Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
08-25-2018, 04:07 PM,
#21
RE: Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
विनीता जानती थी कि अब सौरभ उसको उतारने की कहेगा पर उसने सोच लिया था कि अपने बेटे को उस जन्नत के नज़ारे को अभी नही दिखाएगी उसने कहा- बेटा पैंटी को रहने दो हमारे बीच थोड़ा परदा तो रहना चाहिए तुम इसके उपर से ही साबुन लगा लो सौरभ के लिए तो इतना भी बहुत था ,जैसे ही उसने पैंटी पर अपना हाथ रखा उसके हाथो से साबुन नीचे गिर गयी विनीता की हँसी छूट गयी सौरभ ने चूत को कच्छी के उपर से ही अपनी मुट्ठी मे भरा और दबा दिया विनीता के मुँह से आह निकली 

क्या हुआ मम्मी पूछा उसने

कुछ नही बेटा तुम अपना काम करो 
साबुन से चिकनी हो चुकी कच्छी और टाँगो पर काफ़ी सारा झाग हो गया था सौरभ ने थोड़ा सा आगे बढ़ने को सोचा और अपनी एक उंगली कच्छी की साइड से पैंटी के अंदर सरका दी विनीता ने इसकी उम्मीद नही की थी पर वो चुप ही रही सौरभ धीरे धीरे अपनी उंगली को मम्मी के झान्टो पर रगड़ने लगा विनीता की टाँगे अपने आप खुलती चली गयी दो चार मिनिट तक चूत के बालो से खेलने के बाद सौरभ ने अपना हाथ निकाल लिया और मम्मी को नहलाने लगा 

नहलाने के बाद तौलिए से अच्छे से रगड़ा उसने विनीता के जिस्म को ख़ासकर उसकी गान्ड और चूचियो को विनीता की चूत अब फटने को आई थी उसके बेटे ने उसको बुरी तरह से उत्तेजित कर दिया था अगर रिश्तो की मर्यादा ना होती तो अभी के अभी वो उसकी लंड को अपनी चूत मे घुसा लेती पर उफफफफफफफफफफफ्फ़ ये शरम के बंधन पर कही ना कही एक चिंगारी दोनो माँ बेटे के दिल मे भड़कने लगी थी

विनीता बस जल्दी से जल्दी अपनी चूत की खुजली को उंगली से शांत करना चाहती थी कमरे मे आके सौरभ ने उसको कपड़े पहनाए दोनो का बुरा हाल था विनीता ने कहा बेटा मैं थोड़ी देर सोना चाहती हूँ तुम जाते जाते दरवाजे को बंद करके जाना , सौरभ वहाँ से सीधा बाथरूम मे आया और अपनी मम्मी की गीली ब्रा पैंटी को सूंघते हुए अपने लंड को हिलाने लगा कमरे मे विनीता अपनी चूत मे दो उंगलिया घुसाए पड़ी थी 

ओह मममम्मी तुम कितनी सुंदर हो तुम्हारे बड़े बड़े बोबे और चूतड़ मम्मी एक बार दे दो ना बस एक बार ऐसे मन ही मन बुदबुदते हुवे सुरभ अपने लंड को तेज़ी से हिला रहा था और फिर थोड़ी देर बाद उसने अपना पानी गिरा दिया , विनीता भी बिस्तर पर मचल रही थी उसकी चूत से बहुत ज़्यादा रस बह रहा था उसकी उंगलियो की रफ़्तार अब बहुत तेज हो गयी थी और फिर एक लंबी सांस के बाद वो भी झाड़ गयी पर उसके मुँह से झड़ते हुए निकल गया ओह्ह्ह्ह बेटे चोद दे अपनी माआआआआआआ कूऊव आअहह

झड़ने के बाद विनीता को भी हैरानी हुई कि वो अपने बेटे को सोच कर झड़ी थी उसके होटो पर एक मुस्कान गयी और फिर थकान के मारे उसको नींद आ गयी सौरभ भी अपना काम करने लग गया , 

उषा उठ चुकी थी और नज़रे बचा बचा कर प्रेम की तरफ देख रही थी पर माँ के होते दोनो कुछ कर नही सकते थे तो बस आँख मिचोली चल रही थी दोनो को इंतज़ार था रात का की कब माँ जाए और कब दोनो बिस्तर मे उस गरम खेल को खेले

रात को सबने खाना खाया और फिर रसोई का काम निपटा कर सुधा विनीता के घर चली गयी प्रेम ने दरवाजे को बंद किया और उषा के पास पहुच गया उषा को अपनी बाहों मे भर कर चूमने लगा और वो भी उसका पूरा साथ देने लगी उषा ने अपने रसीले होटो को भाई के लिए खोल दिया और अपनी बाहें प्रेम की पीठ पर कस दी दोनो की साँसे आपस मे घुलने लगी जिस्मो मे गर्मी का दौरा बढ़ने लगा एक लंबे किस के बाद प्रेम ने उषा को अपनी गोदी मे उठाया और कमरे मे ले आया 

दोनो के नज़रे मिली और फिर बेसबरो ने जल्दी जल्दी एक दूसरे के कपड़ो को उतारना शुरू कर दिया दीदी के गदराए योवन के दर्शन करते ही प्रेम के लंड की नसें फूलने लगी उषा अपनी गान्ड मटकाते हुए आगे को आई और अपने भाई की गोद मे बैठ गयी, प्रेम का लंड उषा की गान्ड की दरार मे सेट हो गया गरम लंड को गान्ड पर पहसूस करके उषा को बहुत अच्छा लग रहा था उसने अपनी गंद को थोड़ा सा हिलाया उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ प्रेम का हाल हुआ अब बुरा

दीदी के कान के पिछले हिस्से पर किस करते हुए प्रेम ने अपने हाथों से दीदी को मस्त कबूतरों को थाम लिया और बड़े ही प्यार से उनको सहलाने लगा प्रेम के स्पर्श से उषा की आँखे गुलाबी होने लगी थी कल रात को जो धमाके दार चुदाई की थी प्रेम ने उसकी तो उषा उसकी दीवानी हो चुकी थी उसने पूरी तरह से अपने आप को भाई की बाहों मे सोन्प दिया था अब उषा थोड़ी सी साइड पर हुई और अपना हाथ नीचे ले जाकर लंड को पकड़ लिया और अपना हाथ उस पर फेर ने लगी इधर प्रेम उसके बोबो पर अपना दवाब बढ़ता जा रहा था दोनो की साँसे भारी हो चली थी 


उषा बेहद कामुक हो रही थी उस से रुका नही जा रहा था तो वो गोदी मे ही झुकी और अपने होटो को लंड के सुपाडे पर टीका दिया उसके इस तरह झुकने से उसके कूल्हे उपर की तरफ उठ गये थे और प्रेम की आँखो के सामने आ गये थे लंड पर गीली जीभ के अहसास से ही प्रेम के बदन मे झुरजुरी दौड़ गयी उसको बहुत मज़ा आ रहा था उसके मुँह से निकल गया = आआआआआअ हह दीदी बहुत अच्छे ऐसे ही चूसो बहुत मज़ा आ रहा है ये सुनकर उषा और भी तेज़ी से उसका लंड चूसने लगी 

उषा के चूतड़ बहुत थिरक रहे थे उसकी चूत से रस की बूंदे टपक रही थी प्रेम ने अपनी एक उंगली चूत के अंदर सरका दी तो उषा ने अपने कुल्हो को सिकोड लिया प्रेम ने उंगली को बाहर निकाला और अपने मुँह मे डाल दिया, दीदी की चूत का रस उसे बहुत स्वादिष्ट लगा तो उसने फिर से अपनी उंगली अंदर डाल दिया और हिलाने लगा उषा की टाँगे काँपने लगी उसने ने अपने मुँह से लंड नेकाला और प्रेम से कहा – मेरी चूत को चूसो ना

प्रेम तो चाहता ही था उसने तुरंत अपना मुँह चूत के गुलाबी होटो पर लगा दिया और छोटी सी चूत को झट से अपने मुँह मे ले लिया नमकीन स्वाद उसके मुँह मे घुलने लगा दोनो भाई बहन पागलो की तरह एक दूसरे के गुप्तांगो को चूस रहे थे कमरे की फ़िज़ा मे कामुक सिसकारियो का समावेश हो रहा था , उषा लंड को अपने गले तक उतार लेती थी उसके थूक मे पूरा लंड सन चुका था जबकि प्रेम भी कोई कसर बाकी ना छोड़ते हुए अपनी जीभ को गोल घुमा घुमा करके दीदी की चूत का पानी पीने की कोशिश कर रहा था 


