीच आ आया और मेरी दोनों सख्त चूचियां पकड़ के उसने दो-तीन धक्कों में आधा से ज्यादा लण्ड मेरी कसी चूत में पेल दिया। 


रवी की चुदाई के बाद मेरी चूत अच्छी तरह गीली थी पर सुनील का लण्ड इतना मोटा था की मेरी चीख निकल गयी। पर उसकी परवाह किये बगैर सुनील ने पूरी ताकत से धक्के लगाना जारी रखा। मैं तड़प रही थी, चिल्ला रही थी, मिट्टी पर, पुवाल पर अपने किशोर चूतड़ काटक रही थी, पर जब तक उसका मोटा मूसल ऐसा लण्ड, जड़ तक मेरी चूत में नहीं घुस गया, वह पेलता रहा… चोदता रहा… 


मैंने चन्दा की ओर मुड़कर देखा, वह मेरे पास ही बैठी थी और रवी उसकी जांघें फैलाकर उसकी चूत चूम चाट रहा था। मेरी ओर देखकर चन्दा मुश्कुरा दी। 


सुनील ने मेरे भरे-भरे गोरे-गोरे गाल अपने मुँह में भर लिया था और उन्हें कस के चूस रहा था, अचानक उसने खूब कस के मेरा गाल काट लिया और मैं चीख पड़ी। 

थोड़ी देर तक वहां चुभलाने के बाद उसने फिर वहीं कसकर काट लिया और अबकी उसके दांत देर तक वहीं गड़े रहे, भले ही मैं चीखती रही। आज मेरी चूचियों की भी शामत थी। 


सुनील अपने दोनों हाथों से उन्हें खूब कस के मसल रगड़ रहा था और चूची पकड़ के ही पूरी ताकत से धक्के मार मारकर मुझे चोद रहा था। वह लण्ड सुपाड़े तक बाहर निकालता और फिर पूरी ताकत से पूरा लण्ड एक बार में अंदर तक ढकेल देता। उसका लण्ड मेरी क्लिट को भी अच्छी तरह रगड़ रहा था। दर्द से मेरी जांघें और चूत फटी जा रही थी पर उसकी इस धकापेल चुदाई से थोड़ी देर में मैं भी नशे से पागल हो गयी और चूतड़ उठा-उठा के उसका साथ देने लगी। 

सुनील के होंठ अब मेरी चूची कस के चूस रहे थे, उसने चूची का उपरी भाग मुंह में दबा लिया और देर तक चूसने के बाद कस के काट लिया। मैं चीख भी नहीं पायी क्योंकी चन्दा ने अपने होंठों के बीच मेरे होंठ दबा लिये थे और वह भी उन्हें कस के चूस रही थी।

सुनील उसी जगह पर थोड़ी देर और चुभलाता, चूसता और फिर कस के काट लेता। 

चन्दा ने भी मौके का फायदा उठा के मेरे होंठ चूसते हुये काट लिये और हँस के बोली- “अरे, चुदाई का कुछ तो निशान रहना चाहिये…” 

सुनील ने मेरे दोनों जोबन को कस-कस के ऊपर के हिस्से को अपने दांत के निशान बना दिये थे। अब तक मेरी टांगें फैली हुईं थीं पर अब सुनील ने मुझे मोड़कर लगभग दुहरा कर दिया और मेरे पैर भी सटा दिये जिससे मेरी चूत अब एकदम कसी-कसी हो गयी। और जब उसने लण्ड थोड़ा बाहर निकालकर चोदा तो मेरी तो जान ही निकल गई।


पर चन्दा को इसमें भी मजा आ रहा था। वह हँस के बोली-

“हाँ… सुनील ऐसे ही खूब कस के चोदो की इसका सारा छिनारपन निकल जाय, तीन दिन तक चल न पाये…” 

पर लण्ड इतना रगड़-रगड़ के जा रहा था की मैं जल्द ही झड़ गयी। 


चन्दा ने मेरी एक चूची पकड़ ली और कस के सहलाते, दबाते बोली- “अरी, ये एक बार मेरे साथ झड़ चुका है अबकी बहुत टाइम लेगा…” 

सुनील मेरे चूतड़ पकड़ के लगातार धक्के लगा रहा 

था। रवि दूसरी ओर से मेरी चूची पकड़ के दबा मसल रहा था। मेरे होश लगभग गायब थे, मुझे पता नहीं की मैं कितनी बार झड़ी पर बहुत देर तक चोदने के बाद सुनील झड़ा। 
मैं बड़ी देर तक वैसे ही लेटी रही। थोड़ी देर में चन्दा और रवी ने सहारा देकर मुझे उठाया। जब मैंने गर्दन झुका कर देखा तो मेरे दोनों जोबनों के उपरी हिस्से में खूब साफ निशान थे, और वैसे तो पूरी चूची पर रगड़, खरोंच और काटने के निशान थे। 


सुनील ने मुझसे कहा- “यार तुम्हें पाकर मैं होश खो बैठता हूं, तुम चीज ही ऐसी हो…” 


मैं मुश्कुराके बोली- “चलो चलो ज्यादा मक्खन लगाने की जरूरत नहीं है…” और मैं चन्दा के साथ घर के लिये चल दी। 

रास्ते में चन्दा ने बात छेड़ी- “आज जो तुम्हारी कस के चुदाई हुई, वह तुम्हारे भाई रवीन्द्र के लिये बहुत जरूरी थी…” 

मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी। मैं बनावटी गुस्से में बोली- “बेचारे मेरे भाई रवीन्द्र को क्यों घसीटती हो इसमें…” 

