Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
03-31-2019, 03:05 PM,
#51
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
हम दोनो को बहुत मज़ा आ रहा था, एक दूसरे को पकड़े हुए हम एक दूसरे को छू रहे थे, महसूस कर रहे थे और किस कर रहे थे. दीदी ने मेरी गर्दन पर ज़ोर से किस किया और मुझे ज़ोर से जकड के अपने मम्मे मेरी छाती से दबा लिए. हम एक दूसरे के बेहद करीब थे, हमारे होंठ कब इतना करीब आ गये पता ही नही चला, हम ने अपने होंठ दूसरे के होंठों पर रख दिए और कुछ क्षणों के लिए ऐसा नाटक करने लगे जैसे हम किस नही कर रहे हो, बस होंठों को होंठों के उपर घिस रहे हो, लेकिन फिर कंट्रोल नही हुआ और हम एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे. दीदी ने अपने हाथ नीचे लाकर मेरी कमर पकड़ ली, और फिर ज़ोर से किस करने लगी. मैं भी दीदी को जी भरकर चूम रहा था, दीदी इस बीच अपने हाथ मेरे गीले बॉक्सर के अगले भाग की तरफ ले आई, हाथ थोड़ा नीचे करके दीदी ने मेरे लंड को पकड़ लिया. मेरा लंड जो थोड़ी देर पहले मूठ मारने के बाद बैठा हुआ था, वो भी अंगड़ाई लेने लगा, लेकिन अभी पूरी तरह खड़ा नही था, वो दीदी की इस हरकत से पूरी तरह खड़ा होने लगा....

दीदी का हाथ मेरी गोलियों तक पहुँचने ही वाला था तभी एक ज़ोर से कोई एलेक्ट्रॉनिक आवाज़ हुई और उसने हम दोनो को एक दम भौंचक्का कर दिया. हम एक दूसरे से तुरंत अलग हुए, दो सेकेंड बाद हमारी समझ में आया कि ये आवाज़ दीदी के मोबाइल फोन पर आए टेक्स्ट मेसेज की थी. हम दोनो ने अपने मूँह पोंछे और अपने कपड़े ढूँढने लगे, इस से पहले क़ी हम शांत और ठंडे हो पाते. मैने दीदी की तरफ देखा, वो अपनी टी शर्ट पहन रही थी, हम दोनो ने एक शरम भरी मुस्कान के साथ एक दूसरे को देखा और फिर कुछ सेकेंड के लिए रुके.

दीदी: उस आवाज़ ने तो मुझे डरा ही दिया था

राज: मेरी तो फट ही गयी थी

फिर हम दोनो शांत हो गये, और फिर एक दूसरे की तरफ देख के हँसने लगे. दीदी के गाल शरम से लाल हो रहे थे, और शायद मेरे भी. हम फिर एक दूसरे को देख के मुस्कुराए लेकिन इस बार शरम थोड़ी कम थी.

राज: मैं अभी सॉफ करके आता हूँ

दीदी: ओके ठीक है, मैं तो अब ठंडे पानी से शवर के नीचे नहाउन्गी

मैने कुछ सोचा और फिर पूछा, कंपनी दूं क्या?

दीदी हँसी और मेरे कंधे पर एक थप्पड़ मारा, मैं चहकता हुआ रूम से बाहर चला गया. मैने अपने रूम में आके अपने आप को सॉफ किया, और फिर कुछ देर के लिए बेड पर लेट गया, और सोचने लगा जो कुछ भी आज हुआ था उसके बारे में. मुझे मालूम नही था लेकिन दीदी भी अपने रूम में ही थी और शायद ये ही कर रही थी. 


.....................
आज दोपहर को मौसम बहुत सुहावना था. मुझे घर से बाहर जाके मौसम का आनंद लेने की इच्छा हुई, मैने दीदी से पूछा कुछ देर के लिए ड्राइव पर चलोगि? दीदी मेरे इस प्रस्ताव पर थोड़ा चौंकी, फिर वो तुरंत तय्यार हो गयी, थोड़ी देर बाद मैं और दीदी कार में बैठकर शहर से बाहर एक सुनसान सड़क पर चल पड़े.

एक जगज मैने कार पार्क की, और बाहर निकल के एक खेत की पगडंडी पर खड़े हो गये, दीदी उस सुहाने मौसम में बेहद खूबसूरत लग रही थी. दीदी के काले घने बाल हवा में उड़ रहे थे, दीदी का चेहरा चमक रहा था और दीदी मस्ती के साथ खेत की मंड (बाउंड्री) पर मस्तानी चाल के साथ चल रही थी.

जब भी हम पहले कभी बाहर घूमने ड्राइव पर जाते थे तो ढेर सारी बातें किया करते थे, लेकिन अब ये असंभव था कि हमारी बातों में जो कुछ हमारे बीच चल रहा था, उसका जिकर ना आए. इस सुहाने मौसम में, हम को किसी चीज़ का डर या परवाह नही थी, हम काफ़ी सहज महसूस कर रहे थे.

राज: दीदी आपको नही लगता हम कई बार काफ़ी आगे बढ़ जातें हैं, मैने ये स्वीकार किया और दीदी की राय पूछी

दीदी ने हां में सिर हिलाया और फिर थोड़ा हँसी. हां... लेकिन पता नही, मुझे तो बहुत अच्छा लगता है, मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो और सब कुछ अच्छा लगता है. तुम कहीं फिर से परेशान तो नही हो?

राज (कंधे उँचकाते हुए): पता नही कुछ समझ में नही आता, अच्छा तो मुझे भी बहुत लगता है, मैने दीदी को निहारते हुए कहा, आप बहुत मस्त हो दीदी. 

दीदी ने मुझे देखा और स्माइल किया, फिर हम कुछ देर शांत होकर से चलते रहे.

दीदी : क्या मम्मी ने तुमको बताया कि टान्या का फोन आया था?

टान्या का नाम सुनकर मैं थोड़ा चौंका, फिर किसी तरह बोला नही तो...

दीदी : हां, कल शाम को उसका घर के लॅंडलाइन पर फोन आया था, और वो पूछ रही थी कि तुम घर पर हो क्या? किसी प्रॉजेक्ट के बारे में शायद तुमसे बात करना चाह रही थी, लेकिन मम्मी को लगा कि वो झूठ बोल रही है. राज, मैं आज तुम को कुछ ऐसा बताउन्गी कि तुम को मेरी बात पर विश्वास नही होगा. 

राज: ऐसी क्या बात है दीदी?

दीदी: एक रात को जब मैं टीवी देखकर उपर अपने रूम में जा रही थी तो मैने मम्मी पापा के रूम के पास से गुज़रते हुए मैने जो सुना उस पर मुझे विश्वास ही नही हुआ. कपूर अंकल जो पापा के बिज़्नेस पार्ट्नर हैं, और अपनी इकलौती बेटी टान्या के पापा भी, वो चाहते हैं कि टान्या की शादी तुम्हारे साथ हो जाए. हमारे मम्मी पापा भी इस रिश्ते के लिए तय्यार हैं क्यूंकी ये दोनो की बिज़्नेस पार्ट्नरशिप के लिए भी अच्छा रहेगा.

मैं गौर से दीदी की बातें सुन रहा था, मुझे विश्वास नही हो रहा था.

दीदी (आगे बोलते हुए): लेकिन अपने मम्मी पापा चाहते हैं कि पहले मेरी शादी हो जाए उसके बाद तुम्हारी और टान्या की शादी करेंगे. मेरे लिए पापा और कपूर अंकल कोई पैसे वाला बिज़्नेसमॅन लड़का ढूँढ रहे हैं. तुम्हारी और टान्या की शादी के बारे में दोनो के पेरेंट्स शायद कोई लेन देन की रसम भी कर चुके हैं. इस बारे में केवल हम दोनो को ही नही मालूम लेकिन टान्या को उसके पेरेंट्स सब कुछ बता चुके हैं. वो भी तुम्हारे साथ शादी करने को तय्यार है, बस अब तो पहले मेरी शादी होने की देर है. इसी कारण कल जब टान्या का फोन आया तो मम्मी को कुछ शक हुआ होगा. 

दीदी ज़ोर से हँसने लगी, और मुझसे पूछा, तुम को टान्या अच्छी लगती है ना?

मुझे दीदी के हँसने से बहुत झुंझलाहट हुई, और कोई जवाब समझ में नही आया. दीदी ये देख के कुछ समय के लिए चुप हुई फिर बोली, मैं तुम्हे चिढ़ा नही रही हूँ, लेकिन , मुझे तो वो बहुत सुंदर लगती है, तुमको वो सुंदर नही लगती?

मैने दीदी की तरफ देखा, और फिर टान्या के बारे में दीदी को बताने लगा, जब मैने अपनी बात पूरी कर ली तो दीदी ने फिर मुझ को वो ही बात पूछी, और मुझे आख़िर में मानना पड़ा कि हां टान्या को मैं पसंद करता हूँ. 

ये सुनकर दीदी चहक कर बोली, चलो तो फिर सब ठीक है. दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनो साथ साथ चलने लगे. कुछ दूर जाने के बाद दीदी ने कनखियों से मुझे देखा और बोली, जब तक तुम ये सब टान्या के साथ करने के लिए उस से पूछने की हिम्मत नही जुटा पाते हो तब तक तो तुम्हे मेरी सहायता की शायद और ज़्यादा ज़रूरत पड़ेगी. ये बोल के दीदी हँसने लगी.

मैं दीदी के पीछे भागा, करीद 200 मीटर और वो हंसते हुए आगे आगे दौड़ती रही.

हमारी इसके बाद बाकी सारी बात चीत अच्छी रही और हम दोनो को एक दूसरे से बातें कर के अच्छा लगा. हम जब एक ट्यूबिवेल के पास खड़े थे, वहाँ दीदी मेरा सहारा लगा के खड़ी हो गयी, और मेरे हाथों को अपने हाथों में ले लिया. मैने दीदी के गाल पे एक प्यारी सी चुम्मि ली और दीदी ने एक ज़ोर से साँस ली. हम दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए कार तक आ गये.

