Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
01-07-2021, 01:25 PM,
#71
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
रूबी की नजरों के सामने रामू का टाइट लण्ड अंडरवेर के अंदर से साफ-साफ दिखाई देता है। इतने बड़े लण्ड को देखकर रूबी की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं।

राम समझ जाता है की रूबी उसके लण्ड की आउटलाइन देखकर थोड़ी सी घबरा गई है। उसे लगता है की रूबी ऐसी ही उसके लण्ड को अपने हाथ में नहीं लेगी। वो उसके साथ बेड पे बैठ जाता है और उसकी आँखों को चूम लेता है। रूबी का गला सूखने लगता है। रामू अब उसके होंठों पे अपने होंठ रख देता है। दोनों प्रेमी एक दूसरे के होंठों का रसपान करने लगते हैं। धीरे-धीरे रामू उसका हाथ अपने हाथ में लेकर अपने लण्ड पे ले जाता है। रूबी के कोमल हाथ का स्पर्श पाकर राम का लण्ड झटका मारता है। रूबी घबरा के अपना हाथ पीछे खींच लेती है। राम थोड़ी देर उसके होंठों का रसपान करने के बाद फिर से उसके हाथ को लण्ड पे रख देता है और अपने हाथ से उसके हाथ पर जकड़ बनाए रखता है।

रूबी वापिस हाथ खींचने की कोशिश करती है। पर रामू ऐसा नहीं होने देता। रामू उसके हाथ को पकड़कर अपने लण्ड पे घिसने लगता है। रूबी अपनी तरफ से कोई भी कोशिश नहीं करती उसके लण्ड को हाथ में पकड़ने की। पर कुछ टाइम के बाद उसके हाथ में लण्ड का स्पर्श उसे मदहोश करने लगता है। अपने पति के अलावा तो उसने कभी किसी लण्ड को छुआ नहीं था। राम के लण्ड के स्पर्श से उसके अंदर की औरत जाग उठी और वो अपने हाथ की उंगलियां उसके लण्ड पे टाइट कर लेती है।

रामू उसकी इस हरकत पे खुश हो जाता है और उसका हाथ पकड़कर लण्ड पे रगड़ने लगता है। धीरे-धीरे रूबी उससे खुलने लगती है। राम ठीक समय समझकर बेड से उठकर खड़ा हो जाता है। रामू आँखों-आँखों में रूबी को आगे बढ़ने का इशारा करता है। रूबी थोड़ा सा शर्माती है और राम उसका हाथ पकड़कर लण्ड पे रख देता है। धीरे-धीरे रूबी लण्ड को सहलाने लगती है और रामू उसका हाथ छोड़ देता है।

कुछ देर रूबी लण्ड को अंडरवेर के ऊपर से ही रगड़ती रहती है। रामू का लण्ड पूरी तरह से टाइट हो गया होता है, और वो रूबी को लण्ड अंडरवेर से बाहर निकालने को बोलता है। लेकिन रूबी जो की अभी भी शर्मा रही थी हिम्मत नहीं जुटा पाती।

रामू उसकी मानसिकता समझ जाता है। आखीरकार, अच्छे घर की औरत ऐसे कैसे इतनी जल्दी उसके साथ खुल सकती है। तो राम रूबी के हाथ को लण्ड से अलग करता है और अपनी अंडरवेर को धीरे-धीरे नीचे करता है। उसका लण्ड धीरे-धीरे रूबी के सामने आने लगता है।

लण्ड को देखकर रूबी की सांसें थम जाती हैं। उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है। बाप रे इतना बड़ा? राम तो सच बोल रहा था की उसका g" इंच का है। इसकी मोटाई रूबी की कलाई के बराबर होगी। राम लखविंदर के अलावा दूसरा मर्द था जिसका नंगा लण्ड रूबी अपनी आँखों से इतने करीब से देख रही थी। वो शर्मा जाती है और अपने चेहरे को हाथों में छिपा के बेड पे लेट जाती है।

राम धीरे-धीरे उसके पास जाकर बेड पे लेट जाता है। रूबी को राम के अपने पास आने का एहसास होता है और उसकी सांसें अटक जाती हैं। उसे यकीन नहीं हो रहा था की इतना बड़ा लण्ड भी हो सकता है। राम रूबी के कान के पास आ जाता है और बोलता है।

रामू- क्या हुआ रूबी जी अच्छा नहीं लगा क्या?

रूबी कुछ नहीं बोलती और अपने हाथों से चेहरे को और जोर से ढक लेती है।

राम- बताओ ना अच्छा नहीं लगा क्या? बेचारा आपका प्यार पाने के लिए तड़प रहा है।

जवाब नहीं देती और राम उसके एक हाथ को अपने हाथ में लेकर चूम लेता है। रूबी अपने चेहरे को दूसरी तरफ कर लेती है। रामू एक हाथ से उसके उभार के साथ खेलने लगता है और दूसरे हाथ से उसके । हाथ को थामे रखता है। राम के उभार से खेलने से रूबी को भी अच्छा लगना शुरू हो जाता है, और हल्की-हल्की सिसकियां लेनी शुरू कर देती है।
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01-07-2021, 01:25 PM,
#72
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
राम अच्छा मौका देखकर उसके हाथ को अपने टाइट लण्ड पे रख देता है और उसका हाथ थामे रहता है। नंगे लण्ड का स्पर्श पाते ही रूबी के जिश्म में करेंट सा दौड़ने लगता है और वो घबराहट में अपना हाथ पीछे खींचने की कोशिश करती है। पर राम उसके हाथ को थामे रहता है। जिससे रूबी अपने हाथ को छुड़ा नहीं पाती। राम रूबी के हाथ को अपने लण्ड के ऊपर-नीचे करता रहता है। धीरे-धीरे रूबी नार्मल होने लगती है और अपने हाथ को छुड़ाने की कोशिश बंद कर देती है।

कुछ देर बाद।

राम- रूबी जी कैसा लगा मेरा लण्ड?