चन्दा ने मेरे गाल पे चिकोटी काट कर कहा- “इसलिये मेरी प्यारी बिन्नो कि रवीन्द्र का, सुनील बल्की अब तक मैंने जितने भी देखे हैं सबसे बहुत लंबा और मोटा है, इसलिये अब कम से कम वह अपना सुपाड़ा तो घुसा सकेगा, अपनी प्यारी बहना की चूत में…” 

मेरी आँखों के सामने रवीन्द्र की तस्वीर घूम रही थी, पर मैंने चन्दा को छेड़ते हुए कहा- “अगर ऐसी बात है तो तू ही क्यों नहीं चुदवा लेती रवीन्द्र से…” 

“अरे यार, मैं तो अपनी चूत हाथ पे लेके घूम रही हूँ, पर उसको तो अपनी इस प्यारी बहना को ही चोदना है ना, साल्ला… बहनचोद…” चन्दा हँस के बोली। 

“हे गाली क्यों देती है, मेरे प्यारे भाई को…” मैं उसे घूर के बोली। 

चन्दा ने मुश्कुराकर कहा- “अपनी इस प्यारी प्यारी बहना को तो वह बिना चोदे मानेगा नहीं और अब इस बहना की चूत में भी इतनी खुजली मच रही होगी की वह भी अपने भैय्या से बिना चुदवाये रहेगी नहीं। तो बहनचोद वह हुआ की नहीं और उसकी इस बहन को गांव के मेरे सारे भाई बिना चोदे तो जाने नहीं देंगे, और जिसकी बहन यहां चुदेगी वह साला हुआ की नहीं…” 

बात तो उसकी सही थी पर मेरे मन में बार-बार रवीन्द्र की शक्ल घूम रही थी। मुझसे नहीं रहा आया और मैंने चन्दा से पूछ ही लिया- “लेकिन मेरी समझ में ये नहीं आता कि… वह इत्ता शर्मीला है… मैं शुरूआत कैसे करूं…”

थोड़ी देर में खिलखिलाती हुई चन्दा बोली- “मेरे दिमाग में एक आइडिया आया है… जब तुम घर लौटोगी तो उसके कुछ दिन बाद ही सावन की पूनो, पड़ेगी, राखी…” 
“तो…” उसकी बात बीच में काटकर मैं बोली।

“तो जब तुम उसको राखी बांधना तो वह पूछेगा की क्या चाहिये… तुम उसकी पैंट पर हाथ रखकर मांग लेना, भैय्या, मुझे तुम्हारा लण्ड चाहिये…” चन्दा जोर-जोर से हँस रही थी।
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07-06-2018, 01:49 PM,
#24
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
पेज ३० से आगे 


अब तक 



मेरी आँखों के सामने रवीन्द्र की तस्वीर घूम रही थी, पर मैंने चन्दा को छेड़ते हुए कहा- “अगर ऐसी बात है तो तू ही क्यों नहीं चुदवा लेती रवीन्द्र से…” 
“अरे यार, मैं तो अपनी चूत हाथ पे लेके घूम रही हूँ, पर उसको तो अपनी इस प्यारी बहना को ही चोदना है ना, साल्ला… बहनचोद…” चन्दा हँस के बोली। 
“हे गाली क्यों देती है, मेरे प्यारे भाई को…” मैं उसे घूर के बोली। 


चन्दा ने मुश्कुराकर कहा- “अपनी इस प्यारी प्यारी बहना को तो वह बिना चोदे मानेगा नहीं और अब इस बहना की चूत में भी इतनी खुजली मच रही होगी की वह भी अपने भैय्या से बिना चुदवाये रहेगी नहीं। तो बहनचोद वह हुआ की नहीं और उसकी इस बहन को गांव के मेरे सारे भाई बिना चोदे तो जाने नहीं देंगे, और जिसकी बहन यहां चुदेगी वह साला हुआ की नहीं…” 

बात तो उसकी सही थी पर मेरे मन में बार-बार रवीन्द्र की शक्ल घूम रही थी। मुझसे नहीं रहा आया और मैंने चन्दा से पूछ ही लिया- “लेकिन मेरी समझ में ये नहीं आता कि… वह इत्ता शर्मीला है… मैं शुरूआत कैसे करूं…”


थोड़ी देर में खिलखिलाती हुई चन्दा बोली- “मेरे दिमाग में एक आइडिया आया है… जब तुम घर लौटोगी तो उसके कुछ दिन बाद ही सावन की पूनो, पड़ेगी, राखी…” 
“तो…” उसकी बात बीच में काटकर मैं बोली।

“तो जब तुम उसको राखी बांधना तो वह पूछेगा की क्या चाहिये… तुम उसकी पैंट पर हाथ रखकर मांग लेना, भैय्या, मुझे तुम्हारा लण्ड चाहिये…” चन्दा जोर-जोर से हँस रही थी।
 


आगे 












“तो जब तुम उसको राखी बांधना तो वह पूछेगा की क्या चाहिये… तुम उसकी पैंट पर हाथ रखकर मांग लेना, भैय्या, मुझे तुम्हारा लण्ड चाहिये…” चन्दा जोर-जोर से हँस रही थी। 
“हां जरुर मांगूंगी पर ये बोलूंगी की… मेरी प्यारी सहेली चन्दा के लिये चाहिये…” मैंने चन्दा की पीठ पर हाथ मारकर कहा। बार-बार चन्दा की बात और रवीन्द्र मेरे मन में आ रहा था, इसलिये मैंने बात बदली- “यार रवी… जब चूसता है तो… आग लग जाती है…” 

“सही बात है, पक्का चूत चटोरा है, एक बार तो… अच्छा छोड़ो तुम विश्वास नहीं करोगी…” 
“नहीं नहीं… बताओ ना…” मैंने जिद की। 

