kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
06-27-2018, 12:03 PM,
#41
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
दोस्तो, यहाँ प्रोग्राम शुरू होने में थोड़ा टाइम लगेगा। तब तक हम लोग गाँव की सैर कर आते हैं।
जेम्स को दोबारा मौका ही नहीं मिला कि वो रानी के साथ कुछ कर सके.. क्योंकि रानी को अचानक तेज बुखार हो गया था.. इसलिए अब जेम्स अपनी प्यास मिटाने निधि के घर की तरफ़ चला गया। मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था.. जब वो छुपते-छुपाते निधि के घर के पास गया.. तो अन्दर से रोने की आवाज़ सुनकर वो घबरा गया कि आख़िर अचानक यह क्या हो गया है।
जेम्स जल्दी से दरवाजे के पास गया और आवाज़ लगाई- क्या हो गया.. ऐसे सब रो क्यों रहे हो?
निधि ने जल्दी से दरवाजा खोला।
जेम्स- अरे क्या हुआ..? मैं यहाँ से जा रहा था.. तो रोने की आवाज़ सुनकर रुक गया। कोई बताएगा मुझे.. यहाँ हुआ क्या है?
निधि- जेम्स उउउ उउउहह.. मेरे भैया उउउ.. देखो ना उउ…
घर में सभी रो रहे थे.. मगर कोई ठीक से नहीं बता रहा था। जेम्स समझ गया कि हो ना हो निधि के भाई ने कुछ किया है.. मगर ऐसा क्या किया जो सब ऐसे रो रहे हैं।
जेम्स- ओह्ह.. कोई ठीक से बताएगा?
जेम्स के सवालों का जबाव निधि के बापू ने दिया कि ज़्यादा शराब पीने से उसके बेटे का लीवर ख़त्म हो गया है.. आज शाम से बहुत हालत खराब है.. गाँव के डॉक्टर ने जबाव दे दिया और ये भी कहा कि कल सुबह तक शहर ले जाओगे तो ये बच जाएगा.. नहीं तो ये मर जाएगा। अब जैसा भी है आख़िर है तो मेरा बेटा ही.. अब क्या करें.. कैसे इसको शहर लेकर जाएं.. घर में कौन रहेगा.. कुछ समझ नहीं आ रहा..
जेम्स ने समझाया- अरे चाचा.. मैं किस दिन काम आऊँगा.. मैं लेकर जाऊँगा इसको..
बस फिर क्या था आनन-फानन में जेम्स ने भाभी को साथ चलने का कह दिया कि वहाँ वो अकेला कैसे सब संभाल पाएगा और निधि ने भी ज़िद की.. कि वो भी साथ जाएगी.. तो बस फैसला हो गया।
जेम्स रातों-रात जाने का बंदोबस्त करने चला गया।
अब यहाँ का ट्विस्ट कल समझ आ जाएगा। इनको शहर आने दो.. सब खेल समझ जाओगे। चलो जय को देख आते हैं वो अब तक आ गया होगा।
जय जब बाहर आया तो रश्मि को देख कर हैरान हो गया। वो सब देख कर उसकी आँखें फट गईं.. बदन में अजीब सी हलचल शुरू हो गई और उसका लौड़ा धीरे-धीरे अकड़ना शुरू हो गया।
रश्मि बिस्तर पर आँखें बन्द किए हुए सीधी लेटी हुई थी.. उसके पैर मुड़े हुए और ऐसे फैले हुए थे.. जैसे चुदाई के वक़्त किसी रण्डी के होते हैं। वो कमर को ज़ोर-ज़ोर से हिला रही थी और बड़बड़ा रही थी- आह सस्स आह.. भाई.. चोदो.. आह.. पूरा डाल दो.. आह.. फाड़ दो मेरी चूत को.. आह.. उई.. मज़ा आ रहा है..
जय धीरे से बिस्तर पर चढ़ गया और रश्मि की टाँगों के बीच बैठ गया। जैसे ही उसने लौड़ा चूत पर सैट किया.. रश्मि ने आँखें खोल दीं और अपनी हरकत पर शर्मा गई।
रश्मि ने जल्दी से करवट ली और अपना मुँह हाथों से छुपा लिया।
जय- अरे क्या हुआ.. शर्मा क्यों रही हो.. मुझे नहीं पता था मेरी गुड्डी की चूत में इतनी आग लगी है.. नहीं तो कब का.. मैं अपने लौड़े से इसकी आग को मिटा देता..
रश्मि- क्या भाई, आप चुपके से क्यों आ गए.. जाओ अब मैं आपसे बात नहीं करती..
जय- अरे मेरी जान.. ये शर्माना छोड़ो.. जो अकेले-अकेले कर रही थी ना.. अब मेरे साथ करो.. तो तुमको ज़्यादा मज़ा आएगा।
रश्मि- भाई आपको मेरे मम्मे अच्छे लगते हैं ना.. अब इनका रस पीलो.. मुझे प्यार दो.. मेरे जिस्म को नोंच डालो.. मैं तैयार हूँ.. आपके प्यार को पाने के लिए.. उसके बाद अपने लंड से मेरी चूत को ठंडा करना..
जय- मेरी जान.. कसम से तू ऐसी क़यामत होगी.. मैंने सोचा भी नहीं था। अब तू अपने भाई का कमाल देख.. कैसे तेरी वासना को मिटाता है।
जय अब रश्मि के मम्मों को दबाने लगा और रश्मि के मुँह में अपनी जीभ डाल कर उसको मज़ा देने लगा। कभी वो रश्मि के मम्मों को चूसता.. कभी निप्पल पर जीभ घुमाता.. बेचारी वो तो पहले से बहुत गर्म थी, अब जय उसको और गर्म करने लगा था।
कुछ देर ये चलता रहा.. उसके बाद रश्मि सिसकारियाँ लेती हुई बोली- उफ़फ्फ़ भाई.. आह.. मेरी चूत की आग मिटा दो.. आह.. फाड़ दो इसे.. बहुत इसस्स स्स.. परेशान कर रही है.. आह.. भाई कुछ करो आह..
जय ने चूत को चाटने का आसन बदला और 69 की अवस्था में आकर वो रश्मि की चूत चाटने लगा। इधर प्यासी रश्मि लौड़े को कुल्फी समझ कर चाटने लगी।
दोनों कुछ देर तक ये खेल खेलते रहे। अब जय के भी बस के बाहर हो गया था। वो बैठ गया.. उसने रश्मि की टांगें फैला दीं और चूत पर उंगली घुमाने लगा।
रश्मि- आह..इससस्स.. भाई.. घुसा दो आह…. अब बस बर्दास्त नहीं होता भाई.. उफफफ्फ़..
जय उंगली से चूत को खोलने की कोशिश करने लगा.. पर चूत बहुत टाइट थी। उसने थोड़ी सी उंगली चूत के अन्दर डाली.. तो रश्मि ज़ोर से उछली।
रश्मि- आअऊच भाई.. आराम से उफ़.. दुखता है ना..
जय- अरे ये क्या रश्मि.. तुमने आज तक अपनी चूत में उंगली भी नहीं डाली.. इतना सा दर्द से नहीं पा रही हो.. लौड़ा जाएगा तो कैसे सह पाओगी?
रश्मि- आह.. पता नहीं भाई.. मगर जैसे भी डालना है.. अब डाल दो.. मेरे सर में दर्द होने लगा है.. एक अजीब सा भारीपन मुझे महसूस हो रहा है.. पता नहीं मुझे क्या हो रहा है… मेरी चूत में बहुत खुजली होने लगी है। अब तो आप डाल ही दो बस..
जय- ठीक है रश्मि.. अब मेरा लौड़ा भी बहुत अकड़ कर दर्द करने लगा है। अब तो इसको चूत की गर्मी ही ठंडा कर सकती है।
रश्मि- भाई प्लीज़.. जरा आहिस्ते से पेलना.. ये मेरा पहली बार है।
जय- तू फिकर मत कर मेरी जान.. तेरा पहली बार है.. मगर मैंने बहुत सी चूतें खोली हैं.. मैं सब जानता हूँ कि कैसे करना है.. और तू तो मेरी प्यारी बहन है.. तुझे थोड़ी ज़्यादा तकलीफ़ दूँगा।
रश्मि- ओह्ह.. रियली.. मुझे तो कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि आप ऐसे होंगे मगर आप तो बड़े छुपे रुस्तम निकले..
जय- अरे तुझे कैसे पता होगा.. तू कौन सा यहाँ रहती है.. चल अब बातें बन्द कर.. पैर ठीक से फैला.. ताकि तेरी चूत की आज ओपनिंग कर दूँ।
रश्मि ने घुटने मोड़ कर पैर फैला लिए.. जिससे उसकी चूत थोड़ी सी खुल गई, जय ने टेबल से आयली क्रीम ले ली और अपने लौड़े पर अच्छे से लगा ली।
रश्मि- क्या कर रहे हो भाई..
जय- अरे लौड़े पर क्रीम लगा के चिकना कर रहा हूँ ताकि आराम से फिसलता हुआ अन्दर घुस जाए.. इससे तुझे तकलीफ़ कम होगी.. समझी..
रश्मि- ओह्ह.. थैंक्स भाई.. आप मेरी कितनी फिकर करते हो..
जय ने थोड़ी क्रीम रश्मि की चूत पर भी लगाई.. थोड़ी उंगली से चूत के अन्दर भी लगाई।
रश्मि- आह.. आराम से भाई.. कहीं नाख़ून ना लग जाए..
जय अब कुछ बोलने के मूड में नहीं था उसने लौड़े को चूत पर सैट किया और धीरे-धीरे दबाव बनाने लगा.. मगर चिकनाई से लौड़ा ऊपर को फिसल गया। रश्मि की चूत बहुत टाइट थी.. उसका सुपारा भी अन्दर नहीं घुस पा रहा था। मगर जय कोई कच्चा खिलाड़ी नहीं था.. उसने उंगली से चूत को थोड़ा सा खोला और सुपारा अन्दर फँसा दिया और धीरे-धीरे दबाव बनाने लगा।
रश्मि- आह.. भाई.. बहुत दर्द हो रहा है.. उफ़फ्फ़.. जरा आराम से.. डालना.. आह्ह.. आपका बहुत मोटा है.. ओह्ह.. गॉड.. मेरी जान निकल जाएगी.. इस दर्द से.. आह.. भाई आह..
जय- अरे अभी डाला कहाँ है.. बस लंड का टोपा चूत में फँसाया है मैंने.. अब तू दाँत भींच ले.. बस एक बार दर्द होगा.. उसके बाद हमेशा के लिए मज़े ही मज़े।
रश्मि ने बिस्तर की चादर को कस के पकड़ लिया और डर से अपनी आँखें बन्द कर लीं..
जय को पता था दर्द के कारण रश्मि शोर करेगी, वो उसी अवस्था में उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठों पर जोरदार किस शुरू कर दी।
जय अब लौड़े पर दबाव बनाता जा रहा था.. धीरे-धीरे उसका सुपारा अन्दर घुसने लगा और दर्द के कारण रश्मि का बदन मचलने लगा।
रश्मि की टाइट चूत में लौड़ा घुसना आसान नहीं था। अब जय को थोड़ा ज़ोर लगाना पड़ रहा था और रश्मि की सील ऐसे प्यार से टूटने वाली थी नहीं.. तो जय ने एक झटका मारा, इस प्रहार से 3″ लौड़ा चूत की सील तोड़ता हुआ अन्दर चला गया।
रश्मि को दर्द की एक तेज लहर जिस्म में होने लगी। उसकी चीख निकली.. मगर जय के होंठों के नीचे दब कर रह गई। वो छटपटाने लगी।
जय ने कस कर उसके हाथ पकड़ लिए और लौड़े को दोबारा पीछे किया, अबकी बार का धक्का पहले से ज़्यादा तेज़ था, पूरा लौड़ा झटके से चूत की गहराई में समाता चला गया।

रश्मि ज़ोर से चिल्लाई.. मगर आवाज़ बाहर कहाँ से आती.. उसका मुँह तो जय ने होंठों से बन्द किया हुआ था।
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06-27-2018, 12:03 PM,
#42
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
जय जानता था कि सील टूटने से उसको कितना दर्द हुआ होगा.. क्योंकि उसको यह भी अहसास हो गया था कि रश्मि की चूत से खून का रिसाव शुरू हो गया.. जो उसके लौड़े से होता हुआ बिस्तर पर गिरने लगा है। 
उसने पूरा लौड़ा अन्दर घुसा दिया.. अब वो बिना हिले बस ऊपर लेटा रहा और रश्मि के होंठ चूसता रहा। रश्मि की आँखों में आँसू आ रहे थे.. जिसे देख कर जय ने उसके होंठ आज़ाद किए।
जय- सॉरी रश्मि.. मेरी वजह से तुम्हें कितना दर्द हो रहा है ना..
रश्मि- आह.. भाई.. बहुत दर्द हो रहा है.. आह.. आपने पूरा एक साथ क्यों डाल दिया.. आह.. आराम से डालते तो ठीक रहता.. ऑफ.. मेरी चूत फट गई..
जय- नहीं रश्मि.. धीरे-धीरे डालता.. तो दर्द ज़्यादा होता.. एक ही बार में डालने से एक बार दर्द हुआ। अब तुम्हें आराम से चोदूंगा।
कुछ देर बाद रश्मि का दर्द कम हुआ तो जय लौड़े को आगे-पीछे करने लगा। दस मिनट तक धीरे-धीरे जय रश्मि को चोदता रहा। अब रश्मि का दर्द कम हो गया था और उसको दर्द के साथ मज़ा भी आने लगा था।
रश्मि- आह सीई.. भाई.. आह.. अब तेज करो ना.. आह.. मेरी चूत जल रही है.. आह.. फक मी ब्रो.. आह.. फक मी..
जय समझ गया कि अब रश्मि की उत्तेजना चरम पर आ गई है.. तो उसने भी स्पीड बढ़ा दी और ‘दे..दनादन..’ लौड़ा पेलने लगा।
रश्मि- आह..आईईइ..उफ़फ्फ़.. भाई.. आह.. मज़ा आ रहा है.. आह.. चोदो.. आह.. आज अपनी बहन को चोद कर आह.. आप भी आह.. बहनचोद बन जाओ आह..
जय- उहह उहह.. मेरी जान.. आह.. तेरी चूत बहुत टाइट है.. आह.. ऐसी चूतें मिलती रहें.. तो लौड़े को मज़ा आ जाए.. उफ़.. ले संभाल.. ले..
जय अब स्पीड से चोदने लगा था और रश्मि भी उछल-उछल कर उसका साथ दे रही थी, दो जवान भाई बहन के जिस्म अब एक हो गए थे।
रश्मि- आह.. फास्ट आह.. और फास्ट भाई मेरी चूत फटने वाली है.. आह.. मैं गई.. आह आई.. उफफ्फ़ सस्सस्स..
रश्मि की चूत ने लावा उगल दिया और उसी के साथ जय के लौड़े ने भी उसके रस से अपना रस मिला दिया, रश्मि की कुँवारी चूत जय के रस से भर गई, ये पल रश्मि को बहुत सुकून दे रहे थे। गर्म रस उसकी चूत को सुकून दे रहा था।
काफ़ी देर तक दोनों एकदम शान्त.. वैसे ही पड़े रहे।
रश्मि- उफ़फ्फ़ भाई.. अब हटो भी.. मुझे देखने तो दो.. मेरी चूत का आपने क्या हाल किया है.. लगता है आपने मेरी चूत फाड़ ही दी।
जय- अब तुमको ही चुदाई करवानी थी.. चूत में लौड़ा जाएगा तो फटेगी ही ना.. वैसे कुछ भी कहो.. तुम सच में कमाल की हो.. ऐसे हुस्न के साथ आज तक कुँवारी घूम रही हो.. अगर तुम मेरी बहन ना होती.. तो मैं कब का तेरी चूत फाड़ चुका होता।
रश्मि- अच्छा आपकी मुझ पे इतनी नियत खराब थी क्या?
जय- अरे नहीं.. मैंने कभी ऐसा सोचा भी नहीं.. ये तो बस जब से तुम आई हो और अजीब सी बातें कर रही हो.. तो मेरा मन भी तुम्हारे लिए ऐसा हो गया। वैसे मैंने कंट्रोल बहुत किया.. आख़िर आज तुमने मुझे बहनचोद बनने के लिए मजबूर कर ही दिया।
रश्मि- ओह्ह.. भाई आई लव यू.. अब हमेशा आप मुझे ऐसे ही प्यार देते रहना।
जय- हाँ मेरी प्यारी रश्मि.. आज पूरी रात तुम्हें इतना प्यार करूँगा कि बस तुम हमेशा के लिए मेरी हो जाओगी।
रश्मि- अच्छा कर लेना.. पहले हटो तो सही.. मुझे बाथरूम जाना है।
जय धीरे से एक साइड में हो गया उसका लौड़ा अब मुरझा गया था। उस पर दोनों के रस के साथ रश्मि की सील टूटने के कारण निकला हुआ खून भी लगा था।
रश्मि धीरे से बैठ गई और झुक कर जब उसने चूत को देखा।
रश्मि- ओह्ह.. गॉड.. इतना खून निकलता है पहली चुदाई में.. भाई मेरी चूत पर कितनी सूजन आ गई है.. देखो तो..
जय- अरे डरो मत रश्मि.. पहली बार है ना.. ऐसा होता है। गर्म पानी से साफ कर लो.. आराम मिलेगा..
रश्मि जब बिस्तर से उतरने लगी.. उसको चूत में दर्द महसूस हुआ- आह भाई.. बहुत दर्द हो रहा है.. मेरे पैर भी दु:ख रहे हैं और कमर में भी बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है।
जय- आओ मेरी बहना.. मैं तुम्हें बाथरूम तक ले जाता हूँ.. वहाँ अपने हाथों से तुम्हारी चूत को साफ करूँगा ओके..