रूबी कुछ नहीं बोलती।

राम- बताओ ना मेरी जान अच्छा लगा क्या?

रूबी- हाँ।

राम- “तो इसे प्यार करो ना.... और यह कहते ही राम उसकी उंगलियों का घेरा अपने लण्ड पे बना देता है और उसको लण्ड के ऊपर-नीचे करने लगता है।

इतने मोटा लण्ड पे बड़ी मुश्किल से ही रूबी की उंगलियां घेरा बना पा रही थी। रूबी चकित थी की लखविंदर के लण्ड को तो वो आसानी से पकड़ लेती थी। पर राम का बड़ी ही मुश्किल से पकड़ पा रही थी। लखविंदर के लण्ड से इसकी डबल साइज की मोटाई थी। धीरे-धीरे राम के लण्ड का जादू रूबी पे चढ़ने लगा था। अब रूबी खुद ही लण्ड को पकड़े ऊपर-नीचे करने लगी थी।

रामू ने उसका हाथ भी छोड़ दिया था और मजे से लण्ड रगड़वा रहा था। अब रामू खुद नीचे लेट जाता है और रूबी को अपने ऊपर कर लेता है। रूबी अपना सिर रामू की छाती पे रख देती है और टेढ़ी सी बेड पे लेट जाती है। अब वो रामू के लण्ड को देखते हुए उसे रगड़ने लगती है।

रूबी के गोरे नरम हाथों में गरम लण्ड पूरी तरह सखत हो चुका था। रामू के जिश्म में अकड़न सी आनी शुरू हो जाती है। वो रूबी को थोड़ा ऊपर करता है और उसके होंठों का रसपान करने लगता है। इधर रूबी की शर्म पूरी तरह खतम हो जाती है और वो अपने नरम मुलायम हाथों से रामू के लण्ड को अपना पूरा प्यार देती है। रूबी का मन पूरी तरह लण्ड पे आ चुका था। लण्ड को मसलते-मसलते वो सोचती है की इतना बड़ा लण्ड उसकी छोटी सी चूत कैसे झेल पाएगी? रूबी अब अपनी आँखें लण्ड से बिल्कुल भी नहीं हटा पा रही थी, मानो लण्ड ने उसे अपने वश में कर रखा हो। रूबी के अंदर दुबारा से उत्तेजना बढ़ने लगती है।

रामू अपना एक हाथ उसकी कमर के पीछे ले जाता है और लेगिंग के अंदर उसकी पैंटी के ऊपर से उसके चूतरों से खेलने लगता है। रूबी का ध्यान पूरा लण्ड की तरफ था। जब वो लण्ड को दबाए अपना हाथ नीचे करती है तो लण्ड का सुपाड़ा पूरा बाहर आ जाता है।

इधर रामू एक हाथ उसकी पैंटी के अंदर लेजाकर उसके नंगे चूतरों पे फिराने लगता है, और दूसरे हाथ से उसके उभारों को मसलने लगता है।

रूबी स्वर्ग की सैर पे दुबारा निकल जाती है। रूबी की चूत दुबारा से गीली हो जाती है, और रामू अपनी उंगली को रूबी के चूतरों की दरारर के बीच में घुसा देता है और उंगली को आगे-पीछे करने लगता है, मानो जैसे कुछ ढूँढ़ रहा हो। तभी उसकी उंगली रूबी की गाण्ड के छेद पे टिक जाती है और राम थोड़ा सा दबाव बनाकर उंगली को गाण्ड के छेद में डाल देता है।

रूबी- “राम्मू उम्म... आहह.."

रामू- कैसा लग रहा है मेरी जान?

रूबी- “आह्ह.. बहुत अच्छा मेरे राजा..."

पहली बार रूबी की गाण्ड के अंदर कोई चीज बाहर से प्रवेश कर रही थी। ऐसा अनुभव तो रूबी को पहले कभी था। वो अपने आपको रोक नहीं पाती और अपने होश में नहीं रहती और मदहोशी के आलम में अपनी कमर को आगे-पीछे करने लगती है। उसके आगे-पीछे करने से राम की उंगली उसकी गाण्ड के छेद में और भीतर तक घुस जाती है। इस मदहोशी में रूबी रामू के लण्ड को और जोर से हाथ में पकड़ लेती है और तेजी से मसलने लगती है।
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01-07-2021, 01:25 PM,
#73
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
रूबी स्वर्ग की सैर पे दुबारा निकल जाती है। रूबी की चूत दुबारा से गीली हो जाती है, और रामू अपनी उंगली को रूबी के चूतरों की दरारर के बीच में घुसा देता है और उंगली को आगे-पीछे करने लगता है, मानो जैसे कुछ ढूँढ़ रहा हो। तभी उसकी उंगली रूबी की गाण्ड के छेद पे टिक जाती है और राम थोड़ा सा दबाव बनाकर उंगली को गाण्ड के छेद में डाल देता है।

रूबी- “राम्मू उम्म... आहह.."