पल पल प्रेम के लंड की कठोरता और उषा की चूत की चिकनाहट बढ़ती ही जा रही थी प्रेम का लंड अब बिल्कुल तैयार था दीदी की चूत मे जाने के लिए उसने उषा को बिस्तर पर घोड़ी बनाया और उसकी पतली कमर को थामते हुवे अपने लंड को चूत के मुख से सटा दिया उषा ने एक झुरजुरी सी ली और अगले ही पल प्रेम का सुपाडा चूत मे घुस चुका था , उषा बस एक बार ही चुदि हुई चूत थी तो उसे फिर से दर्द हुआ पर वो जानती थी कि बस थोड़ी देर की ही तो बात हैं उसने अपने हाथों मे चादर को कस लिया प्रेम ने एक धक्का और मारा और लंड आधा अंदर सरक गया

उषा इस बार अपनी आह को नही रोक पाई प्रेम वही पर रुक गया और अपने हाथो को आगे लेजा कर उषा के बोबो को मसल्ने लगा उषा के कुछ नॉर्मल सा होते ही उसने एक तेज का शॉट लगाया और अपने अंडकोषो को उषा के कुल्हो से सटा दिया उषा को लगा कि उसकी चूत को किसी लंबे चाकू से चीर दिया गया हो जैसे आँसू निकल पड़े आँखो से पर वो चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार थी कल भी तो उसने चुदाई का सुख प्राप्त किया था दीदी के बोबो को कुछ ज़ोर से भींचते हुए प्रेम अपनी कमर को आगे पीछे करने लगा 

गीली चूत के रस से सारॉबार लंड ने जल्दी ही जगह बना ली और चूत की दीवारो से रगड़ खाने लगा उषा को धीरे धीरे मस्ती चढ़ने लगी थी जल्दी ही प्रेम ने अपनी रफ़्तार को पकड़ लिया और दीदी को पाने लौडे का मज़ा देने लगा जितनी ज़ोर से अब वो बहन के बोबो को मसलता उषा को उतनी ही मस्ती चढ़ती दोनो भाई बहन एक दूजे मे समाए हुए उस कमरे मे अपनी हवस को शांत कर रहे थे दोनो की आहे कमरे की दीवार से टकरा रही थी करीब पंद्रह मिनिट की चुदाई के बाद उषा झड चुकी थी और प्रेम भी बस झड़ने ही वाला था उसने उषा की कमर को कस कर जाकड़ लिया और फिर उसको लिए लिए ही बेड पर लुढ़क गया उसके वीर्य की धार उषा की चूत मे गिरने लगी दोनो अपनी मंज़िल को पा गये थे………………………….

पर ये तो बस एक शुरुआत थी पाप के रास्ते पर पहले कदम थे इनके
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08-25-2018, 04:07 PM,
#22
RE: Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
बार बार सुधा की नज़रे सौरभ के खड़े लंड पर जा रही थी उसकी चूत भी मचलने लगी थी पर सुधा बहुत शातिर औरत थी गर्मी बहुत हैं ऐसा कहकर उसने अपने आँचल को पूरी तरह से साइड मे कर दिया गोरे गोरे बोबे वैसे ही ब्लाउज से आधे से ज़्यादा बाहर आ रहे थे उपर से ताइजी मेहरबान हो रही थी सौरभ पर तो अब वो बेचारा बस रोके था खुद को किसी तरह से सौरभ का लंड उसको जीने नही दे रहा था उसे लग रहा था कि अगर उसने अभी के अभी अगर नही हिलाया तो फिर उसका पानी कच्छे मे ही निकल जाएगा सुधा का गदराया जिस्म और उसकी कामुक हरकत सौरभ के जिस्म मे गर्मी भर रही थी 

सुधा अपने धोए कपड़ो को सुखाने के लिए उठी कि उसका पाँव साबुन के झाग की वजह से फिसल गया और वो सीधा पानी मे जा गिरी और उपर से नीचे तक भीग गयी ओफफफफफफफफफफफ्फ़ ये क्या हो गया उसने कहा और पानी से बाहर आने लगी गीले होने की वजह से उसके कपड़े बुरी तरह से उसके बदन पर चिपक गये थे उसकी साड़ी मे उभरी उसकी मोटी गान्ड और भी मस्त लग रही थी गीली होने की वजह से सुधा ने अब अपनी साड़ी भी उतार कर साइड मे रख दी और बस वो अब ब्लाउज और पेटिकोट मे ही थी , पेटिकोट पीछे से उसकी गान्ड की दरार मे घुसा पड़ा था सुधा फिर से अपने कपड़े धोने लगी सौरभ अपने कपड़े धो चुका था पर वो सुधा की वजह से वही पर रुक गया था 
सौरभ- ताई जी आप तो पूरे गीले हो गये हो एक काम करो यही पर नहा लेना 
सुधा- बेटा सोच तो मैं भी रही हूँ ऐसा ही पर क्या करूँ घर से दूसरे कपड़े भी तो नही लाई और बाकी सब के तो साबुन लगा दिया हैं तू नहाने की कह रहा हैं मैं सोच रही हूँ कि घर कैसे जाउन्गी 

सौरभ- ताई जी इस साड़ी को धूप मे सूखा दो जल्दी ही सूख जाएगी और फिर जब तक आप बाकी के कपड़े धोकर नहाओगे ये तैयार सुधा को भी उसकी बात जॅंच गयी उसने कहा बेटा बात तो ठीक है तेरी पर फिर तू भी इधर ही है तेरे सामने कैसे नहाउन्गी मैं लाज आएगी मुझे 

सौरभ मन ही मन मे –भोसड़ी की उस दिन चूत मे तीन तीन उंगलिया डाले हुए थी तब तो लाज नही आ रही थी तुझे आज सती-सावित्री बन रही हैं 

सौरभ- ताई जी वो क्या हैं ना कि मुझे भी नहा कर ही जाना था तो रुकना ही पड़ेगा और फिर मेरे कपड़े भी तो सूझ रहे हैं
सुधा ने सोचा कि ये भी पक्का ढीठ हैं ऐसे नही मान ने वाला और वैसे भी जब सुधा जैसा सेक्स बॉम्ब इस हालत मे आँखो के सामने हो तो फिर कॉन कम्बख़्त जाए उधर से उसने कहा – तो फिर एक काम कर बेटा तू भी आजा इधर ही साथ ही नहा लेते हैं फिर इकट्ठा ही घर साथ चलेंगे 

ये सुनते ही सौरभ की जैसे मूह माँगी मुराद पूरी हो गयी और थोड़े दूर दूर होकर दोनो जाने नहाने लगे ठंडा पानी सुधा के बदन को और गरम कर रहा था उधर सौरभ भी पानी मे भीग चुका था उसका खड़ा लंड का साइज़ गीले कच्छे से पूरी तरह दिख रहा था जवान लंड को देख कर सुधा की चूत भी कुलबुलाने लगी उसने सोचा कि थोड़े मज़े लेने मे क्या बुराई है और फिर सौरभ हैं तो घर का ही जब तू अपने बेटे का लंड देख सकती है तो फिर सोरभ कॉन सा पराया है उसने ट्रिक लगाते हुए कहा कि बेटा मेरा हाथ नही पहुँच पा रहा हैं तू ज़रा मेरी पीठ पर साबुन लगा दे 

सौरभ तो जैसे आज मज़े के दरिया मे ही पहुच गया था सुधा खुद उसे बुला रही थी उसने कहा – ताइजी पर साबुन लगाने के लिए ब्लाउज तो उतारना पड़ेगा ना 

सुधा- पर बेटे ऐसे खुले मे मैं कपड़े उतार भी तो नही सकती ना कोई भी आ निकलेगा 
सौरभ- तो फिर कैसे लगाऊ ताई जी 
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08-25-2018, 04:07 PM,
#23
RE: Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
सुधा तो खुद कामवासना मे बुरी तरह से तप रही थी उसने कहा –बेटा एक काम कर कुँए पर जो पिछली तरफ बिना छत का बाथरूम सा बना हैं उधर चल कर नहाते हैं कम से कम चारदीवारी को ओट तो रहेगी कोई देखेगा भी नही और फिर मैं भी थोड़ा आराम से नहा सकूँगी 

ताई जी की ये बात सुनकर सौरभ को नज़ाने क्यो यकीन सा होने लगा था कि आज किस्मत उस पर कुछ ज़्यादा ही मेहरबानी दिखा रही है उसने उसी पल सोच लिया कि ताइजी के थोड़ा सा और आगे सरकते ही आज वो चूत मारने मे कोई कसर नही छोड़ेगा फिर चाहे जो कुछ भी हो जाए आज ताई जी को अपना बना कर ही रहेगा वो 

उसने कहा ताइजी वो तो काफ़ी दिनो से ऐसे ही पड़ा हैं आप अपने कपड़े धो लो तब तक मैं मोटर जोड़के उधर के नलके को चालू करता हू और थोड़ा साफ भी कर देता हूँ दो जिस्मो मे एक ऐसी आग लग चुकी थी जिसे अब ये ठंडा पानी भी नही बुझा सकता था अगर कुछ था तो बस एक दूसरे को अपनी बाहो मे भरना, एक दूसरे को पा लेने की हसरते……….