रश्मि ने मुस्कुरा के ‘हाँ’ कहा.. तो जय ने उसको सहारा दिया.. वो लंगड़ाती हुई उसके साथ बाथरूम तक गई।
वहाँ जाकर रश्मि को आराम से नीचे बैठा कर जय गर्म पानी से चूत पर लगा खून साफ करने लगा।
रश्मि- आह.. आराम से भाई.. दुखता है.. अपने कितना मोटा डंडा.. जो मेरी छोटी सी चूत में घुसा दिया ना..
जय- अरे रश्मि.. तेरी चूत तो ऐसी थी कि उंगली जाने से भी दर्द कर रही थी। अब मेरा लौड़ा गया है.. तो थोड़ा तो दु:खेगा ही.. पर तुझे अबकी बार ज़्यादा मज़ा आएगा.. देख लेना..
रश्मि ने भी जय के लौड़े को पानी से साफ किया और प्यार से उसको सहलाने लग गई।
काफ़ी देर तक दोनों एक-दूसरे को साफ करते रहे। 
उसके बाद रश्मि ने कहा- भाई आप जाओ.. मैं थोड़ी देर बाद आती हूँ।
तो जय वहाँ से बाहर आ गया।
बेड पर लेट कर जय अपने लौड़े को देखने लगा और मुस्कुराता हुआ आँखें बन्द करके बिस्तर पर लेट गया।
दोस्तो, रश्मि जब तक वापस आए.. आपको एक बात बता देती हूँ.. रंगीला ने बिहारी को जो काम दिया था.. आपको याद तो होगा ना.. उसकी उलझन आपके दिमाग़ में चल रही होगी.. तो चलो उसको दूर करने का टाइम आ गया है।
रंगीला एक बिल्डिंग के सामने खड़ा किसी का इन्तजार कर रहा था.. तभी वहाँ बिहारी आ गया।
बिहारी- का बात है रंगीला जी.. आज कैसे हमका याद किया?
रंगीला- अरे बिहारी तुम तो पैसे लेकर गायब ही हो गए.. मैंने कहा था ना.. मैडम बहुत नाराज़ हैं.. तुमको मैंने अलग-अलग एरिया में कमरे और फ्लैट लेकर दिए हुए हैं ताकि पुलिस का कोई चक्कर ना हो.. मगर उसके बाद भी तुम देरी कर रहे हो.. ऐसा क्यों?
बिहारी- अबे का साला बुड़बक जैसा बतिया करता है.. आजकल पाउडर के मामले में पुलिस बहुत सख़्त हो गई है.. संभल के चलना होता है..।
रंगीला- ये सब मैं नहीं जानता.. मुझे भी मैडम को जबाव देना होता है। अब सुनो ये लो चाभी.. इसी बिल्डिंग के 5वें फ्लोर पर फ्लैट नम्बर 22 में इस बार सारा माल रख देना.. आगे मैं देख लूँगा.. ओके?
बिहारी- अरे का भैया.. ये अस्पताल के सामने काहे फ्लैट ले लिया.. सारा दिन लोग आते-जाते रहते हैं।
रंगीला- पब्लिक एरिया में इसी लिए लिया है ताकि किसी को शक ना हो समझे..
बिहारी- ठीक है.. हम जल्दी सब कर दूँगा मगर मैडम को बता देना कि बिहारी देरी करता है.. लेकिन काम बराबर करता है। अब तुम जाओ.. हमको थोड़ा जरूरी काम है।
रंगीला- हाँ जानता हूँ.. तेरा काम.. साला दारू और लड़की के सिवा तुम्हें कौन सा काम जरूरी होता है..
बिहारी- का फालतू का बकवास करता है.. ये दोनों तो हमरा शौक है.. काम अपनी जगह.. शौक अपनी जगह.. अब जाओ..
रंगीला- अच्छा ठीक है.. रविवार को बुलबुल में पार्टी है.. मैंने सलीम से बात कर ली है.. वो पुराना माल उसको पहुँचा देना समझे..
बिहारी ने उसकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिलाई और वहाँ से निकल गया।
दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि ये क्या नया झमेला है.. तो आपको याद दिला दूँ मैंने बताया था ना.. रंगीला के अलग-अलग एरिया में घर हैं। असल में रंगीला एक नशे का काम करता है… इसका असल काम यही है। अब इसके पीछे ये मैडम कौन है.. इसका पता आगे चल जाएगा।
आप बस देखते रहो और ‘हाँ’ ये कोई मैंने अलग से इसमें एड नहीं किया। आगे चलकर ये भी कहानी का एक हिस्सा बन जाएगा ओके.. तो अब वापस रश्मि के पास चलते हैं।
रश्मि जब बाहर आई तो जय बैठा हुआ उसको देख रहा था।
रश्मि- क्या बात है.. भाई नजरें बाथरूम पर टिकाए हुए बैठे हो।
जय- हाँ रश्मि तुमने मुझे अपना दीवाना बना दिया है.. सच्ची इतनी चूतें मारी हैं.. मगर तेरे जैसी किसी की नहीं थी।
रश्मि मुस्कुराती हुई बड़ी अदा के साथ चलती हुई जय के पास आकर बैठ गई और उसके होंठों पर एक किस कर दिया।
जय- उफ़.. तेरी यही अदा तो सबसे अलग है.. ये हुस्न और सेक्सी फिगर मुझे पागल बना रहा है। सच में रश्मि.. तुम जैसी दूसरी शायद ही कोई इस दुनिया में होगी।
रश्मि- मैं तो आपको बड़ा सीधा समझती थी.. किस-किस को चोद चुके हो भाई अब तक..
जय- अरे क्या बताऊँ.. अब मैं तो हर महीने लौंडिया बदलता हूँ.. उनकी चूत का पूरा मज़ा लेकर ही छोड़ता हूँ।
रश्मि- अच्छा इसका मतलब मुझसे मन भर जाएगा.. तो मुझे भी छोड़ दोगे आप?
जय- अरे पागल तू मेरी बहन है.. तेरे साथ ऐसा थोड़े करूँगा.. जब तक तू यहाँ है.. मैं तुझसे प्यार करता रहूँगा।
रश्मि- मैं अब कहीं नहीं जाने वाली.. आपका प्यार मुझे हर पल चाहिए।
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06-27-2018, 12:04 PM,
#43
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
जय- ये तो बहुत अच्छी बात है.. अब हम रोज मज़ा ले सकेंगे.. मगर घर में किसी को पता ना लगने देना.. नहीं तो क़यामत आ जाएगी।
रश्मि- अरे भाई आप कैसी बात कर रहे हो.. मैं पागल थोड़े हूँ जो ऐसी बात किसी को बताऊँगी। बस आप ख्याल रखना.. कहीं विजय को पता ना लग जाए.. सारा दिन आप उसी के साथ घूमते रहते हो.. कहीं आप उसको ना बोल दो।
जय- अरे नहीं नहीं.. मैं क्यों बोलूँगा तुम ख्याल करना.. कि विजय को पता ना लग जाए… नहीं वो पापा को बता देगा। वैसे भी वो तुम्हारा कुछ ज़्यादा ही ख्याल रखता है.. अगर ऐसी बात उसको पता लग गई.. तो हम दोनों की खैर नहीं..
रश्मि- ओके भाई.. अब सिर्फ बातें ही करोगे या मेरी जवानी का मज़ा भी लोगे।
जय- अरे तेरी जवानी तो ऐसी है.. कि लंड अपने आप इसे सलामी देने लगता है। पहली बार तो सब जल्दबाज़ी में हुआ तो ठीक से मैं तुम्हारे इन रसीले होंठों का मज़ा नहीं ले पाया। इन कच्चे अनारों का जूस नहीं पी पाया.. अब सुकून से इनको चूस कर मज़ा लूँगा, तेरी महकती चूत को चाट कर उसकी सूजन कम करूँगा।
जय की बातों से रश्मि उत्तेज़ित होने लगी थी। वो जय की जाँघों पर सर रख कर लेट गई और उसके लौड़े को सहलाने लगी।
जय- आह.. तुम्हारे हाथ भी बहुत सॉफ्ट हैं.. लौड़े पर लगते ही करंट पैदा हो जाता है।
रश्मि कुछ बोली नहीं और लौड़े पर जीभ फेरने लगी.. वो बहुत ज़्यादा मस्ती में आ गई थी। उसकी चूत लौड़े के लिए दोबारा तैयार हो गई थी।
जय- आह.. रश्मि उफ़.. तेरे ये मखमली होंठ आह.. मेरे लौड़े को पागल बना रहे हैं.. तुम मुझे पागल बना रही हो आह..
रश्मि- भाई आप देखते जाओ.. इतने सालों से मैं शराफत का नकाब पहने जी रही थी.. मगर मुझे अब पता चला जो मज़ा नंगेपन में है.. वो शराफ़ात में नहीं.. उफ़.. आपका ये गर्म लौड़ा मुझे चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है। आपकी बहन अब पूरी आपकी है.. आ जाओ नोंच डालो मेरे जिस्म को.. कर दो मुझे अपने इस लौड़े से ठंडी.. आह.. अब मेरा जिस्म जलने लगा है।
रश्मि सीधी होकर बाँहें फैलाए बिस्तर पर लेट गई.. जय समझ गया कि अब उसको क्या करना है।
जय उसके पास लेट गया और उसके एक निप्पल को दबाने लगा.. उसके होंठों को चूसने लगा। अब दोनों एक-दूसरे को चूमने और चाटने में बिज़ी हो गए थे।
जय अब ज़ोर-ज़ोर से उसके मम्मों को दबाने और चूसने लग गया।
रश्मि- आह.. भाई उफ़.. आराम से आह.. चूसो.. आह.. सारा रस पी जाओ.. आह.. मज़ा आ रहा है भाई.. आह.. आह..
दस मिनट तक इनकी मस्ती चलती रही। अब दोनों ही वासना की आग में जलने लगे थे। जय का लौड़ा टपकने लगा।
रश्मि- आह.. भाई.. उफ़फ्फ़.. मेरी चूत जलने आ लगी है.. आह.. आपके गर्म होंठों से इ..ससस्स.. उसकी मालिश कर दो न..
जय- अभी लो मेरी रश्मि रानी.. आज तो तेरी चूत की ओपनिंग हुई है.. उसकी मालिश ऐसे करूँगा कि लाइफ टाइम याद रखोगी.. अपने प्यारे भाई को..
जय ने रश्मि के पैर मोड़े और टाँगों के बीच लेट गया। रश्मि की डबल रोटी जैसी फूली हुई चूत पर उसने धीरे से अपनी जीभ रख दी।
रश्मि- सस्सस्स आह.. भाई.. दर्द हो रहा है आह.. प्यार से मालिश करना.. आह.. आपकी बहन हूँ आह.. उफफ्फ़..
जय- पता है मेरी जान.. तू आँख बन्द करके मज़ा ले.. मैं प्यार से ही तेरी मालिश करूँगा..

जय अब बड़े प्यार से चूत को चाटने लगा था। अपनी जीभ की नोक धीरे-धीरे अन्दर घुसा रहा था.. जिससे रश्मि की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, वो बस आनन्द की दुनिया में कहीं गोते लगा रही थी।
रश्मि- आह.. उहह.. भाई मज़ा आ रहा है.. इससस्स.. आह.. खूब चूसो.. आह.. और दबा के.. ससस्स चूसो.. आह.. मज़ा आ गया।
जय अब आइस्क्रीम की तरह चूत को चाट रहा था.. रश्मि की चूत से रस टपकना शुरू हो गया था.. वो अब तड़पने लग गई थी।
रश्मि- आह..ससस्स.. भाई.. आह.. मेरी चूत की आग बहुत बढ़ गई है.. आह.. अब उफफफ्फ़.. सस्सस्स.. भाई आह.. लौड़ा घुसा दो.. आह.. मुझे कुछ हो रहा है.. आह.. प्लीज़ भाई.. आह.. फक मी आह.. फक मी.. सस्सस्स आह…
जय भी अब बहुत ज़्यादा उत्तेज़ित हो गया था। उसके लौड़े से भी रस की बूँदें टपकने लगी थीं.. वो बैठ गया और लौड़े को चूत पर टिका कर धीरे से दबाने लगा।
रश्मि- आह.. फक मी ब्रो.. आह.. उई घुसा दो आह.. पूरा डालो.. आह.. मेरी चूत को फाड़ दो आज.. आह.. आईई..
जय ने धीरे-धीरे अब कमर को हिलाना शुरू कर दिया था। हर झटके के साथ वो लौड़े को थोड़ा आगे सरका देता और रश्मि की आह.. निकल जाती। कुछ ही देर में उसने पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया और रश्मि के ऊपर लेटकर उसके निप्पल को चूसने लगा।
रश्मि- आह.. भाई अब चुदाई शुरू कर दो.. मुझे दर्द नहीं हो रहा है.. आह.. करो न.. आह.. चोद दो मुझे.. आह.. आज मेरी सारी गर्मी निकाल दो आह..
जय स्पीड से लौड़े को अन्दर-बाहर करने लगा। रश्मि भी गाण्ड उठा कर उसका साथ देने लगी। चुदाई जोरों से शुरू हो गई.. कमरे का तापमान बढ़ने लगा। 
‘ठप.. ठप.. पूछ..फ्छ.. आह.. उहह.. इससस्स.. आह.. उहह.. उहह..’ की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं।
रश्मि- आह फक मी ब्रो.. आह.. फक मी डीप.. आह.. फक हार्ड.. आईईइ ओउ सस्स..
जय- ले रश्मि.. आह.. आज तेरे भाई का आह.. पॉवर देख.. आह.. तेरी चूत का आह चूरमा बना दूँगा मैं.. आह.. आज के बाद तू जब भी उहह.. चूत को देखेगी.. आह.. मेरी याद आएगी तुझे..
दस मिनट तक जय स्पीड से रश्मि को चोदता रहा। अब जय तो पक्का चोदू था। पहले 2 बार झड़ चुका था इसलिए अबकी बार कहाँ वो जल्दी झड़ने वाला था। अब तो उसका टाइम और बढ़ गया। मगर रश्मि की चूत लौड़े की चोट ज़्यादा देर सह ना पाई और उसके रस की धारा बहने को व्याकुल हो गई।
रश्मि- आई आई.. आह.. भाई फक मी फास्ट.. आई एम कमिंग.. आह.. गई.. आह.. भाई.. ज़ोर से पेलो.. आहह.. उहह आह..
जय ने और तेज़ी से लौड़े को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। रश्मि का बाँध टूट गया.. वो झड़ने लगी। कुछ देर बाद वो शान्त पड़ गई.. मगर जय का अभी बाकी था.. वो धीरे-धीरे कमर को हिला रहा था।
रश्मि अब शान्त लेट गई थी.. उसका सारा जोश ठंडा हो गया था। जय ने अचानक लौड़ा बाहर निकाला और रश्मि के पेट पर बैठ गया। उसके मम्मों के बीच लौड़े को रख कर कमर हिलाने लगा।
रश्मि समझ गई कि जय उसके मम्मों को चोदना चाहता है। उसने दोनों हाथों से अपने मम्मों को कस कर दबा लिए जिससे लौड़ा मम्मों के बीच अब टाइट होकर अन्दर-बाहर हो रहा था।
कुछ देर तक ये चलता रहा.. उसके बाद जय ने पोज़ चेंज कर लिया। वो घुटनों के बल बिस्तर पर खड़ा हो गया.. जिसे देख कर रश्मि मुस्कुराई।
रश्मि- क्या हुआ भाई.. मज़ा आ रहा था.. खड़े क्यों हो गए?
जय- मेरी जान लौड़े को थोड़ा चूस कर चिकना कर दे.. उसके बाद तुझे घोड़ी बना कर चोदूँगा.. तेरी चूत की गर्मी तो निकल गई.. अभी मेरा रस निकलना बाकी है।
रश्मि हँसती हुई लौड़े को चूसने लगी.. अपने मुँह में पूरा लौड़ा लेकर अच्छी तरह उसको थूक से तर कर दिया।
जय- आह्ह.. आह्ह.. बस रश्मि.. अब बन जा घोड़ी.. आज तेरी सवारी करूँगा.. आह्ह.. अब बर्दास्त नहीं होता आह्ह.. आह्ह..
रश्मि घुटनों के बल अच्छी तरह पर फैला कर घोड़ी बन गई.. वैसे तो ये उसका पहली बार था.. मगर जिस तरह वो घोड़ी बनी थी.. जय को बहुत अच्छा लगा कि उसकी बहन एकदम पर्फेक्ट घोड़ी बनी है।
जय- वाह.. रश्मि क्या जबरदस्त घोड़ी बनी है तू.. अब ठुकाई का मज़ा आएगा.. तेरी चूत कैसे फूली हुई है.. उफ़फ्फ़ साली ऐसी चूत देख कर लौड़े की भूख ज़्यादा बढ़ जाती है।
जय ने लौड़े को चूत पर टिकाया और पूरा एक साथ अन्दर धकेल दिया।
रश्मि- आईईइ.. भाई आराम से.. आह्ह.. एक बार में पूरा घुसा दिया.. आह्ह.. आज तो आराम से करो.. कल से जैसे चाहो चोद लेना..
जय- अरे सॉरी यार.. तेरी चूत देख कर बहक गया था.. अब ख्याल करूँगा।
जय अब रश्मि की कमर पकड़ कर चोदने लगा.. उसके हाथ रश्मि की मुलायम गाण्ड को भी सहला रहे थे। बीच-बीच में वो रश्मि की गाण्ड के छेद में उंगली भी घुमा रहा था।
थोड़ी देर की मस्ती के बाद रश्मि भी गरम हो गई और गाण्ड को पीछे धकेल कर जय के मज़े को दुगुना बनाने लगी।
रश्मि- आह.. आह.. छोड़ो भाई.. आह्ह.. आज की रात हर तरीके से मुझे चोदो.. आह.. आह.. फास्ट करो.. और तेज भाई आह्ह.. मज़ा आ रहा है।
जय अब तेज़ी से चोदने लगा। उसका लौड़ा अब फूलने लगा था। कितना से पता वो चूत की गर्मी को आख़िर कर जय के लौड़े ने रस की धारा चूत में मारनी शुरू कर दी। उसका अहसास पाकर रश्मि की चूत भी झड़ गई। दो नदियों के मिलन के जैसे उनके कामरस का मिलन हो गया।
अब दोनों ही शान्त पड़ गए.. रश्मि की कमर में दर्द हो गया। जैसे ही जय ने लौड़ा बाहर निकाला.. वो बिस्तर पर कमर के बल लेट गई और लंबी साँसें लेने लगी। जय भी उसके पास ही लेट गया।
रश्मि- उफ़फ्फ़ भाई.. इस बार तो आपने बहुत लंबी चुदाई की.. आह्ह.. आपने तो मेरी चूत की हालत बिगाड़ दी।
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06-27-2018, 12:04 PM,
#44
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
जय- तुम्हें ही चुदवाने का चस्का लगा था.. अब लौड़े के लिए तड़फी हो.. तो पूरा मज़ा लो।
रश्मि- मज़ा ही तो ले रही हूँ.. मगर आप ये मेरी गाण्ड में उंगली क्यों डाल रहे थे?