रामू- कैसा लग रहा है मेरी जान?

रूबी- “आह्ह.. बहुत अच्छा मेरे राजा..."

पहली बार रूबी की गाण्ड के अंदर कोई चीज बाहर से प्रवेश कर रही थी। ऐसा अनुभव तो रूबी को पहले कभी था। वो अपने आपको रोक नहीं पाती और अपने होश में नहीं रहती और मदहोशी के आलम में अपनी कमर को आगे-पीछे करने लगती है। उसके आगे-पीछे करने से राम की उंगली उसकी गाण्ड के छेद में और भीतर तक घुस जाती है। इस मदहोशी में रूबी रामू के लण्ड को और जोर से हाथ में पकड़ लेती है और तेजी से मसलने लगती है।

रामू की हालत भी इधर बुरी थी। बड़ी मुश्किल से वो अपने ऊपर कंट्रोल कर पाता है। रूबी अपनी गाण्ड को और तेजी से आगे-पीछे करने लगती है और जोर-जोर से आहें भरने लगती है।

रूबी- “आहह... आऽऽ उफफ्फ... मर जाऊँगी राजा उफफ्फ... मेरी जान... मर गई मैं तो... ले लो मेरी राम उफफ्फ... ओहह..."

उसकी आंहों से पूरा कमरा भर जाता है, और जल्दी ही उसकी चूत का रस उसका साथ छोड़ देता है। आज वो पहली बार एक दिन में इतने कम टाइम में दो बार झड़ी थी। थक कर चूर हुई रूबी रामू के लण्ड को मसलना भी भूल जाती है। वो बस रामू के चेहरे को देखती रहती है।

रामू नीचे झुक कर उसके होंठों पे किस करता है और पूछता है- “कैसा लग रहा है मेरी जान?”

रूबी- “आई लोव यू राम..” और रामू के होंठों पे अपने होंठ रख देती है।

राम- "आपकी सिसकियों से तो पूरा कमरा भर गया था। मुझे तो डर था की कही मालेकिन बाहर बैठी ना सुन लें.." और रामू रूबी की गाण्ड में पेली हुई उंगली को अपने होंठों में लेकर चूसता है।

रूबी शर्म से अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती है।

रामू उसके पास आता है और कहता है- “मेरी जान मुझे तो पूरा कर दो..."

रूबी को तब याद आता है की राम तो अभी तक झड़ा ही नहीं है। कोई और होता तो अभी तक झड़कर थक गया होता। पर रामू का लण्ड अभी तक सख्त था। उसे लगता है की अब उसे शर्म छोड़ देनी चाहिए। रामू ने आज उसे दो बार चरमसुख दिया था। अब तो रामू का साथ देना चाहिए और उसे भी शांत करना चाहिए। वो रामू का लण्ड पकड़ती है और उसे मसलने लगती है। कुछ देर बाद।

रामू- मेरी जान मुँह में लो ना?

रूबी शर्माकर मना कर देती है।

रामू- प्लीज करो ना... तुम्हारे रसीले होंठों का प्यार पाने को तड़प रहा है।

रूबी फिर से मना कर देती है और अपने हाथों की रफ्तार बनाए रखती है। राम के बार-बार फोर्स करने पे भी भी नहीं मानती।

इधर रामू का बुरा हाल हो रहा था। वो झड़ने की कगार पे पहुँच चुका था। वो रूबी को पकड़कर नीचे लेटाता है

और खुद उसके ऊपर आकर उसके उभारों के बीच में लण्ड रखकर रगड़ने लगता है। रूबी के हाथों को पकड़कर उसके उभारों पे रखकर दबाता है, जिससे उसके लण्ड को ज्यादा घर्षण मिल सके। रूबी आँखें बंद किए उसका पूरा साथ देती है और खुद ही अपने हाथों से अपने उभारों को आपस में चिपका देती है। रामू चरमसुख की ओर बढ़ रहा था और और अपनी कमर हिला-हिलाकर रूबी के उभारों को चोदने लगता है।

तभी रूबी के फोन की रिंग होने लगती है। दोनों चौंक पड़ते हैं। रूबी आँखें खोलकर रामू की तरफ देखती है और पाती है की रामू तो अपनी ही दुनियां में खोया हुआ है। उसे तो बस अपना वीर्य निकालने से मतलब था। रूबी का दिल भी रामू को बीच में छोड़कर फोन उठाने को नहीं करता। रामू आँखें बंद किए हुये रूबी को चोदने की कल्पना करता है। उसके चेहरे पे टाइटनेस आ जाती है और तभी उसका वीर्य निकलने लगता है।
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01-07-2021, 01:25 PM,
#74
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
रामू धीरे-धीरे अपनी सांसें कंट्रोल में करता है। उसके वीर्य से रूबी की गर्दन और बेडशीट दोनों भीग गये थे। रामू के पूरी तरह शांत होने के बाद रूबी उठती है और अपने को बाथरूम में बंद कर लेती है और गरम पानी से नहाने लगती है।