दोनो के दिल बड़ी तेज़ी से धड़क रहे थे दोनो ने इस रास्ते पर आगे बढ़ने का सोच लिया था दोनो घबराए से थे, पर आग दोनो के जिस्मो को पिघला रही थी बस इस आग को एक बोछार की सख़्त ज़रूरत थी, सौरभ दौड़ कर गया और जल्दी ही उस कच्चे बाथरूम को सॉफ कर दिया और पानी की मोटर चला दी थोड़ी देर बाद सुधा भी सावधानी से इधर उधर देख कर बाथरूम मे घुस गयी टूटे से किवाड़ को बंद कर लिया 

सुधा- बेटे ये सही किया तूने अब आराम से नहा सकती हूँ 

सौरभ अपने हाथ मे साबुन लेते हुए, ताई जी अब मैं भी अच्छे से साबुन लगा देता हूँ सुधा ने अपना मूह दीवार की तरफ किया और अपने ब्लाउज को उतार दिया ब्रा अंदर पहनी नही थी उसके उड़ते कबूतर बाहर आकर झूल गये पर चूँकि उसकी पीठ सौरभ की ओर थी तो वो उन कयामत चूचियो के दर्शन नही कर पाया था सुधा की नंगी, मखमली पीठ देख कर ही उसका लंड बुरी तरह से झूलने लगा था उसने ताई जीकी पे पीठ पर पानी का डिब्बा डाला और साबुन रगड़ने लगा सुधा को अपने जिस्म पर जवान लड़के का स्पर्श बड़ा ही मस्त लग रहा था 

सौरभ का हाथ बार बार सुधा की बगल से होते हुए चूचिओ से भी रगड़ खा रहा था सुधा की चूत बुरी तरह से रस छोड़ रही थी उसने अपनी गान्ड को और पीछे कर लिया और सौरभ के लंड पर रगड़ते हुए बोली बेटा- ये क्या है जो डंडे जैसा मेरे पीछे चुभ रहा हैं 

सौरब अपना हाथ आगे को ले गया और उसके दोनो बोबो को कस कर भीचते हुए बोला ताई जी आप ही देख लो ना क्या हैं , सुधा के बोबो पर सालो बाद किसी ने छुआ था वो मस्त हो गयी उसके मूह से सिसकारिया निकालने लगी सुध बुध भूलने लगी वो सौरभ भी पूरी मस्ती से सुधा के बोबो को मसल रहा था सुधा अपना हाथ पीछे ले गयी और सौरभ के कच्छे मे हाथ डालकर उसके लंड को मसल्ने लगी, अपने लंड पर पहली बार किसी औरत के हाथ को देख कर सौरभ तो जैसे झड़ने को ही हो गया 

सुधा धीरे धीरे उसके लंड को अपनी मुट्ठी मे लेकर आगे पीछे करने लगी सौरभ और कस कस कर सुधा के बोबो को दबाने लगा दोनो के जिस्मो पर पड़ता ठंडा पानी जिस्मो की आग को और भड़काए जा रहा था जब सुधा ने सौरभ की दोनो गोटियो को अपने हाथ मे भर कर दबाया तो सौरभ जैसे मस्ती से झड़ने को ही हो गया उसको पता था कि आज वो कुछ भी करे ताई जी उसको रोकने वाली नही हैं उसने अपना हाथ चूचियो से हटाया और सुधा के पेटिकोट के नाडे को खोल दिया सुधा अब पूरी तरह से नंगी हो गयी थी उसकी मदमस्त गान्ड सौरभ की आँखो के सामने थी उसने सुधा का मूह अपनी ओर किया और उसके मोटे मोटे रसीले होटो पर अपने होंठ रख दिए और ताई जी के होटो का रस चूसने लगा 


बरसो बाद सुधा के प्यासे होटो पर गरम लबो का अहसास हुआ था उसने अपना मूह खोला और अपनी जीभ सौरभ के मूह मे डाल कर चुसवाने लगी सौरभ का लंड उसकी चूत पर रगड़ खा रहा था सुधा बस उसकी बाहों मे पिसना चाहती थी एक बेहद लंबे चुंबन के बाद सुधा उस से अलग हुई उसकी फूली सांस अपनी कहानी बया कर रही थी वो सौरभ की आँखो मे देख कर मुस्कुराइ और फिर अपने घुटनो के बल बैठ गयी लंड अब बिल्कुल उसके चेहरे के सामने झूल रहा था बिना देर किए सुधा ने अपना मूह खोला और लंड के सुपाडे को अपने मूह मे भर लिया 
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08-25-2018, 04:07 PM,
#24
RE: Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
सुधा के मूह मे लंड जाते ही सौरभ की सिट्टी पिटी गुम हो गयी मस्ती के मारे उसकी एक एक नस नाच उठी ओह ताइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई जीिइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई उसके मूह से निकला, गोटियो को अपने हाथो से सहलाते हुए सुधा लंड को चूसने लगी थी खुद सुधा की हालत ऐसी हो रही थी कि जैसे किसी बच्चे को उसका मनपसंद खिलोना मिल गया हो थोड़ा थोड़ा करके उसने पूरा लंड अपने मूह मे ले लिया और दबा के चूसने लगी सौरभ ताई जी की इस अदा का दीवाना हो गया उसका खुद से काबू खोता जा रहा था सुधा के कामुक होटो लंड पर अपना जादू चलाए जा रहे थे अब सौरभ ने ताई जी के सर को अपने हाथो से दबा लिया और उसके मूह को चोदने लगा 

सुधा जहाँ पूरी तरह से खेली खाई औरत थी वही सौरभ एकदम नोसखिया था वो ज़्यादा देर नही ठहर पाया और झड़ने को हो आया, उसकी आँखे मज़े से फैलती चली गयी पूरा जिस्म अकड़ गया और उसका गरमा गरम पानी सुधा के मूह मे गिरने लगा अरसे बाद सुधा आज वीर्यपान कर रही थी उसके मूह मे वो गाढ़ा नमकीन सफेद रस अच्छे से घुल गया जिसे वो चतखारे लेते हुए घूँट घूँट करके पी गयी 

जब तक लंड से रस की एक एक बूँद ना चूस ली सुधा ने लंड को अपने मूह मे ही दबाए रखा सौरभ तो मस्ती के मारे पागल ही हो गया था बड़ी कातिल निगाहो से सुधा ने सौरभ की तरह देखा और फिर बाथरूम के फरश पर घोड़ी बन गयी सौरभ ने आज से पहले इतनी बड़ी गान्ड नही देखी थी सुधा की 46” की गान्ड का मस्त नज़ारा उसकी आँखो के सामने था सुधा ने अपनी टाँगो को थोड़ा सा फैला दिया जिस से उसकी चूत बाहर मूह निकाल कर लॅप लपाने लगी सुधा ने कहा बेटा बहुत तड़प रही हैं मेरी मुनिया आ तू भी इसका रस चख ले बहुत प्यासी हैं ये आजा इसका सारा रस निकाल दे सौरभ उस मदमस्त गान्ड पर झुका और अपने काँपते होंठो को उस चूत पर रख दिया …

घोड़ी बनी हुई सुधा की कई सालो से अन्छुइ चूत काम रस से गीली होकर लॅप लपा रही थी सौरभ ने अपनी जीभ को गीली किया और ताई जी की गरम चूत की खुश्बू को सूंघने लगा उसकी उत्तेजना और भी बढ़ गयी थी उसने ताई जी के विशाल नितंबो पर अपने हाथ रखे और अपने सप्निली जीभ को टच कर दिया चूत से लिस लीसी जीभ का स्पर्श चूत पर होते ही सुधा के शरीर मे जैसे भूकंप हो गया वो लड़खड़ा गयी और आगे को सरकने लगी पर सौरभ ने बड़ी मजबूती से उसको थाम रखा था तो वो सरक ना पाई 