उस रात हम ने जो किया था, उसके बाद कुछ दिनों तक मैने इंतजार किया. मैने अपने उपर काबू रखा और ये समझने और समझाने की कोशिश की मैं दीदी का ग़लत इस्तेमाल नही कर रहा हूँ. मुझे पता था दीदी को कोई फरक नही पड़ता, लेकिन मैं अपने दिल में दीदी की इज़्ज़त करता था और दीदी को मूठ मारने के साधन के रूप में नही सोचता था.

लेकिन कुछ दिन बाद मेरी वो स्थिति हो गयी कि मेरे दिमाग़ में बस दीदी, लड़की और सेक्स के सिवा और कुछ नही सूझ रहा था. वो दिन ट्यूसडे का दिन था, वीकेंड मैने किसी तरह पार कर लिया था, अब और बर्दाश्त नही हो रहा था.

रात को डिन्नर के बाद मम्मी पापा ड्रॉयिंग रूम में टीवी देख रहे थे, दीदी फेमिना मॅगज़ीन पढ़ रही थी, मैं भी दीदी के पास इंडिया टुडे लेकर बैठ गया. 
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03-31-2019, 03:06 PM,
#52
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
राज (धीरे से): मैने दीदी को कनखियों से देखा और पूछा, दीदी, आज थोड़ा हेल्प करोगी? 

दीदी ने मेरी तरफ देखा और स्माइल के साथ धीरे से बोली, हां क्यों नही, आज कैसे करने का मूड है?

हर बार की तरह ना चाहते हुए भी मुझे जवाब देना पड़ा, मैं बोला, दीदी आपकी ये टाइट जीन्स, जो आपने पहन रखी है, जब आप झुकती हो तो......

दीदी (मूँह दबा के हंसते हुए धीरे से): जब मैं झुकती हूँ..., हुह, तो लगता है तुम और ज़्यादा अच्छे से देखना चाहते हो?

राज: शायद हां दीदी, मैं स्वीकार करते हुए बोला 

दीदी: रूको मैं देखती हूँ, हम क्या कर सकते हैं

हम ने अपनी अपनी मॅगज़ीन्स बंद की, मम्मी पापा भी टीवी बंद कर के अपने बेड रूम की तरफ जा रहे थे, मैने और दीदी ने उनको गुड नाइट कहा. दीदी और मम्मी रुक के कुछ बातें करने लगी और मैं अपने रूम में चला गया और बेड पर जाके बैठ गया.

करीब 10 मिनिट के बाद दीदी डोर पर नॉक कर के मेरे रूम में आ गयी, दीदी ने अब भी वो ही ड्रेस पहन रखी थी.

दीदी: तो तुम को मेरी हेल्प चाहिए क्यों?

राज: ह्म..., करके मैने अपनी शर्ट और फिर जीन्स उतार दी, और अपने बेड पे बॉक्सर्स पहन के बैठ गया, लंड खड़ा होना शुरू हो चुका था.

दीदी ने मेरे बॉक्सर्स की तरफ देखा और बोली, लगता है तुम तो एकदम तय्यार हो, वो घूमी और गर्दन घूमाकर मेरी तरफ देखा और पूछा, तो तुम को ये जीन्स मेरे उपर अच्छी लगती है?

राज: हां दीदी, सच कह रहा हूँ, आप पर ये जीन्स बहुत अच्छी लगती है. जीन्स में दीदी की गान्ड के उभार सॉफ नज़र आते थे.

दीदी: तान्या से अच्छी या खराब? दीदी ने हंसते हुए कहा, मज़ाक कर रही हूँ, तुम कुछ मत जवाब दो.

दीदी अपनी जीन्स का बटन खोलकर अब उसकी ज़िप खोल रही थी

दीदी: ये जीन्स मैने शॉपर्स स्टॉप से सेल में खरीदी थी, ये कहते हुए दीदी ने जीन्स अपने हिप्स से नीचे करनी शुरू कर दी. जीन्स के नीचे होते ही दीदी की ग्रे पैंटी जिस पर पिंक स्ट्रिपेस थे दिखाई देने लगी, दीदी पर ये बहुत अच्छी लग रही थी.

दीदी को जीन्स उतारते देख मैं बोला, सेल में चाहे आपको सस्ती मिली हो, लेकिन ये फुल प्राइस का मज़ा दे रही है. 

दीदी ने पीछे देखा और मुस्कुराइ. दीदी फिर से सीधी खड़ी हो गयी और अपने गोल गोल हिप्स पर हाथ फिराने लगी. दीदी अपना हाथ उपर पैंटी की एलास्टिक पर ले गयी, और पैंटी को धीरे धीरे नीचे करने लगी.

मुझे दीदी के हिप्स के बीच का क्रॅक दिखाई देने लगा, दीदी ने पैंटी इतनी नीचे कर दी कि अब दीदी के पूरे हिप्स नंगे हो गये.

दीदी: ये पैंटी भी मैने सेल में ही खरीदी थी, 3 पैंटी, एक पैंटी के प्राइस पर, ऐसा बोलते हुए दीदी ने अपनी पैंटी नीचे फ्लोर पर गिरा दी.

मैने मज़ाक में कहा: मुझे ये फुल्ली ऑफ वाला डिसकाउंट अच्छा लगा

दीदी ने पीछे देखा और अपनी भोहें चढ़ा के बोली, ये मज़ाक बहुत बेहूदा था, और फिर मुस्कुराइ.

हां शायद, मेरा ध्यान कहीं और ही है, मैं अपने लंड को बॉक्सर्स के उपर से ही सहलाता हुआ बोला. क्या मस्त गान्ड थी दीदी की, दीदी के हिप्स क्या मस्त गोलाइयाँ लिए हुए थे, एक दम कड़क बम्स थे, एक दम चिकने. मैं दीदी की नंगी गान्ड देख के मूठ मार रहा था और दीदी मुझे ऐसा करते हुए देख रही थी. जिस तरह मैं दीदी के घूर्ने को नज़रअंदाज कर रहा था उसी तरह दीदी भी मुझे कर रही थी. ये बेहद नाज़ुक स्तिथि थी कि हम इतना ज़्यादा सेक्सी माहौल बनाने के बाद भी ये कोशिश कर रहे थे कि इससे ज़्यादा आगे ना बढ़ें.

दीदी एक सेकेंड के लिए थोड़ा सा घूमी तो मुझे उनकी हल्की हल्की झान्टो के त्रिकोण की एक झलक मिल गयी, मेरे मूँह से आहह की आवाज़ निकल गयी.

दीदी: क्या हुआ राज?

राज: कुछ नही दीदी, बस थोड़ा सो झुक जाओ ना प्लीज़

जैसे ही मैने ये कहा दीदी थोड़ा आश्चर्य में पड़ गयी. दीदी ने अपने पैर चौड़ा रखे थे और मैं उनके बीच कुछ कुछ देख पा रहा था.

एक सेकेंड रूको, दीदी बोली और सीधे खड़े होते हुए घूमकर मेरी तरफ देख के हँसने लगी. दीदी ने अपने होंठ दाँत से दबा के मेरी तरफ आश्चर्य में सिर हिलाया, और बोली कैसे लड़के हो तुम, मेरे हाथ की तरफ देखते हुए बोली जिस से मैं लंड आगे पीछे कर रहा था. एक बात कहूँ राज.... अगर तुम मेरा सब कुछ देखने में इतना इंट्रेस्टेड हो तो मैं भी तुम्हारे उसको देखूँगी, बाहर निकालो उसको.

राज (दीदी की तरफ देखते हुए): मुझे कोई आपत्ति नही है, पक्का ना दीदी?

दीदी ने हां में सिर हिलाया, फिर थोड़ा नर्वस हो गयी कि कहीं इस बात को लेकर बाद में उसकी खिंचाई ना करूँ

दीदी सोच के बोली: क्या ये करना चाहिए?

कुछ क्षणों के लिए खामोशी छा गयी

मैं बोला पछताओगी दीदी आप

दीदी ने मेरी और मैने दीदी की तरफ देखा, और फिर मुस्कुराने लगे, थोड़ा शरमाते हुए

दीदी: क्या मैं उपर बेड पर आ जाउ?

मैं दीदी के लिए जगह बनाने के लिए घूमा, और बेड के दूसरी तरफ देखने लगा. दीदी बेड पर उपर आ गई, थोड़ा साइड की तरफ से जिस से मैं कुछ देख ना पाऊँ. दीदी बेड के दूसरे किनारे पर बैठ गयी और फिर मेरी तरफ घूमी, दीदी ने अपने दोनो घुटनों को जोड़ रखा था. ये बड़ा अजीब लग रहा था कि हम दोनो एक ही बेड पर बैठ कर एक दूसरे को अपनी बेहद पर्सनल चीज़ दिखाने जा रहे हैं.

तुमको ऐसा नही लगता जैसे हम फिर से छोटे बच्चों की तरह घर-घर खेल रहे हों? दीदी ने पूछा

मैं एक सेकेंड सोचा और बचपन की वो सारी यादें ताज़ा हो गयी जब हम घर-घर खेला करते थे.... और नाटक करते थे जैसे हम मम्मी पापा हों

हां दीदी, सही कह रही हो आप, वो सब आपको अब भी याद है, मैं हंसते हुए बोला

दीदी के गाल गुलाबी हो गये और वो हँसने लगी, फिर बोली.... आइ आम सॉरी राज, मुझे कुछ ज़्यादा ही उत्सुकता हो गयी थी. हम दोनो हँसने लगे जिस से माहौल थोड़ा लाइट हो जाए.