इधर रामू अपने कपड़े पहनता है और सफाई वगैरा करने लगता है। उनपे कोई शक ना करे इसलिए वो काकरोच स्प्रे भी कर देता है। कुछ देर बाद रूबी बाथरूम से बाहर आती है और फोन चेक करती है और देखती है की लखविंदर का फोन आया था।

रूबी काल बैक करती है और लखविंदर से बातें करने लगती है।

इधर हरदयाल भी वापिस आ जाता है ट्रैक्टर लेकर। राम को मजबूरन काम खतम करने के बाद अपने रूम में जाना पड़ता है। उसे लगता है की आज जिस हिसाब से रूबी गरम हो गई थी और जैसे उसके लण्ड को प्यार दे रही थी, अगर कमलजीत ना होती तो चुदवा ही लेती।

रामू की किश्मत फूटी थी जो लखविंदर का फोन आ गया बीच में, और रूबी वापिस अपने होशो-हवास में वापिस आ गई और उधर से हरदयाल भी तो वापिस आ ही गया था। पर राम इस बात से खुश था की रूबी ने आज उसके लण्ड के दीदार कर लिए थे। इतना तो पक्का था की रूबी अपने दिल से उसके लण्ड को नहीं निकाल पाएगी। उसकी चूत उसका तगड़ा मोटा लण्ड लेने के लिए तड़पेगी जरूर। बस एक मौका मिल जाए जब रूबी अकेली हो घर पे। उसे चाहे जोर जबरदस्ती करनी पड़े वो उसे भोग के ही रहेगा। वैसे भी अब तो रूबी भी खुल चुकी थी उसके साथ, और उसे भोगने में ज्यादा परेशानी नहीं होने वाली थी। बस जैसे तैसे करके उन दोनों को अकेलापन मिल जाए घर में।

इधर रूबी भी पूरा दिन रामू के बारे में सोचती रही। बार-बार उसकी आँखों के सामने रामू का मोटा लंबा लण्ड आ जाता था। जब भी वो राम के लण्ड के बारे में सोचती तो उसके शरीर में कंपकंपी सी छट जाती थी। राम के लण्ड ने उसपे जादू कर दिया था। क्या वो इतना मोटा और लंबा लण्ड झेल भी पाएगी? जब उसने पहली बार लखविंदर का लिया था तो उसे बहुत दर्द हुई थी। पर रामू का तो लखविंदर से तकरीबन दोगुना बड़ा और मोटाई में उसकी कलाई के बराबर था।

रूबी की चूत तो लण्ड लेने के लिए तड़प रही थी पर लण्ड का साइज सोचकर रूबी का दिल बैठा जा रहा था। ऊपर से रूबी यह सोचकर चकित थी की राम का लण्ड वो कितनी देर मसलती रही, पर फिर भी उसे शांत नहीं कर पाई। रामू को खुद कंट्रोल लेना पड़ा अपने हाथ में तब जाकर शांत हुआ। लखविंदर के लण्ड को जब भी । उसने मसला था तो एक मिनट के बाद ही लखविंदर उसके हाथ से लण्ड को छुड़ा लेता था की कही वो झड़ ना जाए। पर राम तो जैसे पक्का खिलाड़ी हो। रूबी चाह कर भी राम के लण्ड से अपना ध्यान हटा नहीं पा रही थी। इसी कशमकश में आज रूबी ने खुद ही रात को खाना खाने के बाद रामू को फोन लगा दिया।

उसे पता था की रूबी आज के बाद खुद को रोक नहीं पाएगी। उसके लण्ड की तो औरतें दीवानी थीं तो रूबी भी कहां रोक सकती थी अपने आपको।

रामू फोन उठकर कहता है- "हाय मेरी जान। आज खुद ही फोन कर लिया."

रूबी- बड़े मूड में हो।

रामू- अरे तुम्हारी आवाज सुनकर मूड खुद ही बन जाता है। और सुनाओ कैसे याद किया?

रूबी- बस वैसे ही। क्यों कर नहीं सकती?

राम- अरे क्यों नहीं मेरी परी। मैं भी तो तुम्हें ही याद कर रहा था की कब फोन आए और बात करें।

रूबी- तुम्हें क्यों लगा मैं फोन करूंगी?

रामू- बस आज दिल ने कहा के आप फोन करोगे।

रूबी- हाँ।

रामू- और सुनाओ दिन कैसा गुजरा?

रूबी- बस ठीक था... और तुम्हारा?

रामू- मेरा तो बहुत बुरा।

रूबी- क्यों?

राम- बस आपके बारे में हो सोचता रहा सारा दिन।

रूबी- अच्छा जी। क्या सोचते रहे?

राम- बस आपकी आँखें, आपका चेहरा, आपके होंठ और आपकी चूत।

रूबी- धत्... बेशर्म।

रामू- अरे मेरी जान अभी भी शर्मा रही हो। चूत में उंगली डलवाकर पानी भी निकाल दिया, अब काहे की शर्म?
वो तो तुम जबरदस्ती करते हो। वर्ना ऐसी थोड़ी कोई हमें वहां पे छू सकता है।

राम- हाँ यह बात तो माननी पड़ेगी की मेरी जान की इजाजत के बिना कोई उसको छु भी नहीं सकता।

रूबी- हाँ।

रामू- कैसा लगा आज? मजा आया ना?