चूत के नमकीन पानी का स्वाद अपने मूह मे आते ही सौरभ को पता चल गया कि आख़िर क्यो दुनिया चूत के पीछे इतनी देवानी हुई पड़ी हैं सुधा की हिलती गांद उसे और भी उत्तेजित कर रही थी उसने अपने हाथो से छूट की मासूम पंखुड़ियो को आहिस्ता से फैलाया और अपनी जीभ को जितना अंदर डाल सकता था डाल दिया सुधा ने अपनी कामुक टाँगो मे सौरभ के चेहरे को दबा लिया और उसको अपनी चूत का पानी पिलाने लगी दोनो ताई-बेटा अपने रिश्तो की मर्यादा को भूल कर एक नया रिश्ता जोड़ने जा रहे थे जिसमे अगर था तो बस चूत और लंड का मिलन 

जैसे जैसे चूत की चुसाइ होती जा रही थी सुधा की गान्ड अपने आप थिरकने लगी थी वो बस किसी तरह से अपनी आहों को रोके हुए थी उसकी फूली हुई चूत का आधे से ज़्यादा हिस्सा सौरभ के मूह मे भरा हुआ था शाबाश बेटे शाबाश वो धीमे धीमे बुदबुदते हुए सौरभ के जोश को बढ़ा रही थी सुधा ने अपनी आँखे मस्ती के मारे बंद कर ली थी अब सुधा की चूत मे इतने सालो से रस जमा हुआ था तो वो ज़्यादा देर तक सौरभ की जीभ को सहन नही कर पाई और उसके मूह मे ही झड गयी सौरभ उसके सारे पानी को पी गया शांत होने के बाद सुधा अब खड़ी हुई दोनो की नज़रे मिली सुधा ना जाने क्यो शर्मा गयी

पर सौरभ का लंड फिर से खड़ा हो गया था उसने सुधा को वही फर्श पर लिटा दिया और उसकी गद्देदार जाँघो को खोल दिया सुधा ने मस्ती से आह भरी सौरभ उसकी टाँगो के बीच आया और अपने लंड को चूत के छेद पर टिका दिया दोनो ही जानते थे कि आगे क्या होने वाला हैं बस एक पल की ही बात थी पर ये एक पल ही बहुत लंबा हो गया बाहर किसी तरह की आवाज़ हुई तो दोनो की वासना एक मिनिट मे ही कही गायब हो गयी दोनो एक दूसरे का मूह ताके कॉन आ गया इस टाइम कही वो पकड़े ना जाए सुधा घबराई सौरभ की चेहरे पर हवाइयाँ उड़ी गान्ड फट गयी उसकी की कही प्रेम तो नही आ गया
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08-25-2018, 04:07 PM,
#25
RE: Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
उसने किवाड़ हल्के से खोला तो देखा कि कुछ बकरिया घुस आई थी उस साइड मे उसने फिर से किवाड़ बंद किया और सुधा की पकड़ लिया तो सुधा बोली- नही बेटे अभी इधर कुछ भी करना ठीक नही है अगर कोई आ निकला तो शामत आ जाएगी तो फिर वो दोनो उस बाथरूम से बाहर आ गये हाथ आई चूत फिसल गयी थी तो सौरभ का मूड उखड़ सा गया था पर सुधा कोई रिस्क नही लेना चाहती थी तो फिर उसने अपने कपड़े समेटे और घर की तरफ चल दी सौरभ वही पर रुक गया 

उधर घर पर विनीता को अकेली देख कर प्रेम उसके पास पहुच गया और उस पर चुंबनो की बोछार कर दी विनीता तो खुद वासना की आग मे जल रही थी उसने मज़े ले लेकर अपने होतो का रस प्रेम को पिलाया प्रेम ने उसकी चूचियो को नंगा कर दिया और बोला चाची कितना इंतज़ार करना पड़ेगा मुझे तुम्हारे बिना जीना बड़ा मुस्किल हो रहा हैं विनीता बोली- मेरी जान मेरा हाल भी ऐसा ही हैं पर ये निगोडी चोट ना जाने कब सही होगी प्रेम ने विनीता की 36” की चूचियो को दबाना शुरू किया तो वो मचलने लगी उसने हाथ आगे कर के प्रेम की चैन खोली और उसके लंड को बाहर निकाल कर हिलाना शुरू कर दिया 

विनीता- आह प्रेम थोड़ा आहिस्ता से एक काम कर थोड़ा सा मेरे उपर झुक जा और मेरी चूत मे अपनी उंगली डाल कर रगड़ बड़ी बेकाबू हो रही हैं ये इसकी खुजली को मिटा बेटे पर थोड़ा ध्यान से कही मेरे पैर को ना हिला देना 
प्रेम उसके उपर आया और उसने विनीता की साड़ी को कमर तक उठा दिया अंदर उसने पैंटी नही डाली थी तो कोई रुकावट की बात ही नही थी बस उसने अपनी चाची की चूत को मुट्ठी मे भर लिया और उसको मसल्ते हुए चूचियो को पीने लगा विनीता की नस नस मे हवस की आग शोलो के रूप मे भड़कने लगी वो बेकाबू हो ने लगी और ज़ोर ज़ोर से प्रेम के लंड को हिलाने लगी दोनो चाची बेटे जैसे तैसे जुगाड़ से लगे हुए थे दो उंगलिया चूत मे जाने से विनीता को थोड़ा सा आराम तो मिला था पर जिसे लंड की आदत हो उसका काम कैसे चले उंगलियो से

पर मजबूरी भी कोई चीज़ होती हैं तो काम ही चलना था प्रेम तेज़ी से चूत मे उंगलिया चला रहा था विनीता बस झड़ने ही वाली थी कि तभी उसे नीचे घर मे किसी के आने की आवाज़ सुनाई दी वो समझ गयी कि उसका बेटा ही होगा तो उसने प्रेम को भगाया वहाँ से इधर प्रेम अपनी दीवार पर उतरा उधर सीढ़िया चढ़ कर सौरभ मम्मी के कमरे मे आया अपना काम बीच मे लटक जाने से विनीता को गुस्सा तो बहुत आया पर वो बेटे के सामने कुछ भी शो नही करना चाहती थी तो उसने अपने कपड़ो को सही किया और बेटे से बात करने लगी 

विनीता- कहाँ गया था बेटा कितना टाइम हुआ तुझे गये हुए
सौरभ- मम्मी वो घर पर पानी नही आया तो मैं नहाने और कपड़े धोने खेत पर चला गया था और फिर वहाँ पर कई और काम भी करने थे तो देर हो गयी
विनीता – खाना खाया तूने
सौरभ- जी हाँ खा लिया था 
सौरभ- मम्मी क्या बापू आज आएँगे
विनीता- बेटे, उसका हाल तो तुझे पता ही है जब तक उसको मुफ़्त की दारू मिलती रहेगी वो घर का मूह नही देखेगे पर मैं हूँ ना बता क्या बात हैं 
सौरभ- कुछ किताबें ख़रीदनी हैं तो पैसे चाहिए 
विनीता- कल जब तू सहर जाएगा तो ले जाना 
सौरभ- ठीक हैं अभी आपके पैर का दर्द कैसा है हाई रे, पूरे दिन मे आपके घुटने की मालिश करना तो मैं भूल ही गया मैं अभी बाम लेकर आता हूँ

सौरभ बाम लेने चला गया और विनीता को अपनी गीली चूत का ख्याल आया जो रस से भरी पड़ी थी उसको ये पता था कि जब बेटा उसके घुटने की मालिश करेगा तो अंदर का नंगा नज़ारा उसकी निगाहो से छिपा नही रह सकेगा पर उसके पास ना तो इतना टाइम था और ना ही वो इस हालत मे थी कि फटाफट से पैंटी पहन सके तो हाई रे ये मजबूरी जो जवान बेटे की आँखे अपनी गदराई हुई माँ की जवानी से सेंकने का इंतज़ाम कर रही थी उसने एक गहरी सांस ली और अपने आप को हालत के हवाले कर दिया 

इधर सुधा जब घर पर पहुचि तो उसने देखा कि प्रेम अपने कमरे मे किताबो मे डूबा हुआ है उसकी नज़र आँगन मे तार पर लटकी उषा की ब्रा-पैंटी पर पड़ी तो वो उसको डाँट लगाते हुए बोली- बेशरम, थोड़ी बहुत तो शरम कर लिया कर घर मे जवान भाई है तेरे इन अन्द्रूनि कपड़ो को ऐसे खुले मे लटके देखे हुए देखेगा तो क्या सोचेगा सुधा अपने मन ही मन मे बोली और वैसे भी आजकल उसकी निगाहें कुछ और ही बयान करने लगी हैं 