जब हम तोड़ा शांत हुए तो मैने पूछा, पहले मुझे देखना चाहोगी दीदी? दीदी ने वहीं बैठे हुए ही मेरी तरफ देखा, अपने घुटनों को बाहों में भरते हुए, अपने हाथ के अंगूठे के नाख़ून को दाँत से काटते हुए हां में गर्दन हिला दी. मैने अपने बॉक्सर्स को नीचे खिसकाना शुरू कर दिया, मैने अपने बड़े खड़े लंड के उपर से बॉक्सर को हटा दिया, और अपने बॉक्सर को पूरी तरह उतारने के लिए अपने हिप्स को थोड़ा उपर उठाया और फिर उतार के फेंक दिया. दीदी मेरे खड़े हुए 7 इंच ले लंड को आँखें फाड़ फाड़ के देख रही थी.

जब मैं थोड़ा पीछे होकर अपनी पीठ के सहारे बैठ गया, तो दीदी ने शरमाते हुए अपने नीचे की तरफ देखा. अपने दोनों घुटनों को जोड़े रखे हुए ही दीदी ने अपने दोनो पैरों को नीचे से करीब एक फुट फैला दिया. अब दीदी की गोरी गोरी नंगी जांघें मुझे दिखाई दे रही थी, और ज़्यादा नीचे गहराई में देखने पर, दीदी के नीचे वाले लिप्स थोड़ा छुपे हुए दिखाई दे रहे थे. मेरी दीदी की सब से प्राइवेट चीज़ अब मेरे सामने थी, नीचे वाले वो दो लिप्स दीदी का सबसे बड़ा ख़ज़ाना था, जो अब तक सब से छिपा हुआ था मेरे सिवाय. दीदी ने जब मेरे खड़े हुए लंड को देखा, मैं दीदी के उस नाज़ुक से द्वार की रखवाली करते ढंग से कटी हुई झान्ट के बालों को देर तक निहार रहा था. 

करीब 2 मिनिट तक हम ऐसे ही चुप चाप और बिना हिले बैठे रहे, हालाँकि मेरे पूरे शरीर में उत्तेजना हो रही थी और मैं अपने कानों में अपने दिल की धड़कन के सिवा और कुछ नही सुन पा रहा था.

मैं दीदी की चूत को घूरते हुए अपने हाथ से फिर से अपने लंड को पकड़ के आगे पीछे करने लगा, दीदी मेरे हर झटके के साथ मेरी गोलियों को हिलते हुए देखकर अब भी अपने दाँत से नाख़ून काट रही थी.

कुछ देर बाद दीदी ने अपना गला थोड़ा खांस के सॉफ किया और फुसफुसाई, मैं थोडा और पास आऊँ क्या? 

मैने हां में सिर हिलाया, थोड़ा मैं भी सर्प्राइज़ हुआ. दीदी खिसक के मेरे इतना पास आ गयी कि दीदी के पैर मेरे पैरो के पास आ गये, मैने अपने पैर थोड़ा फैलाए जिस से दीदी के पैर मेरे पैरो की पिंदलियों के नीचे आ गये.

दीदी ने फुसफुसा कर पूछा, अब ठीक है? 

मैं इस सब में इतना खो गया कि मैने अपना लंड हाथ में लिया और दीदी की चूत को देखने लगा. मुझे दीदी की चूत अब सॉफ दिखाई दे रही थी, दो मोटे मोटे चूत के लिप्स, और उनके अंदर सलवट लिए हुए अंदर के छोटे छोटे लिप्स, जो बाहर वाली स्किन से बाहर निकले हुए थे. और दोनो पैरों के बीच झान्टो की वो क्यारी जो प्यार से ट्रिम की हुई थी और चूत को घेरे हुए बड़ी सेक्सी लग रही थी.

मेरी गोलियाँ और लंड पानी छोड़ने के लिए बेचैन होते जा रहा थे. मैं बस झड़ने ही वाला हूँ .... मैं दीदी से बोला. झूठी हँसी के साथ मैने पूछा, आप के उपर निकाल दूं पानी? मैने दीदी की तरफ देखा तो उस को अपने दाँत से से होंठ काटते हुए मेरी तरफ घूरते हुए पाया.

आज नही राज, दीदी ने धीरे से कहा.

दीदी का एक पैर मेरी पिंडली को छू रहा था, मैने एक लंबी साँस लेते हुए दीदी की लंबी टाँगों के बीच नीचे की तरफ देखा. दीदी ने अपना पैर उठाया और इतना आगे कर लिया कि दीदी के पैर का पंजा अब मेरे हाथ के काफ़ी पास आ गया. हम दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा, लेकिन दोनो ने कुछ भी कहना मुनासिब नही समझा.

दीदी के पैर का पंजा मेरी गोलियों को साइड से छूने लगा, जैसे ही दीदी ने थोडा ज़ोर से ऐसी सेन्सिटिव जगह दबाया, मेरे मूँह से आहह की आवाज़ निकल गयी. 

इसके बाद जो हुआ उसके लिए हम दोनो शायद तय्यार नही थे. सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि मैं बिना कुछ सोचे अपने आप को रोक नही पाया, मैने दीदी के पैर को घुटने से पकड़ के उपर उठा दिया, फिर लंड पर अपने हाथ से एक दो जोरदार झटके मार के अपना सारा पानी दीदी के पैर के पंजे के उपर निकाल दिया. मेरे लंड से निकला हुआ पानी जो पिचकारी से मेरे हाथ, दीदी के पैर के पंजे के उपर से लुढ़क के मेरे बेड के उपर गिर रहा था, मेरा शरीर काँप रहा था, दीदी ये सब देख रही थी लेकिन वो अपनी जगह से हिली नही. 

पानी की आख़िरी बूँद निकालने के बाद जब मैं थोड़ा शांत हुआ, तो मैने पास ही रखे टिश्यू बॉक्स में से 2-3 टिश्यूस निकाले (मैं हमेशा अपने कमरे में टिश्यू रखता हूँ, इसी काम के लिए) और प्यार से दीदी के पैर को पोंछ दिया, जब मैं पैर के पंजे के नीचे से पोंछ रहा था तो दीदी गुदगुदी होने के कारण हँसने लगी. 

मैं दीदी का पैर नीचे रख के पीछे होकर बैठ गया. मुझे अपने नंगे होने का एहसास था लेकिन दीदी भी कपड़े पहनने की कोई जल्दी नही दिखा रही थी. मैने दीदी की तरफ देखा तो पाया कि वो मेरी तरफ ही प्यार से देख रही थी. मेरे को अपनी तरफ देखता पा के दीदी ने एक बड़ी सी स्माइल कर दी.

दीदी ने एक अंगड़ाई ली और ख़ुसी के साथ एक लंबी साँस ली. कुछ देर बाद साँस छोड़ते हुए बोली, ये सगे रिश्तों में ग़लत है.

मैं अचंभित होके बोला, दीदी... 

उसने अपने कंधे उचकाए और थोड़ा मेरी तरफ देखा, फिर खड़े होकर अपने कपड़े पहनने लगी.

मैं दीदी को देख रहा था, किसी खूबसूरत लड़की को कपड़े पहनते देखने का आनंद ले रहा था, फिर मैं भी उठा और अपने कपड़े पहनने लगा.

जब हम दोनो ने कपड़े पहन लिए तो हम एक दूसरे के पास खड़े थे, बड़ा अजीब लग रहा था. दीदी ने फिर से अपना होठ दाँत से काटा, और मेरी तरफ देखा, मैने दीदी के माथे पर एक पप्पी ले ली और एक झप्पी भी ले डाली. सारे कपड़े पहन के इस तरह दीदी को झप्पी देना कुछ अजीब लगा ये सोच के कुछ देर पहले हम क्या कर रहे थे. इसलिए मैने फिर से दीदी के माथे पर पप्पी ली, और थोड़ा पीछे हो गया, दीदी मेरी तरफ देखे जा रही थी.

मैं रूम के डोर के पास पहुँचा तो दीदी डोर खोलने देने के लिए थोड़ा साइड में हो गयी, मैने डोर नही खोला बस दीदी की तरफ देखता रहा. जब दीदी ने देखा कि मैं डोर नही खोल रहा हूँ तो फिर मेरे चेहरे की तरफ देखा. मैं दीदी के पास आया, वो बिल्कुल नही हिली. मैं झुक के आगे बढ़ा और दीदी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए, दीदी ने भी मुझे किस करना शुरू कर दिया.

मेरे हाथ दीदी की शर्ट के अंदर दीदी की कमर को पकड़े थे, मैने दीदी को हल्का धक्का देकर दीवार से लगा दिया, और फिर किस करना लगा. मैं अपना शरीर दीदी के शरीर से चिपका के बहुत ज़ोर से किस कर रहा था. मैं दीदी की जीन्स का बटन खोलने लगा. दीदी अब और ज़ोर से साँसे लेने लगी, जब बटन खुला उस समय दीदी हाँफ रही थी. दीदी ने जीन्स उतारने में मेरी मदद की, और अपने पैरों से निकाल के फेंक दी, अब मेरे हाथ अब दीदी की पैंटी के अगले हिस्से पर घूम रहा था. दीदी अब कराह रही थी, मैं अपना हाथ पैंटी के अंदर डाल दीदी की झान्टो के उपर से सहलाने लगा, ऐसा करने से दीदी अब काँपने लगी.

मेरी उंगलियाँ अब दोनो पैरों के बीच जाके दीदी की चूत को सहला रही थी. जैसे ही मैने चूत के दाने को सहलाया, तब तक दीदी की पैंटी गीली हो चुकी थी, और दीदी अपने फिंगर्स को मेरी पीठ पर ज़ोर से गढ़ा रही थी, दीदी ने ऐसा पहले किसी को करने का मौका नही दिया था.