रूबी- हाँ।

रामू- आपने भी मुझे बहुत मजा दिया। आपके हाथों में तो जादू है।
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01-07-2021, 01:26 PM,
#75
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
राम- हाँ यह बात तो माननी पड़ेगी की मेरी जान की इजाजत के बिना कोई उसको छु भी नहीं सकता।

रूबी- हाँ।

रामू- कैसा लगा आज? मजा आया ना?

रूबी- हाँ।

रामू- आपने भी मुझे बहुत मजा दिया। आपके हाथों में तो जादू है।

रूबी शर्माते हुए- “ऐसा क्या जादू है?"

रामू- सच में मेरी जान। तुम्हारे हाथों में तो जादू है। कसम से मैंने इतनी लड़कियों को चोदा है पर मुझे कभी लण्ड इतना सख्त नहीं लगा जितना आपके हाथों में लगा।

रूबी- अच्छा जी।

रामू- हाँ। मेरी तो जान ही निकाल दी अपने। इतने मुलायम हाथ लण्ड को रगड़ रहे थे की मैं तो स्वर्ग में था मानो। अगर आप अपने होंठों का प्यार दे देती तो सोने पे सुहागे वाली बात हो जाती।

रूबी- नहीं जी, वो नहीं हो सकता।

रामू- क्यों?

रूबी- बड़ा है काफी।

रामू रूबी के मुँह से अपने लण्ड की तारीफ सुनकर खुश हो जाता है। रूबी भी आज ज्यादा खुलकर बातें कर रही थी। रामू ने कहा- “मैंने तो पहले ही बोला था की मेरा लण्ड बड़ा है आपके पति से.."

रूबी- तुम झड़े क्यों नहीं?

राम- झड़ तो गया था मेरी जान।

रूबी- नहीं, मेरा मतलब... जब मैं तुम्हारे उसको मसल रही थी तब?

*****
*****
राम शरारत के अंदाज में- “किसको?"

रूबी- तुम्हारे उसको ही।

राम- किसको यार, बताओ ना।

रूबी- तुम्हें पता है... फिर भी जानबूझ कर मेरे से कहलवाना चाहते हो।

रामू- तो बोल दो ना किसको?

रूबी- नहीं, हमें शर्म आती है।

राम- अरे मेरी रानी हाथ में भी पकड़ लिया। मसल भी दिया और नाम लेने से झिझक कैसी? अब बोलो ना... मेरे कान तरस गये हैं तुम्हारे होंठों से सुनने के लिए।

रूबी- तुम नहीं मनोगे। बड़े जिद्दी हो।

रामू- मेरी जान बोलो ना किसको?

रूबी- तुम्हारे ल-ण-ड को।

रामू- आए हाए मेरी रानी। तुम्हारे मुँह से यह शब्द सुनकर मेरा लण्ड टाइट हो गया है। मुआअहह... अब बताओ क्या पूछ रही थी?

रूबी- मैं यह पूछ रही थी की तुम्हारा वो झड़ा नहीं, जब मैं मसल रही थी?

रामू- प्लीज... उसका नाम लेकर बात करो ना?

रूबी- उफफ्फ.. तुम्हारा लण्ड क्यों नहीं झड़ा, जब मैं मसल रही थी? इतनी देर मसला था पर नहीं झड़ा।

रामू- तो क्या लखविंदर का झड़ जाता है इतनी जल्दी?

रूबी- नहीं। पर वो तो एक आधा मिनट ही करने देते हैं, और फिर हाथ से अलग कर देते हैं।

राम- अरे मेरी जान... मालिक अभी कच्चे है काम क्रीड़ा में।।

रूबी- मतलब?

राम- अरे मेरी परी। मर्द के सेक्स की ताकत उसके लण्ड में तो होती ही है, पर उससे ज्यादा उसके दिमाग में होती है।

रूबी- मतलब?

रामू- हमारे बुजुर्ग बोल गये हैं की जिस मर्द ने अपने दिमाग पे काबू रखा, वो औरत को जीत पाता है।

रूबी- मैं समझी नहीं।
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01-07-2021, 01:27 PM,
#76
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
राम- देखो। ज्यादातर औरत मर्द सोचते हैं की मर्दानगी लण्ड में होती है। पर असल में ऐसा नहीं होता।

रूबी की उत्सुकता बढ़ जाती है- “तो फिर क्या होता है?"

राम- चुदाई के समय मर्द चुदाई के टाइम को अपने दिमाग की ताकत से बढ़ा सकता है। अगर वो अपना दिमाग शांत और काबू में रखता है तो मनचाहा समय निकाल सकता है। अगर वो ऐसा नहीं कर सकता तो जल्दी झड़ जाता है। जिससे औरत चरमसुख नहीं ले पाती। अब जो मेरे गाँव में औरतें है उनको लगता है की मेरा लण्ड मोटा और तगड़ा है, इसलिए मैं उनको चरमसुख दे पाता हूँ। पर असल में मैं अपने दिमाग को शांत और काबू में रखता हूँ। इसलिए उनको यौन सुख दे पाता हूँ।

रूबी- ऐसा होता है क्या?

रामू- हाँ मेरी जान।

रूबी- तुम तो बड़े ज्ञानी प्रतीत होते हो।

राम- अभी तो आपको मेरी बातों से ही ज्ञान दिखाई दे रहा है। एक बार आप मेरे नीचे लेट जाओ और चूत में लण्ड डलवा लो, तब आप मेरी बातों का असली समझ पाओगी। तब आपको पता चलेगा की औरत होने का एहसास क्या होता है?