उषा- जी, माँ वो जब मैं नहा कर आई थी तो भाई घर पर था नही और फिर मुझे इन्हे उतारना ध्यान नही रहा , आगे से ध्यान रखूँगी ऐसा कह कर वो उनको लेकर अपने कमरे मे चली गयी
उषा कपड़ो को अलमारी मे रखते हुए- मेरी भोली माँ, अब तुम्हे क्या पता तुम इन कपड़ो की बात कर रही हो तुम्हारा भोला बेटा पूरी रात मुझे अपनी गोदी मे बिठाए रखता हैं प्रेम के साथ की चुदाई का ख्याल आते ही उषा के तन बदन मे मस्ती सी भरने लगी तो उसने देखा सुधा रसोई मे व्यस्त हैं तो वो उपर प्रेम के कमरे मे पहुच गयी 

अपनी दीदी को कमरे के दरवाजे पर खड़े देख कर प्रेम मुस्कुराया और खड़ा हो गया उषा आगे आई और बिना देर किए प्रेम के जिस्म से चिपक गयी और अपने नाज़ुक नाज़ुक होंठो को अपने भाई के लिए खोल दिया प्रेम ने अपने होंटो पर जीभ फेर कर उनको गीला किया और फिर दीदी के निचले होंठ को अपने दाँतों के बीच मे फसा लिया उषा के शहद से भी मीठे लबों के रस को चूमते हुए प्रेम सलवार के उपर से ही उसकी गान्ड को सहलाने लगा अपने दोनो हाथो से उसको भीच रहा था उषा की मुनिया फिर से गीली होने लगी 
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08-25-2018, 04:08 PM,
#26
RE: Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
करीब 5 मिनिट तक दोनो भाई बहन जम कर एक दूसरे को किस करते रहे प्रेम के लंड का बुरा हाल हो रहा था इस से पहले दोनो कुछ आगे बढ़ते नीचे से माँ की आवाज़ आई तो उषा ने खुद को प्रेम की बाहों से आज़ाद किया और अपनी चुनरिया को संभालते हुए नीचे को भाग गयी प्रेम भी उसके पीछे पीछे नीचे आ गया और फिर से दोनो की आँख मिचोली शुरू हो गयी 

सुधा- प्रेम, पता नही आजकल तेरा ध्यान कहाँ पर रहता है खेतो का कुछ भी काम तू करता ही नही

प्रेम- माँ, बताओ क्या करना हैं

सुधा- बेटा वो जो नदी की तरफ वाले खेतो मे जो सब्ज़िया उगाई हुई थी उसकी एक साइड की बाढ़ कमजोर हो गयी है आवारा पशु घुस आते है बहुत नुकसान हो रहा हैं तू एक काम करना कल मेरे साथ चलना उधर 

प्रेम- जी माँ

सुधा- उषा, कई दिन हो गये हैं तू कॉलेज भी नही जा रही कुछ दिक्कत है क्या

उषा- नही माँ, वो कॉलेज मे स्टूडेंट्स की हड़ताल चल रही हैं इसलिए 

सुधा- दोनो कान खुलकर सुन लो अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दो दो चार काम और पड़े है पर वो तुम्हारे मामा के बेटे की शादी के बाद ही करेंगे अभी तुम लोग खाना खा लो फिर मुझे विनीता के घर भी जाना है खाना लेकर 

अगले आधे घंटे का समय बस खामोशी मे ही कटा सभी लोग खाना खाने मे व्यस्त थे 

उधर सौरभ बाम लेकर आ चुका था उसने विनीता के पाँव को अपनी गोदी मे रखा और उसकी साड़ी को घुटने तक उठा दिया उसने ये सब एक नॉर्मल वे मे ही किया था पर उसे क्या पता था कि कयामत का नज़ारा उसका ही इंतज़ार कर रहा था जैसे ही विनीता के पैर थोड़े से चौड़े हुए उसकी चूत की फांके अलग अलग दिशाओ मे खुल गयी और सौरभ को अंदर का गुलाबी हिस्सा दिखने लगा उसका सोया हुआ लंड एक झटके मे ही तन गया शरम के मारे विनीता के गाल और भी गुलाबी हो गये पर वो भी तो मजबूर थी कमरे मे एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी दोनो माँ बेटे को साँसे बड़ी तेज़ी से दौड़ रही थी मालिश करते हुए सौरभ कभी कभी अपनी मम्मी की सुडोल चिकनी जाँघो पर भी हाथ फेर देता था बेटे की इन हरकतों की वजह से मम्मी की अधूरी कामवासना अपना रंग दिखाने लगी थी 

उसकी चूत मे गीला पन कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया था उसकी नज़र बराबर अपने बेटे का तने हुए लंड पर जमी थी जिसे वो बिल्कुल भी छुपाने की कोशिश नही कर रहा था मन ही मन उसने सोचा कि सौरभ का हथियार भी तगड़ा है उफ़फ्फ़ ये तो कितना मोटा लग रहा हैं उसे पता ही नही चला की कब वो अपने इन हवस से भरे ख़यालो मे डूब गयी उधर सौरभ अपने दोनो हाथो को घुटनो से हटा कर अपनी मम्मी की चिकनी जाँघो पर चला रहा था अपनी मम्मी की नमकीन चूत को चाटने की हसरत मन मे लिया वो बस उन टाँगो को ही मसल रहा था विनीता को बड़ा मस्ती भरा सुकून मिल रहा था पर तभी उसकी आँख एक आवाज़ सुनकर खुल गयी 

बाहर दरवाजे पर सुधा चिल्ला रही थी दोनो माँ बेटे हड़बड़ा गये सौरभ ने मम्मी की साड़ी को सही किया और फिर तेज़ी से दरवाजे की तरफ चल दिया विनीता अपनी उखड़ी सांसो को संभालते हुए चुपचाप बिस्तर पर लेट गयी सौरभ ने ताई की ओर देखते हुए मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला और वही दरवाजे के पास ही सुधा को दीवार से सटा दिया और उसके होंठो को खुद से चिपका लिया उसका पहले से ही तना हुआ लंड ताई के पेट के निचले तरफ रगड़ खाने लगा सुधा उसको अपने से दूर करते हुए बोली क्या करता है ऐसे कोई शरारत करता है क्या तो सौरभ अपने लंड को सहलाते हुए बोला- तो आप ही बता दो ना कि कैसे शांत रहूं, अभी आपने ही किया है जो अब इलाज भी आप ही करोगी मुझे कुछ नही पता

सुधा- जब सही समय आएगा तो इलाज भी हो जाएगा अभी तुम फटा फट से खाना खा लो मैं विनीता को खाना देने जाती हूँ 

सौरभ ने बुरा सा मूह बनाया और खाने की थाली लेकर बैठ गया सुधा विनीता के पास चली गयी दूसरी तरफ माँ के जाते ही उन दोनो भाई बहन को पूरा मोका मिल गया उषा ने अपने कपड़े उतारे और मात्र ब्रा- पैंटी मे ही भाई के कमरे की तरफ चल पड़ी आज की रात फिर से गुलाबी होने वाली थी

उषा को इस तरह सेक्सी ब्रा- पैंटी मे देख कर प्रेम के होश ही उड़ गये दीदी के गोरे बदन पर सजे उस काले लिंगेरी सेट ने उषा की खूबसूरती मे चार चाँद लगा दिए थे प्रेम कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और फॉरन ही अपने कच्छे और बनियान को उतार दिया और नंगा हो गया सुधा ने भी अपनी ब्रा के हुको को खोल दिया आज़ाद होते ही उसकी चूचिया मस्ती से फड़फड़ाने लगी प्रेम अपने लौडे को हिलाने लगा उषा अपने बोबो को अपने हाथो से मसल्ने लगी दोनो भाई बहन एक दूसरे को ऐसी हरकते कर कर के रिझा रहे थे प्रेम के लौडे को देखते ही उषा की मुनिया मे जैसे आग लग गयी थी


अब उस से रहा नही जा रहा था कुछ ऐसा ही हाल प्रेम का भी था उषा ने उसको और तडपाते हुए अपनी पैंटी को खीच कर उतार दिया और उस से अपनी चूत को सॉफ करते हुए प्रेम की तरह उछाल दिया प्रेम ने दीदी की कामरस से सनी हुई कच्छी को सूँघा मस्त कर देने वाली खुश्बू उसकी नाक मे उतरती चली गयी उसने चूत के उस रस को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया उषा भी अब और मस्तानी हुई उसने दरवाजे पर खड़े खड़े ही अपनी टाँगों को चौड़ा किया और अपनी दो उंगलियो को एक साथ चूत मे उतार लिया और तेज़ी से अंदर बाहर करने लगी 