“एक बार… हम लोग खेत में थे, मुझे पेशाब लगी थी मैं जैसे ही करके आयी, रवी ने मुझे पकड़ लिया, मैंने बहुत कहा कि मैंने अभी साफ नहीं किया, पर वह नहीं माना, कहने लगा- कोई बात नहीं, स्पेशल टेस्ट मिलेगा और उस दिन रोज से भी ज्यादा कस के चूसा और मुश्कुराके कहने लगा- थोड़ा खारा खारा था…” 

“हाय… लगी हुई थी और…” मैं आश्चर्य से बोली। 

घर आ गया था इसलिये हम लोग बाहर खड़े-खड़े हल्की आवाज में बातें कर रहे थे। 

“अरे, चौंक क्यों रही है देखना अभी चम्पा भाभी और कामिनी भाभी तुमसे क्या-क्या करवाती हैं…” चन्दा बोली। 

मैं- “हां चम्पा भाभी हरदम चिढ़ाती रहती हैं कि कातिक में आओगी तो राकी के साथ…” 

मेरी बात काटकर चन्दा ने फुसफुसाते हुए कहा- “अरे राकी के साथ तो अब तुझे चुदवाना ही होगा उससे तो तू बच ही नहीं सकती। उसके साथ तो वो तेरी सुहागरात मनवाएंगी, पर… उसके बाद देखना, हर चीज तुम्हें पिलायेंगी-खिलायेंगी…”


तब तक घर के अंदर से भाभी की आवाज आयी, अरे तुम लोग बाहर क्या कर हो। जैसे ही हम अंदर गये चम्पा भाभी बोलीं- “अरे मैं बताना भूल गयी थी, आज कामिनी भाभी के यहां सोहर और कजरी होगी, सबको बुलाया है तैयार हो जाओ, जल्दी चलना है…” 


“ठीक है भाभी मैं चलती हूँ कामिनी भाभी के घर पे मिलूंगी…” ये कहकर चन्दा अपने घर को निकल गयी।
थोड़ी देर में सब लोग तैयार होने लगे। आज भाभी ने अपने हाथों से मुझे तैयार किया। खूब ज्यादा, गाढ़ा मेकप किया, कहने लगीं- 

“सबको मालूम तो हो कि मेरी ननद कितना मस्त माल है। 

चोली मेरी आज कुछ ज्यादा ही लो कट थी। जब शीशे में मैंने देखा तो मेरे जोबन को, सुनील ने जो निशान बनाये थे वे बहुत साफ दिख रहे थे। मैंने भाभी से आखिरी कोशिश की- “भाभी मैं ना चलूं तो…” 

पर भाभी कहां मानने वाली थि, मेरे गालों पे चिकोटी काट के बोलीं-


“अरे मेरी ननद रानी, आखिर हम लोग फिर गाली किसको देंगे…” बेचारा अजय, उसने मुझसे वादा लिया था कि रात को मैं अपनी खिड़की खोल के रखूंगी, वो आयेगा और फिर रात भर… लेकिन…
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07-06-2018, 01:49 PM,
#25
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
रतजगा : कामिनी भाभी के घर 




कामिनी भाभी हम लोगों का इंतजार कर रहीं थीं। मुझसे तो वो खूब जोश से गले मिलीं और उनके 38डीडी जोबन ने मेरे 32सी किशोर जोबनों को एकदम दबाकर रख दिया। सबसे मुझे दिखाकर कहने लगीं- 

“सबसे ज्यादा तो मुझे इसी माल का इंतजार था…” 


थोड़ी देर तो ऐसे ही गाने चलते रहे पर जब चमेली भाभी ने ढोलक ली तब मैं समझ गयी कि अब क्या होने वाला है। चमेली भाभी ने एक सोहर शुरू किया- 


सासू जो आयें चरुआ चढ़ाने, जो आयें चरुआ चढ़ाने,
उनको तो मैं नेग दिलाय दूंगी, नेग लेवे में जो ठनगन करिहें, 
नेग लेवे में जो ठनगन करिहें, मुन्ने के, अरे मुन्ने के नाना से उनको चुदाय दूंगी। 

देवरा जो आये बंसी बजाये, जो आये बंसी बजाये, 
उनको तो मैं नेग दिलाय दूंगी, नेग लेवे में जो ठनगन करिहें, 
नेग लेवे में जो ठनगन करिहें, अरे उनकी अरे उनकी गाण्ड में बंसी घुसाय दूंगी। 

ननदी जो गये कजरा लगाये, अरे छिनरी जो गये कजरा लगाये, 
उनको तो मैं नेग दिलाय दूंगी, नेग लेवे में जो ठनगन करिहें, 
नेग लेवे में जो ठनगन करिहें, उनकी भोंसड़ी में कजरौटा घुसाय दूंगी। 

अरे अपने देवर से प्यारे रवीन्द्र से उनको चुदाय दूंगी… (भाभी ने जोड़ा।)

राकी से उसको चुदाय दूंगी। (चम्पा भाभी कहां चुप रहने वाली थीं।) 


मैंने भाभी को चिढ़ाया- “पर भाभी, गा तो चमेली भाभी रही हैं और उनकी ननद तो आप, चन्दा हैं। 

कामिनी भाभी ने मेरा साथ दिया- “ठीक तो कह रही है, अरे नाम लेके गाओ…” 
पूरबी ने मुझे चिढ़ाते भाभी से कहा- “अरे राकी से भी, बड़ी कैपिसिटी है, आपकी ननद में…” 

चम्पा भाभी को तो मौका मिल गया- 

“अरे कातिक में दूर-दूर से लोग अपनी कुतिया लेकर आते हैं, नंबर लगता है, राकी को ऐसा मत समझो…” 