जय- रश्मि सच कहूँ.. तेरी गाण्ड देख कर मन बेचैन हो गया है.. ऐसी मटकती गाण्ड.. उफ़फ्फ़ इसमें लौड़ा जाएगा.. तो मज़ा आ जाएगा.. बस यही देख रहा था कि अबकी बार मैं तेरी गाण्ड ही मारूँगा.
रश्मि- नो वे.. आज शुरूआत में ही सारे मज़े लूट लोगे क्या.. आज का मेरा हो गया.. अब कल देखते हैं.. आप चूत मारते हो या गाण्ड..
जय- अरे अभी कहाँ थक गई यार.. अभी तो बहुत पोज़ बाकी हैं.. तुम्हें आज अलग-अलग तरीके से चोदूँगा और प्लीज़ रश्मि तुम्हारी मुलायम गाण्ड मारने दो ना.. प्लीज़..
रश्मि- नो नो भाई.. आज प्लीज़.. ज़िद मत करो.. आप नहीं जानते.. मेरे पैर अकड़ कर दर्द कर रहे हैं.. चूत में भी बहुत सूजन है.. आप कल गाण्ड मार लेना.. मगर आज नहीं..
जय- ठीक है जानेमन.. जैसा तुम कहो.. मगर एक बार और तेरी चूत मारूँगा.. कसम से मन भरता ही.. नहीं तेरी चूत से..
रश्मि- हा हा हा हा.. आप तो मेरी चूत का आज भुर्ता बना के दम लोगे.. ठीक है भाई.. अब आपको मना नहीं करूँगी.. पर थोड़ा रेस्ट लेने के बाद आप आराम से चुदाई कर लेना..
जय- वाहह.. ये हुई ना बात.. अच्छा अपनी हॉस्टल लाइफ के बारे में कुछ बताओ न.. तुम्हारे अन्दर ये बदलाव कैसे आया.. ये भी बताओ..
रश्मि ऐसे ही इधर-उधर की बातें करने लगी और जय बस उसको सुनता रहा। एक घंटे तक दोनों बातें करते रहे.. उसके बाद जय का मन दोबारा चुदाई का हो गया।
जय धीरे-धीरे रश्मि के जिस्म को सहलाने लगा। रश्मि ने नानुकुर की.. मगर जय कहाँ ऐसी कच्ची कली को छोड़ता.. उसने रश्मि को मना ही लिया।
इस बार वो सीधा लेट गया और रश्मि को ऊपर लेटा कर नीचे से झटके दिए, रश्मि भी मस्ती में आकर लौड़े पर कूदने लगी।
लंबी चुदाई के बाद दोनों थक गए और नंगे ही एक-दूसरे से लिपट कर सुकून की नींद में सो गए।
सुबह का सूरज निकला.. रश्मि के लिए यह सुबह एकदम नई थी.. क्योंकि रात को उसकी अपने सगे भाई के साथ जो सुहागरात मनी.. उसके बाद तो उसके जीवन की यह पहली सुबह ही थी..
मगर अभी आप रश्मि को नहीं देख सकते.. वो कहाँ इतनी जल्दी उठने वाली है। सारी रात तो चुदाई करवा रही थी.. अब आराम से सो रही है.. तो चलो आपको कहीं और ले चलती हूँ।
सुबह के 7 बजे का वक्त था.. जेम्स के हाथ में चाय थी, वो भाभी और निधि के पास जाकर उनको चाय देने लगा।
तभी डॉक्टर वहाँ आ गया और उसने बताया कि आप रात को बहुत लेट यहाँ आए थे.. तो उनको यहाँ रुकने दिया है.. मगर अब कहीं पास में कोई होटल या धर्मशाला में कमरा ले लें.. मरीज के साथ बस एक आदमी ही यहाँ रह सकता है.. बाकी सब नहीं।
जेम्स- डॉक्टर.. सब ठीक तो है ना.. हमको यहाँ कितने दिन रहना होगा?
डॉक्टर- अभी कुछ कहा नहीं जा सकता, हालत बहुत खराब है। आप कमरा किराए पर ले लो.. यही सही रहेगा.. एक हफ़्ता तो कम से कम यहाँ रुकना ही होगा.. आगे का अभी कुछ कह नहीं सकते..
डॉक्टर के जाने के बाद भाभी और निधि जेम्स की तरफ़ देखने लगीं।
भाभी- जेम्स, हम तो यहाँ किसी को जानते भी नहीं हैं.. अब तुम ही किसी कमरे का कोई बंदोबस्त करो..
जेम्स- चिंता मत करो.. मैं अभी कुछ न कुछ इन्तजाम करके आता हूँ.. आप तब तक चाय पिओ..
भाभी- मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूँ जेम्स..
जेम्स- जैसा आपको ठीक लगे.. चलो..
निधि- मैं अकेली यहाँ नहीं रहूँगी.. मुझे भी साथ ले चलो..
भाभी- अरे तू क्या करेगी साथ जाकर.. यहीं रुक.. तेरे भाई के पास बैठ ना..
जेम्स- अरे आने दो.. रात से बेचारी यहीं तो बैठी है।
भाभी- नहीं.. यहाँ कोई तो होना चाहिए ना.. हम कमरा देखने जा रहे हैं.. क्या पता ज्यादा वक्त लग जाए।
निधि- अच्छा जाओ.. मगर जल्दी आ जाना.. कहीं दूर मत निकल जाना।
जेम्स- अरे चिंता मत करो निधि.. तुमको छोड़कर कहीं नहीं जाएँगे..
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06-27-2018, 12:04 PM,
#45
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
वो दोनों वहाँ से बाहर निकल गए और आस-पास के लोगों से दुकान वालों से बात करने लगे.. कमरे के बारे में पूछने लगे.. अब इसे इत्तफाक कहो.. या कहानी की जरूरत कहो.. कि अपना बिहारी उन्हें वहाँ मिल गया, अब इसको तो आप जानते ही हो।
बिहारी- अरे का बात है.. तुम हियां-उहाँ का पूछ रहे हो.. ये बुड़बक तुमको कमरा नहीं दिला सकता.. हमरे पास आओ.. हम तुमको कमरा दे देंगे..
जेम्स- अरे हाँ.. हमको कमरा ही चाहिए भाईजी.. आप दिला दोगे तो मेहरबानी होगी।
बिहारी के पूछने पर जेम्स ने सारी बात उसको बताई कि कैसे यहाँ आना हुआ और अब उनको कोई कमरा चाहिए ताकि कुछ दिन रह सकें..
बिहारी की नज़रें भाभी को घूर रही थीं.. वो अपने काले-काले होंठों पर ज़ुबान फिरा रहा था।
बिहारी- देखो भाई हमरा नाम है बिहारी बाबू.. इहाँ पूरे शहर में हमारा बहुत कमरा खाली पड़ा है.. मगर तुमको आने-जाने का दिक्कत ना हो.. तो भाई ये सामने वाली बिल्डिंग में हमरा एक ठौ फ्लैट खाली पड़ा है.. हॉस्पिटल के नज़दीक भी है.. तुम हियाँ रह सकते हो मगर…
जेम्स- मगर क्या बिहारी जी.. हमको तो बस एक कमरा चाहिए.. हम पैसे भी दे देंगे आपको..
बिहारी- अरे पैसों का बात ना है रे.. रात को हमरा कुछ सामान आएगा.. तुमको हमरे आदमी के साथ जाकर वो समान लाना है.. और उहाँ के फ्लैट के एक कमरे में वो रखने में हमार मदद करनी होगी.. बाकी तुम फ्री में इहाँ रह सकते हो.. हमको कौनऊ दिक्कत नाहीं होगी.. और जब तक तुम आओगे.. तोहार भाभी का ख्याल हम रख लेंगे.. समझ गए ना..
फ्री में रहने का नाम सुनकर भाभी खुश हो गई मगर जेम्स तो पक्का खिलाड़ी था, वो समझ गया कि बिहारी के इरादे कुछ नेक नहीं हैं।
जेम्स- ठीक है बिहारी जी आप हमें कमरा दिखा दो.. रात से परेशान हैं.. हम थोड़ा आराम कर लें..
बिहारी- अरे इसमें सोचना कैसा.. चलो अभी दिखा देता हूँ..
बिहारी दोनों को ऊपर ले गया.. जो फ्लैट रंगीला ने उसको दिया था.. वही उसने इन दोनों को दे दिया। जाते वक्त वो जेम्स को इशारे में समझा गया कि भाभी को मना लेना.. मैं शाम को आऊँगा.. ये कहकर वो वहाँ से चला गया।
भाभी- अरे रामा रे.. यह घर तो बड़ा ही शानदार है.. वो आदमी बहुत भला लगता है.. इतना अच्छा घर हमें मुफ्त में रहने दे दिया..
जेम्स- भाभी अपने दिल से ये ख्याल निकाल दो.. ये शहर है गाँव नहीं.. यहाँ कोई किसी को मुफ्त में कुछ नहीं देता.. वो आपके इन बड़े-बड़े चूचों का दीवाना हो गया है.. इसलिए उसने ये मेहरबानी की है।
भाभी- क्या बात करते हो.. जेम्स तुम्हें कैसे पता?
जेम्स- उसकी नज़र मैंने देखी है.. आज शाम को आपका बैंड बजाने का उसका इरादा है..
भाभी- नहीं नहीं.. चलो यहाँ से.. हमें नहीं रहना यहाँ..

जेम्स- अरे क्या भाभी.. आप क्यों इतनी सीधी बन रही हो.. कर देना उसको भी खुश.. अब ऐसा अच्छा घर हमको और कहाँ मिलेगा.. अब मान भी जाओ..
भाभी- अरे कैसी बातें करता है.. मैं कोई वेश्या थोड़ी हूँ.. जो किसी के भी साथ सो जाऊँ.. ना बाबा ना.. और वैसे भी मेरे पति तो ऐसी हालत में है.. और मैं ऐसे काम करती रहूँ।
जेम्स- अरे भाभी.. मेरी जान.. तुझे पति की इतनी फिकर होती.. तो पहले ऐसे काम ना करती.. अब ज़्यादा सती-सावित्री मत बनो… ऐसा मस्त फ्लैट मिला है.. मज़ा भी करेंगे हम.. और अस्पताल के पास भी हैं.. मान जाओ.. वो बिहारी को खुश कर दो एक बार.. उसका काम भी बन जाएगा और हमारा भी…
भाभी- एक बात बताओ.. तुम इतने यकीन से कैसे कह सकते हो कि वो ऐसा ही चाहता है?
जेम्स- मेरी जान.. मर्दों की नियत का तुम्हें क्या बताऊँ.. कब किस पर खराब हो जाए.. कुछ कहा नहीं जा सकता। मैंने उसकी आँखों में तुम्हारे लिए हवस देखी है।
भाभी- अच्छा अच्छा.. मगर निधि का क्या करोगे.. उसको इस बात का पता नहीं लगना चाहिए।
जेम्स- अरे उसका क्या करना है.. उसकी तो खुद की चूत में आग लगी हुई है.. तभी तो साथ आई है। तुम बिहारी को जलवा दिखाना.. उसकी चूत की आग मैं ठंडी कर दूँगा।
भाभी- पागल हो गए हो क्या.. ऐसा सोचना भी मत.. तुम उसके साथ अस्पताल में ही रहना.. समझे.. मैं यहाँ का देख लूँगी कि क्या करना है।
जेम्स- ओये होये मेरी जान.. अकेले में मज़ा लेगी.. अच्छा है.. अच्छा है।
भाभी- बस बस.. जानती हूँ तेरे को.. जब से निधि तेरे को मिली है.. तू मेरे पास बहुत कम आता है.. तुझे तो कच्ची कली में ज़्यादा मज़ा आता है..
जेम्स- अरे क्या भाभी.. अब बस भी करो.. ऐसी कोई बात नहीं है। अगर आपको ऐसा लगता है कि मैं निधि को ज़्यादा चाहता हूँ.. तो उस बिहारी के आगे निधि को कर देंगे.. बस खुश..
भाभी- अरे नहीं नहीं.. वो बहुत डरावना सा है.. निधि डर जाएगी। मैं ही संभाल लूँगी उसको.. अब बातें बन्द करो.. जाओ निधि को भी ले आओ.. बेचारी रात से परेशान है। तब तक मैं मुँह-हाथ धो लेती हूँ।
जेम्स वापस गया और निधि को ले आया।
अब यहाँ क्या होना था.. थके-हारे लोग आराम ही करेंगे।
तो चलो हमारी रश्मि उठ गई होगी अब तक..
सुबह के करीब 9 बजे विजय की आँख खुली.. तो वो सीधा बाथरूम चला गया और करीब आधा घंटा बाद फ्रेश होकर कमरे से बाहर निकला।
विजय सीधा नीचे चला गया.. उसे वहाँ काम्या दिखाई दी.. तो उसने मुस्कुराते हुए ‘गुड मॉर्निंग’ किया और वहीं सोफे पर बैठ गया।
काम्या- तुम्हारे बड़े पापा ने क्या कहा था.. उसके बाद भी तुम रात को कहाँ थे?
विजय- अरे हम तो गुड्डी को बाहर घुमाने ले गए थे और देर भी तो हुई नहीं हमें.. जल्दी आ गए थे..
काम्या- अच्छा अच्छा.. जाने दो.. आज मैं अपनी सहेली के यहाँ जा रही हूँ। वहाँ उन्होंने हवन रखवाया है.. तो रात को देर तक चलेगा। अभी मैं निकल जाऊँगी.. तो कल सुबह ही वापस आऊँगी। तब तक गुड्डी का ख्याल रखना और हाँ.. ऐसा कोई काम ना करना.. जिससे तुम्हारे बड़े पापा नाराज़ हो जाएँ.. बाहर जाना मगर ‘रात’ को जल्दी आ जाना.. समझ गए?
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06-27-2018, 12:05 PM,
#46
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
काम्या ने ‘रात’ पर कुछ ज़्यादा ज़ोर देकर कहा था.. क्योंकि वो जानती थी अक्सर ये रात को देर से आते हैं और आज घर में कोई नहीं रहेगा.. तो इनको घूमने का मौका मिल जाएगा.. इसलिए उसने ‘रात’ पर इतना ज़ोर दिया।
विजय- अरे आप बेफिक्र रहो.. हम बाहर जाएँगे ही नहीं.. तो ऐसा कुछ होगा भी नहीं.. वैसे जय और गुड्डी कहाँ हैं। अब तक उठे नहीं क्या?
काम्या- अरे कहाँ उठे हैं.. गुड्डी के कमरे का एसी कल वो ले गया था.. वापस लाया नहीं.. तो बेचारी को जय के कमरे में सोना पड़ा। अब देखो कितना वक्त हो गया.. दोनों घोड़े बेच कर सोए हुए हैं।
विजय- आपने जगाया नहीं क्या उनको?
काम्या- अब जा ही रही थी कि तुम आ गए और मैं तुमसे बातें करने यहाँ रुक गई।
विजय- अच्छा मैं उठा देता हूँ.. आप रहने दो।
काम्या- हाँ.. ये सही रहेगा। तब तक मैं दूसरे काम देख लेती हूँ।
विजय सीधा ऊपर गया और कमरे पर ज़ोर से दो बार नॉक की।
अन्दर का नजारा तो आपको पता ही है, दोनों रात को लंबी चुदाई करके नंगे ही चिपक कर सो गए थे। विजय के दरवाजा पीटने से रश्मि की आँख खुल गई..
उस वक़्त जय लगभग पूरा उसके चिपका हुआ था, उसका हाथ रश्मि के मम्मों पर और टाँगें उसकी जाँघों से लिपटी हुई थीं।

रश्मि- भाई.. भाई.. उठो.. सुबह हो गई देखो बाहर विजय आवाज़ दे रहा है।
जय- उनहह.. सोने दो ना यार.. कितनी अच्छी नींद आ रही है.. जाओ तुम जाकर दरवाजा खोल दो..
रश्मि- ओ भाई.. हम किस हालत में हैं ये तो देखो पहले..
रश्मि की बात सुनकर जय को जैसे झटका सा लगा.. वो फ़ौरन उठ बैठा- ओह्ह शिट.. हम ऐसे ही सो गए.. त..त..तुम ऐसा करो.. ये चादर अपने ऊपर डाल कर सो जाओ.. मैं विजय को देखता हूँ.. ओके..!
रश्मि- ओके.. मगर आप कपड़े पहन कर जाना.. कहीं ऐसे ही दरवाजा मत खोल देना।
जय थोड़ा अजीब सी नजरों से रश्मि को देखता है। फिर जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगता है। साथ ही साथ वो विजय को आवाज़ भी देता हैं दो मिनट सबर तो कर.. सारी नींद खराब कर दी.. आ रहा हूँ ना..