दोनो भाई बहन बुरी तरह से उत्तेजित हो चुके थे अब प्रेम खड़ा हुआ और बढ़ चला दरवाजे की तरफ उसने उषा को अपनी बाहो ने भर लिया और बिना कुछ बोले अपने होटो को बहन के होटो से जोड़ दिया दोनो की दहक्ति साँसे एक होने लगी उषा के मूह मे बहते लार को प्रेम अपनी जीभ से चाटने लगा उषा ने हाथ को नीचे की तरफ किया और प्रेम के टट्टो को अपनी मुट्ठी मे भर लिया एक मर्द के जोशीले टट्टो को अपने हाथ मे पकड़ उषा मदमस्त हो गयी वो धीरे धीरे से उनको मसल्ने लगी जिस से प्रेम और उत्तेजित होने लगा दोनो की जीभ एक दूसरे से जैसे जंग लड़ रही थी दोनो मे एक होड़ सी मच गयी

सुधा वही पर बैठ गयी और प्रेम उसके पीछे आकर खड़ा हो गया सुधा ने चाल खेलते हुए अपने आँचल को पूरा सरका दिया जिस से प्रेम को उसके बोबो का पूरा नज़ारा दिख सके सुधा की सुडोल भारी भरकम छातियाँ जो कि उस टाइट ब्लाउज मे से आधे से ज़्यादा बाहर को निकल ही रही थी, माँ की छातियो की गहराई को देख कर प्रेम का लंड फिर से हरकत करने लगा

उषा की धड़कने बढ़ने लगी थी उसकी रगों मे बहता खून बहुत तेज़ी से दौड़ रहा था उत्तेजना की हद तक वो गरम हो चुकी थी भाई के लंड को अपने हाथ मे थामे वो किसी जंगली शेरनी की तरह हो चुकी थी बड़ी तेज़ी से वो अपने हाथ को प्रेम के लंड पर उपर नीचे कर रही थी प्रेम भी बेसबरा हो रहा था उसने अपने मूह को उषा के चेहरे से हटाया और उसको पलट कर खड़ी कर दिया उषा की पीठ अब प्रेम की तरफ थी बहन के मचलते, बल खाए चूतड़ देख कर प्रेम के खड़े लंड ने लहरा कर सलामी दी और उसने उषा के दोनो हाथो को दरवाजे की चोखट पर रखा और उसकी पतली कमर को पकड़ कर उसको वही दरवाजे के बीचो बीच झुका दिया 

प्रेम ने अपने लंड के सुपाडे पर अच्छी तरह से थूक लगाया और उसको उषा की जाँघो के बीच दे दिया चूत के मुहाने पर लंड को महसूस करते ही उषा मंद मंद मुस्कुरा पड़ी उसने अपने आप को थोड़ा सा और झुकाया उसके कूल्हे अपने आप खुलते चले गये प्रेम ने बहन की कमर को कस कर पकड़ा और अपने कुल्हो को आगे को किया चूत के मुलायम होंटो को अलग अलग करते हुए लंड उस मक्खन सी चिकनी चूत मे धंसता चला गया उषा की चूत का दरवाजा बिना किसी आवाज़ के खुलता चला गया उषा को हल्का सा दर्द हुआ पर उसे पता भी था कि बस थोड़ी देर मे मज़ा ही मज़ा हैं 
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08-25-2018, 04:08 PM,
#27
RE: Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
उफफफफफफफफफफ्फ़ उफफफफफफफफफफ्फ़ उषा के मूह से निकला अपनी बहन की कामुक आवाज़ सुनकर प्रेम को जोश आया उसने खीच कर एक धक्का और लगाया और पूरा का पूरा लंड दीदी की मस्तानी चूत मे उतार दिया उषा के मखमली कुल्हो से जगह बनाते हुए प्रेम का चिकना लंड लपा लॅप दीदी की चुदाई करने लगा उषा भी जल्दी ही अपनी गान्ड को बार बार आगे पीछे करके भाई का भरपूर साथ देने लगी बाहर चलती ठंडी हवा उनके जिस्मो से टकरा कर राहत दे रही थी उषा ने अब अपने दोनो हाथो को अपने घुटनो पर रख लिया और अपनी गान्ड को और भी प्रेम की तरफ उभार लिया चूत का छेद थोड़ा सा और खुल गया और दोनो पूरे मज़े से एक दूसरे के जिस्मो का मज़ा लूटने लगे

उषा की चूत के होंठ बारी बारी से खुल और बंद हो रहे थे उनकी मजबूत पकड़ प्रेम के लंड पर पूरा दवाब डाले हुए थी और फिर वैसे भी उषा की चूत थी भी कितनी पुरानी जुम्मा झुम्मा चार पाँच दिन सारे हुए थे उसको अपनी सील तुडवाए हुए पर प्रेम के मूसल जैस लंड से चुदने के कारण अब साइज़ थोड़ा तो खुलना ही था प्रेम ने दीदी के मजबूत उभारों को अपनी क़ैद मे कर लिया था और पूरी ताक़त से उनको मसल्ते हुए दीदी को चोदे जा रहा था करीब दस मिनिट तक उसने दीदी को अपने घुटनो पर झुकाए रखा पर अब उषा की कमर और पैरो मे दर्द होने लगा था तो वो सीधी खड़ी हो गयी लंड चूत से बाहर निकल कर हवा मे गुस्से से झूलने लगा 

प्रेम ने उषा को अपनी तरफ खीचा और उसको अपनी मजबूत बाहों मे उठा लिया उषा अब उसकी गोदी मे थी उसने प्रेम के लंड को अपने हाथ से चूत पर स्ट्रीट किया और उस पर बैठ गयी लंड सीधा उसकी बच्चेदानी से जा टकराया कई बार तो उसे यकीन ही नही होता था कि वो इतने लंबे लंड को इतनी आसानी से अपनी चूत मे उतार लेती है पर चुदाई का नशा ही कुछ ऐसा होता हैं जितनी चुदाई हो उतनी ही कम लगती हैं और फिर चुदाई अगर अपने भाई से ही हो तो कहने ही क्या अपने भाई की गोदी मे चढ़ि हुई दीदी अपनी पूरी गान्ड तक का ज़ोर लगाते हुए भाई के खड़े लंड पर कूदे जा रही थी दोनो के बदन पसीने से भर गये थे जबकि बाहर ठंडी हवा चल रही थी 


चुदाई के आलम मे बेख़बर दोनो भाई बहन अपनी अपनी सीमाओ को तोड़ते हुए अपने अंत की तरफ बढ़ रहे थे उषा का बदन बुरी तरह से थर थरा रहा था पल पल वो झड़ने के करीब हो रही थी प्रेम के लंड को उषा की चूत ने बुरी तरह से जाकड़ रखा था पर लंड कहाँ कभी चूत के रोकने से रुका करता है प्रेम के टट्टो मे भरा वीर्य भहर निकलने को बेताब हो रहा था तभी उषा ने कस कर प्रेम को थाम लिया और अपनी जाँघो को उसकी कमर पर गोल लपेट ते हुए झड़ने लगी उसकी चूत से रिस्ता पानी प्रेम के लंड को भिगोते हुए उसके टट्टो को गीला करने लगा और उसी समय प्रेम के घुटने भी काँप गये और उसके लंड से वीर्य की पिचकारियाँ निकल कर बहन की चूत को भिगोने लगी …………

जिस्मो की आग जो जल रही थी बेसबरो मे वो कुछ पॅलो के लिए ठंडी हो गयी थी उषा प्रेम की बाहो से अलग हुई और अपने कपड़ो को समेट कर बाथरूम मे चली गयी आज प्रेम ने कस कर उसकी चूत मारी थी उषा का बदन बुरी तरह से थक गया था बाथरूम मे जाकर उसने अपने शरीर को सॉफ करना शुरू किया ठंडा पानी जैसे ही उसके बदन पर पड़ा उसे बहुत सुकून मिला उसको कल सुबह सुबह ही कॉलेज के लिए निकलना था उपर से चुदाई की थकान तो उसने सोचा कि नहा धोकर ही सो जाती हूँ और नहाने लगी जबकि प्रेम सोच रहा था कि दीदी को एक बार और चोद कर आराम से सोउंगा 
उसने सोचा कि दीदी पेशाब वग़ैरा करके आती ही होगी पर करीब 15 मिनिट बीत गये उषा आई नही तो प्रेम भी नंगे बदन ही बाथरूम की तरफ हो लिया दरवाजा खुला पड़ा था अंदर जलते बल्ब की रोशनी मे उषा का सुडोल बदन पानी की बारिश की चादर मे लिपटा हुआ किसी कयामत से कम नही लग रहा था प्रेम भी बाथरूम मे घुस गया और उषा को अपनी बाहों मे भर लिया पर उषा का अब बिल्कुल मूड नही था उसने प्रेम को मना कर दिया अब प्रेम भी दीदी से ज़बरदस्ती तो कर नही सकता था तो थोड़ी देर बाद भाई बहन अपने अपने कमरे मे सो गये 