रूबी- हाँ।

रामू- बताओ ना हम कब मिलेंगे? अब तो कल के बाद से मौका भी नहीं मिलेगा।

रूबी- पता नहीं?

रामू- कुछ तो करना पड़ेगा।

रूबी- क्या कर सकते हैं?

रामू- कुछ भी। किसी तरीके से हम अकेले हों जब। सच में मेरे से नहीं रहा जा रहा। मेरा दिल आपको अपनी बाहों में लेकर बेहद प्रेम करने को कर रहा है। दिल करता है की आपको पूरी जिंदी चोदता रहूँ।

रूबी शर्माते हुए- “धत्..."

रामू- धत् क्या। क्या आपका नहीं करता क्या?

रूबी- नहीं।

राम- झूठ। आप हमसे प्यार नहीं करते क्या?

रूबी- नहीं तो।

रामू- रूबी जी झूठ बोलना तो कोई आपसे सीखे।

रूबी- मैं क्यों झूठ बोलूंगी?
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01-07-2021, 01:28 PM,
#77
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
रामू- आज आप जब चरमसुख की ओर बढ़ रहे थे तो खुद ही मुझे आई लोव यू बोला था।

रूबी- नहीं ऐसा नहीं बोला होगा।

रामू- मैं झूठ नहीं बोलता। आप तो होश में ही नहीं थे। बस अपनी कामवासना में तड़पते हुए बोल दिया। आपको पता है आपकी सिसकियों से पूरा कमरा गूंजने लगा था। मुझे तो डर था कही मालेकिन सुन ना लें।

रूबी चकित होते हुए- “मुझे सच में कोई खबर नहीं थी। ऐसा क्या?"

रामू- सच में। आपकी कसम। बताओ ना हमसे प्यार नहीं करते?

रूबी शर्मा जाती है और कुछ नहीं बोलती। रामू के बार-बार मिन्नत करने पे उसको हार माननी पड़ती है, और कहती है- “ठीक है बाबा करते हैं.."

रामू- क्या करते हैं?

रूबी- रामू, तुम बहुत शैतान हो। जिस चीज के पीछे पड़ जाते हो उसको मना के ही छोड़ते हो।

रामू- हाँ वो तो है। बताओ ना क्या करते हो?

रूबी- प्रेम।

राम- पूरा बोलो ना?

रूबी शर्माते हुए- "हम तुमसे प्रेम करते हैं। बस अब खुश?"

रामू हँसते हुए- “और हमारे लण्ड को?"

रूबी- उसको क्या?

राम- उसको नहीं करते प्रेम?

रूबी- "करते हैं बस..” और हँस पड़ती है।

रामू को यकीन हो जाता है की रूबी अब चुदवाने के लिए तैयार है। बस अब इंतेजार करना होगा की कब वो अकेली हो घर पे। नहीं तो कोई योजना बनानी पड़ेगी उसको अकेली करने लिए।

रामू- तो फिर इन दोनों प्रेम करने वालों का अपनी अंतिम मंजिल कब मिलेगी?

रूबी- पता नहीं राम्।

रामू- रूबी जी। सच में मेरा बहुत बुरा हाल हो रहा है। मैं आपको पाना चाहता हूँ। क्या मेरी यह हसरत इस जनम में आप पूरी नहीं करोगी?

रूबी- मैं क्या कर सकती हँ? घर पे मम्मीजी होते हैं।

रामू- तो क्या मैं आपको बिना पाए इस दुनियां से चला जाऊँगा?

रूबी- शट-अप रामू... जाने की बात मत करो।

रामू- मेरी कसम खाकर बताओ आपका दिल नहीं कर रहा मिलन के लिए?

रूबी- हाँ शायद।

रामू- शायद नहीं? सच में बताओ। दिल करता है ना?

रूबी- हाँ। राम- तो फिर कब तक हम तड़पेंगे ऐसे ही?

रूबी- पता नहीं। मेरे पास इस सवाल का जवाब नहीं है राम्।

राम- आपको एक बात बताऊँ?

रूबी- हाँ।

रामू- मैंने अभी ताक आपको वो बात नहीं बताई थी?

रूबी- क्या?

रामू- मैंने आपको रात के टाइम अपनी चूत रगड़ते तकिये के साथ देखा है।

रूबी चकित होकर- “क्या? कैसे? कब?"

राम- बस कुछ दिन पहले देखा था। तब समझ गया था की आप अपनी वासना की आग में तड़प रहे हो।

रूबी- पर कैसे?

रामू- अरे मेरी जान तुम्हारी खिड़की का पर्दा पूरी तरह खिड़की को ढकता नहीं है, थोड़ा सा पीछे रह जाता है। मैंने उसी से ही देखा था।
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01-07-2021, 01:28 PM,
#78
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
रूबी पर्दे की तरफ देखती है तो सच में वो पूरी तरह खिड़की को ढक नहीं पा रहा था। उसकी बस थोड़ी सी अड्जस्टमेंट करनी पड़नी थी।

रामू- मैंने तुम्हारे नंगे चूतरों को धीमी सी रोशनी में देखा है। बस तब से तुम्हारे चूतरों को देखना चाहता हूँ वो बिल्कुल पास से।

रूबी शर्मा जाती है यह सोचकर की राम ने पास से ना सही, पर डिम लाइट में तो उसके नंगे चूतरों के दीदार कर लिए हैं।

रूबी हँस पड़ती है- "तुम बहुत गंदे हो रामू, जो मेरे कमरे में चोरी-चोरी देखते हो। तुमको शर्म नहीं आती क्या?"