रश्मि को जय की इस हरकत पर बहुत प्यार आया.. वो मुस्कुराती हुई चादर लेकर सो गई। जय ने रश्मि की नाईटी को देखा.. तो जल्दी से चादर उठा कर अन्दर ही छुपा दिया। उसके बाद दरवाजा खोला तो विजय सीधा अन्दर आ गया।
जय- अरे अरे रुक तो.. कहाँ घुसा आ रहा है.. सुबह-सुबह सारी नींद की ऐसी तैसी कर दी।
विजय- अरे भाई सुबह कहाँ.. वक्त देखो पहले.. और ये गुड्डी भी देखो.. कैसे घोड़े बेच कर सो रही है। मैंने कितनी ज़ोर से दरवाजा पीटा.. तब भी नहीं उठी। अब मुझे ही इसे उठाना पड़ेगा।
विजय जब रश्मि की तरफ़ जाने लगा जय के पैरों तले ज़मीन निकल गई। उधर रश्मि भी डर गई.. उसको पता था विजय चादर को पकड़ कर खींचने वाला है।
जय- अरे विजय क्यों उसकी नींद खराब कर रहा है। रात को बेचारी की तबियत खराब थी। बड़ी मुश्किल से सोई थी। अब उसको उठा मत.. सोने दे..
विजय- अरे क्या हुआ हमारी रश्मि को, यार डॉक्टर के पास ले जाएँ?
जय- अरे अब सोने दे.. जब उठ जाएगी तब दिखा आएँगे.. चल अब तू यहाँ से निकल.. मैं रेडी होकर नीचे आता हूँ। यहाँ बातें करेंगे तो रश्मि की नींद खराब होगी।
विजय- हाँ.. ये ठीक कहा आपने.. अच्छा मैं नीचे जाता हूँ.. जल्दी रेडी होकर आप भी आ जाओ।
विजय के जाने के बाद दोनों की जान में जान आई, रश्मि ने चादर से मुँह बाहर निकाला और मुस्कुराती हुई जय को देखने लगी।
जय- ऐसे क्या देख रही हो.. अब उठो जल्दी से फ्रेश हो जाओ, उसका कुछ पता नहीं.. दोबारा भी आ सकता है।
रश्मि- मैंने कुछ नहीं पहना है.. आपके सामने कैसे उठ जाऊँ.. पहले आप फ्रेश हो जाओ, उसके बाद मेरे कमरे से मेरे कपड़े लाकर दो.. तब मैं उठूँगी.. समझे..
जय- ओ हो.. अब कैसी शर्म.. रात को तो जलवे दिखा रही थी.. अब क्या हो गया.. जो मेरे सामने नंगी आने में शर्म आ रही है।
रश्मि- चुप करो भाई… आप कुछ भी बोल देते हो! रात की बात और थी.. वो एक नशा था.. अब उतर गया..
जय- तुमने कौन सी ब्राण्डी पी हुई थी जो नशे में थी.. अब वो नशा उतर गया?
रश्मि- ओह.. अब ज़िद मत करो.. जाओ आप पहले फ्रेश हो जाओ और वैसे भी आपने विजय को कहा है कि मेरी तबियत ठीक नहीं है… तो मैं आराम से बाद में फ्रेश हो जाऊँगी। वैसे भी सच में मेरा सारा जिस्म दर्द कर रहा है.. मुझे हल्का सा बुखार भी है..
जय- अरे ऐसा होता है.. पहली बार चुदी हो ना.. अब नास्ता करने के बाद में दवा दिलवा दूँगा.. सब ठीक हो जाएगा। ओके… मैं फ्रेश हो जाता हूँ।
जय के जाने के बाद रश्मि ने नाईटी को देखा तो मुस्कुराते हुए उसे चूम लिया। उसके बाद नाईटी पहन कर वो वापस सो गई।
जय जब बाहर आया तो उसने रश्मि को कहा- अब जाओ.. फ्रेश हो जाओ..
रश्मि- भाई मेरे कपड़े यहाँ नहीं हैं.. आप ऐसा करो.. नीचे देखो कोई ऊपर तो नहीं आ रहा ना… मैं जल्दी से अपने कमरे में चली जाऊँगी।
जय को यह बात ठीक लगी.. तो उसने कमरे से निकल कर देखा कि नीचे कोई नहीं था। उसने रश्मि को इशारा किया कि जल्दी से निकल जाए।
रश्मि बिस्तर से उतरी और स्पीड से जाने लगी.. तो उसकी चूत में दर्द की लहर दौड़ गई.. उसके मुँह से ‘आहह..’ निकल गई।
जय- आराम से मेरी जान.. अब तुम कुँवारी कली नहीं हो.. जो फुदकती हुई चलो.. रात को तुम्हारी सील टूटी है.. चूत में सूजन भी है.. आज का दिन तो आराम से चलो.. कल से भागती फिरना पहले की तरह हा हा हा हा..
रश्मि- आप बहुत बदमाश हो गए हो भाई.. जाओ मैं आपसे बात नहीं करती।
रश्मि मुँह फुला कर वहाँ से निकल गई और सीधे अपने कमरे में चली गई।
जय सीधा नीचे गया.. जहाँ विजय पहले से बैठा हुआ चाय की चुस्कियाँ ले रहा था।
जय- हाय विजय.. आज बड़ी जल्दी रेडी हो गए.. कहीं जाना है क्या?
विजय- जाना तो है.. मगर अब सोच रहा हूँ.. ना जाऊँ..
जय- अरे कहाँ जाना था.. जो अब नहीं जा रहा.. ठीक से बता ना..
विजय- अरे वो हमारे शर्मा जी हैं ना.. उनके यहाँ जाना था। रात को उनका फ़ोन आया था.. बड़े पापा के कुछ पेपर हैं उनके पास.. वही लेकर आना था, मगर अब मूड नहीं कर रहा जाने का.. सोच रहा हूँ.. लंच के बाद ही जाऊँगा।
जय- जैसी तेरी मर्ज़ी.. मगर पापा का कोई फ़ोन तो नहीं आया ना.. ऐसा ना हो कोई जरूरी काम के पेपर हों..
विजय- अरे नहीं नहीं.. ऐसा कुछ नहीं है.. उन्होंने कहा था सुबह 10 बजे तक ना आ पाओ.. तो लंच के बाद ही आना। वो निकल जाएँगे.. अब जाकर कोई फायदा भी नहीं है।
जय- अच्छा ठीक है.. मगर याद से ले आना.. नहीं तो पापा हम दोनों को सुना देंगे।
विजय- डोंट वरी भाई.. ले आऊँगा.. अच्छा रश्मि को उठाया क्या आपने.. देखो तो सही.. उसको क्या हुआ है.. कहीं कोई गड़बड़ हो गई तो हमारी शामत आ जाएगी। आंटी को पता है रात को हम साथ थे और देर से आए थे.. समझे..
जय- अरे कुछ नहीं.. थोड़ा सा बुखार है.. मैंने उठा दिया, अभी आती होगी बस..
विजय- वैसे रात को भी रश्मि की तबियत ठीक नहीं थी.. कुछ अजीब सी घबराहट सी हो रही थी उसको..
जय- अरे कभी बाहर घूमती तो है नहीं.. तो कल थोड़ा अजीब लगा उसको.. अब रोज फ़िरेगी.. तो आदत हो जाएगी।
विजय- वो तो ठीक है.. मगर भाई बड़े पापा को अगर इन सब बातों का पता चल गया.. तो क्या होगा?
जय- तू डरा मत यार.. उनको कैसे पता चलेगा.. चल अब चुप बैठ.. कोई सुन लेगा तो गड़बड़ होगी।
विजय ने हँस कर बात ख़त्म कर दी। दोनों दूसरी बातें करने लगे।
उधर रश्मि बाथरूम में गर्म पानी से चूत की सिकाई के बाद नहाकर बाहर निकली.. उसकी चाल में थोड़ा फरक था.. यानि देखने वाला समझ सकता था कि कुछ ना कुछ गड़बड़ तो जरूर है।
रश्मि- ओ माय गॉड.. मेरे पैर ठीक से ज़मीन पर नहीं टिक रहे.. कहीं किसी को पता ना लग जाए कि रात को क्या हुआ था.. अब क्या करूँ.. क्या करूँ?!
रश्मि सोच में डूबी थी.. तभी उसको आइडिया आया। उसने जल्दी से एक टी-शर्ट और बरमूडा पहना.. बाथरूम के पास जाकर ज़मीन पर पैर पकड़ कर बैठ गई और ज़ोर से चिल्लाई!
विजय- यह तो रश्मि की आवाज़ है.. क्या हुआ उसको.. चलो भाई?
दोनों लगभग भागते हुए उसके कमरे में पहुँचे.. तब तक रश्मि झूटमूट के आँसू निकाल चुकी थी।
विजय- क्या हुआ रश्मि.. ऐसे क्यों बैठी हो.. और चिल्लाई क्यों? सब ठीक तो है ना?
रश्मि- व्व..वो भाई.. मैं फिसल गई.. आह्ह.. मेरा पैर बहुत दर्द कर रहा है.. उफ मॉम.. लगता है.. मोच आ गई है आह्ह..
जय- अरे तुम्हारी तबियत ठीक नहीं थी तो बिस्तर पर आराम करती.. अब देखो डबल प्राब्लम हो गई ना..
विजय- भाई आप कैसी बातें कर रहे हो.. रश्मि तकलीफ़ में है और आप उसे डांट रहे हो। चलो इसे सहारा देकर बिस्तर तक ले जाने में मेरी हेल्प करो और जल्दी से डॉक्टर को फ़ोन लगाओ आप..
जय ने आगे कुछ नहीं कहा और रश्मि को बिस्तर पर लेटा दिया। उसके बाद वो विजय की ओर देख कर बोला- नीचे से डायरी लेकर आओ.. उसमें डॉक्टर का नंबर है।
विजय- ओके मैं अभी लाता हूँ.. तब तक आप रश्मि का ख्याल रखो।
विजय जल्दी से वहाँ से निकल गया।
जय- अरे क्या रश्मि.. ऐसे-कैसे फिसल गई.. हम तो तुम्हारे बीमार होने का नाटक कर रहे थे और तुम सच में बिस्तर पर आ गई?
रश्मि- अपने जैसा बुद्धू समझा है क्या आपने मुझे… ये भी एक नाटक ही है भाई.. हा हा हा..
जय- अरे लेकिन क्यों यार.. ये कोई तरीका है मजाक करने का?
रश्मि- धीरे बोलो भाई.. कोई सुन लेगा.. मेरे पैर रात को आपने घुमा दिए.. अब ऐसे चलती.. तो किसी को भी शक हो जाता.. इसलिए गिरने का नाटक किया। अब कैसे भी चलूँ.. कोई दिक्कत नहीं है..
जय- वाह.. रश्मि.. मान गया तुम वाकयी में मेरी बहन हो.. क्या दिमाग़ लगाया तुमने..
वो दोनों बातें कर रहे थे.. तभी वहाँ विजय आ गया।
विजय- ये लो भाई.. मैं यहाँ परेशान हूँ और आप दोनों गप्पें लड़ा रहे हो.. मैंने डॉक्टर को फ़ोन कर दिया है.. वो कुछ देर में आ जाएगा।
जय- तुमने बहुत अच्छा किया जो डॉक्टर को यहीं बुला लिया। इस हालत में रश्मि को ले जाते तो इसे चलने में ज़्यादा तकलीफ़ होती।
विजय- हाँ मुझे पता है.. पैर की मोच बड़ी तकलीफ़ देती है। एक बार मेरे साथ भी ऐसा हुआ था.. नहाकर निकल रहा था कि पाँव फिसल गया.. बहुत दर्द हुआ था।
जय- हाँ याद है.. कैसे बच्चों की तरह तू रोने लगा था..
विजय- तो क्या हँसता.. उस वक्त?
रश्मि- भाई जिसको लगती है दर्द का अहसास उसी को होता है..
विजय- बिल्कुल सही कहा तुमने रश्मि.. भाई तो उस वक्त बस मजाक बना रहे थे मेरा..
रश्मि- अब आप दोनों झगड़ा मत करो.. एक तो मेरे पैर में बहुत दर्द है.. ऊपर से आप बहस करने लगे।
विजय- अच्छा बाबा सॉरी.. अब नहीं करेंगे.. वैसे मुझे देखने तो दो ज़्यादा चोट तो नहीं आई ना..
रश्मि- अरे भाई क्या देखोगे.. कोई चोट नहीं आई है.. बस पैर मुड़ गया था मेरा.. अब डॉक्टर ही बताएगा कि असल में हुआ क्या है.. कोई मोच है या बस पैर मुड़ने से दर्द हुआ है।
विजय- ये भी सही बात है.. अच्छा ये बताओ मैं जब आया तो भाई आप रश्मि को क्या ‘दिमाग़ लगाया’ बोल रहे थे?
जय- कब कहा मैंने.. ऐसा नहीं.. मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा..
रश्मि- अरे कहा था ना.. इतनी जल्दी भूल गए.. वो दरअसल जब मैं फिसली तो मेरा सर दीवार से टकराने वाला था। मैंने जल्दी से दरवाजा पकड़ लिया.. इसी बात पर आपने कहा था कि अच्छा दिमाग़ लगाया और तभी विजय भाई आ गए तो शायद आप भूल गए।
विजय के अचानक हमले से जय घबरा गया.. मगर रश्मि ने बात को संभाल दिया।
विजय- ओह अच्छा ये बात थी.. थैंक गॉड.. तुम्हें ज़्यादा चोट नहीं आई.. नहीं तो बड़े पापा बहुत गुस्सा होते।
जय- भाई पापा तक ये बात जानी भी नहीं चाहिए।
विजय- टेंशन नॉट.. बड़े पापा को कुछ पता नहीं चलेगा.. इसी लिए मैंने अपने फैमिली डॉक्टर को नहीं बल्कि दूसरे डॉक्टर को बुलाया है।
जय- वाह.. यार तुम तो बड़े समझदार हो।
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06-27-2018, 12:05 PM,
#47
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
जय आगे कुछ बोलता.. तभी काका अपने साथ डॉक्टर को ले आया और वो रश्मि के पैर की जाँच करने लगा।
डॉक्टर- डरने वाली कोई बात नहीं है बस मांस-पेशियों में थोड़ा खिंचाव आ गया है.. अक्सर उल्टी साइड पैर मुड़ने से ऐसा होता है.. मैं दर्द की दवा और ट्यूब लिख देता हूँ.. शाम तक आराम मिल जाएगा।
डॉक्टर के जाने के बाद विजय और जय ने सोचा कि वो दवा ले आएं.. तब तक रश्मि रेस्ट कर लेगी।
विजय- रश्मि तुम रेस्ट करो.. हम दवा लेकर आ जाते हैं।
रश्मि- ओके भाई.. मगर जल्दी आ जाना मैं अकेले बोर हो जाऊँगी।
दोनों के जाने के बाद काका ने पूछा- बिटिया तुम्हारा नाश्ता और जूस यहीं ले आऊँ.?
तो रश्मि ने मना कर दिया कि अभी मूड नहीं है।स
काका के जाने के बाद रश्मि कमरे में टहलने लगी ताकि उसकी चाल ठीक हो जाए और किसी को पता ना लगे।
रश्मि के सर से सारा नशा उतर चुका था, अब उसके अन्दर की बहन जाग गई थी, चलते-चलते अचानक वो रुक गई.. और बिस्तर पर बैठ कर सोचने लगी कि ये उसने क्या कर दिया? अपने ही भाई के साथ उसने सेक्स किया।
ये सब सोच कर उसकी आँखों में आँसू आ गए, वो काफ़ी देर तक वहाँ बैठी रोती रही।
उसके बाद उसने फैसला किया कि जो हुआ वो गलत हुआ.. अब बस इस बात को यहीं ख़त्म कर देगी.. और आगे से ऐसी कोई हरकत नहीं करेगी।
यही सोचते हुए वो काफ़ी देर बैठी रही.. उसके बाद उसने काका को आवाज़ देकर ऊपर बुलाया और नाश्ते के लिए उनसे कहा कि ले आए।
काका- अभी लो बिटिया.. मैंने तो आपको पहले ही कहा था। अब बस 5 मिनट में नाश्ता बना देता हूँ।
काका ने जल्दी से नाश्ता तैयार किया और रश्मि का स्पेशल जूस भी उसको दे दिया। वो कहाँ जानती थी कि अभी कुछ देर पहले जो वो सोच रही थी कि अब ऐसा नहीं करेगी। ये जूस पीते ही उसकी सारी सोच धरी की धरी रह जाएगी और वो वासना के जाल में दोबारा फँस जाएगी।
उधर विजय और जय मेडिकल स्टोर से कुछ दूर थे कि तभी रंगीला वहाँ सामने से आ गया।
रंगीला- अरे क्या बात है.. सुबह-सुबह मेरे दोनों शेर कहाँ शिकार पर जा रहे हैं।
जय- अरे कहीं नहीं यार.. सुबह-सुबह गड़बड़ हो गई। रश्मि फिसल कर गिर गई.. उसके पाँव में चोट आई है।
रंगीला- अरे बाप रे, तो तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो.. किसी डॉक्टर के पास लेके जाओ उसको यार..
विजय- अरे पूरी बात सुने बिना बोले जा रहे हो.. उसे कुछ नहीं हुआ.. बस मामूली सी चोट है.. डॉक्टर को घर बुलाया था कुछ दवा लिखी है.. वही लेने आए हैं हम।
रंगीला- ओह.. ऐसा क्या.. मैं कुछ और ही समझ बैठा.. चलो थैंक गॉड.. रश्मि को कुछ नहीं हुआ।
जय- हाँ यार.. वैसे तुम इतनी सुबह कहाँ जा रहे हो?
रंगीला- अरे कहीं नहीं.. एक प्लॉट के लिए पापा ने मैसेज किया था.. वही देखने जा रहा हूँ। अब तुम मिल गए तो चलो ना यार साथ चलते हैं.. मैं अकेला बोर हो जाता।
विजय- अरे क्या साथ चलूँ.. वहाँ रश्मि बेचारी दवाई के लिए वेट कर रही है और हम तेरे साथ चलें..