अगले 10 मिनिट तक मैं दीदी को कामुक तरीके से छूता और सहलाता रहा, दीदी को कांपता हुआ महसूस करता रहा, और दीदी की जीभ का अपनी जीभ से स्वाद लेता रहा, दीदी की चूंचियाँ मेरी छाती से दब रही थी. मेरी उंगलियाँ दीदी की जांघों के बीच सहला रही थी और दीदी के कराहने की आवाज़ों से पता चल रहा था कि दीदी क्या चाहती है. मैने दीदी को थोड़ा अपनी तरफ करते हुए, दीदी की चूत की दरार के उपर और आगे उंगलियाँ ले जाते हुए उस छेद को ढूँढने लगा, दीदी की जांघें अब काँप के हिलने लगी थी.

अब दीदी हिल हिल के अपनी चूत मेरी उंगलियों पर घिस रही थी, तभी गिरते गिरते बची और अपना पूरा बोझ मेरे हाथ पर डाल दिया, दीदी ने अपना चेहरा मेरी गर्दन में घुसा रखा था, और उनकी बाहें मेरे सिर के चारो ओर थी, और मैं दीदी को पकड़े उनकी उस कुँवारी जगह छू रहा था. कुछ सेकेंड्स बाद दीदी की चूत ने कई सारी अंगड़ायाँ ली, और अगर दीदी साँस ले पा रही थी तो थोड़ा गुर्राने की आवाज़ निकाल के अब एक दम ठंडी पड़ गयी. मुझे लगा मानो दीदी के पैरों में से जान निकल गयी हो, मैने तुरंत दीदी को संभाला और दीदी को फ्लोर पर गिरने से बचाया.

मैने दीदी के काँपते हुए और निढाल शरीर को उठा के बेड पे लिटाया. मैं दीदी के उपर आ गया, दीदी के माथे को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा, और फुसफुसाते हुए कहने लगा, दीदी आप कितनी सुंदर हो..... विश्वास नही होता..... आप को पता नही है आप मुझको कितना अच्छी लगती हो... 

थोड़ी देर बाद दीदी नॉर्मल साँसें लेने लगी और आँखें बंद करे हुए ही मेरी बातें सुन के मुस्कुराने लगी. दीदी ने फिर आँखें खोल के मेरी तरफ देखा और मेरे हाथ अपने माथे से हटा के उस पर एक किस ले लिया. दीदी ने मुझे नीचे खींच के मुझे अब तक की सबसे जोरदार और प्यारी झप्पी दी. 

जब दीदी को लगा कि अब उठना चाहिए तो मैने दीदी की उठने में सहारा दिया और दीदी को अपने कपड़े सीधे करते हुए और जीन्स पहनते देखने लगा. मैने दीदी की एक झप्पी ली और एक बार फिर से हम ने किस किया, फिर दीदी मेरे कमरे से निकल के अपने रूम में चली गयी. 
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03-31-2019, 03:06 PM,
#53
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
अगले दिन दीदी काफ़ी देर तक सोती रही और कॉलेज के लिए बहुत लेट हो गयी.

जैसे ही मैने कार के पॅसेंजर की तरफ जाकर डोर खोलने के लिए हॅंडल खींचा, मैने देखा कि मानो किसी मूक दर्शक की तरह चंद्रमा मेरे सिर के उपर चमक एक अपनी चाँदनी बिखेर रहा है. तान्या मुझे देख के मुस्कुराइ और अपना पर्स उठा के कार से बाहर निकल आई, मैने गेट बंद लिया और उसे उसके अपार्टमेंट तक छोड़ने के लिए उसके साथ साथ चलने लगा. जब हम उसके अपार्टमेंट के शीशम की लकड़ी से बने गेट तक चल कर पहुँचे, वहाँ उपर 20 वॉट की सीएफएल लाइट जल रही थी, मैं थोड़ा नर्वस हो रहा था.

मैं अपने आप को कॉन्फिडेंट दिखाते हुए बोला, आज की शाम मस्त रही, मज़ा आ गया.

अपने चेहरे पर आए बालों को हटते हुए तान्या बोली, हां बहुत मज़ा आया, मैने तो ना जाने कितने सालों से बोलिंग की ही नही थी, जब मैं छोटी थी तब किया करती थी.

गुड नाइट कहने से पहले कुछ खामोशी के बीच वो अजीब क्षण अब आ चुका था. तभी मैने शरारत करते हुए कहा, हां पर अगली बार तुम इस छोटी सी पिंक बॉल की बजाय असली बॉल से खेलना. 

शायद तान्या को मेरा ऐसा बोलना अपनी इन्सल्ट लगी वो तुरंत बोली, ठीक है लेकिन आज भी अगर असली बॉल मिल जाती तो मैं तो तय्यार थी खेलने के लिए, वो ऐसा बोल के हँसने लगी और मेरी सुलग गयी.

तान्या ने दरवाजा खोलते हुए कहा, देखो अब मुझे जाने दो कल की क्लास के लिए मुझे पढ़ाई भी करनी है, तुम मुझे कॉल करना ओके? 

मैं हकलाते हुए बोला हां ज़रूर, मैं जैसे ही अपने कार की तरफ चला तभी तान्या की बिल्डिंग के किसी अपार्टमेंट का किरायेदार बाहर निकला और मुझे और तान्या को देखता हुआ पास से निकल गया.

तान्या अंदर घुसते हुए स्माइल करते हुए बोली, ओके बाइ गुड नाइट, तुम्हारे साथ मैने आज बहुत एंजाय किया.

उसका दरवााज़ा बंद हो गया लेकिन मैं एक मिनिट वहीं खड़ा रहा और कार के चाबियों को अपनी उंगलियों पर घुमाता रहा. मैं कार की तरफ चलते हुए चमकते हुए चंद्रमा को देखने लगा जो आज तान्या को तीसरी बार, हर बार की तरह मेरे मूँह पर दरवाजा बंद कर के अंदर घुसते हुए देख चुका था और इस बात का गवाह था.

मैं पिछले हफ्ते हुई सारी घटनाओं के बारे में सोचने लगा. तान्या ने करीब 2 हफ्ते पहले किसी प्रॉजेक्ट के बारे में अपनी क्विरीस पूछने के लिए मुझे फोन किया था. हम दोनो शुरू में तो क्लास असाइनमेंट्स के बारे में बातें करते रहे, फिर हम अपने बारे में बातें करने हुए मस्ती करने लगे. डॉली दीदी को पता था कि मेरे से फोन पर बातें कर रही लड़की कोई और नही तान्या ही है, दीदी मेरे रूम के डोर पर आ गयी और मुझे चिढ़ाने लगी. कुछ देर बाद एक कागज के पुर्ज़े पर लिखकर मुझसे पूछा, .तान्या से पूछा क्या? जब मैने ना में सिर हिलाया तो दीदी ने रोनी सूरत बनाई और निराश होके अपनी गर्दन हिलाई. ये अब सॉफ था कि दीदी चाहती थी कि मैं तान्या से इस बारे में जल्द से जल्द बात करूँ, और मैं भी ऐसा ही चाहता था, इसलिए मैने तान्या से अगले ट्यूसडे को डिन्नर पर चलने को प्रपोज़ किया तो तान्या थोड़ी सर्प्राइज़ हुई और फिर तुरंत तय्यार हो गयी. डॉली दीदी के चेहरे पर ये सुन के एक बड़ी सी स्माइल आ गयी और बाद में मुझ से बोली, मुझे मालूम है राज तुम तान्या को पसंद करते हो, और मुझे इस बात की खुशी है. मैं ये देख के इस बात पर खुश हो गया कि दीदी भी मेरे को तान्या के साथ बाहर जाने को एनकरेज कर रही है. 

मैं और तान्या ट्यूसडे को और फिर फ्राइडे को बाहर गये, और आज सनडे को बोलिंग के लिए गये, ये एक्सपीरियेन्स भी अच्छा रहा. मुझे लगने लगा था कि अब हम क्लासमेट्स से ज़्यादा एक दूसरे को जानने लगे हैं. मुझे इस बात की उम्मीद नही थी कि तान्या मुझे अंदर बुलाकर अपने कमरे में, अपनी दोनो टाँगें चौड़ा के और चूत खोल के मुझे चोदने के लिए कहेगी, लेकिन हां मैं केवल एक गुड नाइट से ज़्यादा एक किस या हग की उम्मीद तो कर ही रहा था. शायद मुझे ज़्यादा ही जल्दी थी, सब जवानी का दोष था.

निराश होकर मैं अपनी कार में बैठ गया और ड्राइव कर के अपने घर की तरफ चल पड़ा. आधे घंटे की ड्राइव के बाद जब मैं घर पहुँचा मैं काफ़ी कुछ नॉर्मल हो चुका था. मुझे मालूम था कि मेरी निराशा का मूल कारण ये था कि तान्या पहली लड़की थी जिसे मुझे घुमाने ले जाने का मौका मिला था और शायद एक नॉर्मल भारतीय लड़की से कुछ ज़्यादा ही एक्सपेक्ट कर रहा था,वो भी जब, जब कि तान्या को मालूम था कि उसकी शादी मेरे साथ दोनो के पेरेंट्स पक्की कर चुके हैं. वो शायद अपनी इमेज मेरी नज़रों में खराब नही होने देता चाहती थी. मैं तान्या को बहुत चाहने लगा था वो मुझे बहुत अट्रॅक्टिव लगती थी. मैं ये समझ नही पा रहा था कि वो क्लास में ऐसा बिहेव क्यों करती है जिस से सभी लड़कों को लगे कि वो लाइन दे रही है. 

जैसे ही मैं घर के दरवाजे पर पहुँचा तब तक मेरी समझ में कुछ नही आ रहा था, और दिमाग़ से इन सब फालतू बातों को फिलहाल निकालने के लिए मैने अपने सिर को ज़ोर से झटका. 