भाभी बड़े भोलेपन से मेरे कंधे पर हाथ रखकर मेरी ओर इशारा करके बोलीं। 

“अबकी मैं भी ले आऊँगी अपनी… इस कातिक में…”

कामिनी भाभी बोलीं, “ठीक है, तुम्हारी वाली का नंबर पहले लगावा दूंगी। और नंबर क्या उसका नंबर तो हर रोज लगेगा …” 



बाहर बादल उमड़ घुमड़ रहे थे। गीता को भी जोश आ गया, वो बोली- “भाभी वो बादल वाला सुनाऊँ…” 


“हां हां सुनाओ…” चमेली भाभी और मेरी भाभी एक साथ बोलीं। चन्दा भी गीता का साथ दे रही थी। 

बिन बदरा के बिजुरिया कैसे चमके, हो रामा कैसे चमके, बिन बदरा के बिजुरिया, 
अरे हमरी ननदी छिनार के गाल चमके, अरे गुड्डी रानी के दोनों गाल चमकें, 

अरे उनकी चोली के, अरे उनकी चोली के भीतर अरे गुड्डी रानी के दोनों अनार झलकें
जांघon के बीच में अरे जांघon के बीच में अरे गुड्डी छिनार के दरार झलके। 

बिन बदरा के बिजुरिया कैसे चमके, हो रामा कैसे चमके



चमेली भाभी ने पूछा- “कैसी लगी…” 
मैंने आँखें नचाकर, मुश्कुराकर कहा- “भाभी मिरच जरा कम थii…” 

कामिनी भाभी ने पूरबी की ओर देखकर कहा- “ये तो तुम ननद सालiयों के लिये चैलेंज है…” 

पूरबी और उनका साथ देने के लिये मेरी भाभी चालू हो gयीं- 
अरे हमरे खेत में सरसों फुलायी, अरे सरसों फुलायी
गुड्डी रानी की अरे गुड्डी साली की हुई चुदाई, 

अरे, रवीन्द्र की बहना की, गुड्डी की हुई चुदाई, 


भाभी ने फिर दूसरा गाना शुरू किया और अबकी पूरबी साथ दे रही थी- 


अरे मोती झलके लाली बेसरiया में, मोती झलके, 
हमरी ननदी रानी ने, गुड्डी रानी ने एक किया, दो किया, साढ़े तीन किया, 
हिंदू मूसलमान किया, कोरी, चमार किया, 
अरे 900 गुंडे बनारस के, अरे 900 छैले पटना के, मोती झलके, 
अरे मोती झलके लाली बेसरiया में, मोती झलके, 
हमरी ननदी छिनार ने, गुड्डी छिनार ने एक किया, do किया, साढ़े तीन किया,
हमro भतार किया, भतro के सार किया, उनके सब यार किया, 
अरे 900 गदहे एलवल के, अरे 900 भंfuये कालीनगंज के, अरे मोती झलके



(q जिस मुहल्ले में रहती थी उसका नाम एलवल था, और मेरी गाली के बाहर धोबियों के घर होने से, काफी गधे बंधे रहते थे, इसलिये मजाक में उसे, गधे वाली गाली कहते थे और हमारे शहर में जो रेड लाइट एरिया थी, उसका नाम कालीन गंज था।) मेरी भाभी ने मुश्कुराकर पूछा- “क्यों आया मजा, अब तो नाम साफ-साफ है ना” मैं मुश्कुरा कर रह गयी। 
कामिनी भाभी ने कहा- “मैं असली तेज मिरच वाली सुनाती हूंz” पूरबी ने ढोलक थामी और चम्पा भाभी ने उनका साथ देना शुरू किया- 

अरे गुड्डी छिनार, हमरा जादी, वो तो कुत्ता चोदी, गदहा चोदी, 
हमरे देवर के मुँह पे आपन चूची रगड़े, 
उनके लण्ड बुर रगड़े, अपनी गाण्ड रगड़े, 
अपने भाई के मुँह पे आपन चूची रगड़े, अपनी बुर रगड़ेz (भाभी ने जोड़ा।) 
अरे गुड्डी छिनार, हraमजादी, वो तो कुत्ता चोदी, गदहा चोदी


“क्यों गदहों के साथ भी, अभी तक तो कुत्तों की बात थी…” पूरबी ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा. 

“अरे जब ये अपनी गली के बाहर चूतड़ मटकाती हुई निकलती है, तो गदहों के भी लण्ड खड़े हो जाते हैं…” भाभी आज पूरे मूड में थीं। 
“क्यों मिरचा लगा…” कामिनी भाभी ने पूछा। 
“हां भाभी, बहुत तेज, लेकिन मजा तो मुझे में ही आता है…” मैं मुश्कुराकर कर बोली। 
तभी किसी बड़ी औरत ने कहा- “अरे लड़का हुआ है तो थोड़ा नाच भी तो होना चाहिये, कौन आयेगा नाचने…”
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07-06-2018, 01:49 PM,
#26
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
भाभी ने चमेली और चम्पा भाभी की ओर इशारा करके कहा- “मुन्ने की मामी को नचाया जाय…” 

“ठीक है, अगर ये तुम मaन ले कि बच्चा मुन्ने के मामा का है तो हम तैयार हैं…” चमेली भाभी ने हँसकर कहा। 

आखिर भाभी को खुद उठना पड़ा। कुछ देर में चमेली भाभी भी उनका साथ देने के लिये खड़ी हुईं और नाचते नाचते, चमेली भाभी ने भाभी का जोबन पकड़ने की कोशिश की पर मेरी भाभी झुक कर बच gयीं। भाभी ने मेरी ओर इशारा करते हुए कहा की, अगला नंबर मुन्ने कii बुआ का होगा। 