जय- अरे विजय ऐसा कर.. तू चला जा रंगीला के साथ.. मैं दवा ले जाता हूँ।
रंगीला- हाँ ये सही रहेगा, दोनों काम साथ हो जाएँगे, उसके बाद आते वक्त मैं भी रश्मि से मिल लूँगा।
विजय को बात समझ आ गई.. तो वो रंगीला के साथ चला गया और जय अकेला आगे बढ़ गया।
रश्मि ने नाश्ता ख़त्म किया और अपने बिस्तर पर टेक लगा कर बैठ गई। वो कुछ सोच रही थी कि तभी जय वहाँ आ गया।
जय- अरे क्या बात है मेरी बहना.. किस सोच में डूबी हुई हो?
रश्मि- कुछ नहीं भाई.. पता नहीं आजकल मुझे क्या हो रहा है। कुछ अजीब सी बेचैनी मन में रहती है। दिमाग़ कहाँ से कहाँ चला जाता है। देखो ना.. हमने क्या कर दिया? ये पाप हमसे कैसे हो गया.. मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा.. मैं इतनी गंदी हरकतें कैसे करने लगी हूँ.. छी:.. और आपने भी मेरा साथ दिया।
जय- हैलो.. ये क्या बोल रही हो.. जो हुआ वो तुम चाहती थीं.. मैंने तो बहुत मना किया.. मगर तुम कहाँ मानी.. अब जो हो गया.. उसको भूल जाओ और ये अचानक तुम कैसी बातें करने लगी हो। मैं गया.. तब तक तो बिल्कुल ठीक थी।
रश्मि- पता नहीं भाई.. मैं बहुत बड़ी उलझन में हूँ.. कभी तो ऐसा लगता है कि बस आप ही मेरे सब कुछ हो.. आपसे लिपट कर खूब प्यार करूँ.. कभी लगता है.. कि यह गलत है।

जय- अरे मेरी जान.. ऐसा कुछ नहीं है.. तुम वासना की आग में जल रही थीं.. तो मैंने तुम्हारी प्यास मिटाने की कोशिश की है.. मगर लगता है रात की चुदाई काफ़ी नहीं है.. तुमको दोबारा ठंडी करना होगा.. तभी तुम्हारा दिमाग़ ठिकाने पर आएगा।
रश्मि- चुप रहो भाई.. ऐसी बातें मत करो.. मुझे अजीब सा महसूस हो रहा है।
जय- अच्छा अच्छा.. नहीं करता.. ये लो ये गोली खा लो.. इससे दर्द कम होगा और ये क्रीम चूत पर अच्छे से लगा लेना.. सूजन ठीक हो जाएगी।
रश्मि- छी:.. भाई आप कितने गंदे हो.. कैसी बातें कर रहे हो.. सीधे नाम ले रहे हो.. मुझे तो बहुत अजीब सा लग रहा है।
जय हैरान हो गया कि ये रश्मि को अब क्या हो गया.. रात को तो कुछ और ही जलवे दिखा रही थी.. अब अचानक सती सावित्री कैसे बन गई?
जय- सॉरी रश्मि.. मगर तुम्हें तकलीफ़ थी.. तो ये ले आया और हाँ ये गोली भी ले लेना.. रात को हमने जो किया उससे कहीं कोई गड़बड़ ना हो जाए। जैसे पेट में बच्चा वगैरह.. तुम समझ रही हो ना..
रश्मि- हाँ समझ रही हूँ और वैसे विजय भी साथ गया था.. उसके सामने ये सब कैसे लिया आपने?
जय- वो रंगीला के साथ किसी काम से गया है। अब पैर में मोच का तो बहाना था.. तो उस दवा के बजाए मैं ये सब ले आया।
रश्मि- ओके ठीक है भाई.. अब आप यहाँ से जाओ.. प्लीज़ मुझे कुछ देर अकेला रहना है।
जय बिना कुछ बोले वहाँ से चला गया, उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि रश्मि अचानक बदल कैसे गई, रात को तो उसका मूड कुछ और ही था और अब कुछ और?
जय अपने कमरे में जाकर मोबाइल पर टाइमपास करने लगा।
जय के जाने के बाद रश्मि ने दवा ली और बाथरूम में जाकर अपनी चूत पर अच्छे से क्रीम भी लगाई।
रश्मि पर दोबारा से गोली का असर शुरू हो गया था, वो अपने कमरे में आई और बिस्तर पर बैठ गई। उसको रात की चुदाई याद आने लगी.. उसका जिस्म वो सोच कर उत्तेजित होने लगा।
रश्मि- ओह गॉड.. यह क्या हो रहा है.. अभी मैंने सोचा था.. जो हुआ वो सब अब दोबारा नहीं करूँगी.. मगर मेरा जिस्म मेरे दिमाग़ का साथ नहीं दे रहा.. नहीं नहीं.. यह भाई और बहन की चुदाई का खेल अच्छा है.. इसमें कोई बुराई नहीं है। काजल ने भी तो अपने भाई के साथ किया था और ना जाने कितने लोग करते होंगे। अब मैंने कर लिया तो कौन सा गुनाह हो गया। नहीं.. मैंने जय को नाराज़ किया है.. अब जाकर उसको मनाती हूँ।
रश्मि कमरे से निकली और सीधी जय के कमरे में चली गई।
उस वक़्त वो मोबाइल में बिज़ी था.. तो रश्मि ने उसको पीछे से जाकर पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर एक चुम्बन कर दिया।

जय- अरे रश्मि छोड़ो मुझे.. तुम यहाँ क्यों आई हो?
रश्मि- सॉरी भाई.. मैंने आपसे ठीक से बात नहीं की। वो दरअसल मेरा दिमाग़ खराब था उस वक्त..
जय- अच्छा अब ठिकाने आ गया क्या.. खुद ही मुझे बहनचोद बना दिया और खुद ही ज्ञान देने लगी थीं।
रश्मि- भाई प्लीज़ ‘सॉरी’ कहा ना मैंने.. अब ऐसा नहीं कहूँगी.. आप तो मेरी जान हो आई लव यू भाई..
जय- आई लव यू टू मेरी जानेमन.. रात की मस्त चुदाई के बाद सुबह तक तुम ठीक थीं.. अचानक क्या हो गया था?
रश्मि- पता नहीं भाई.. मेरे दिमाग़ में अचानक बात आई कि हमने गलत किया मगर अब लगता है.. सब सही था। अभी भी मेरी चूत फड़फड़ा रही है।
जय- क्या बात है मेरी जान.. सुबह-सुबह चुदाई का मूड बना लिया.. मगर ये वक़्त और जगह सही नहीं है.. कोई भी आ सकता है। अब तुम मेरी वाइफ तो हो नहीं.. जो किसी भी वक्त तुम्हें चोद सकूँ।
रश्मि- ओह भाई.. तो रोका किसने है.. बना लो ना मुझे अपनी वाइफ..
जय- मेरी जान रात का इन्तजार करो.. आज तो पहले तेरी मस्त गाण्ड मारूँगा मैं.. बड़ा मन मचल रहा है मेरा.. तेरी गाण्ड मारने को..
रश्मि- अच्छा भाई मार लेना.. अभी प्लीज़ कुछ करो ना.. मुझे बड़ी बेचैनी हो रही है।
जय- अरे कोई आ गया तो मुसीबत हो जाएगी.. ऐसा करो बाथरूम में जाकर उंगली से काम चलाओ अभी.. रात को सुकून से तुम्हारी चुदाई करूँगा।
रश्मि ने बहुत ज़िद की.. मगर जय जानता था कि इस वक्त चुदाई करना मुश्किल होगा। फिर भी उसने हिम्मत करके रश्मि को किस किया और बाथरूम तक छोड़ आया।
रश्मि भी समझ गई कि जय नहीं मानेगा.. तो उसने अपने आप को उंगली से शान्त किया। उसकी बेचैनी तो ख़त्म हो गई.. मगर नशा नहीं उतरा। उसको अभी भी यही लग रहा था कि जब तक लौड़ा अन्दर नहीं जाएगा.. उसको चैन नहीं मिलेगा।
रश्मि अब थोड़ी ठंडी हो गई थी और वो जय को कहीं बाहर चलने को कह रही थी.. तभी विजय भी आ गया।
उसने पूछा- अब पैर का दर्द कैसा है?
तो रश्मि ने कहा- दवा से ठीक हो गया।
तीनों ने बाहर जाने का प्लान बना लिया और सब रेडी होने अपने-अपने कमरों में चले गए।
उधर जेम्स और निधि बैठे हुए बातें कर रहे थे.. भाभी थकी हुई थीं तो उनको नींद आ गई थी।
निधि- जेम्स मेरे भैया ठीक तो हो जाएँगे ना?
जेम्स- अरे होंगे क्यों नहीं.. इतने बड़े अस्पताल में ऐसे ही लेकर आए है क्या हम?
निधि- भगवान जल्दी मेरे भाई को अच्छा करे।
जेम्स- अरे फिकर मत कर.. सब अच्छा ही होगा। तू भी थोड़ा आराम कर ले.. रात से सोई नहीं.. तुझे भी नींद आ रही होगी।
निधि- तुम भी तो जागे हो हमारे साथ.. तुम भी सो जाओ.. वो दोपहर तक भाई के पास जाने भी नहीं देंगे।
जेम्स- बिस्तर पर तो भाभी सोई हैं.. ऐसा करते हैं हम दूसरे कमरे में जाकर सो जाते हैं..
निधि- हाँ ये सही रहेगा.. ऐसे तो यहाँ नींद आएगी भी नहीं।
दोनों दूसरे कमरे में चले गए और बिस्तर पर लेट गए। निधि ने करवट ली और सोने की कोशिश करने लगी। जेम्स का ध्यान निधि की गाण्ड पर गया.. तो वो सरक कर उसके पीछे चिपक गया।
निधि- क्या करते हो.. सोने दो ना..
जेम्स- मेरी रानी तुझे यहाँ सोने के लिए साथ लाया हूँ क्या.. आज तक उस खटिया पर ही तेरी ठुकाई की है। आज अच्छा मौका मिला है.. ऐसा नर्म बिस्तर और तेरी मुलायम गाण्ड देख कर मेरा लंड उछलने लगा है। चल जल्दी से कपड़े निकाल.. मुझे तेरी गाण्ड मारनी है। उसके बाद सो जाना।
निधि- क्या जेम्स… ये कोई समय है गाण्ड मारने का.. भाभी जाग गई तो?
जेम्स- अरे भाभी उठ जाएगी तो उसकी भी गाण्ड मार दूँगा। चल देर ना कर मेरी थकान लौड़े को ठंडा करके ही उतरेगी।
निधि ने सलवार निकाल दी.. मगर जेम्स को लगा ऐसे मज़ा नहीं आएगा। उसने निधि को प्यार से पूरी नंगी कर दिया।
निधि- क्या जेम्स पूरे कपड़े क्यों निकाले.. तुमको तो बस गाण्ड मारनी थी ना.. ऐसे ही मार लेते?
जेम्स- अरे मेरी बुलबुल.. चूत मारो या गाण्ड… पहले चूचे चूसने में मज़ा आता है.. लौड़े को पूरा गर्म करके ही चुदाई होती है।
निधि- अच्छा.. तो मैं भी लौड़ा चूस के मज़ा लूँगी। मुझे उसमें मज़ा आता है और हाँ तुम मेरी फुद्दी भी चाटना.. ठीक है ना..!
जेम्स- अरे मेरी बुलबुल.. ये भी कोई कहने की बात है क्या.. तेरी फुद्दी को तो चाट कर ठंडा कर दूँगा और तेरे मुलायम होंठों के रस से ही तो लौड़ा चिकना होगा और आराम से तेरी गाण्ड में जाएगा।
इतना कहकर जेम्स निधि के अनारों को चूसने लगता है, अपने हाथ से उसकी चूत को रगड़ने लगता है।
निधि- आह्ह.. जेम्स ससस्स.. तुम भी कपड़े निकालो ना.. मुझे मेरा प्यारा गन्ना चाहिए.. आह्ह.. धीरे दबाओ ना.. आह्ह.. दुख़ता है..
जेम्स- अरे क्या नखरे करती है.. कितनी बार तेरे चूचे दबा चुका हूँ.. चूत और गाण्ड को ढीला कर चुका हूँ.. अब भी नाटक करती है.।
निधि- तेरा गन्ना भी तो देख कितना बड़ा है.. जब भी मुँह में जाता है.. सांस गले में अटक जाती है।
जेम्स- हाँ ये तो है लौड़ा तो बड़ा ही है.. मेरा मगर तेरी भी हिम्मत की दाद देता हूँ.. साली दोनों तरफ़ से पूरा मज़ा देती है तू.. पहले तो चिल्ला-चिल्ला कर कान के पर्दे खराब कर दिए थे तूने.. अब तू मस्त मज़ा देती है।
निधि- अब बातें ही करते रहोगे या मेरा गन्ना मुझे दोगे..
जेम्स ने कपड़े निकाल दिए और निधि का हाथ पकड़ कर लौड़े पर रख दिया।
जेम्स- ये ले.. अब तू ज़्यादा बात मत करना.. जल्दी से इसे चूस कर चिकना बना दे ताकि तेरी गाण्ड में आराम से चला जाए।
निधि- मैं कहाँ बात कर पाऊँगी.. अब ये जो मेरे मुँह को बन्द कर देगा। चलो सीधे लेट जाओ.. हम उस तरह करेंगे जैसे पहले किया था। तुम मेरी फुद्दी चाटना और में तुम्हारा गन्ना चुसूंगी।
जेम्स समझ गया कि यह क्या चाहती है.. वो सीधा लेट गया। उसके पेट पर उल्टी साइड निधि भी लेट गई। अब उसकी फूली हुई चूत जेम्स के मुँह के पास थी और उसने घप से जेम्स का लौड़ा मुँह में ले लिया था।
दोनों की चुसाई का प्रोग्राम शुरू हो गया और कोई 15 मिनट तक ये चलता रहा।
जेम्स जीभ की नोक से चूत को चोद रहा था.. जिसे निधि ज़्यादा देर बर्दाश्त ना कर सकी और उसके मुँह में झड़ गई।
जेम्स उसका सारा चूतरस गटक गया और चूत को चाट-चाट कर एकदम साफ कर दिया।
जेम्स- बस मेरी बुलबुल.. अब हट भी जा.. तेरी चूत का लावा तो मैं पी गया। अब मेरे लौड़े को भी तेरी गुफा में जाने का रास्ता दे दे..
निधि ऊपर से उठते हुए बोली- तुम फुद्दी को चूत क्यों कहते हो.. मैंने कितनी बार तुम्हारे मुँह से यह सुना है?
जेम्स- मेरी जान इसका असल नाम यही है.. शहर के लोग इसको चूत ही कहते हैं यह बोलने में भी अच्छा लगता है। अब ये सवाल बाद में पूछना.. जल्दी से घोड़ी बन जा.. मुझे तेरी गाण्ड मारनी है। मेरा लौड़ा तो तूने चूस कर लोहे जैसा बना दिया है.. अब तरसा मत..
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06-27-2018, 12:05 PM,
#48
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
निधि को पता था कि जेम्स अब पूरा गर्म हो गया है, अब उसको ज़्यादा तड़पाना ठीक नहीं है.. नहीं तो वो उसको झटके दे दे कर तड़पा देगा, वो चुपचाप घोड़ी बन गई।
जेम्स ने गाण्ड के छेद पर लौड़े को रखा और धीरे से धक्का दिया, उसका सुपारा अन्दर चला गया।
निधि- आह.. धीरे से डालो ना.. दुख़ता है आई..
जेम्स- अबे चुप साली.. कितनी बार तो गाण्ड मरवा चुकी है.. अब काहे का दुख़ता है..
निधि- अरे तेरा लौड़ा कोई छोटा सा है क्या.. जो नहीं दु:खेगा.. जब भी अन्दर जाता है.. दर्द होता है। वैसे भी कितने दिन हो गए तुझे गाण्ड में घुसाए.. अब दु:खेगा ही ना..
जेम्स- अच्छा.. अच्छा.. अब ठीक से सीधी हो जा… एक बार दु:खेगा बाद में नहीं.. अब मैं पूरा घुसा देता हूँ।
जेम्स ने एक जोरदार धक्का मारा.. तो पूरा लौड़ा गाण्ड की गहराई में समाता चला गया।
निधि- आह आह.. जेम्स.. तू तो पूरा घोड़ा है रे.. आह्ह.. कितना लंबा लौड़ा है तेरा.. जान ही निकाल देता है।
जेम्स- अब पूरा घुस गया ना.. चल मजबूती से टिकी रह.. अब तेरी सवारी करता हूँ.. ठका ठक.. ठका ठक..
इतना कहकर जेम्स स्पीड से निधि की गाण्ड मारने लगा, उसकी पॉवर तो आपको पता ही है, निधि को सांस भी नहीं लेने दे रहा था.. घपाघप लौड़ा अन्दर-बाहर कर रहा था।
निधि- आहह आह्ह.. आईईइ.. मर गई रे माँ.. आह्ह.. जल्दी से चोद ले.. आह्ह.. निकाल दे पानी.. आह्ह.. आह्ह.. ऐइ..
लगभग 20 मिनट तक जेम्स गाण्ड को चोदता रहा, निधि बेचारी थक कर चूर हो गई थी, उसके झटके थे भी पॉवरफुल.. वो छोटी सी जान कहाँ सह पाती, आख़िर निधि पेट के बल लेट गई और लौड़ा गाण्ड से निकल गया।
जेम्स- अबे साली पसर क्यों गई.. थोड़ी देर और करने देती.. पानी आने ही वाला था मेरा..
निधि- ना जेम्स.. मेरी कमर दु:खने लगी है.. रात की नींद भी है.. तू मेरे मुँह को चोद ले.. वैसे भी तेरा रस पिए बहुत दिन हो गए हैं..