रात के साढ़े बारह बज चुके थे और मैं होशियार था कि ज़्यादा आवाज़ ना करूँ जिस से कहीं मम्मी पापा और डॉली दीदी जाग ना जायें. जैसे ही मैं घर में घुसा मैने ड्रॉयिंग रूम में टीवी चलने के आवाज़ सुनी, ड्रॉयिंग रूम में कोई नही था बस सेंटर टेबल पर एक बोवल में पॉपकोर्न्स रखे थे और एक खाली पानी का ग्लास, जब मैं अपने रूम की तरफ बढ़ा तो मैने टाय्लेट की लाइट जलती हुई देखी, मतलब डॉली दीदी अभी जाग रही थी, मुझे टाय्लेट से पानी बहने की आवाज़ सुनाई दी.

मैने टाय्लेट के डोर को धीरे से खटखटाया तो दीदी कुछ धीरे से बोली. मैने डोर के हॅंडल को पकड़ के घुमाया और जैसे ही अंदर सिर घुसाया, इस से पहले कि मैं कुछ देख पाता मेरे नथुने एक महकती हुई खुसबु से भर गये, दीदी किसी सुगंधित साबुन से शवर के नीचे नहा रही थी, दीदी तुरंत जैसे ही आगे बढ़ी, मैं बोला बस ये बताने के लिए कि मैं आ गया हूँ. दीदी मेरा मूँह बाहर धकेलते हुए और डोर को बंद करते हुए बोली, अच्छा ठीक है.

मैने अपने रूम में जाके जीन्स उतार के बॉक्सर्स पहना और फिर से नीचे ड्रॉयिंग रूम में आकर टीवी पर नॅशनल जियोग्रॅफिक देखे लगा, प्रोग्राम था कि क्या एक पेड़ पौधों के पत्ते खाकर जीने वाली चिंटी इस मूसलाधार बरसात के मौसम को बर्दाश्त कर पाएगी? भगवान बचाए इन नेचर शोस से. तभी डॉली दीदी आ गयी और मुझे टीवी पर ये प्रोग्राम देखते हुए मुस्कुराइ.

तभी एक अड्वर्टाइज़्मेंट आ गया जिसमे घर में एक यन्त्र लगाने से लक्ष्मी की बरसात होने का दावा किया जा रहा था, मैं उस अड्वर्टाइज़्मेंट को देख के बोला, ऐसे अड्वर्टाइज़्मेंट्स को बॅन कर देना चाहिए.

डॉली दीदी ने मेरी तरफ आँख गोल गोल घुमा के देखा और मेरे सोफे के सामने वुडन फ्लोर पर बैठ गयी. दीदी ने नाइट्गाउन पहन रखा था और उनके बाल अभी भी थोड़े गीले थे.

मेरे हाथ से रिमोट लेते हुए दीदी बोली, इसीलिए तो मैं मूवी देख रही थी बुद्धू, रिमोट लेकर उसे डीवीडी प्लेयर की तरफ पॉइंट करते हुए अपनी पॉज़ की हुई मूवी रिज्युम कर दी. आशिक़ी 2 हालाँकि मेरी फॅवुरेट मूवी थी, लेकिन अगर कोई और भी होती तो भी आज मैं अपने दिमाग़ को डाइवर्ट करने के लिए कुछ भी देखने को तय्यार था. 

कुछ मिनट के बाद, मैने देखा कि दीदी अपना सिर गोल गोल घुमा रही है, और अपनी गर्दन सीधी कर रही है. दीदी अपने एक हाथ को उपर उठाकर उस से दूसरे कंधे की मालिश कर रही थी

राज: क्या गर्दन में फिर से दर्द हो रहा है?

दीदी मूवी में खोई हुई थी, उसने शायद सुना नही, इसलिए मैने दोबारा पूछा. दीदी ने हां में सिर हिलाया और बोली, इस सिर दर्द ने तो परेशान कर रखा है.

रूको दीदी, मुझे करने दो, मैं दीदी के पीछे बैठ गया, और दीदी के कंधों की मालिश करने लगा. दीदी को ये प्राब्लम पिछले कयि सालों से थी, शायद जब वो 10थ में थी तब से. दीदी के कंधे और गर्दन की मालिश करने से उनका सिर दर्द कम हो जाता था, और ज़्यादा तीव्र नही होता था, मैं और पापा दोनो अब दीदी की गर्दन की मालिश करने में एक्सपर्ट हो चुके थे, जब भी वो चाहती हम दोनो में से एक उसकी ये मालिश किया करता था.

दीदी ने एक ज़ोर से साँस ली और बोली, थॅंक यू राज, और अपने हाथ नीचे कर लिए.
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03-31-2019, 03:06 PM,
#54
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
जिस तरह हम करीब आ चुके थे उसके बाद, दीदी के कंधों के उपर हाथ फिराने में अब और ज़्यादा मज़ा आ रहा था. ये वासना से भरा हुआ नही था, बस एक भाई का अपनी बेहन के लिए प्यार था. दीदी को भी ये बात पता थी.

मूवी के जब 2-3 सीन ख़तम हुए तब दीदी ने अपना सिर पीछे किया, (अब वो पहले से रिलॅक्स लग रही थी) और मुझसे पूछा, मेरे पैर के पंजे की भी मालिश कर दो. 

मैने हां में सिर हिलाया, दीदी मेरे साथ मेरे 3 सीटर सोफे पर दूसरी तरफ बैठ गयी और मेरी गोदी में अपने पैर के पंजे को रख दिया. हालाँकि ये नया नही था लेकिन ऐसे वो कभी कभार ही करवाती थी. जब दीदी ज़्यादा स्ट्रेस में होती थी तभी अपने पैर के पंजों की मालिश करवाती थी. दीदी के पैर के पंजे बहुत नाज़ुक कोमल से बहुत सुंदर थे, मुझे उनको सहलाने में कोई आपत्ति नही थी. हम दोनो टीवी की तरफ देख रहे थे और मैं दीदी के पैर के पंजों को दबा दबा के, कभी पंजे की तो कभी दीदी के पैर की उंगलियों में अपनी उंगलियाँ घुसा के उनकी मालिश कर रहा था. दीदी को और ज़्यादा आराम देने के लिए, मैने दीदी के घुटनों तक उनकी पिंदलियों को हल्के हल्के दबा दबा के कुछ देर मालिश की. मैं दीदी के चिकने पैरों और दीदी की सुडौल पिंदलियों का स्पर्श सुख ले कर रोमांचित हो रहा था.

दीदी ने स्माइल करते हुए मुझसे पूछा, तो फिर कैसी रही तुम्हारी आज की डेट?

मैने कंधे उँचकाते हुए कहा, हां मज़ा आया, बढ़िया रही

मैं दीदी की पिंदलियों को हल्के हल्के आटे की तरह गूँथ रहा था, दीदी के मूँह से आहह निकल गयी. फिर दीदी खिलखिलाई और पूछा, तो आज किस ली या आज भी नही?

मैं फिर से दीदी के पंजों के निचले हिस्से, उनकी उंगलियों की मालिश करने लगा, और दीदी के पंजे के साथ खेलने लगा, दीदी के पैर के पंजे की उंगलियों को जॉइंट पर से थोड़ा धीरे से नीचे करता और फिर बीच के हिस्से को मसलता.

नही ऐसा कोई चान्स नही मिला, मैं बोला.

दीदी ने मेरी तरफ देखा, मैं दीदी के चेहरे पर आए निराशा के भाव को पढ़ पाया.

तुम खुश रहा करो राज, क्यों? दीदी ने पूछा, 

मैने हां में सिर हिलाया. दीदी ने अपना पैर मेरे पास से दूर कर लिया और खड़ी हो गयी, फिर मुझे फ्लोर पर सोफे के पास लेटने को कहा.

देखो, जैसे तुम मेरी इतनी अच्छी सेवा करते हो, आज मैं भी तुम्हारी करती हूँ. दीदी मेरे साथ फ्लोर पर बगल में लेट गयी, लेकिन दीदी का सिर मेरे पैरों की तरफ था और दीदी के पैर मेरे सिर की तरफ.

दीदी मे मेरे पैर का पंजा पकड़ा और धीरे से उसकी मालिश करने लगी. ये देख मैं भी दीदी के पैर के पंजे को पकड़ के वहीं से शुरू हो गया, जहाँ से मैने सोफे पर बैठ के छोड़ा था. 

मेरी ऐसी मालिश दीदी ने पहले कभी नही की थी, दीदी जिस तरह से मेरे पैर के पंजों के उंगलियों की मालिश कर रही थी उस से सारा तनाव ख़तम हो रहा था, और तान्या के साथ हुई निराशा को भूलने में ये मालिश बहुत मदद कर रही थी. मैं भी दीदी की उसी तरह प्यार से मालिश करने लगा.

थोड़ी देर बाद इतना ज़्यादा सुकून मिलने लगा कि मैने कुछ भी सोचना बंद कर दिया, बस दीदी के पैरो को सहला रहा था और मूवी देख रहा था. दीदी की आवाज़ सुन के मैं चौंका, मैने दीदी की तरफ देखा, दीदी के चेहरे पर कुछ अजीब से ही भाव थे. मैने उसे प्रश्न भरी निगाह से देखा और पूछा, कुछ कहा आपने?

दीदी: हां, मैने कहा कि मुझे कुछ कुछ हो रहा है, ऐसा बोल के दीदी थोड़ा शर्मा गयी

मैं भी मुस्कुराया और बोला, ओह्ह्ह सॉरी दीदी. मैं दीदी के पैर के पंजे को सहलाते हुए बोला, बस इतना सा करने से?

दीदी ने हां में सिर हिलाया और बोली, पहले तो आराम मिल रहा था, लेकिन अब कुछ अलग ही हो रहा है

मेरे समझ में नही आया कि क्या कहूँ, तो मैं बस थोड़ा मुस्कुराया और जहाँ मैं सहला रहा था वहाँ अब दबाने लगा.

दीदी ने खीजते हुए अपने होंठ भींचे और हंस कर डाँटते हुए बोली, राज नही मानोगे तुम. मैने कंधे उँचका के दीदी को चिढ़ा दिया.