इधर सौरभ के घर पर रोज की ही तरह सुधा और सौरभ बेड पर सो रहे थे विनीता का बिस्तर दरवाजे के पास वाले पलंग पर लगा हुआ था कमरा गहरे अंधेरे मे डूबा हुआ था विनीता गहरी नींद मे मगन सपनो की दुनिया मे खोई पड़ी थी दूसरी तरफ एक ही बिस्तर पर लेटे हुए सुधा और सौरभ दोनो ही जागे हुए थे नींद दोनो की आँखो से कोसो दूर थी पिछले दो दिनो मे ही उनके रिश्ते ने ना जाने कैसे कैसे मोड़ ले लिए थे जिस ताई जी को वो इतना शरीफ समझता था वो ताई जी ही उसके लंड को अपनी चूत मे लेने के लिए मचल रही थी इधर सुधा की चूत भी सौरभ का ख़याल कर कर के गीली हो रही थी
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08-25-2018, 04:08 PM,
#28
RE: Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
दोनो अपनी अपनी उधेड़बुन मे फसे पड़े थे दोनो के जिस्म एक दूसरे से पास पास ही सटे हुए थे पर दोनो मे से कोई भी पहल नही कर रहा था जबकि हसरते दोनो को पागल करे जा रही थी सौरभ का लंड उसे एक पल के लिए भी चैन नही लेने दे रहा था आख़िर जब उस से बिल्कुल भी काबू नही रहा तो वो आहिस्ता से ताई जी की तरफ सरका सुधा के जिस्म से सट गया वो, सुधा समझ गयी कि सौरभ भी जाग रहा है पर वो चाहती थी कि सौरभ ही पहल करे साथ ही उसे ये भी डर था की कहीं विनीता ना जाग जाए तो वो चुपचाप लेटी ही रही , सौरभ ने अपने पयज़ामे को नीचे सरकाया और अपने लंड को कपड़ो की क़ैद से आज़ाद कर दिया 

फनफनाता हुआ लंड खुली हवा को महसूस करते ही और भी गर्म हो गया सौरभ ने आहिस्ता से सुधा के हाथ को अपने गरम लंड पर रख दिया लंड को अपने हाथ पर महसूस करते ही सुधा रोमांचित हो गयी पर उसको विनीता का डर भी था तो वो कोई रिस्क नही लेना चाहती थी तो उसने अपना हाथ सौरभ के लंड से हटा लिया पर सौरभ की रगों मे चढ़ती जवानी ज़ोर मार रही थी वो कहाँ मान ने वाला था उसने फिर से अपने लंड को ताइजी के हाथ मे दे दिया और अपने हाथ से सुधा के हाथ को दबाते हुए मूठ मरवाने लगा उधर सुधा सौरभ के सिग्नल को समझ गयी उसने सोचा कि चलो जल्दी से हाथ से हिला कर ही इसको शांत कर देती हूँ और उसके लंड को हिलाने लगी 


जल्दी ही सुधा का हाथ पूरी रफ़्तार से सौरभ के लंड पर चलने लगा मज़े के सागर मे डूबा सौरभ यही नही रुकने वाला था उसने अपना हाथ सुधा की मस्त चूचियो पर रख दिया और उनको दबाने लगा सुधा की हालत टाइट होने लगी उसकी चूत तो पहले ही रस छोड़ रही थी उपर से सौरभ की ये गर्म छेड़खानी सुधा का कंट्रोल अपने आप से छूटने लगा सौरभ ने उसके ब्लाउज के हुको को खोल दिया और उसकी नंगी छातियो से खेलने लगा सुधा ने भी उसको रोकना मुनासिब नही समझा और चुपचाप लेटी रही उसके लंड को हिलाते हुए पर सौरभ ने धीमे से उसके कान मे कहा कि ताई जी इसको चूसो ना और सुधा के गोरे गालो पर किस करने लगा सुधा मस्त होने लगी


सौरभ के मूह से लंड चूसने की बात सुनकर उसके प्यासे होंठ फड्फाडा उठे, उसने कंबल से अपना मूह बाहर निकाला और चारो तरफ देखा कमरे मे घुप्प अंधेरा छाया हुआ था सौरभ ने कस कर उसकी छातियो को भींचा तो ना चाहते हुए भी उसके मूह से हल्की सी आह निकल गयी तो सुधा ने भी सौरभ की गोटियो को कस कर भींच दिया सौरभ ने ताई जी के रसीले होंटो को अपने होंटो से लगा लिया और उनके रस को निचोड़ने लगा करीब 4-5 मिनिट तक दबा के सुधा के होंठो का रस पीता रहा वो सुधा भी अब गरम हो चुकी थी 


वो उल्टी हुई और अपने मूह को सौरभ की टाँगो की तरह ले आई और बिना देर किए चुप चाप अपने मूह को उसके लंड पर झुका दिया जबकि उसके चूतड़ अब सौरभ के मूह की तरफ हो गये थे सुधा ने अपने होंठो पर जीब फिरा कर उनको गीला किया और गप्प से सौरभ के लाल सुपाडे को अपने मूह मे भर लिया और अपनी लंबी जीभ से उसको चूसने लगी सौरभ के सारे तार हिल गये ताई जी की जीभ की रागड़ाई की वजह से वो अपने दोनो हाथो से ताई जी के चुतड़ों को सहलाने लगा और धीरे से साड़ी को उपर कमर तक उठा दिया 


सुधा की गदराई गान्ड पर हाथ फिराने लगा तो सुधा भी पूरी मस्ती से उसके लंड को चाटने लगी सौरभ ने ताई जी की चूत की फांको को फैलाया और उस मस्त खुसबू को जो चूत से आ रही थी सूंघ ने लगा सुधा उसके लंड को चूस्ते चूस्ते उसके टट्टो पर भी जीभ फिरा रही थी सोरभ ने अगले ही पल सुधा की चूत को अपने मूह मे भर लिया ब्रेड की तरह फूली हुई चूत को गपा गप चाटने लगा किसी गोलगप्पे को मूह मे भर लिया हो जैसे उसने सुधा अपनी आँखे बंद किए लंड चूस रही थी चूत का नमकीन पानी पीकर सौरभ को बहुत मज़ा आ रहा था दोनो ताई बेटे की जीभ अपनी अपनी जगह पर कमाल कर रहे थे 

सुधा अब पूरी तरह से सौरभ के उपर चढ़ बैठी थी दोनो जने अपनी उफनती सांसो को समेटे हुए चुपचाप लगे हुए थे सुधा के चूतड़ अब बुरी तरह से सौरभ के मूह पर उछल रहे थे करीब10 मिनिट तक ऐसे ही चलता रहा और फिर अबकी बार जैसे ही सुधा ने अपनी जीभ को गोल गोल सुपाडे पर रगड़ा सौरभ का लंड हार गया और उस से गाढ़ा सफेद लावा फुट पड़ा , स्वादिष्ट नमकीन पानी सुधा के मूह मे पिचकारियो के रूप मे गिरने लगा जिसे सुधा गटा गट पी गयी उसने सौरभ के लंड से वीर्य की छोटी से छोटी बूँद भी निचोड़ ली
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08-25-2018, 04:08 PM,
#29
RE: Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
पर अभी सुधा का काम नही हुआ था सौरभ ने अपनी पूरी जीभ उसकी चूत मे उतार दी और अंदर वाले हिस्से को चाटने लगा कुरेदने लगा सुधा ही जानती थी कि कैसे उसने अपनी मचलती हुई आहो को रोके रखा था वरना वो इस हद तक गरम हो चुकी थी कि सारे कमरे को अपने सर पर उठा लेती पर हर शुरुआत का अंत भी होता हैं दो चार मिनिट बात सुधा ने सौरभ के मूह को कस लिया अपनी जाँघो मे और अपनी चूत से टपकते पानी से उसके पूरे चेहरे को तर कर दिया बड़ी ही खामोशी से दोनो ताई बेटा ने अपना काम कर लिया था रात अपनी खामोशी से कट रही थी हसरते शांत पड़ गयी थी 