जेम्स- अच्छा ये बात है.. तो ले मेरी रानी.. सीधी लेट जा.. आज तेरे मुँह को ही चोद कर पूरा मज़ा लूँगा।
निधि सीधी लेट गई और जेम्स उस पर सवार हो गया, उसके मुँह को चोदने लगा, बीच-बीच में वो रुक जाता.. तो निधि उसके सुपारे को होंठ दबा कर चूसती.. उसकी गोटियों पर जीभ घुमाती।
ऐसे ही 15 मिनट और निकल गए। अब जेम्स की नसें फूलने लगी थीं.. वो स्पीड से निधि के मुँह को चोदने लगा और आख़िरकार उसने अपना सारा रस उसके मुँह में भर दिया।
निधि ने सारा माल पी लिया.. अपनी जीभ से लंड को साफ किया।
जेम्स- आह.. अब मज़ा आया.. रात की सारी थकान उतर गई.. अब आएगी सुकून की नींद.. चल कपड़े पहन ले.. नहीं तो तेरी जवानी को देख कर मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो जाएगा।
निधि- बस बस.. पहली बार में ही तू जान निकाल देता है.. दूसरी बार तो तेरा पानी निकलने का नाम ही नहीं लेता। तू भी कपड़े पहन ले और मुझसे दूर होकर सोना.. नहीं तो तेरा क्या भरोसा.. फिर से तेरे जी में आ गया.. तो.. मेरी चूत का कबाड़ा हो जाएगा।
जेम्स- हा हा हा.. साली मज़ा भी लेती है और डरती भी है.. चल अब नहीं करूँगा.. सो जा.. नहीं तो तेरी भाभी आ जाएगी और उसकी भी चुदाई मुझे करनी पड़ेगी।
दोनों अब सुकून की नींद सो गए थे।
अब यहाँ से वापस रश्मि के पास चलते हैं, अब तक वो रेडी हो गई होगी।
जय और विजय रेडी होकर रश्मि के कमरे के बाहर खड़े नॉक कर रहे थे.. मगर अन्दर से कोई जबाव नहीं आ रहा था।
विजय- अरे यार ये रश्मि को अब क्या हो गया.. लगता है सो गई है..
जय- अरे नहीं रे.. ये लड़कियों के हमेशा नखरे होते हैं रेडी होने में कुछ ज्यादा ही वक्त लगाती हैं।
विजय- ओ मेरी प्यारी बहना.. अब आ भी जा.. कितना वक्त लगावगी यार..
रश्मि ने दरवाजा खोला.. तो दोनों उसको देखते ही रह गए।
रश्मि ने ब्लैक शॉर्ट्स पहना हुआ था जिसमें से उसकी मोटी जांघें खुली हुई थीं.. उस पर स्लीवलैस लाल टी-शर्ट.. ऊपर से ब्लैक जैकेट.. वो भी स्लीबलैस ही था, उसमें रश्मि कयामत लग रही थी।
जय- वाउ यार.. रश्मि तुम बहुत अच्छी लग रही हो..
विजय- सच में रश्मि.. तुम बहुत अच्छी लग रही हो। अब बोलो तुम्हें कहाँ जाना है।
रश्मि- कहीं भी भाई.. बस घूमने का मज़ा आना चाहिए।
विजय- ठीक है.. आज हम ऐसी जगह जाएँगे.. जहाँ खूब मस्ती करेंगे.. एयरलिफ्ट में आसमान की सैर करेंगे।
रश्मि- ओह.. वाउ.. आप फनपार्क की बात कर रहे हो.. वहाँ तो बहुत मज़ा आएगा।
तीनों घर से निकल गए और फनपार्क में चले गए। वहाँ बहुत से लड़कों की नज़र रश्मि पर टिकी हुई थीं.. हर कोई उसकी गाण्ड को देख कर अपना लौड़ा सहला रहा था। मगर ये कोई मामूली लड़की तो थी नहीं.. जो कोई इसको छू कर मज़ा ले लेता। इसके साथ इसके दोनों भाई जो मौजूद थे। हाँ ये अलग बात है कि जय खुद मस्ती मजाक में उसको छू कर मज़ा ले रहा था।
अब यहा इनको मज़ा करने दो। यहाँ कुछ खास है भी नहीं.. आपको सीधे शाम का सीन दिखा देती हूँ।
दोपहर को जेम्स और निधि सुकून की नींद में थे। उनको भाभी ने उठाया और तीनों फ्रेश होकर बाहर लंच करने गए, उसके बाद हॉस्पिटल में चले गए और शाम तक वहीं रहे।
नर्स- चलो अब यहाँ मत रहो.. आप लोगों को समझ क्यों नहीं आता.. आपका मरीज आईसीसीयू में है.. उससे आप मिल तो सकते नहीं.. तो यहाँ बैठने से क्या फायदा.. हम हैं ना देखभाल के लिए.. अब आप सब जाओ सुबह कोई एक आ जाना.. डॉक्टर से मिल लेना। अब जाओ समझे..
जेम्स- ठीक है.. हम वो सामने की बिल्डिंग में ही हैं.. अगर कोई बात हो तो बता देना.. हम आ जाएँगे।
नर्स- अच्छा अच्छा.. अब जाओ यहाँ से..
वो तीनों वापस फ्लैट में आ गए।
निधि बाथरूम चली गई..
तब भाभी ने जेम्स से कहा- वो आदमी आएगा तो निधि यहीं रहेगी उसके सामने.. कैसे कुछ हो पाएगा..
जेम्स- तुम उसकी फिकर मत करो.. मैं उसको समझा दूँगा, वो दूसरे कमरे में सो जाएगी।
भाभी- अच्छा ठीक है.. मगर तुमको पक्का पता है कि वो आदमी मेरे साथ चुदाई के लिए ही आएगा।
जेम्स- अरे कितनी बार बताऊँ उसका इशारा यही था। अब आप बार-बार एक ही बात मत पूछो।
भाभी कुछ कहतीं.. तभी वहाँ बिहारी आ गया, उसको देख कर दोनों एकदम से चुप हो गए।
बिहारी- का हाल है… कोना जरूरी बतिया हो रही थी का?
जेम्स- अरे नहीं नहीं बिहारी जी.. आइए ना.. हम तो बस ऐसे ही बात कर रहे थे कि आप बहुत अच्छे इंसान हो..
बिहारी- अच्छा बोल कर हमको गाली ना दो.. हम कोई अच्छा नहीं हूँ.. तुमको काम याद है ना.. कुछ देर बाद जाना है हमार आदमी के साथ..
जेम्स- अरे हाँ.. बिहारी जी.. याद है और मैंने भाभी को भी समझा दिया है। आप यहीं रहना इनके साथ.. इनको संभाल लेना..
बिहारी होंठों पर जीभ घुमाने लगा, वो कुछ कहना चाहता था.. तभी निधि वहाँ आ गई।
बिहारी- ई कौन वा.. सुबह तो नहीं देखा हम इसको?
भाभी- यह मेरी ननद है.. सुबह अपने भाई के पास थी अस्पताल में..
बिहारी सवालिया नजरों से जेम्स की तरफ़ देखता है कि अब क्या होगा?
जेम्स- बिहारी जी आपसे एक बात करनी है.. आप मेरे साथ बाहर आएँगे..
बिहारी बाहर चला जाता है। उसके पीछे जेम्स भी चला जाता है।
जेम्स- देखिए बिहारी जी.. मैं जानता हूँ अपने हमें ये जगह क्यों दी है। मैं निधि को समझा दूँगा.. वो दूसरे कमरे में सो जाएगी। आप आराम से अपना काम कर लेना।
बिहारी- तोहार को देख कर ही हम समझ गया था.. तू बड़ा समझदार है। ये छोकरी बीच में तो नहीं आएगी ना.. अच्छी तरह समझा देना..
जेम्स ने बिहारी को भरोसा दिलाया कि निधि नहीं आएगी और उसको कुछ पता भी नहीं लगेगा- आप आराम से अपना काम कर लेना।
बिहारी- ये हुई ना बात.. अभी हम चलता हूँ.. एक घंटा बाद हमार आदमी तोहार को लेने आएगा.. उसके साथ चले जाना पीछे से मैं तोहार भाभी का अच्छे से ख्याल रख लूँगा।
बिहारी के जाने के बाद जेम्स वापस अन्दर गया.. तब तक भाभी निधि को बता चुकी थीं कि इस भले आदमी ने ही हमको यहाँ रहने दिया है।
जेम्स- निधि तुम उस कमरे में जाओ मुझे भाभी से कुछ जरूरी बात करनी है।
निधि- अरे मेरे सामने कह दो ना..
जेम्स- तुम्हें भी बता दूँगा.. अब जाओ भी यहाँ से..
निधि मुँह फुला कर दूसरे कमरे में चली गई।
जेम्स- भाभी अभी बिहारी से मेरी बात हो गई है.. उसको खुश कर देना बस और निधि को मैं समझा दूँगा। वो कमरे में रहेगी! ठीक है ना?
भाभी- अब तुम कहते हो तो ठीक है, मगर निधि को क्या कहोगे?
जेम्स- वो सब तुम मेरे पर छोड़ दो.. मैं उसको समझा दूँगा।
भाभी को समझा कर जेम्स निधि के पास गया.. वो गुस्से में थी।
जेम्स- अरे मेरी बुलबुल.. ऐसे गुस्सा क्यों हो गई.. मैं बताता हूँ ना…
निधि- नहीं मुझे पता है.. अब कुछ और ही बात बताओगे.. अगर बतानी होती तो वहीं बता देते।
जेम्स- अरे मेरी जान तुम कुछ नहीं समझती.. तेरी भाभी से तेरे सामने ये बात नहीं कर सकता था।
निधि- ऐसी क्या बात है बताओ मुझे..
जेम्स ने उसको बिहारी की पूरी बात बताई और ये भी समझा दिया.. उसकी भाभी नहीं चाहती कि उसको ये पता लगे इसलिए उनकी चुदाई के वक्त तू यहीं रहना.. बाहर मत जाना.. नहीं वो काला सांड तेरी भी ठुकाई कर देगा। अभी तो उसकी नज़र में तू छोटी बच्ची है.. मगर उसने तेरे पर गौर कर लिया ना.. तो देख लेना.. फिर तुझे उसका काला लौड़ा चूसना पड़ सकता है।
निधि- छी:.. ना बाबा मैं ना चुसूंगी उसका लौड़ा..
जेम्स- हाँ तो बस.. जब तक मैं आकर आवाज़ ना दूँ.. तू यहाँ से बाहर ना जाना.. समझी ना..
निधि- हाँ समझ गई.. मगर मुझे भाभी की चुदाई देखनी है।
जेम्स- अरे पागल हो गई क्या.. कैसे देखेगी.. अगर बिहारी की नज़र पड़ गई तेरे पर.. तो जानती है.. क्या होगा?
निधि- वो चिंता तू ना कर.. मैं ये दरवाजे की चाभी का छेद है ना.. इसमें से देख लूँगी..
जेम्स- अच्छा देख लेना.. और ज़्यादा गर्म हो जाओ.. तो उंगली ना करना.. मैं रात को बड़े प्यार से तेरी चूत की गर्मी निकाल दूँगा।
निधि- ओये होये.. मेरा जेम्स कैसे निकालेगा.. भाभी भी तो यही होगीं..
जेम्स- भाभी के सोने के बाद तेरी चुदाई करूँगा मेरी बुलबुल.. और वैसे भी वो काला सांड आज भाभी को चोदकर थका देगा.. जल्दी सो जाएगी वो.. समझी..
जेम्स बाहर आया और भाभी को समझा दिया कि निधि बाहर नहीं आएगी, अब तुम खुलकर बिहारी के साथ चुदाई करना। उसको खुश कर देना ताकि जब तक यहाँ रहे.. वो हमें कुछ ना कहे।
भाभी- जेम्स तुम कहते हो तो ठीक है.. मगर यह तो बता सुबह तूने निधि की चुदाई की है क्या?
जेम्स- हाँ की है ना.. उसकी गाण्ड मारी है.. क्यों क्या हुआ?
भाभी- तुम दोनों को उस कमरे में सोया देख कर मैं समझ गई थी। तू पक्का हरामी है.. चोदे बिना थोड़े ही माना होगा। बेचारी थकी हुई थी और थका दिया उसको..
जेम्स- अभी कहाँ थकाया है.. रात को देखना.. मैं उसकी चूत का भुर्ता कैसे बनाता हूँ।
भाभी- उसको ही चोदता रहेगा क्या.. मुझे भी तो तेरे लौड़े की आदत है.. मेरे बारे में ज़रा भी नहीं सोचा..
जेम्स- अरे भाभी.. मेरी जान.. आज तो बिहारी तेरी ठुकाई करेगा। फिर कहाँ तुम्हारे अन्दर मेरे लंबे लौड़े से चुदवाने की ताक़त रहेगी।
भाभी- उसको देख कर लगता तो नहीं.. कि वो मेरी प्यास बुझा पाएगा और पता नहीं उसका कितना बड़ा होगा.. कहीं लुल्ली निकली.. तो मुझे कहाँ मज़ा आएगा।
जेम्स- अरे नहीं.. उसका जिस्म देख कर लगता है हथियार भी भारी होगा।
भाभी- देख जेम्स.. अगर उसने मुझे संतुष्ट ना किया.. तो रात को तू मेरे साथ ही सोएगा, निधि को चुपचाप सोने को बोल देना।
जेम्स- अरे उसको क्यों सोने को बोलूँ? मेरे लौड़े में इतना पॉवर है कि दोनों की ठुकाई एक साथ कर सकता हूँ।
भाभी- नहीं नहीं जेम्स.. तू जानता है मैं निधि के सामने चुदाई नहीं कर सकती।
जेम्स- तुम दोनों की अजीब बात है.. दोनों को पता है कि मैं दोनों की चुदाई करता हूँ.. फिर भी सामने चुदवाने से ना कहती हो.. वो भी यही कहती है..
भाभी- देख जेम्स हमारे बीच ये परदा जो है.. इसको रहने दे.. यही हम सब के लिए सही होगा।
जेम्स ने ज़्यादा ज़िद नहीं की और भाभी से बातें करता रहा।
करीब 40 मिनट बाद बिहारी का एक आदमी आ गया और जेम्स उसके साथ वहाँ से चला गया। जाने से पहले वो दोबारा निधि के पास गया और उसको बता गया कि अब थोड़ी देर बाद खेल शुरू होगा, वो बाहर बिल्कुल ना निकले।
जेम्स के जाने के बाद भाभी बाथरूम में चली गई। उसको पता था बिहारी कभी भी आ सकता है.. इसलिए जो करना है अभी कर ले। उसके बाद तो चुदाई का खेल शुरू हो जाएगा, उसको कहाँ वो काला सांड कहीं जाने देगा।
जेम्स के जाने के 20 मिनट बाद बिहारी वहाँ आ गया और बिस्तर पर बैठ गया, उसके हाथ में दारू की बोतल थी।
भाभी- आइए मालिक.. बोलिए मैं आपकी क्या सेवा करूँ?
बिहारी- अरे सेवा तो हम करूँगा तोहार, तनिक दो गिलास तो लाओ जानेमन.. पहले कुछ गला गीला कर लें..
भाभी- यहाँ कहाँ गिलास हैं.. पूरा घर खाली पड़ा है?
बिहारी- अरे रसोई में जाओ.. वो दराज में हम रखा हूँ गिलास.. वो प्लास्टिक वाला है न.. वही ले आओ..
भाभी कुछ नहीं बोली और रसोई में चली गई। वहाँ प्लास्टिक के कुछ गिलास रखे हुए थे.. वो एक ले आई।
बिहारी- अरे मेरी जान.. एक काहे ले आई तुम नहीं पिओगी का?
भाभी- नहीं में नहीं पीती.. आप पी लो..
बिहारी ने भाभी को खींच कर अपने पास बैठा लिया और कहा- तुम अपने हाथों से पिलाओ मुझे..
काफ़ी देर तक भाभी उसको शराब पिलाती रही.. और वो शराब के साथ साथ भाभी के मम्मों को दबाता रहा। उसकी चूत को सहलाता रहा। भाभी भी कहाँ पीछे रहने वाली थी। वो भी उसके लौड़े को टटोल कर देखने लगी कि कितना बड़ा है। इसी तरह शराब का दौर ख़त्म हो गया और बिहारी ने भाभी को नंगा करना शुरू कर दिया।
भाभी पहले तो थोड़ी शरमाई.. मगर नंगी होने के बाद खुलकर बिहारी का साथ देने लगी।
उधर निधि आराम से सारा खेल देख रही थी।
भाभी- मुझे तो नंगा कर दिया। अब अपने भी कपड़े निकालो.. मुझे भी तो अपना लंड दिखाओ.. कैसा है?
बिहारी- कपड़े के ऊपर से अंदाज़ा नहीं ना लगाया तुमने.. तो ले खोल के दिखा देता हूँ तेरे को..
बिहारी नंगा हो गया उसका 8″ का काला लंड देख कर भाभी के मुँह में पानी आ गया.. क्योंकि वो काफ़ी मोटा था और भाभी जानती थी कि ये चूत में जाएगा तो मज़ा खूब आएगा।
बिहारी- ये लो रानी देख लो ये है हमार लौड़ा.. अब तनिक तोहार चूचियां हमको चूसने दो.. बड़ा मान बेचैन है हमार..
भाभी बिस्तर पर लेट गई और इशारे से बिहारी को अपने पास बुलाया। बिहारी ने भाभी को बाँहों में ले लिया और उसके निप्पल चूसने लगा।
काफ़ी देर तक बिहारी कभी होंठ चूसता.. कभी उसके मम्मों का मज़ा लेता.. वो एकदम गर्म हो गया और भाभी की चूत भी फुदकने लगी थी, अब कहाँ बर्दाश्त होने वाला था, बिहारी ने अपना मोटा लंड चूत पर रखा और जोरदार झटका मारा, एक ही बार में 8″ का लौड़ा चूत में घुसा दिया।
भाभी- आईई.. मर गई रे.. आराम से डालते.. आह्ह.. आपका लौड़ा बहुत मोटा है आह्ह.. मेरी जान निकाल दी..
बिहारी- हमार तरीका ऐसन ही है.. एक ही बार में पूरा लौड़ा ठोक कर घुसेड़ देते हैं। अब तोहार को काहे का दर्द हो रहा है.. तुम तो हमका बहुत लौड़े खाई हुई लगती हो..