मैने दीदी के पैर के पंजे को सहलाते हुए दीदी की तरफ देखा. दीदी ने मुझे देखा. पता नही मुझे क्या हुआ मैं दीदी के पैर के पंजे जिसकी उंगलियों पर गुलाबी रंग की नेल पोलिश लगी हुई थी, उसे अपने करीब लाके उसको चूमने लगा. 

दीदी थोड़ा हँसी फिर जल्दी से बोली, राज !

मैने अपना काम जारी रखा और फिर छोटी वाली उंगली की एक चुम्मी ले डाली. दीदी ने अपना निचला होंठ दाँतों से दबाया और फिर आराम से अपने पंजा मेरे हवाले कर दिया. मैने एक और उंगली ली और उसे चूसने लगा, और अपनी जीभ को सबसे छोटी और उसकी पड़ोसी उंगली के बीच फिराने लगा. दीदी अब कराहने लगी थी, दीदी ने अपने पैरों की उंगलियों को और ज्याद फैला के दूर दूर कर दिया जिस से मैं उनके बीच आसानी से चाट सकूँ.

दीदी बोली, हे भगवान...., मैने अपनी जीभ उन नाज़ुक उंगलियों के संवेदन शील हिस्सों के बीच फिराना जारी रखा. बड़ा अजीब लग रहा था कि मैं अपनी बेहन के पैर की उंगलियों को मूँह में लेकर चाट रहा हूँ, लेकिन मुझे इस बात की खुशी थी कि ऐसा करने से दीदी को अच्छा लग रहा है.

मैने महसूस किया कि दीदी खिसक के मेरे और पास आ गयी है, दीदी का फेस मेरी पिंदलियों के पास था. दीदी की चूंचियाँ मेरी जांघों को दबा रही थी और मेरा लंड दीदी के पेट को दबा रहा था. मैने दीदी के पैर की उंगलियों का चाटना और चूसना जारी रखा, दीदी अपने पैर का पंजा आगे पीछे करती और कभी इधर उधर घुमा लेती फिर सीधा कर लेती. 

कुछ देर बाद दीदी कुछ हिलने लगी, दीदी ने अपना पंजा मेरे मूँह से दूर किया और मेरे को हल्का धक्का देकर सीधा पीठ के बल लिटा दिया, और मेरे उपर आ गयी. दीदी ने मेरे दोनो कंधों के नीचे से अपने पैर निकाले और घुटनों के बल अपनी गान्ड मेरे चेहरे के ठीक उपर कर ली मैने भी अपनी बाँहों को सही पोज़िशन में कर लिया. मेरे चेहरे को दीदी के नाइट्गाउन के किनारे ने ढक रखा था, मुझे अपने चेहरे के कुछ इंच उपर दीदी की पैंटी दिख रही थी जिसमे फूली हुई चूत क़ैद थी.

दीदी ने एक गहरी साँस लेते हुए पूछा, सब लड़के किसी लड़की के साथ डेट से लौटने के बाद ऐसे ही मूड में रहते होंगे, क्यों राज?

मूवी के डाइलॉग्स की आवाज़ आ रही थी, दीदी के शरीर का उभार जो मेरे उपर था और दीदी की पैंटी के हर धागे को देखकर अब मेरी धड़कन तेज होने लगी थी. दीदी की चूत से निकल रही खुश्बू और मेरी नाक के नथुनो में घुस रही वो मादक खुश्बू और गर्माहट मुझे पागल कर रही थी. मैं अपने हाथ को बॉक्सर्स के अंदर डाल के अपने खड़े लंड को हिलाने लगा. मैं ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रहा था और मेरे लंड को अपने हाथ से शांत करने का प्रयास कर रहा था, मुझे मालूम था कि दीदी ये सब देख रही है. 

दीदी ने अपने दोनो हाथ मेरी कमर पे मेरी हिप्स के ऊपर रखे और मुझे अपने लंड को सहलाते देख अपनी गान्ड को मेरे चेहरे के उपर गोल गोल घुमा के मटकाने लगी, दीदी की पैंटी के अंदर फूली हुई चूत मेरी आँखों के सामने थी. मेरे लंड से निकली प्रेकुं की कुछ बूँदों ने मेरे बॉक्सर्स को गीला करना शुरू कर दिया था, मैं दीदी की पैंटी को घूर्ने लगा. दीदी ने मेरी कमर ज़ोर से पकड़ ली, बदले में मैने अपना दूसरा हाथ दीदी की नंगी जाँघ पर रख दिया. 
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03-31-2019, 03:06 PM,
#55
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
दीदी की गान्ड हिलाने के कारण, पैंटी में बंद उनकी चूत मेरे चेहरे के काफ़ी पास आ गयी थी, शायद दीदी को इस बात का एहसास नही था, मैने दीदी की जांघों को आगे से पकड़कर पीछे की तरफ खींचा, जिस से दीदी थोड़ा नीचा हो जाए. दीदी समझ गयी और उसने अपनी पैंटी से मेरे चेहरे को दबा लिया. मैने अपना मूँह खोला और भूखे शेर की तरह टूटते हुए दीदी की चूत को पैंटी के उपर से ही किस करने लगा. मैं जो कर रहा था वो दिमाग़ हिला देने वाली बात थी कि मैं अपनी दीदी की चूत को किस कर रहा हूँ. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, लेकिन जिस तरह से दीदी अपनी चूत को मेरे चेहरे के उपर घिस रही थी, उस से लगता था कि दीदी को भी मज़ा आ रहा है. मेरे दिमाग़ फिर से अंतरद्वंद चलने लगा कि कितना मज़ा आ रहा है और शायद हम को ऐसा नही करना चाहिए क्यों कि ये मेरी बड़ी बेहन है, लेकिन मैं रुकना नही चाहता था.

मैने मूठ मारना जारी रखा. बॉक्सर्स की एलास्टिक थोड़ी नीचे हो गयी थी और शायद मेरा लंड भी थोड़ा बाहर निकल आया था, लेकिन मुझे कोई परवाह नही थी. मैने अपने आप को समझाया कि दीदी टीवी की रोशनी में शायद ज़्यादा कुछ नही देख पा रही होगी. मैने अपनी जीभ को दीदी की चूत में पैंटी के उपर से ही घुसा के चूसने लगा, मेरी नाक दीदी की गान्ड के उपर थी. दीदी की पैंटी एक दम टाइट थी और मेरे चूसने से वो गीली हो गयी थी, अंदर छिपी हुई मस्त मुलायम चूत को मैं महसूस कर पा रहा था.

दीदी अपने हाथ नीचे की तरफ सरका रही थी और सरकते हुए अब वो मेरे बॉक्सर की एलास्टिक के पास पहुँच चुके थे और अब मेरी झान्टो को छू रहे थे.

दीदी की पैंटी में से दिख रहे चूत के उभार को देख कर मैं मस्त हो रहा था और जवान लड़की के शरीर की मादक सुगंध को सूंघते हुए अपने जीभ को चूत वाली जगह गीली हो चुकी पैंटी के उस हिस्से को अपने होंठों से दबा रहा था. दीदी की उंगलियाँ अब मेरे लंड के नीचे तक पहुँच चुकी थी. मैं पैंटी के उपर से ही, पूरी शिद्दत के साथ दीदी की कुँवारी चूत के अंदर अपनी जीभ घुसाने की कोशिश कर रहा था, दीदी मेरे लंड के आस पास अपना हाथ फिरा रही थी. दीदी का शरीर यकायक अकड़ने लगा और वो थोड़ा सा झुक भी गयी. 

जब तक मुझे होश आया, दीदी मेरे बॉक्सर्स के अगले भाग और मेरे खड़े लंड को छू रही थी.

दीदी शुरू में थोड़ा रुकी और बस अपना चेहरा मेरे लंड के उपर रख दिया. मैने अपना हाथ बॉक्सर्स के अंदर से निकाल लिया, और बिना ज़्यादा कुछ सोचे एलास्टिक को खींच कर लंड तो पूरी तरह से ढक लिया. दीदी अपने हिप्स को मेरे चेहरे के उपर घुमा रही थी और मैं दीदी की चूत को अपने होंठों से पैंटी के उपर से ही मसल रहा था. मैने महसूस किया कि दीदी अपना चेहरा मेरे लंड पर घिस रही है. लंड की पूरी लंबाई तक दीदी अपने गाल और होंठों को बॉक्सर्स के उपर से ही लंड के उपर घिस रही थी. दीदी शुरू में ये सब थोड़ा धीरे धीरे और सावधानी के साथ कर रही थी, लेकिन जैसे ही मैने दीदी के दोनो पैरों के बीच उनकी चूत को ज़ोर से दबाया, दीदी भी ज़ोर से दबा के मेरे लंड को अपने चेहरे से सहलाने लगी.

जैसे ही मैने दीदी की उस जगह को अपने चेहरे से दबाया जहाँ शायद नही दबाना चाहिए, दीदी ने मेरे उपकार का तुरंत बदला चुका दिया. दीदी अब मेरे लंड को चूम रही थी और दीदी की उंगलियाँ मेरी झान्टो के बीच सहला रही थी. मेरा लंड अब ख़ूँख़ार तरीके से पूरी तरह कड़क होकर खड़ा हो चुका था, मैने दीदी के हिप्स पकड़े और अपने चेहरे के उपर उनको ज़ोर से दबा लिया, और अपने मूँह से दीदी की चूत को मसल्ने लगा. दीदी के मूँह से निकल रही कराहने की आवाज़ को मैं सुन पा रहा था, दीदी ने मेरे लंड के सुपाडे को बॉक्सर्स के उपर से ही अपने होंठों के बीच ले लिया, मुझे लगा जैसे जन्नत मिल गयी हो. 