सौरभ की आँख जब सुबह खुली तो उसने देखा कि कमरे मे कोई नही है उसने बिस्तर को देखा जहाँ रात को उसने ताई जी के साथ शरारत की थी बिस्तर की सिलवटों से भरी चादर रात की कहानी बता रही थी वो उठा और कमरे से बाहर आया तो देखा कि विनीता धूप मे बैठी हुई थी, 


सौरभ- मम्मी, माफ़ करना आज थोड़ा लेट आँख खुली , मैं अभी आपके लिए पानी रखता हूँ आप नहा लेना फिर


विनीता-नही बेटा , तुम्हारी ताई जी ने नहला दिया था मुझे तू एक काम कर सहर जा और मछलियो की पेमेंट जो बकाया पड़ी है वो ले आ 


सौरभ- जी, मैं अभी चला जाता हूँ 


उषा कॉलेज जाने के लिए घर से बाहर निकली ही थी कि उसको सौरभ मिल गया 
सौरभ- दीदी कहाँ जा रहे हो


उषा- कॉलेज और कहाँ जाना है मुझे 


सौरभ- मैं भी सहर जा रहा हूँ चलो साथ ही चलते है 
उषा- ठीक है भाई 


सौरभ ने स्कूटर स्टार्ट किया और उषा लपक कर बैठ गयी दोनो चल पड़े सहर के रास्ते की तरफ 

दूसरी ओर प्रेम सुबह सवेरे ही खेतो की तरफ निकल गया था सुधा ने घर का काम निपटाया और नहाने का सोचने लगी बाथरूम मे गयी और कपड़े उतारे ही थे कि उसको रात को सौरभ के साथ किए खेल की याद आ गयी सुधा खुद चूत मरवाने के लिए बेताब थी आख़िर इतने सालो से दबा के रखी गयी कामवासना ने अब उसका कहना मान ने से मना जो कर दिया बाथरूम मे पूरी नंगी खड़ी सुधा सौरभ के ख़याल से रोमचित होकर गरम होने लगी उसने अपने दोनो बोबो को हाथ से मसलना शुरू किया दो दो किलो की चूचियो मे हवा भरने लगी कामुकता से वो ऐंठने लगी 



सुधा की चूत जो कि आज कल 24 घंटे ही पनियाई हुई रहा करती थी फिर से गीली होने लगी उसने थोड़ी देर उसको उंगली की सहयता से सहलाया पर उसको ज़रूरत थी एक तगड़े लंड की , लगडे लंड का ख़याल आते ही उसके जेहन मे प्रेम का ख्याल आया सुधा जो की सारी उमर एक पतिव्रता और संस्कार शील औरत रही थी 40 की उम्र मे आते ही उसको जाने क्या हुआ सारी शरम जैसे घर की खूँटि पर टाँग के रख दी थी उसने कामुकता मे अंधी होकर वो अपने बेटों से ही चुदवाने से भी नही शरमा रही थी प्रेम के लंड का ख्याल आते ही वो अपनी सुध बुध खोने लगी 
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08-25-2018, 04:08 PM,
#30
RE: Ghar Pe Chudai एक और घरेलू चुदाई
पर वो भी करे तो क्या करे ये चूत की आग भी ना कमाल थी उसका पूरा जिस्म सुलग रहा था उसने सोचा कि प्रेम पर थोड़े और डोरे डाले जाए काश उसको पता होता कि प्रेम तो पहले से ही अपनी माँ को चोदने के लिए तैयार बैठा है बस सुधा के साड़ी उपर उठाने की देर थी बाकी काम तो वो खुद ही कर देता हाई रे मजबूरी सुधा ने वापिस अपने कपड़े पहन लिए और खाना लेकर प्रेम के पास खेत मे पहुच गयी सुधा ने आज बस एक पतली सी साड़ी पहनी थी अंदर ब्रा-पैंटी कुछ नही थे पतला सा ब्लाउज उसके मस्त उभारों का बोझ संभालने मे असमर्थ था आज एक माँ अपने बेटे को रिझाने की पूरी तैयारी करके आई थी खेत मे काम करते हुए प्रेम ने दूर से ही सुधा को देख लिया था अपनी भारी गान्ड को मटकाते हुए कुछ ज़्यादा ही इठला कर चलती हुई उसकी तरफ ही आ रही थी वो 




माँ को आया देख कर प्रेम ने काम को बंद किया और सुधा के पास आ गया सुधा कुँए की मुंडेर पर बैठ गयी थी उसने अपनी साड़ी को घुटनों तक उपर कर लिया था जिस से उसकी सुडोल गोरी गोरी पिंडलिया प्रेम को ललचा रही थी प्रेम का लंड जो की सदा खड़ा ही रहता था माँ की चिकनी टाँगो को देख कर फिर से अपना सर उठा ने लगा 

सुधा बोली- बेटे तेरे लिए गरमा गरम खाना लाई हूँ खा ले सुधा जब प्रेम से बात कर रही थी तो उसकी साड़ी का पल्लू साइड मे सरक गया और उस पतले ब्लाउज से बाहर को उसकी छातिया छलक आई सुधा के मनमोहक निप्पल्स ब्लाउज मे से साफ साफ दिखाई दे रहे थे प्रेम का गला माँ के बोबो को देख कर खुश्क हो गया उसका दिल तो कर रहा था कि अभी साली को पटक कर चोद दे पर वो ऐसा कर नही सकता था प्रेम खाना खाने बैठ गया सुधा वहाँ से उठी और उसी कच्चे बने हुए बाथरूम मे पहुच गयी और पानी की मोटर चला दी उसका आज भी वही इरादा था जो सौरभ को रिझाने के टाइम पे था



सुधा ने आहिस्ता से अपनी साड़ी को उतारी और नंगी होकर पानी के पाइप के नीचे आ गयी उसका भीगा हुआ बदन अगर कोई देख ले तो बेहोश ही हो जाए ऐसी गजब लग रही थी वो खाना खाते खाते प्रेम को ध्यान आया कि उसने बिजली की लाइन से तारों को चेंज नही किया था आज उसको खेत मे पानी छोड़ना था तो वो खाना बीच मे ही छोड़कर छत पर पहुच गया और तारों को सही करने लगा और तभी उसकी नज़र उस कच्चे बाथरूम पर पड़ी जिसकी छत नही थी तो उसने सुधा को वहाँ पर नहाते हुए देखा तो उसके होश उड़ गये उसे ये तो पता था कि माँ मस्त है पर ये नही पता था कि वो तो कयामत है प्रेम के कदम वही पर ठिठक गये और वो सुधा के नंगे बदन को देख कर अपनी आँखे सेकने लगा पर उसको ये ध्यान नही रहा कि उपर खड़े होने के कारण उसकी परछाई नीचे ज़मीन पर पड़ रही है 



सुधा मस्ती से अपने अंग अंग को मसल्ते हुए नहाने का आनंद ले रही थी कि उसकी नज़र उपर से पड़ती छाया पर पड़ी तो उसने तिरछी निगहो से उपर की ओर देखा तो प्रेम खड़ा नज़र आया सुधा मंद मंद मुस्कुराइ और , और भी खुल कर अपने अंगो का प्रदर्शन करने लगी

अपनी माँ को नहाते देख कर प्रेम का हाल बुरा होने लगा था उसका हाथ अपने आप नीचे लंड पर चला गया और उसने उसको बाहर निकाल लिया और तेज़ी से हिलाने लगा सुधा आज बेटे के दिल मे अपने हुश्न की आग बुरी तरह से लगा देना चाहती थी उसे पता तो था ही कि प्रेम उसे नहाते हुए देख रहा हैं सुधा अब बिल्कुल बीच मे आकर खड़ी हो गयी और अपनी टाँगो को फैला कर झान्टो से भरी हुई फूली हुई चूत को सहलाने लगी सुधा की गुलाबी चूत को देख कर प्रेम ने अपने होंटो पर जीभ फेरी और तेज़ी से मूठ मारने लगा 


सुधा ने अपनी चूत को सहलाया और अपनी बीच वाली उंगली को चूत मे डाल कर अंदर बाहर करने लगी प्रेम का हाल हुआ और बुरा उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि करे तो क्या क्या माँ उस से चुदना चाहती है इतने पे प्रेम का पानी चूत गया और फिर वो तारों को सही करके नीचे उतर गया और अपना खाना खाने लगा तब तक सुधा भी नहा कर आ गयी थी खाना खा लिया बेटा उसने पूछा प्रेम से 

जी, माँ खा लिया प्रेम सुधा के पास आकर खड़ा हो गया 
सुधा के गीले बदन से आती मनमोहक खुश्बू से प्रेम को नशा चढ़ने लगा था 
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