भाभी कुछ नहीं बोली और बस मुस्कुरा दी। बिहारी के मुँह से शराब की बदबू आ रही थी.. मगर भाभी को इसकी आदत थी। उसका पति भी तो शराबी ही था।
अब चुदाई का खेल शुरू हो गया, बिहारी कस-कस के शॉट लगा रहा था और भाभी गाण्ड उठा-उठा कर उसका साथ दे रही थीं।
अन्दर निधि ये सब देख कर गर्म हो रही थी। उसकी चूत में पानी आने लगा था वो अपने हाथ से चूत को दबा कर बैठी थी।
भाभी की चूत को ठंडा करने के बाद बिहारी ने अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया और उसको घोड़ी बना कर फिर से चोदने लगा।
भाभी- आह्ह.. छोड़ो.. आह्ह.. तुम्हारा इतना मोटा लंड लेने में मज़ा आ रहा है.. आह्ह.. ज़ोर से करो आह्ह…
भाभी की ‘आहें’ बिहारी को और जोश दिलाने लगीं, वो उसकी कमर को पकड़ कर स्पीड से चोदने लगा।
भाभी दोबारा उत्तेजित हो गई थीं.. वो भी गाण्ड को पीछे करके झटके देने लगी।
करीब 20 मिनट बाद दोनों एक साथ झड़ गए, बिहारी का पूरा माल भाभी की चूत में भर गया, अब दोनों शान्त होकर लेट गए थे।
बिहारी- बहुत मजेदार चूत है तोहार.. मज़ा आ गया… हम तुमको घोड़ी बनाया ओ वक्त गाण्ड पर गौर किया.. तोहार गाण्ड भी गजब है.. इसको ठोकने में भी दुगुना मज़ा आएगा.. साली इस बार हम गाण्ड ही मारूँगा।
भाभी- उफ.. तुम्हारे जैसा हट्टा-कट्टा मर्द बोले.. तो ना कहने का सवाल ही नहीं होता। मेरी चूत की आग तो मिट गई है अबकी बार गाण्ड की खुजली भी मिटा देना।
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06-27-2018, 12:05 PM,
#49
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
दोनों काफ़ी देर तक बातें करते रहे, इस दौरान बिहारी कभी भाभी के होंठ चूमता.. तो कभी उसके मम्मों का मज़ा लेता रहा।

अन्दर निधि बहुत ज़्यादा गर्म हो गई थी उसका बड़ा मन किया कि उंगली डालकर अपनी आग शान्त कर ले.. मगर फिर उसने सोचा कि ये आग और भड़कने देती हूँ.. ताकि रात को जेम्स से चुदाई का मज़ा आ जाए।
निधि ने बड़ी मुश्किल से अपने आपको कंट्रोल किया। उसको एक आइडिया आया वो अन्दर के बाथरूम में गई.. और पेशाब करने बैठ गई ताकि उसकी तड़प कुछ तो कम हो जाए।
उधर जेम्स को वो आदमी एक गाड़ी में किसी सुनसान जगह ले गया… जहाँ पहले से एक गाड़ी खड़ी हुई थी। उसमें से कुछ लकड़ी के बॉक्स जेम्स और इस आदमी ने अपनी गाड़ी में रखे और वापस घर की तरफ़ चल दिए।
इधर बिहारी का लौड़ा अब दोबारा खड़ा होने लगा था।
बिहारी- हमार आदमी के साथ तोहार जेम्स आता ही होगा। जल्दी से तोहार नर्म होंठ में हमार लौड़ा ले लो.. ताकि ये पूरा खड़ा हो जाए और हम तोहार गाण्ड का सवाद भी चख लें..
भाभी अब पूरी मस्ती में आ गई थीं। ऐसे तो उसका मन वो काला लंड चूसने का नहीं था मगर उसकी ऐसी मस्त चुदाई करने वाला लौड़ा अब उसको पसंद आ गया था, उसने जल्दी से लौड़े को चूसना शुरू कर दिया और बिहारी मज़े में आँख बन्द करके लेट गया।
कुछ ही देर में उसका लौड़ा एकदम लोहे जैसा सख़्त हो गया.. तो बिहारी ने भाभी को घोड़ी बनाया और ‘घप’ से लौड़ा उसकी गाण्ड में घुसा दिया।
वो बस सिसक कर रह गई।
करीब 20 मिनट तक बिहारी एक सांस उसको चोदता रहा। उसको पता था जेम्स किसी भी पल आ सकता है इसलिए वो जल्दी अपना माल निकाल देना चाहता था और उसने ऐसा ही किया, अपनी उतेजना बढ़ा कर वो भाभी की गाण्ड में झड़ गया।
पानी निकलने के बाद बिहारी ने जल्दी से कपड़े पहने और भाभी को कहा- तुम भी कपड़े पहन लो.. वो बस आते ही होंगे।
साथ-साथ ये भी कह दिया कि अगली बार फ़ुर्सत में आएगा.. तो भाभी के साथ पूरी रात मज़ा करेगा।
भाभी ने भी कपड़े पहन लिए और दोनों बातें करने लगे।
लगभग 5 मिनट बाद जेम्स उस आदमी के साथ वहाँ लकड़ी के बॉक्स लेकर आ गया।
भाभी- अरे आ गए तुम.. ये सामान किसका है.. इसमें क्या है?
बिहारी- हमने बताया था ना.. ये हमार कुछ जरूरी सामान है.. इसको छेड़ना भी मत.. उस कमरे में आराम से रख दो। हम कल आकर ले जाऊँगा इसको..
निधि ने भाभी की गाण्ड मराई भी देख ली थी। अब वो बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी। उसकी आँखें एकदम लाल सुर्ख हो गई थीं। जेम्स के आने के बाद वो बिस्तर पर जाकर बैठ गई। उसको पता था अब ये सामान इस कमरे में लेकर आएँगे, उसने सारी बात सुन ली थी।
जैसे ही जेम्स और वो आदमी उस कमरे में सामान लेकर आए.. उनके पीछे बिहारी भी अन्दर आ गया और सामान को एक कोने में रखवाने लगा।
तभी बिहारी की नज़र निधि पर गई, उसने बड़े गौर से उसको देखा और मुस्कुरा के वहाँ से निकल गया।
कुछ देर वो जेम्स को समझाता रहा कि इस सामान को छेड़ना मत.. कल वो आकर इसे ले जाएगा और अपने आदमी के साथ वहाँ से निकल गया।
उन लोगों के जाते ही निधि भी बाहर आ गई और भाभी के पास बैठ गई। वो ऐसे बर्ताव कर रही थी कि जैसे जेम्स के आने के बाद अभी नींद से जागी हो।
भाभी- अरे निधि तू सो गई थी क्या?
निधि- हाँ भाभी आँख लग गई थी। जब जेम्स कमरे में आया तो आँख खुल गई। ये आदमी बहुत अच्छा है अपना सामान भी कोने में रखा.. ताकि हमको कोई परेशानी ना हो।
भाभी- हाँ सही कहा तूने.. अच्छा जेम्स अब मेरी बाहर जाने की हिम्मत नहीं है। थोड़ा बुखार सा लग रहा है.. तुम खाना यहीं ले आओ ना.. बहुत जोरों की भूख लगी है।
जेम्स- अरे हाँ क्यों नहीं भाभी.. आप कब से ‘मेहनत’ जो कर रही हो।
जेम्स ने यह बात भाभी की तरफ़ आँख मारते हुए कही थी।
निधि- कैसी मेहनत भाभी..?
भाभी- अरे कुछ नहीं.. इसकी तो आदत है.. कुछ भी बोल देता है..
निधि मन ही मन मुस्कुराई कि आप कितना भी बहाना बनाओ.. मैंने सब देख लिया है कि कैसे बिहारी ने आपको उलट-पुलट करके चोदा है। अब भूख तो लगेगी ही।
जेम्स भी मुस्कुराता हुआ वहाँ से बाहर निकल गया।
निधि कुछ कहना चाहती थी.. मगर उसको पता था इस वक्त जेम्स उसकी वासना नहीं मिटा पाएगा.. क्योंकि भाभी को खाना खिलाने के बाद ही कुछ हो पाएगा। तो वो अपने मन की बात मन में लेकर वहीं बैठी रही।
दोस्तो, जेम्स वापस आए.. तब तक रश्मि के पास चलते हैं। अब तक तो उनका घूमना-फिरना हो गया होगा।
वहाँ उन लोगों ने बहुत मस्ती की.. रश्मि को थोड़ी घबराहट हुई तो विजय ने उसको नींबू पानी पिला दिया.. जिससे उसका नशा उतर गया। दरअसल उस दवा की काट यही है। अब इत्तफाक से ही सही.. मगर रश्मि का नशा उतर गया था। वो ज़्यादा खुल कर मज़े लेने लगी थी।
वहाँ चाट खाना.. डांसिंग कार में बैठना.. सब कुछ एंजाय किया उसने और शाम को थक हार कर वो तीनों घर आ गए..
काका ने बताया कि काम्या जी दो दिन तक घर नहीं आएंगी। कोई बहुत बड़े बाबाजी आए हैं.. तो त्यागी जी के घर सत्संग में रहेगीं। वहीं सबके खाने-पीने और रहने का बंदोबस्त किया है।
जय ने यह सुनकर मन ही मन कहा कि रश्मि अब घर में बड़ा कोई नहीं है, अब मैं तेरी गाण्ड को बड़े आराम से मारूँगा। मैं बहुत चोदूंगा तेरे को.. आह्ह.. मज़ा आ जाएगा..
विजय- काका मैं बहुत थक गया हूँ प्लीज़ मुझे परेशान मत करना.. रात को खाने के लिए अगर मैं ना आऊँ तो बुलाना मत… मैं अपने आप आ जाऊँगा। अभी थोड़ा सोना चाहता हूँ मैं.. सर भी दर्द कर रहा है।
काका- आप कहो तो कोई दवा ले आऊँ.. आपके लिए बेटा जी?
विजय- अरे नहीं नहीं काका.. सुबह से घूमना-फिरना कुछ ज्यादा हो गया ना.. तो थकान सी हो गई है। आराम करूँगा तो अपने आप ठीक हो जाऊँगा।
काका- बेटा वो एसी वाला भी आया था.. लगाकर चला गया है। उसने कहा है कि कल उसकी माँ बीमार हो गई थी.. इसलिए नहीं आ पाया.. उसने माफी भी माँगी है।
जय- तभी मैं सोचूँ कि वो ऐसा तो नहीं कर सकता.. कुछ ना कुछ बात तो जरूर हुई होगी। चलो अब अच्छा है.. रश्मि तुम आज रात आराम से अपने कमरे में सो पाओगी।
रश्मि- हाँ भाई.. सही कहा आपने आज अकेली सुकून से सोऊँगी और आप भी मेरी वजह से परेशान नहीं होंगे।
जय- अरे मुझे क्या परेशानी हुई है.. तुम भी कैसी बात करती हो। चलो तुम जाकर चेंज कर लो.. मैं भी चेंज करके थोड़ी देर में तुम्हारे कमरे में आता हूँ।
रश्मि- क्यों.. आप मेरे कमरे में क्यों आ रहे हो?
जय- अरे एसी चैक करने आऊँगा ना.. बराबर काम कर रहा है या नहीं..
रश्मि मुस्कुराती हुई बोली- अब चैक क्या करना.. उसने ठीक किया है तभी लगा कर गया है.. हाँ.. आपको देखना है तो आ जाना.. मुझे आपके आने से कोई दिक्कत नहीं है..
इतना कहकर रश्मि अपने कमरे में चली गई और जय अपने कमरे में घुस गया।

रश्मि और जय अब चेंज करने चले गए हैं तो यहाँ से वापस आपको बिहारी के पास लेकर चलती हूँ.. वहाँ एक नया ट्विस्ट आपका इन्तजार कर रहा है या यूँ कहो कि एक पुराना राज खुलने वाला है।
भाभी की मस्त चुदाई करने के बाद बिहारी बहुत खुश हो गया था.. उसने रंगीला को फ़ोन किया और बता दिया कि सारा माल यहाँ रख दिया है।
तो रंगीला ने कहा- तुम वहीं रूको.. मैं कुछ देर में वहीं आता हूँ।
बिहारी वहीं बिल्डिंग के नीचे खड़ा होकर रंगीला का इन्तजार करने लगा.. उसका आदमी वहाँ से चला गया था।
जेम्स नीचे आया तो उसने बिहारी को वहाँ देखा.. तो उसके पास चला गया।
जेम्स- क्या हुआ बिहारी जी.. यहाँ क्यों खड़े हो गए.. आपका भाभी से मन नहीं भरा क्या?
बिहारी- अरे हम तो हमार काम से हियाँ खड़ा हूँ.. मगर सच कहूँ तोहार भौजी एकदम मल्लिका सेरावत जैसन वा.. मज़ा आ गया साली को चोदने में.. उसकी चूत और गाण्ड ऐसी कसी हुई है.. कि बस चोदते रहो.. चोदते रहो.. मन ही नहीं भरता.. कभी भी..
जेम्स- अच्छा इतनी पसन्द आ गई आपको.. तो कल फिर आ जाना.. किसने रोका है.. बस हमारे भाई जी ठीक हो जाएं.. तब तक हमें यहाँ रहने देना और कुछ मदद कर सको.. तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी।
बिहारी- अरे तुम चिंता काहे करता है.. हम हूँ ना.. जब तक चाहो.. यहाँ रहो और हम कल आऊँगा ना.. तो कुछ माल भी दे दूँगा.. तुम लोग आराम से खाओ-पियो.. मज़ा करो।
जेम्स- बहुत मेहरबानी जी आपकी..
बिहारी- अभी कहाँ जा रहे हो तुम..?
जेम्स- यहाँ खाना बनाने का तो कुछ है नहीं.. तो बाहर से ही लाते हैं बस वो सामने वाले होटल से खाना लाने जा रहा हूँ।
बिहारी- अरे उस साला छोड़ के पास काहे खाना लाते हो.. वो हरामी यहाँ हॉस्पिटल में आए लोगों को लूटने बैठा है.. तुम ऐसा करो.. वो सामने की गली से जाओ.. सीधे जाकर बाएँ मुड़ जाना.. उसके बाद दो बिल्डिंग के आगे एक मस्त होटल है.. वहाँ से खाना ले आओ और हाँ उसको पैसा मत देना.. बस कह देना बिहारी ने भेजा है.. जो पसन्द आए ले आना..
जेम्स- जी बहुत अच्छा.. मैं कह दूँगा उसको.. अच्छा अब मैं जाता हूँ।
जेम्स खुश होकर वहाँ से चला गया। अब खाना भी फ्री में मिलने वाला है और कल कुछ पैसे भी मिल जाएँगे.. तो मज़ा ही मज़ा है।
जेम्स के जाते ही रंगीला वहाँ आ गया उसने दूर से उसको बिहारी से बात करते हुए देखा था, अब रंगीला को उसकी जाते हुए की पीठ दिखाई दी।
बिहारी- अरे आओ रंगीला महाराज.. अब तो आपको कोई शिकायत नहीं है ना.. आपका माल सही सलामत रख दिया हूँ।
रंगीला- क्या बात है.. आज बड़े खुश दिखाई दे रहे हो.. और वो लड़का कौन था.. जिससे बातें कर रहे थे।
बिहारी- अरे अब तुमो का बताऊँ भाई.. आज तो रात होने के पहले ही मूड बन गया.. साली क्या मस्त माल थी.. चोदने में मज़ा आ गया।
रंगीला- अरे ये कोई वक्त है चुदाई का.. कौन मिल गई तुझे इतनी जल्दी?
बिहारी- अरे वो लड़का गया है ना.. उसकी भाभी को चोदा है.. अब अपने फ्लैट में है.. तो कभी भी चोद लो.. क्या फ़र्क पड़ता है।
रंगीला- अपने फ्लैट में.. कहाँ?
बिहारी ने शुरू से अब तक की सारी बात रंगीला को बताई तो रंगीला गुस्सा हो गया कि यहाँ हमारा माल रखने के लिए ये जगह मैडम ने दी है तुम यहाँ अय्याशी कर रहे हो।
बिहारी- अरे इतना भड़कता काहे हो.. उन लोगन को हमार माल के बारे में कुछ पता नहीं है.. बेचारे वो तो बीमार के साथ आए हैं।
रंगीला- हाँ ठीक है.. ठीक है.. तेरा नसीब अच्छा है.. तुझे कहीं ना कहीं से जुगाड़ मिल ही जाता है.. वैसे ये भाभी में क्या रखा है.. कोई कच्ची कली हो.. तो बात भी बने..
बिहारी- अरे मौके पर जो मिले.. वही अच्छा होता है.. वैसे उनके साथ एक कच्ची कली भी है.. मगर छोटी है.. नहीं तो उसका भी काम तमाम कर देता मैं.. वैसे उसकी आँखों में मैंने एक नशा देखा है.. जरूर ससुर की नातिन ने मुझे उसकी भाभी को चोदते हुए देख लिया होगा.. कल ट्राइ करूँगा साली को.. आजमा के देखूँगा..
रंगीला- क्या बात करता है.. कली है.. और चुदाई भी देखी है.. तो जरूर अभी तक गर्म होगी.. चल ऊपर जाकर उस कली को छूकर देखते हैं कितनी गर्मी है उसके अन्दर.. वैसे भी बहुत दिन से कोई अच्छा माल नहीं मिला..