मैने जैसे ही पानी छोड़ा मेरा शरीर मानो तीर कमान बन गया और दीदी गिरते गिरते बची, मुझे मालूम है, मेरा वीर्य बॉक्सर्स के कपड़े से निकल के दीदी के होंठों तक आ गया था. जब मेरा लंड वीर्य उंड़ेल रहा था तब दीदी लंड के सुपाडे को किस कर रही थी, मैं भी दीदी की पैंटी को और उस कोमल जगह को ज़ोर ज़ोर से किस कर रहा था. जब मेरे लंड से माल निकलना धीरे हुआ, दीदी थोड़ा उपर हो गयी और अपनी पैंटी के अंदर अपना अपना हाथ डालकर अपने आप घिसने लगी. दीदी ने फिर से अपनी चूत के हिस्से को मेरे मूँह के उपर रख दिया, और मैं महसूस कर रहा था कि दीदी पैंटी के अंदर से चूत के दोनो तरफ अपनी उंगलियों से वी शेप बना के मेरे मूँह को एक ख़ास जगह पर ध्यान देने के लिए कह रही थी. मैं तुरंत समझ गया और उस जगह पर अपना मूँह और जीभ ज़ोर से दबाने लगा, दीदी का शरीर अब अकड़ने लगा और दीदी आआहह की आवाज़ निकालते हुए काफ़ी देर तक काँपति रही. थोड़ी देर बाद दीदी शांत हो गयी.

उस शांति में हम दोनो हाँफ रहे थे और ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रहे थे, और एक दूसरे को प्यार से सहला रहे थे. दीदी ने अपना हाथ पैंटी में से निकाला और अपने पैरों पर खड़ी हो गयी. 

दीदी धीरे से फुसफुसाई, मैं फ्रेश होके आती हूँ, और कमरे से बाहर निकल गयी. गॅलरी में बाथरूम से आ रही रोशनी बता रही थी कि दीदी अंदर है. मैं सोफे पर लेटा रहा, और आज जो हम ने किया था उसको सोच के मैं आश्चर्य करने लगा. टीवी पर चल रही मूवी अब क्लाइमॅक्स पर थी और ख़तम होने ही वाली थी. मैं उठा अपने आप को सॉफ किया और फिर से सोफे पर लेट गया.

जब तक दीदी लौट के आई मैं करीब करीब सो ही चुका था. मैने अपने मूँह को हाथ से पोन्छा और महसूस हुआ कि दीदी की चूत की मादक खुश्बू अब भी मेरे होंठों पर थी, दीदी मेरे को देख कर मुस्कुरा रही थी.

दीदी प्यार से बोली, राज लगता है तुम बहुत थक गये हो, मैं आधी नींद में थोड़ा मुस्कुराया. खड़ा होने में मदद के लिए दीदी ने अपना हाथ बढ़ा कर मुझे उठने में मदद की और बोली चलो अब सो जाते हैं. मैं जैसे ही अपने रूम की तरफ बढ़ा, दीदी टीवी बंद करके मेरे पीछे पीछे आने लगी. मैं बाथरूम के सामने थोड़ा रुका, और जब मैं बाहर आया तब तक दीदी आराम से मेरा इंतेजार कर रही थी. दीदी ने एक जमहाई ली लेकिन वो बहुत खुश नज़र आ रही थी.

मैं अपने रूम में आके बेड पर धडाम से लेट गया. दीदी ने मुझे चादर ऊढाई . कमरे में बिल्कुल शांति थी, मैने अपने सिर पर दीदी के बालों को और दीदी की प्यारी साँस को अपने चेहरे पर महसूस किया और फिर दीदी के नरम नरम होंठ मेरे होंठों के उपर आकर धीरे धीरे दबाने लगे. ये कोई भाई बेहन वाली किस नही थी, लेकिन उस रात कुछ ऐसा ही हुआ. दीदी वासना की आग में बह कर वो कर रही थी जो किसी बेहन को अपने भाई के साथ जज्बातों में बह कर नही करना चाहिए, दीदी प्यार से अपनी जीभ मेरी जीभ के उपर घूमा रही थी, मैने भी धीरे धीरे प्यार से उसी तरह किस करना शुरू कर दिया मानो वो मेरी दीदी नही बीवी हो.

ऐसा लगा जैसे ये किस कभी ख़तम ही नही होगी, फिर दीदी ना चाहते हुए भी मुझ से दूर हुई, और फिर सोने जाने से पहले मेरे माथे पर फिर से एक छोटा सा किस किया. फिर मैं भी सोने की कोशिश करने लगा, पर मेरी आँखों से नींद कोसों दूर थी.
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03-31-2019, 03:06 PM,
#56
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
उस दिन वेडनेसडे था, जैसे ही हम क्लास ख़तम कर के कॉलेज से बाहर आए, तान्या ने पूछा तो फिर क्या मूड है?

मैं बोला, भूख लगी है लंच कर लेते हैं

तान्या तुरंत तय्यार हो गयी और अपनी कार वहीं पार्किंग में छोड़ के मेरी कार में ही आ गयी. हम एक अच्छे से 2न्ड फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट में गये और एक कॉर्नर टेबल पर बैठ गये.वहाँ लगे ग्लास में से शहर की मेन रोड और उस पर रेंगता ट्रॅफिक सॉफ नज़र आ रहा था.

तान्या आज बहुत सुंदर लग रही थी, उसने अपने काले गहने बाल आज खोल रखे थे. आज उसने वाइट टी-शर्ट जिस पाट कुछ लिखा हुआ था और डार्क ब्लू जीन्स पहन रखी थी. मुझे अपने आप को विश्वास दिलाना पड़ रहा था कि बस हम दोनो अकेले में बैठे हैं, और ऐसा लग रहा था कि वो भी मुझे पसंद करती है.

लंच आ चुका था, हम प्रॉजेक्ट्स के बारे में और बाकी क्लासमेट्स के बारे मे बातें करते हुए खाना खा रहे थे. तान्या ने हाथ धोने के लिए आए गरम पानी में से नींबू उठाकर मेरे फेस पर फेंक दिया और फिर खिलखिलाकर हँसने लगी.

वेटर ने जब पूछा कि डिज़र्ट में क्या लोगे, तो हम एक दूसरे को देखने लगे और फिर मैं बोला, मेरा तो कुछ मीठा खाने का मन कर रहा है.

तान्या हंसते हुए बोली, हां मैं भी खाउन्गि. दोनो ने आइस्क्रीम का फ्लेवर डिसाइड कर के ऑर्डर प्लेस कर दिया. अच्छा हुआ तुम ने ऑर्डर कर दिया, नही तो तुम ये ही सोचते हैं कि मैं बहुत ज़्यादा मीठा खाती हूँ.

मैने शरारत करते हुए कहा, कोई बात नही, तुम्हारा साथ पाने के लिए, ये बंदा कुछ भी करने को हाजिर है.

तान्या कुछ सोचते हुए मेरी तरफ देखने लगी. 

तान्या: थॅंक यू, राज...

मैने अपना सिर हिलाया और मुस्कुरा दिया.

कुछ देर में आइस्क्रीम आ गयी और हम खाने लगे. शुरू में तान्या थोड़ा चुप चुप थी पर अब वो खुल के बातें कर रही थी. कुछ देर पहले की तान्या जो मुझे एक आकर्षक और स्वावलंबी लड़की नज़र आ रही थी, वो अब मुझे अपना शिकार लगने लगी थी. तान्या मुझे बता रही थी कैसे उस को बचपन में बहुत ज़्यादा खाने की आदत थी और कैसे उसने इस पर काबू पाया. 

तान्या ने आगे बताया कि कैसे वो 10+2 के दौरान एक लड़के की दीवानी हो गयी थी. बात करते करते वो प्लेट पर चम्मच से डिज़ाइन बनाती जा रही थी. जब उस लड़के के पापा जो आर्मी में थे उनका ट्रान्स्फर जम्बू&कश्मीर हो गया और वो लड़का जम्बू&कश्मीर चला गया तो कैसे वो डिप्रेशन में आ गयी थी. डिप्रेशन के एक साल के दौरान एक बार फिर से वो बहुत ज़्यादा खाने लगी थी.

तान्या फिर शांत हो गयी, मैं बेसब्री से उसके आगे बोलने का इंतेजार करने लगा.

तान्या ने आँखे उठाकर एक उम्मीद भरी नज़र से मुझे देखा, फिर आगे बोली, मुझे वास्तविकता स्वीकार करने में बहुत टाइम लगा. मैं अब इस बात से सावधान रहती हूँ, हँसी मज़ाक तो सब के साथ कर लेती हूँ लेकिन अपना दिल, अब मैं सिर्फ़ अब अपने पति को ही दूँगी. कुछ देर तान्या चुप रही, मैं उसके आगे बोलने का वेट करता रहा.चम्मच रखते हुए तान्या ने अपना हाथ बढ़ाया और मैने उसका हाथ खुशी से पकड़ लिया.

तान्या: मुझे ये देख के बहुत अच्छा लगा कि तुम मुझसे कभी नाराज़ नही हुए. मुझे लगा तुम सोच रहे होंगे कि ये कैसी लड़की है? हां मैं दूसरी लड़कियों की तरह नही हूँ, लेकिन मुझे इस बात का पता है. तुमने इतने दिनों में कभी भी मेरे साथ किसी बात की ज़बरदस्ती नही की, और हमेशा ये सोचते रहे होंगे कि जाने कब पटेगी? इतना बोल कर तान्या हँसने लगी.

हम दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा, फिर मैने अपन गला सॉफ करते हुए कहा, तान्या तुम बहुत सुंदर हो, मुझे बहुत अच्छी लगती हो, थॅंक यू.

मेरा हाथ पकड़े हुए तान्या नीचे देखने लगी.


तुम जैसी भी हो, लेकिन मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मैं तुमको इतना चाहता हूँ कि और ऐसा कभी कुछ नही कर सकता जो तुमको बुरा लगे. मैं सच कह रहा हूँ, तुम भी अगर मेरे साथ ऑनेस्ट रहोगी तो हम एक दूसरे को बेहतर जान पाएँगे. मुझे पक्का नही मालूम लेकिन कभी कभी मुझे लगता है कि शायद हमारे पेरेंट्स मेरी दीदी की शादी के बाद कहीं हमारी शादी कराने का प्लान तो नही बना रहे? 