मैं मaन गयी पर मैंने कहा- “ठीक है, लेकिन मुन्ने की मौसी को साथ देना होगा…” 

कामिनी भाभी ने पूरबी से कहा- “ठीक है, हो जाये देखतें है कि बुआ और मौसी में कौन ज्यादा चूतड़ मटका सकती है…” 

भाभी ने ढोलक ली और चन्दा उनका साथ दे रही थी। मेरे साथ पूरबी खड़ी हुई, भाभी ने गाना शुरू किया- 

लौंडे बदनाम हुये, नसीबन तोरे लिये, हो गुड्डी तोरे लिए, 
ऊपर से पानी होगी, नीचे से नाली होगी, 
सट्टासट, घचाघच्च कीचड़ होगा, हो नसीबन, हो गुड्डी तेरे लिए


मैं भी पूरे जोश में “मेरी बेरी के बेर मत कभी जोबन उभारकर, कभी झुककर लो कट चोली से जोबन झलकाकर, कभी चुदाई के अंdaज में चूतड़ मटकाकर नाच रही थी और पूरबी तो और खुलकरz भाभी ने अगली लाइन शुरू की- 


लौंडे बदनाम हुये, नसीबन तोरे लिये, हो गुड्डी तोरे लिए
छोटा सा कोल्हू होगा होगा मोटा सा गन्ना होगा, 

अरे, छोटा सा कोल्हू होगा होगा
सटासट जाता होगा, अरे जाता होगा, गुड्डी तेरे लिये,


अरे छोटी सी चूत होगी, मोटा सा लण्ड होगा, अरे गुड्डी तेरे लिये,
अरे गपागप जाता होगा, सटासट जाता होगा, हो गुड्डी तोरे लिए


कामिनी भाभी ने पूरबी को इशारा किया- “अरे पूरबी दिखा तो ससुराल से क्या सीख के आई यी है” 



[Image: 209698926376625015]



पूरबी ने मेरी कमर पकड़ के रगड़ना कभी धक्के लगाना, इस तरह शुरू किया कि जैसे जोर की चुदाई चल रही हो। कामिनी भाभी ने पूरबी को कुछ इशारा किया, और जब तक मैं समझती, चन्दा और गीता ने मेरे दोनों हाथ कस के पकड़ लिये थे और पूरबी ने मेरी साड़ी एक झटके में उठा दी और मेरे रोकते,-रोकते कमर तक उठा दी। 
“अरे जरा ठीके सेभरतपुर के दर्शन कराओz” चम्पा भाभी बोली.

और चन्दा ने पूरबी के साथ मिलकर मेरी जांघें फैला दीं। मैं अपनी चूत हर हफ्ते, रिमूवर से साफ करती थी और अभी कल ही मैंने उसे साफ किया था इसलिये वह एकदम चिकनी गुलाबी थी। 


“अरे ये तो एकदम मक्खन मलाई है। चाटने के लायक और चोदने के भी लायक…” कामिनी भाभी बोल पड़ी। 

“अरे तभी तो गांव के सारे लड़के इसके दीवाने हैं और लड़के ही क्यों…” चम्पा भाभी ने हँसकर कहा। 

“और मेरा देवर भी…” भाभी क्यों चुप रहतीं, बात काटकर वो बीच में बोलीं। 

मैं पूरबी के साथ बैठ गयी। कामिनी भाभी भी मेरे पास आ गयीं। उनकी आँखों में एक अजीब चमक थी। चैलेंज सा देते हुये उन्होंने पूछा- “तो तुम्हें तेज मिरच पसंद है…” 

जeeसे चैलेंज स्वीकार करते हुए मैं बोली- “हां भाभी जब तक कस के छरछraय नहीं तो क्या मजा…”


कामिनी भाभी ने मुश्कुराकर चम्पा भाभी से कहा- “तो इसको स्पेशल चटनी चटानी पड़ेगी…” 

चम्पा भाभी मुझसे बोलीं- “अरे जब एक बार वो चटनी चाट लोगी तो कुछ और अच्छा नहीं लगेग…” 



कामिनी भाभी और कुछ बोलतीं तब तक उनकी एक ननद उनको चुनौती दे दी और वह उससे लोहा लेने चल पड़ीं। 

मैं और पूरबी बैठकर मज़ा ले रहे थे, एकदम फ्री फार आल चालू हो gया था। पूरबी ने मुझसे पूछा कि कभी गांव में मैंने नदी में नहाया है। मेरे मना करने को वो बोली कि बहुत मजा आता है और वह कल मुझे अपने साथ ले चलेगी। 


गaने, पकड़ा-पकड़ी, सब कुछ चल रहा था, चन्दा के पीछे चम्पा भाभी और गीता के पीछे चमेली भाभी पड़ीं थीं। सुनील की छोटी बहन रीना भी \ थी, अभी 8वीं में पढ़ती थी, मुश्किल से 13 साल की होगी। चेहरा बहुत भोला सा, टिkoरे से छोटे छोटे उभार, फ्राक को पुश कर रहे थे, पर गाली देने में भाभी लोगों ने उसको भी नहीं बख्शा, आखिर उनकी ननद जो थी। 
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07-06-2018, 01:50 PM,
#27
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
सोलहवां सावन 












अगले दिन जब पूरबी मुझे लेने गयी तो आंगन में काफी धूप निकल चुकी थी। बहुत दिनों के बाद आज मौसम खुला था। चन्दा के घर कुछ मेहमान आये थे इसलिये वह आज खाली नहीं थी। बसंती और भाभी आंगन में बैठे थे और बसंती मुन्ने को तेल लगा रही थी। तेल लगाते-लगाते, बसंती ने मेरी ओर देखकर, मालिश करते बोला- 