बिहारी- अरे इसमें सोचने जैसी का बात है.. चलो अभी दिखा देते हैं।
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06-27-2018, 12:06 PM,
#50
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
वो दोनों फ्लैट में ऊपर चले गए.. भाभी तो थकी हुई थीं.. तो निधि ने ही दरवाजा खोला.. जिसे देख कर रंगीला के मुँह में पानी आ गया।
निधि बिहारी को देख कर एक तरफ़ हट गई.. वो दोनों अन्दर चले आए।
भाभी आराम से लेटी हुई थीं.. उनको देख कर जल्दी से बैठ गईं।
बिहारी- अरे लेटो.. लेटो.. कोई बात नहीं है.. ये हमारा दोस्त है.. जो सामान हम इहाँ रखा हूँ ना.. ये बस उको देखने आए हैं आप काहे तकलीफ़ करती हो.. आ बछिया.. तोहार कमरे में जो हम सामान रखवाया हूँ ना.. वो साहेब को दिखा लाओ.. जाओ..।
बिहारी ने ये बात रंगीला की तरफ़ आँख मारते हुए कही थी। रंगीला भी समझ गया कि बिहारी उसको निधि के साथ अकेला क्यों भेज रहा है.. ताकि वो चैक कर सके कि लोहा अभी भी गर्म है या नहीं.. अगर है तो हथौड़ा मार देना चाहिए।
निधि- आइए बाबूजी.. मैं दिखा देती हूँ आपको.. वो अन्दर कोने में पड़ा है आपका सब सामान..
निधि आगे-आगे और रंगीला उसके पीछे उसकी गाण्ड को घूरता हुआ कमरे में चला गया।
बिहारी- का हाल है आपका.. मज़ा आया कि नहीं चुदाई में?
भाभी- क्या बात करते हो आप.. ऐसा मज़ा आया कि मैं बता नहीं सकती..
बिहारी इधर-उधर की बातों में भाभी को उलझाए हुए था.. उधर कमरे में जाकर रंगीला ने निधि को फंसाने के लिए अपना जाल फेंका।
निधि- ये रहा आपका सब सामान।
रंगीला- हाँ वो तो ठीक है.. मुझे तुमसे कुछ पूछना है.. सही-सही जवाब दोगी ना?
निधि- हाँ बाबूजी.. पूछो क्या पूछना है.. मैं सब सही ही बताऊँगी।
रंगीला- ये जो बाहर मेरा दोस्त बैठा है ना.. ये थोड़ा रंगीन मिज़ाज का है। ये आज कब से यहाँ है और क्या-क्या किया इसने यहाँ?
निधि ने रंगीला को शाम की बात बताई कि कैसे ये आया और जेम्स को अपने आदमी के साथ भेजा.. उसके बाद से ये यहीं है.. भाभी से बातें कर रहा था।
रंगीला- ये जेम्स नाम कहीं सुना हुआ सा लगता है.. चल जाने दो। ये जब भाभी के पास था.. तुम यहाँ क्या कर रही थी?
निधि- मैं तो यहाँ सो रही थी।
रंगीला- देखो सच-सच बताओ ये मेरा दोस्त ठीक आदमी नहीं है.. अकेली औरत देख कर इसके मन में गंदे विचार आते हैं। इसने जरूर कुछ ना कुछ तो किया ही होगा।
रंगीला ये बात बोलते वक्त निधि को घूर रहा था और उसकी हालत देखकर वो समझ गया कि इससे बात उगलवाना आसान है.. क्योंकि निधि थोड़ी घबरा गई थी।
निधि- न..नहीं.. तो.. ऐसा तो उसने कुछ नहीं किया.. वो बस बैठ कर भाभी से बातें कर रहा था।
रंगीला- तुम झूठ मत बोलो.. तुम सोई नहीं थी.. मुझे पता है तुमने जरूर कुछ देखा है.. सच बता दो.. नहीं कल से यहाँ रहने नहीं दूँगा।
निधि घबरा गई कि इसको जरूर पता लग गया है.. कि यहाँ क्या हुआ था। अब बात छुपा कर कोई फायदा नहीं है।
निधि- आ..आप उनको मेरा नाम ना बताना.. मैं आपको सब बता देती हूँ।
रंगीला तो यही चाहता था.. चिड़िया जाल में फँस गई थी। उसने बड़े प्यार से निधि को विश्वास दिलाया कि वो बस पूछ रहा है.. किसी को कुछ नहीं बताएगा।
निधि- व्व..वो आपके दोस्त मेरी भाभी के साथ कर रहे थे.. मैंने चाबी के छेद से सब देख लिया था। मैं डर गई थी तो चुपचाप सो गई।
रंगीला- अच्छा क्या कर रहे थे दोनों.. मुझे खुलकर बता.?
अब निधि एक अनजान आदमी के सामने कैसे सब साफ-साफ बता देती कि उसकी भाभी को वो चोद रहा था और वो देखकर मज़ा ले रही थी।
निधि- व्व..वो मुझे शर्म आती है.. सब बताने में.. बस वो बिना कपड़ों के एक-दूसरे से चिपके हुए थे। मैंने इतना ही देखा और सो गई..
रंगीला- अच्छा शर्म आती है.. और तुमने कुछ नहीं देखा.. ये बातें किसी और को बताना.. तुमने दोनों की चुदाई बड़े आराम से देखी है और शायद मज़ा भी लिया है।
निधि- नहीं नहीं.. बाबूजी ये गलत है.. मैंने कुछ नहीं देखा और ये चुदाई क्या होती है.. मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं है।
निधि एकदम अनजान बनने की नाकाम कोशिश कर रही थी.. मगर रंगीला जैसे चालाक आदमी से वो जीत थोड़े ही सकती थी। वो ठहरा एक नंबर का कमीना आदमी.. उसकी आँखों में वासना साफ दिखाई दे रही थी।
निधि की बात सुनकर उसने निधि का हाथ पकड़ा सीधे उसके मम्मों पर हाथ रख दिया।
रंगीला- अच्छा अगर तुम कुछ नहीं जानती.. तो तुम्हारी धड़कन इतनी तेज कैसे चल रही है।
निधि- बाबूजी आप ये क्या कर रहे हो.. अपना हाथ हटाओ यहाँ से.. मुझे अजीब सा लग रहा है।
रंगीला- ओ लड़की.. अब ज़्यादा नाटक मत कर.. सही-सही बता दे.. नहीं अभी का अभी धक्के मार कर यहाँ से निकाल दूँगा सबको.. 
रंगीला का गुस्सा देख कर निधि डर गई और तोते की तरह एक ही बार में सारी दास्तान उसको सुना दी।
रंगीला- वाह.. ये हुई ना बात.. अच्छा तुझे वो सब देख कर मज़ा आया ना..
निधि ने शर्माते हुए ‘हाँ’ में सर हिला दिया.. तो रंगीला का हौसला और ज़्यादा बढ़ गया।
रंगीला- अच्छा.. मेरे पास बैठ सिर्फ़ देखकर ही मज़ा लेगी क्या.. कभी खुद भी करके देख.. दुगुना मज़ा मिलेगा तुझे..
निधि ने शर्माते हुए कहा- मुझे ये मज़ा बहुत अच्छा लगता है.. मैंने बहुत बार मज़ा लिया है..
रंगीला- अरे तेरी की.. साली दिखने में तो तू छोटी सी बच्ची लगती है.. और लण्ड खा चुकी है.. तब तो ठीक है.. मैं तो सोच रहा था मेरा लौड़ा तू कैसे ले पाएगी। चल आज नए लौड़े का सवाद चख कर देख.. कितना मज़ा मिलेगा तुझे..
निधि- कैसी बात करते हो बाबूजी.. भाभी बाहर हैं और कुछ देर में जेम्स भी आता ही होगा।
रंगीला- अरे भाभी तो चुदवा कर मज़ा ले चुकी है.. उसकी परवाह तू मत कर.. और जेम्स का बंदोबस्त भी मैं कर दूँगा। वो इतनी जल्दी आने वाला नहीं है।
इतना कहने के साथ ही रंगीला ने निधि को अपनी बाँहों में भर लिया और उसके नर्म होंठों को चूसने लगा।
निधि तो पहले से ही फुल गर्म थी.. वो रंगीला का विरोध कैसे करती। उसने अपने आपको ढीला छोड़ दिया और रंगीला का साथ देने लगी।
उधर बाहर भाभी को अहसास हुआ कि निधि सामान दिखाने गई थी.. कितनी देर हो गई.. अब तक आई क्यों नहीं.. तो उसने बिहारी से कहा- आपके दोस्त को गए बहुत देर हो गई है।
बिहारी- आप काहे चिंता करती हैं हमार दोस्त अच्छे से सब सामान देख रहा होगा.. हम बैठा हूँ ना यहाँ आपके पास.. हमसे बतियाय लो।
भाभी को शक हुआ कि कहीं वो निधि के साथ कुछ कर ना ले.. मगर फिर उसने सोचा वो कौन सी कुँवारी है.. अगर करता है तो करे.. उसको तो बिहारी ने सुकून दे ही दिया है।
दो मिनट के लंबे किस के बाद रंगीला अलग हुआ और निधि को बिस्तर पर उठा कर पटक दिया।
निधि- बाबूजी आप तो बहुत बेसबरे हो.. पहले भाभी और जेम्स को तो देख लो..
रंगीला- तू बस दो मिनट रुक.. मैं अभी उनका इंतजाम करके आता हूँ।
रंगीला बाहर गया तो भाभी बस उसको देखने लगी और बिहारी जल्दी से उठकर रंगीला के पास गया। रंगीला ने बिहारी को समझा दिया कि उसको क्या करना है।
बिहारी के चेहरे पर चमक आ गई.. उसने कहा- तुम मज़ा करो बाकी मैं संभाल लूँगा।
रंगीला वापस अन्दर चला गया और बिहारी भाभी के पास आकर बैठ गया।
भाभी- क्या हुआ बिहारी जी.. क्या कहा आपके दोस्त ने आपसे?
बिहारी- तनिक सब्र तो करो मेरी जान.. बता दूँगा पहले एक फुनवा तो कर लूँ.. नहीं तो तोहार लाड़ला देवर वहाँ से खाना लेकर निकल जाएगा।
बिहारी ने एक फ़ोन किया और कहा- एक लड़का खाना लेने आएगा.. उसके नाम से उसको आराम से बैठा के रखना.. कम से कम आधा घंटा बाद ही उसको उसकी पसन्द का खाना देना.. समझ गए?
भाभी- यह अपने क्या किया.. जेम्स को क्यों रोक दिया वहाँ?
बिहारी- इतनी भी भोली ना बनो मेरी जान.. हमार दोस्त का दिल तोहार ननदिया पर आ गया है। अब ऊ उसको चुदाई का खेल सिखाएगा।
भाभी- ये क्या बोल रहे हो आप.. वो अभी छोटी है.. भगवान के लिए ऐसा मत करो.. कहीं कुछ हो गया तो?
बिहारी हँसने लगा और भाभी के बाल पकड़ कर ज़ोर से खींच दिए।
बिहारी- अरे मेरी जान.. ऊ कोई नया खिलाड़ी नहीं है.. जो कछु हो जाएगा.. ऊ तो बहुत बड़ा खिलाड़ी है चूतों का.. अब ज़्यादा नाटक मत कर.. वो अन्दर मज़ा ले.. तब तक मेरा लौड़ा चूस कर मज़ा दे हमको.. ले चूस हमार लवड़ा..
भाभी ने थोड़ी देर ज़िद बहस की.. उसके बाद मान गई।
वैसे भी उसके मन में ये बात आई कि जेम्स का लौड़ा जब निधि खा गई.. तो यह शहरी छोकरा उसका क्या बिगाड़ देगा। बस यही सोचकर वो बिहारी के लण्ड को चूसने लगी।
उधर रंगीला वापस अन्दर गया.. तो निधि बिस्तर पर बैठी हुई उसका इन्तजार कर रही थी, वो पहले ही गर्म थी और कुछ उसको रंगीला ने गर्म कर दिया था।
निधि- क्या हुआ बाबूजी.. कहाँ गए थे आप.. और भाभी कहाँ है?
रंगीला- अरे मेरी रानी.. सब ठीक हो गया। तेरा वो जेम्स अब देरी से आएगा और तेरी भाभी तो शुरू हो गई बिहारी के साथ.. अब बस में तेरी चूत का मज़ा लूँगा। उफ़फ्फ़ साली तेरी चूत के बारे में सोच कर ही मेरा लौड़ा फनफ़ना गया।
निधि के गाल शर्म से लाल हो गए थे। वो मुस्कुराने लगी.. तो रंगीला उसके पास गया और उसको चूमने लगा।
कुछ ही देर में उसने निधि को नंगी कर दिया और उसके कच्चे अनारों को चूसने लगा। उसको निधि के मम्मों चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
फिर उसने निधि की चूत को देखा.. तो देखता रह गया। बिना बालों की फूली हुई चूत.. उसके सामने थी। वो बस बैठाहाशा उसको चाटने लगा।

निधि- आह्ह.. उफ़फ्फ़.. बाबूजी.. मज़ा आ रहा है.. आह्ह.. ज़ोर से चाटो.. आह्ह.. आज ये बहुत तड़प रही है.. आह्ह.. इसको ठंडा कर दो आह्ह.. उफ़फ्फ़..
रंगीला- मेरी जान.. तेरे में तो बहुत गर्मी है.. आज कस के शॉट लगाऊँगा.. तो सारी गर्मी निकाल दूँगा तेरी मैं.. बाद में ना कहना दु:खता है.. निकाल लो..
निधि- मैंने जिस लौड़े से शुरुआत की है ना.. उससे बड़ा तो होगा नहीं आपका लौड़ा.. तो मुझे डर किस बात का?
रंगीला- मेरा लौड़ा देखेगी.. तो अपने यार का लौड़ा भूल जाएगी। लड़कियाँ देख कर डर जाती हैं समझी?
निधि- अच्छा ऐसी बात है.. तो दिखाओ..
रंगीला ने पैन्ट निकाल दी.. साथ में अंडरवियर भी हटा दी। उसका 8″ का लौड़ा फुंफकारता हुआ बाहर आ गया।
निधि- वाह.. बाबूजी.. ये तो बहुत अच्छा है.. मज़ा आ जाएगा.. मगर एक बात कहूँ.. मेरे वाले से छोटा है..
यह बात सुनकर रंगीला हैरान हो गया.. इत्ती सी छोकरी.. उसके लौड़े को छोटा बता रही है.. इसने किसका लौड़ा ले लिया.. जो उससे भी बड़ा होगा..
निधि- क्या सोचने लगे बाबूजी.. अपने लौड़े को मुझे चूसने नहीं दोगे क्या?
रंगीला- साली.. तू दिखती छोटी है.. मगर चुदक्कड़ बहुत बड़ी है.. पता नहीं किसने तेरी चूत को खोला होगा। साला जरूर कोई दमदार बंदा ही होगा.. जिसका मेरे से भी बड़ा है..
निधि बस मुस्कुरा के रह गई और जल्दी से रंगीला के लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगी।
रंगीला- आह्ह.. साली.. मज़ा आ गया.. चूस और.. ले अन्दर.. आज तेरी चूत को इसका स्वाद भी चखा दूँगा.. आह्ह.. पहले तू इसका स्वाद ले ले..
निधि मज़े से लौड़े को चूसे जा रही थी और रंगीला उसके मुँह में झटके दे रहा था।
कुछ देर बाद रंगीला ने लौड़ा उसके मुँह से निकाल लिया और उसको नीचे लेटा कर उसके पैर मोड़ दिए।
रंगीला- वाहह.. मेरी जान बहुत मस्त चूसती है तू लौड़ा.. अब मेरी बारी है तेरी चूत को ठंडी करने की.. अब तेरी चूत में लौड़ा जाएगा.. तभी मज़ा डबल होगा।
इतना कहकर रंगीला ने लौड़े को चूत पर रखा और एक ज़ोर का धक्का मार दिया पूरा 8″ का लौड़ा सरसराता हुआ चूत में समा गया।
निधि- आइई.. रे.. मर गई रे.. बाबूजी.. एक साथ ही घुसा दिया.. आह्ह.. आराम से करते ना.. आह्ह..
रंगीला- क्यों साली.. तू तो इससे भी बड़ा लौड़ा खा चुकी है.. तो दर्द कैसा?
निधि- ऐसे एक साथ घुसाओगे तो दर्द होगा ही ना.. अब नहीं हो रहा.. चोदो आह्ह.. जल्दी-जल्दी से मुझे चोदो.. मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है।
रंगीला- अभी ले मेरी जान.. हावड़ा मेल अब तैयार है चलने के लिए..
इतना कहकर रंगीला स्पीड से निधि की ठुकाई करने लग गया, वो 10 मिनट तक उसकी ज़बरदस्त चुदाई करता रहा।
निधि- आ..आह्ह.. बाबूजी.. आह्ह.. मेरा रस निकल रहा है.. उई ज़ोर से करो.. आह्ह.. निकल गया.. आह्ह.. आह..
निधि गाण्ड को उठा कर झड़ने लगी।
रंगीला ने भी स्पीड कम कर दी, वो उसको प्यार से देखने लगा।
जब वो शान्त हो गई.. तो रंगीला ने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।
रंगीला- तेरी चूत तो कमाल की है.. चल अब जल्दी से घोड़ी बन जा.. थोड़ा सवाद मेरे लण्ड को तेरी गाण्ड का भी चखने दे।
निधि को पता था.. रंगीला ऐसे जल्दबाज़ी क्यों कर रहा है.. ये वक्त और जगह ही ऐसी थी। उसने बिना कुछ कहे रंगीला की बात मान ली और घोड़ी बन गई।
रंगीला- कसम से अगर तू कुँवारी होती तो तेरे दोनों होल खोलने में बड़ा मज़ा आता। साली क्या ज़बरदस्त गाण्ड है तेरी.. एकदम मलाई की तरह।
रंगीला ने लौड़े को गाण्ड के छेद पर रखा और ‘घप’ से अन्दर पेल दिया। निधि तो सुकून में थी.. उसकी चूत की आग जो मिट गई थी। अब गाण्ड में लौड़ा तो उसके लिए बोनस जैसा था, वो मज़े से गाण्ड मरवा रही थी.. साथ-साथ गाण्ड को पीछे-पीछे धकेल कर रंगीला का मज़ा दुगुना कर रही थी।
रंगीला- आह्ह.. साली.. आह्ह.. तू पक्की चुदक्कड़ है.. आ ले आह्ह.. मेरा पूरा लौड़ा खा गई.. ले मेरा भी रस निकलने वाला है.. आह्ह.. भर दूँगा तेरी गाण्ड को मैं.. आह्ह.. आह्ह..
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