राम- आपसे कैसी शर्म?

दोनों काफी देर तक बातें करते रहते हैं और फिर सो जाते हैं। रूबी जब भी आँख बंद करने की कोशिश करती है, उसके सामने रामू का टाइट लण्ड आ जाता है। हालांकी वो खुद चुदवाना चाहती थी, पर इतना मोटा लण्ड लेने के ख्याल से घबरा जाती है। बड़ी ही मुश्किल से उसको नींद आती है।

उस दिन से रूबी रामू के साथ फोन पे काफी खुल बातें करने लगी थी। अब उन दोनों की प्रेमी प्रेमिका की तरह बातें होती थी और रूबी की शर्म भी काफी हद तक खतम हो गई थी। इधर रामू बस इंतेजार करने लगा की कब उन दोनों को अकेले में टाइम मिल पाए। कुछ दिन गुजरते गये। रूबी और रामू दोनों मिलने के लिए तड़प रहे थे। रूबी के दिल दिमाग दोनों पे बस रामू ही छाया हुआ था। उधर रामू भी किसी तरह दिन काट रहा था। दोनों की नजरें एक दूसरे को ढूँढ़ती रहती थी। फोन पे दोनों रोज ही बात करते थे। लेकिन मिलने का कोई प्लान नहीं बन पा रहा था।

पर एक दिन कुछ ऐसा हआ मानो कदरत खद उन दोनों प्रेम करने वालों का साथ दे रही हो। पड़ोस के गाँव से हरदयाल के दोस्त की रिटायमेंट फंक्सन का इन्विटेशन आ जाता है। हरदयाल का दोस्त खुद पूरी परिवार को इन्वाइट करने घर पे आता है, और उन्हें अगले मंडे घर पे फंक्सन अटेंड करने को बोलता है।

हरदयाल उसके फंक्सन में आने का वादा करता है और रूबी और कमलजीत को फंक्सन के लिए तैयार रहने को कहता है। बातों बातों में रूबी को पता चलता है की वो आदमी हरदयाल का खास दोस्त है और पास के गाँव का है। रात को राम के साथ बातें करते-करते रूबी उसे बताती है की अगले मंडे वो सभी पास के गाँव में फंक्सन अटेंड करने के लिए जा रहे हैं।

राम- तो क्या आप भी जा रही हो?

रूबी- हाँ। पापा का खास दोस्त है, सभी को इन्वाइट किया है।

राम- रूबी जी आप मत जाओ ना।

रूबी- पर मैं कैसे मना करूं| मझे तो पापा ने खुद बोला है चलने को।

राम- इतने टाइम से मिले नहीं हैं हम। आप कोई बहाना बना दो उस दिन।

रूबी जो खुद राम से मिलने के लिए तड़प रही थी उसे समझ में नहीं आता की वो क्या बहाना बनाए।

रामू- फिर दुबारा पता नहीं कब टाइम मिलेगा? आपको कुछ करना होगा।

रूबी- पता नहीं, देखते हैं।

राम अपनी कसमें रूबी को देता है और उससे वादा लेता है की उस दिन वो कोई ना कोई बहाना बनाकर घर पे ही रुक जाएगी। दोनों कुछ देर और बातें करते हैं। इधर रामू डिसाइड करता है की वो अब अपने लण्ड का वीर्य नहीं निकालेगा और उसे रूबी के लिए संभाल के रखेगा, और उन दोनों के पहले मिलन पे रूबी की चूत में अपना गाढ़ा वीर्य डालेगा।
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01-07-2021, 01:28 PM,
#79
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
राम अपनी कसमें रूबी को देता है और उससे वादा लेता है की उस दिन वो कोई ना कोई बहाना बनाकर घर पे ही रुक जाएगी। दोनों कुछ देर और बातें करते हैं। इधर रामू डिसाइड करता है की वो अब अपने लण्ड का वीर्य नहीं निकालेगा और उसे रूबी के लिए संभाल के रखेगा, और उन दोनों के पहले मिलन पे रूबी की चूत में अपना गाढ़ा वीर्य डालेगा।

आखीरकार, फंक्सन का दिन आ जाता है। सभी खाना वगेरा खाते है सुबह का, और रूबी ऐसे शो करती है जैसे वो बीमार हो।

कमलजीत- क्या हुआ बहू, थकी-थकी सी लग रही हो?

रूबी- मम्मीजी पता नहीं सुबह से सेहत ठीक नहीं है। सिर भी दर्द कर रहा है। शायद सर्दी लग गई है।

कमलजीत- हाँ हो सकता है। तुम मेडिसिन वगैरा ले लो, फंक्सन में भी जाना है।

रूबी- पता नहीं मम्मीजी। दिल नहीं कर रहा है। रेस्ट करने को दिल कर रहा है।

कमलजीत- तो तुम नहीं जाना चाहती? अंकल इतने प्यार से सभी को इन्वाइट करके गये थे।

रूबी- हाँ वो तो है। जाना तो चाहती हूँ। पर सेहत ठीक नहीं लग रही।

हरदयाल- अरे बहू कोई बात नहीं। तुम आराम करो। हम दोनों चले जाएंगे। तुम्हारे अंकल को बोल देंगे की सेहत ठीक नहीं थी बहू की।

रूबी- ठीक है पापाजी। आप किस टाइम जा रहे हो?