आटा पाटा दही का लाटा, मुन्ने की बुआ का लहंगा फाटा। 


भाभी ने मजाक में मुझसे धीरे से पूछा- क्यों लहंगे के अंदर वाला अभी फटा की नहीं। 


मैंने मुश्कुराकर हामी में सर हिला दिया और उनका चेहरा खिल उठा। 


थोड़ी देर में, गीता, कजरी और नीरा भी नदी नहाने के लिये इकठ्ठा हो आयीं और हम लोग चल दिये। 


मेरी समझ में नहीं आ रहा था की हम लोग नदी में नहायेंगे कैसे… क्योंकी बदलने के लिये कपड़ा हम लोगों ने लिया नहीं था। 


पर नदी के किनारे पहुँच कर मेरे समझ में आ गया। सब लड़कियों ने साड़ी चोली उतार दी थी और अपना साया खूब कस के अपने सीने के ऊपर बांध रखा था। नहाने के बाद सिर्फ साड़ी चोली में घर वापस आ जातीं और गीले पेटीकोट साथ ले आतीं। 

वह जगह एकदम एकांत में थी और मुझे गीता ने बताया कि औरतों का घाट होने के परण वहां मर्द नहीं आते। सबकी तरह मैंने भी अपने जोबन के ऊपर पेटीकोट बांध लिया और नदी में घुस गयी। 


पर थोड़ी देर में ही छेड़छाड़ शुरू हो गयी। पानी के जोर से सबका पेटीकोट ऊपर हो जाता और पूरा शरीर भीग रहा था। तभी मैंने पाया कि गीता ने पानी के अंदर घुसकर मेरे जोबन पकड़ लिये और मसलने लगी। मैं क्यों छोड़ती, मैंने भी उसके उभारों को पकड़ के कस के दबा दिया।

तब तक कजरी भी मैदान में आ गयी और वह मेरे जांघों के बीच हाथ रगड़ने लगी। कुछ देर तक मैं और गीता एक दूसरे की चूचियां दबाते रहे पर तभी मैंने देखा कि पूरबी मुझे इशारे से बुला रही है। मैं जैसे ही उसकी ओर मुड़ी, गीता और कजरी एक दूसरे के साथ चालू हो गयीं। 
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07-06-2018, 01:51 PM,
#28
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
नदी के मजे 






कुछ देर तक मैं और गीता एक दूसरे की चूचियां दबाते रहे पर तभी मैंने देखा कि पूरबी मुझे इशारे से बुला रही है। मैं जैसे ही उसकी ओर मुड़ी, गीता और कजरी एक दूसरे के साथ चालू हो गयीं। 




पूरबी नीरा के पास नहा रही थी। उसने मुझसे आँख मारकर इशारे से पूछा- “क्यों इस कच्ची कली का मजा लेना है…” 

मैंने कहा- “अभी बहुत छोटी है…” 

पूरबी बोली- “जरा नीचे का चेक करो, छोटी वोटी कुछ नहीं है…” 

जब तक वो बेचारी कुछ समझती, मैंने उसकी जांघों के बीच में हाथ डालकर कस के दबोच लिया था। उसकी छोटी-छोटी काली झांटें मेरे हाथ में आ गयीं। जब तक वह कुछ बोलती, पूरबी ने उसके दोनों छोटे छोटे उभरते उभारों को कस के पकड़ लिया था और मजे ले-लेकर दबा रही थी। 


मुझे सुनील की याद गयी कि कल कैसे कस-कस के उसने मेरी चूत फाड़ी थी और आज उसकी बहन… मैंने अपनी उंगली का टिप उसकी चूत में बिना सोचे डाल दी। मेरा दूसरा हाथ उसके छोटे-छोटे चूतड़ दबा रहा था। 


हम लोग इतनी मस्ती कर रहे थे पर ऊपर से कुछ पता नहीं चलता, क्योंकी हमारे हाथ जो शैतानियां कर रहे थे वो पानी के अंदर थे।

बहुत देर तक उसको छेड़ने मजा लेने के बाद, अचानक पूरबी ने पैंतरा बदलकर मेरे जोबन दबाने चालू कर दिये। पर जब मैं उसकी चूचियां पकड़ने लगी तो वो तैरकर दूर निकल गयी। पर उसे ये नहीं पता था की मैं भी पानी की मछली हूं। मैं इंटर-स्कूल तैराकी चैम्पियन थी। मैंने भी उसका पीछा किया। जब मैंने उसे पकड़ा तो वो जगह एकदम एकांत में थी।

नदी में तेज मोड़ आ आया था और वहां से हमारी सहेलियां क्या, कुछ भी नहीं दिख रहा था। दोनों ओर किनारे खूब ऊँचे और घने लंबे पेड़ थे। पानी की धार भी वहां एकदम कम थी। 

पूरबी पानी में खड़ी हो गयी। वहां उसके सीने से थोड़ा ही कम पानी था और पेटीकोट के भीग जाने से, उसके पत्थर से कठोर स्तन एकदम साफ दिख रहे थे। मैंने पीछे से उसे पकड़कर उसके भरपूर जोबन कस-कस के दबाने शुरू कर दिये। पर वो भी कम नहीं थी।

थोड़ी देर में मेरे हाथ से मछली की तरह वो फिसल गयी और तैर कर सामने आ गयी। जब उसने मेरे सीने की ओर हाथ बढ़ाया, तो मैंने अपने दोनों उभारों को हाथ से छिपा लिया। पर मुझे क्या मालूम था कि उसका इरादा कुछ और है। उसने एक झटके में मेरे पेटीकोट का नाड़ा खींच लिया और जब तक मैं सम्हलूं, पानी के अंदर घुसकर उसने नीचे से उसे खींच लिया और यह जा वह जा। मैं भी उसके पीछे तैरी। 


थोड़ी देर मेरा पेटीकोट हाथ में लिये, वो मुझ चैलेंज करती रही पर जब मैं पास में पहुँची तो उसने उसे किनारे पर दूर फेंक दिया। 


पहली बार इस तरह खुले आसमान के नीचे, नदी में मैं पूरी तरह निर्वस्त्र तैर रही थी। नदी का पानी मेरे जोबन, जांघों के बीच सहला रहा था। जल्द ही मैंने उसे धर पकड़ा, पर पूरबी पहले से तैयार थी और उसने अपने साये का नाड़ा कस के पकड़ रखा था। काफी देर खींचातानी के बाद भी जब मैं उसका हाथ नहीं हटा पायी तो उसकी जांघों के बीच हाथ डालकर मैंने कसकर उसकी चूत को पकड़कर मसल दिया। 


अपने आप उसका हाथ नीचे चला आया और मैंने उसका नाड़ा खोलकर पेटीकोट खींच दिया। जब तक वह मुझे पकड़ती मैंने उसका पेटीकोट भी वहीं फेंक दिया, जहां मेरा पेटीकोट पड़ा था। 


अब हम दोनों एक जैसे थे।
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07-06-2018, 01:51 PM,
#29
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
पूरबी










अब पूरबी ने मुझे पकड़ने की कोशिश की तो मैं तैरकर किनारे की ओर बढ़ी, पर इस बार पूरबी ने मुझे जल्द ही पकड़ लिया (मैं शायद चाहती भी थी, पकड़वाना)। मैं हार मानकर खड़ी हो गयी। वहां पर पानी हमारे सीने के आस-पास था। 

पूरबी ने मुझे अपनी बांहों में भरकर, अपनी बड़ी-बड़ी चूंचियों से मेरी चूंचिया रगड़नी शुरू कर दीं। उसके हाथ मुझे कसकर जकड़े हुये थे और मैंने भी उसे पकड़ लिया था। चूचियों से चूचियां मसलते हुये पूरबी ने प्यार से मेरी ओर देखा और अचानक मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर कसकर एक चुम्मी ले ली। मेरी देह भी अब दहकने लगी थी और मैं भी अपनी चूचीं उसकी चूची पर दबा रही थी। 


पूरबी का एक हाथ सरक कर पानी के अंदर मेरे चूतड़ों तक पहुँचा और उसने उसे कसकर भींच लिया। उह्ह्ह मेरे मुँह से सिसकारी निकल गयी। अब उसकी चूत भी मेरी चूत दबा रही थी। धीरे-धीरे, उसने मेरी चूत पर अपनी चूत रगड़नी शुरू की और मेरा एक हाथ भी खींचकर अपनी चूची को रखकर दबवाने लगी। 


हम दोनों कसकर अपनी चूत एक दूसरे से रगड़ रहे थे, मैं उसकी पथरीली, कड़ी-कड़ी चूचियां अपने हाथे से सहला दबा रही थी और पूरबी का एक हाथ मेरे चूतड़ों को कसकर भींच रहा था। हम दोनों एकदम मस्त होकर आपा खो बैठे थे और किनारे के काफी पास पहुँच गये थे। 



वहां एक पत्थर सा निकला हुआ था, जिस पर पूरबी ने मुझे लिटा दिया। मेरी आँखें मुंदी जा रही थीं। पूरबी के एक हाथ ने मेरी चूत में उंगली डालकर मंथन करना शुरू कर दिया और दूसरा कस के मेरी चूची मसल रहा था और मेरे चूचुक को खींच रहा था।

मैंने भी पूरबी की चूत पानी के अंदर पकड़ ली और उसे रगड़ने मसलने लगी। अभी भी पानी हम दोनों की कमर से काफी ऊपर था। पूरबी की उंगली तेजी से मेरी चूत के अंदर-बाहर हो रही थी और अंगूठा मेरी क्लिट को रगड़ रहा था। मैं एकदम झड़ने के कगार पर पंहँच गयी थी। तभी जैसे किसी ने मेरे पैर पकड़ के पानी के अंदर खींच लिया। 





मैं एकदम डर गयी। मैंने सुन रखा था कि, पानी के अंदर कुछ… होते हैं जो सुंदर कन्याओं को पकड़ ले जाते हैं, लेकिन तभी उसने पीछे से मेरे किशोर उरोजों को पकड़ लिया, पहले मुझे लगा कि पूरबी है, पर वह तो सामने खड़ी हँस रही थी और अबतक मैं मर्दों का हाथ पहचानने भी लगी थी। 


दोनों जोबनों को कस के दबाते उसने पीछे से ही मेरे गालों पर खूब रसभरा कसकर चुम्बन ले लिया। उसका लण्ड भी एकदम खड़ा होकर मेरे चूतड़ों के बीच धंस रहा था। 


“हे कौन…” मैंने पीछे मुड़ने की कोशिश करते हुये पूछा। पर एक तो उसकी पकड़ बड़ी तगड़ी थी और दूसरे, अब उसने मेरी पीठ के पीछे अपना मुँह छिपा लिया था। 
पूरबी मुश्कुराती हुई बोली- “अरे तुम्हें लण्ड से मतलब या नाम से…” और उससे बोली- “ठीक है आ जाओ सामने…”
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07-06-2018, 01:51 PM,
#30
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
पूरबी के यार 








पूरबी मुश्कुराती हुई बोली- “अरे तुम्हें लण्ड से मतलब या नाम से…” और उससे बोली- “ठीक है आ जाओ सामने…” 


जब वह सामने निकला तो मैं उसे पहचान गयी, ये तो वही था, जो उसे दिन मेले में मेरी इतनी तारीफ कर रहा था और जिसके बारें में चम्पा ने बताया था कि वह पूरबी के ससुराल का यार है, गोरा, लंबा, ताकतवर, कसरती गठा बदन। 