हरदयाल- बस 11:00 बजे निकलेंगे और दोपहर का खाना खाने के बाद वापिस आ जाएंगे तकरीबन 3 बजे।

रूबी- ठीक है पापा। मैं रेस्ट कर लेती हूँ।

कमलजीत- ठीक है बहू। जाने के टाइम मैं तुम्हें बता दूंगी और तुम घर के दरवाजे अंदर से लाक कर लेना।

रूबी- “ठीक है मम्मीजी..."

यह कहकर रूबी अपने कमरे में आ जाती है। उसकी हिम्मत नहीं पड़ती की वो राम को इसके बारे में बताए। उसे शर्म आ रही थी की वो कैसे राम को यह बात बताकर इन्वाइट करे। इधर राम बेसब्री से रूबी के फोन का इंतेजार करता है। पर रूबी का फोन नहीं आता। वो काल भी करता है पर रूबी हिम्मत नहीं जुटा पाती फोन पिक करने की लिए। वो सोच रही थी क्या सचमुच आज वो रामू से समागम कर लेगी?

इधर रामू रूबी से बात नहीं होने पे निराश हो जाता है। उसका ध्यान काम पे नहीं लगता। 11:00 बजे के टाइम पे राम् देखता है की हरदयाल और कमलजीत गाड़ी की तरफ बढ़ते हैं पर रूबी उनके साथ नहीं है। इसका मतलब क्या रूबी ने बहाना बना दिया कोई? रामू के मन में खुशी के लहर दौड़ जाती है। वो दोनों के घर से निकलने का इंतेजार करता है और उसे यह समय गुजरता महसूस नहीं होता।
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01-07-2021, 01:28 PM,
#80
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
तभी हरदयाल और कमलजीत मेनगेट से होते हुए बाहर निकल जाते हैं। गाड़ी की आवाज धीरे-धीरे कम होने लगती है। रामू सारे काम छोड़कर अंदर रूबी के कमरे में प ता है, और रूबी को अपने बेड पे बैठा पाता है। दोनों की नजरें मिलती हैं। रूबी का दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है। क्या आज वो दिन है जब वो सचमुच अपने आपको राम को समर्पित कर देगी?

रामू उसके पास जाकर बैठ जाता है। रूबी थोड़ा सा सिकड़ जाती है। उसका दिल घबरा रहा था। ना जाने क्या होने वाला था? राम की नजरों में उसे अपने लिए वासना नजर आती है। दोनों में कोई बात नहीं होती, मानो दोनों जानते थे की क्या करना है या क्या होने वाला है। राम रूबी के हाथ को अपने हाथ में लेता है और उसको चूम लेता है। रूबी डर कर हाथ छुड़ा लेती है।

रामू- क्या हुआ रूबी जी?

रूबी कुछ नहीं बोलती और रामू दोबारा से उसका हाथ पकड़कर चूम लेता है। उसे लगता है की रूबी थोड़ा सा झिझक रही है, और उसे खुद ही कमान अपने हाथ में लेनी होगी। वो अब रूबी के चेहरे को अपने हाथों में लेता है और रूबी के आकर्षक चेहरे का जायजा लेता है।

राम- “रूबी जी आपकी आँखें कितनी खूबसूरत हैं। दिल करता है सिर्फ मुझे ही देखती रहें..." और वो आगे बढ़कर उसकी दोनों आँखों का बारी-बारी से चुंबन लेता है। उसके बाद वो रूबी के माथे का चुंबन लेता है और फिर धीरे धीरे रूबी के होंठों को चूम लेता है। कुछ देर वो अपने होंठों को बिना कोई हरकत किए रूबी के नरम गुलाबी होंठों से चिपकाए रहता है।

रूबी अपने हाथों से हल्का सा जोर लगाकर उसके हाथों को अपने चेहरे से अलग करने की कोशिश करती है। पर उसकी कोशिश में कोई जान नहीं थी। फिर कुछ देर बाद धीरे-धीरे रामू रूबी के रसीले होंठों को चूसने लगता है। रूबी अभी तक कोई जवाब नहीं देती। रामू सोचता है की शायद उसके होंठ चूसने से रूबी उसका साथ देना शुरू कर देगी, पर ऐसा कुछ नहीं होता। रामू को समझ नहीं लगती की रूबी जवाब क्यों नहीं दे रही। रामू कुछ देर रूबी के होंठ चूसने के बाद उसको अपने से अलग करता है और रूबी की तरफ देखने लगता है।

रामू- रूबी जी क्या?

रूबी नजरें झुकाए हुए- “कुछ नहीं..."

रामू- आप खुश नहीं हो क्या मुझे यहाँ पे देखकर?

रूबी- नहीं ऐसी बात नहीं है?

रामू- तो क्या बात है? इतने मुश्किल से हमें टाइम मिला है मिलने का, और लगता है कि आप खुश नहीं हो।

आपको मेरी कसम बताओ क्या बात है?

रूबी- रामू मुझे डर लग रहा है।

रामू- किससे? हमसे?

रूबी- इस समझ से। क्या जो हम कर रहे है वो ठीक है?
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