“अपने आशिकों की लिस्ट में इसका भी नाम लिख लो, राजीव नाम है इसका…” हँसती हुई, पूरबी बोली। 

अब तक उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया था और कस-कस के चूम रहा था, उसकी चौड़ी छाती मेरे कड़े-कड़े उत्तेजित रसीले जोबनों को दबा रही थी, और उसका सख्त, कड़ा लण्ड मेरी चूत पे धक्का मार रहा था। अपने आप मेरी जांघें फैल गयीं। थोड़ी देर में मेरी बाहें भी उसी जोश से उसे पकड़े थीं और अब उसका एक हाथ कस-कस के मेरी चूचियों का रस ले रहा था और दूसरा मेरा चूतड़ नाप रहा था। 

पूरबी ने ही मुझे इतना गरम कर दिया था और फिर जब उसका लण्ड मेरी अब पूरी तरह गीली चूत को टक्कर मारता, तो बस यही मन कर रहा था कि अब ये कस के पकड़ के मुझे चोद दे। 

मन तो उसका भी यही कर रहा था। उसने मेरी टांगों को थोड़ा फैलाकर मेरी चूत में अपना लण्ड डालने की कोशिश की पर वह नहीं घुस पाया। इसके पहले मैंने कभी खड़े-खड़े नहीं चुदवाया था और फिर वह भी नदी के भीतर… उसकी कोशिश से लण्ड तो नहीं घुस पाया पर मैं और गरम हो गयी। 


पूरबी ने रास्ता सुझाया- “जरा और किनारे को चले आओ, यहां…” उसने उस पत्थर की ओर इशारा किया जिस पर लिटाकर वह कर रही थी। 


उसने वही किया और पत्थर पर मुझे पेट के बल लिटा दिया। मेरे कंधे के ऊपर पानी से बाहर था और बाकी सारा शरीर नदी के अंदर। पूरबी मेरा सर सहला रही थी। पीछे जाकर उसने मेरी जांघों को खूब चौड़ा करके फैला दिया और मेरी चूत में कस-कस के उंगली करने लगा, उसका दूसरा हाथ नदी के अंदर मेरी चूची मसल रहा था। मेरी हालत खराब हो रही थी। 


मैं खीझकर बोली- “हे करो ना… डालो… प्लीज… जल्दी… हां ऐसे ही… ओह… लगा रहा है… एक मिनट… बस…” 


मेरे बोलते-बोलते उसने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ के कस के अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दिया और चोदने लगा। मेरे चिल्लाने का उसके ऊपर कोई असर नहीं था और वह पागलों की तरह मुझे पूरी ताकत से चोद रहा था। और ऊपर से पूरबी, वह मेरे दोनों उरोजों को उससे भी कस के दबा, मसल रही थी और उसे उकसा रही थी- 



“हां राजीव रुकना नहीं पूरी ताकत से चोदो, फाड़ दो इसकी…” 


और राजीव का हाथ जैसे ही मेरी क्लिट पर पहुँचा मैं झड़ने लगी। पर राजीव रुका नहीं वह कभी मेरे चूतड़ पकड़कर, कभी कमर पकड़कर, कभी चूचियां दबाते, नदी के अंदर चोदता रहा, चोदता रहा और बहुत देर चोदने के बाद ही झड़ा। 


हम दोनों किनारे पे आकर बड़ी देर लेटे रहे। फिर अचानक मुझे याद आया कि अपनी साड़ी और चोली तो हम घाट पे ही छोड़ आये हैं। 


मैंने जब पूरबी से कहा तो वो हँसके बोली- ये तेरा आशिक किस दिन काम आयेगा। जैसे ही राजीव कपड़े लेने गया, पूरबी मुझे पटक के मेरे ऊपर चढ़ गयी और बोली- तूने तो मजा ले लिया पर मेरा क्या होगा… जो काम हम कर रहे थे, चलो उसे पूरा करते हैं…” 


उसके होंठों ने मेरी चूत को कस के भींच लिया था और वह उसे कस-कस के चूस रही थी। अपनी चूत भी वह मेरे मुँह पर रगड़ रगी थी। थोड़ी देर में उसकी तरह मैं भी चूत चूसने लगी। यह मेरी सिक्स्टी नाईन की पहली ट्रेनिंग थी। जब हम लोग झड़कर अलग हुए तो देखा कि राजीव हम दोनों के कपड़े लिये मुश्कुरा रहा है। पूरबी के कपड़े तो उसने दे दिये पर मेरे कपड़ों के लिये उसने मना कर दिया। 


जब मैंने पूरबी से बिनती की तो वो बोली- तेरे कपड़े हैं तू मना इसको या फिर वैसे ही घर चल। 


मैंने राजीव से कहा की- “मैं सिर्फ उससे ही नहीं बल्की आज के बाद अगर गांव में जो भी मुझसे मांगेगा, मैं मना नहीं करूंगी…” मेरे पास चारा क्या था। 


बड़ी मुश्किल से कपड़े मिले और उसपर से भी दुष्ट पूरबी ने जानबूझ कर मेरी चोली देते हुये नदी में गिरा दी। वह अच्छी तरह गीली हो गयी, और मुझे भीगा ब्लाउज पहनकर ही घर आना पड़ा। मेरी चूचियों से वह अच्छी तरह चिपका था और रास्ते में दो-चार लड़के गांव के मिल भी गये जो मेरी चूचियों को घूर रहे थे। 



पूरबी ने मुझे चिढ़ाया- “अरे दे दो ना जोबन का दान, सबसे बड़ा दान होता है ये…”
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