तान्या के गाल गुलाबी हो गये और उसने मुस्कुराते हुए कहा, पता नही, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो अच्छा ही होगा. उसने इधर उधर देखा और फिर ज़ोर से हँसने लगी, हम कुछ ज़्यादा ही सीरीयस हो गये, है ना?

मैने भी हंसते हुए जवाब दिया, कोई बात नही, जो होगा अच्छा ही होगा...

कुछ देर और बातें करने के बाद हम तान्या की कार लेने कॉलेज की पार्किंग पहुँचे और फिर हाथ हिलाकर बाइ किया. वो अपनी कार चला के चली गयी और मैं अपने घर आ गया.




उस दिन शाम को मैं डॉली दीदी के रूम में गया और आज मेरी तान्या के साथ हुई सारी बातों को बता दिया. दीदी सब कुछ सुनते हुए बस मुस्कुराती रही.

दीदी: वाह, ये तो बहुत अच्छा हुआ, लगता है वो तुमसे शादी से पहले ही प्यार करने लगी है. मेरी तरफ आइब्रोज चढ़ा के देखते हुए दीदी आगे बोली, देख राज, अब कोई गड़बड़ मत करना, और फिर हँसने लगी. मैने भी शरारती लहजे में जवाब दिया, हां दीदी मैं ऐसा वैसा कुछ नही करूँगा.

दीदी शायद मेरे दिमाग़ में चल रहे विचारों को पढ़ पा रही थी, दीदी ने मुझसे पूछा, राज, तुम किस बात से परेशान हो?
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03-31-2019, 03:06 PM,
#57
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
मैं घबराता हुआ बोला, दीदी मुझे लगता है, कि अगर हम ने शादी से पहले ऐसा वैसा कुछ किया, आप को तो मालूम ही है कि मुझसे सब्र नही होता, और मैं कुछ ग़लती कर बैठा तो तान्या पता नही कुछ ग़लत ना समझ ले? और शादी के लिए मना ना कर दे.

दीदी ने मेरी तरफ देखा और फिर खड़े होकर मुझे एक झप्पी दी. मेरे गले में अपनी बाहें डाल के मेरी आँखों में आँखें डाल के देखते हुए बोला, हे राज, मैं हूँ ना, तुम्हारी बड़ी बेहन तुम्हारी हर प्राब्लम को सॉल्व करने के लिए.

राज: हां दीदी वो तो ठीक है, लेकिन वो सब तो हम, मेरा पॉर्न अडिक्षन दूर करने के लिए कर रहे थे (मैने समझाते हुए कहा), मुझे लगता है कि मुझे आप का किसी तरह से ग़लत इस्तेमाल नही करना चाहिए. 

दीदी ने कंधे उँचकाते हुए कहा, जब भी मुझे ऐसा कुछ लगेगा, मैं तुम को बता दूँगी, दीदी मे अपने निचले होठ को दाँत से काटते हुए कहा, मुझे लगता है कि हम दोनो को ये बात मालूम है कि मुझे भी इस सब में मज़ा आ रहा है.

हम दोनो एक दूसरे की आँखों में देखते रहे और कुछ देर वहीं खड़े रहे.

तुम बहुत अच्छी हो दीदी, सारी दुनिया एक तरफ और मेरी दीदी एक तरफ, इसीलिए आइ लव यू दीदी. दीदी ये सुनकर थोड़ा हँसी और मैने अपना माथा दीदी के माथे से लगा दिया.

दीदी: अरे भाई मेरे बारे में इतनी अच्छी अच्छी बाें मत करो, मैं बहुत लालची हूँ. मैं तुम्हारी उतनी ही हेल्प कर रही हूँ जितनी तुम मेरी कर रहे हो. आगे दीदी ने स्वीकार करते हुए कहा, मुझे बहुत अच्छा लगता है जब तुम मुझे स्पेशल फील करवाते हो. मुझे मालूम था कि मैं तुम्हारे लिए इंपॉर्टेंट हूँ लेकिन अब........ आगे बोलने से पहले दीदी थोड़ा रुकी, उनके गाल थोड़ा लाल हो गये थे.... लेकिन अब जब तुम मुझे इतना पसंद करते हो, मुझे तुम्हारी बड़ी बेहन होने पर गर्व है.

मैं मुस्कुराया, तो फिर ये मान लिया जाए कि हम दोनो एक दूसरे की हेल्प कर रहे हैं, और मुझे किसी मुसीबत से बचाने के लिए नही कर रहे

दीदी ने दूसरी तरफ देखा और मूँह बना के बोली, लगता है हम किसी मुसीबत से बचने की बजाय उसी मुसीबत में फँसते जा रहे हैं, हंस के आगे बोली, हां ये थोड़ा कॉंप्लिकेटेड तो है लेकिन एक बात पक्की है कि हम दोनो एक दूसरे की हेल्प कर रहे हैं. और ये सब अब केवल अकेले तुम्हारे लिए नही हो रहा.

हां दीदी, मुझे ये सुन कर अच्छा लगा, मैने दीदी की बात मानते हुए कहा. हम ने एक दूसरे को देखा और फिर एक छोटी सी झप्पी ले ली.

जब हम अपने अपने रूम में जाने को हुए तो दीदी ने पूछा, तो तुम तान्या के साथ अगली बार डेट पर कब जा रहे हो ?

अभी पक्का नही है लेकिन शायद फ्राइडे को, मैने कहा.

दीदी: ओके तो फिर जाकर आराम करो, और अगर किसी चीज़ की कभी भी ज़रूरत हो तो मुझे जगाने में संकोच मत करना, ऐसा कह कर स्माइल करते हुए दीदी अपने रूम में चली गयी.

मैने अपना सिर हिलाया और दीदी को पीछे से मूँह बनाकर चिढ़ाने लगा.

फ्राइडे को मैं और तान्या अपनी डेट पर गये, और मैं अपने आप को तान्या और दीदी के साथ हुई सारी घटनाओं के बाद काफ़ी स्वच्छन्द और हल्का फील कर रहा था. हम ने डेट पर काफ़ी मज़ा किया, उस दिन हम एक पास ही के एक हिस्टॉरिकल जगह पर गये, हम जिस होटेल के रेस्टोरेंट में लंच के लिए पहुँचे वहाँ पर फॉरिन टूरिस्ट्स का एक ग्रूप भी आया हुआ था, वो सब बियर पी कर डॅन्स पार्टी कर रहे थे, उन्होने जब अपनी तरफ हम को देखता हुआ पाया तो हम दोनो को भी इन्वाइट किया, हम ने उनके इन्विटेशन को ठुकराना सही नही समझा और उन फॉरिन टूरिस्ट्स को डॅन्स में जाय्न कर लिया. डॅन्स करते हुए तान्या के साथ इतना करीब आना और हँसना, तान्या का इतने लोगों के बीच मुझको पकड़ना एक अद्भुत घटना थी, जिस पर विश्वास करना मुश्किल था.

रात को जब हम तान्या के अपार्टमेंट पहुँचे तो मैने पहले ही सोच लिया था कि आज तान्या को डोर पर छोड़ते समय उसको एक झप्पी का ऑफर करूँगा, जब हम गुडनाइट विश करेंगे. मैं बहुत खुश हुआ तान्या ने मुझको गुड नाइट विश करते समय मुझे खुशी खुशी झप्पी दी. हालाँकि मेरा उसके लिए प्यार, इस से कुछ और ज़्यादा की उम्मीद कर रहा था. 

तान्या घर के अंदर चली गयी, और मैं अपनी कार में बैठ के अपने घर आ गया. मैं दीदी के उस इन्विटेशन के बारे में सोच रहा था जो दीदी ने डेट से लौटने के बाद उनके पास आकर रिलॅक्स होने के लिए मुझे दिया था, मैं दीदी से मिलने को बेचैन था. मुझे मालूम था कि मेरे को जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए लेकिन मेरे दिमाग़ में दीदी का वो मुस्कुराता हुआ चेहरा घूम रहा था जब हम इस बारे में बातें कर रहे थे. मैं याद कर रहा था कैसे दीदी पिछली कुछ बार से कितना ज़्यादा गरम हो जाती है, जब हम वो सब करते हैं.

मैने मोबाइल को ऑन कर के देखा, रात का एक बज रहा था. मम्मी पापा तो हमेशा की तरह सो ही चुके थे, और लग रहा था कि डॉली दीदी भी सो चुकी है. मुझे थोड़ी निराशा हुई, मैं बाथरूम में नहाने चला गया, फिर अपने रूम में आके एक मॅगज़ीन पढ़ने लगा. थोड़ी देर बाद मॅगज़ीन पढ़ने में मन नही लगा. मुझे दीदी की कमी खलने लगी थी, मैं दीदी से मिलने के लिए मचलने लगा. 

मैं दीदी के रूम में धीरे धीरे पहुँचा और थोड़ा सा डोर खोल के अंदर झाँक के देखा कि दीदी बेड पर है या नही. दीदी अपने बेड पर सो रही थी और एक चादर ओढ़ के उसके अंदर सिंकूडी हुई लेटी हुई थी. रूम के अंदर ब्लाइंड्स में से आ रही चाँदनी की रोशनी इतना उजाला कर रही थी कि मैं दीदी के बेड तक आसानी से पहुँच गया. मैं बेड के पास जाकर धीरे से बोला, डॉली दीदी और दीदी के कंधे के उपर अपना हाथ रख दिया, और फिर बोला डॉली दीदी. दीदी थोड़ा हिली और नींद में ही बोली ह्म...

दीदी मैं घर आ गया हूँ, मैने कहा. दीदी अब थोड़ा ज़्यादा हिली और शायद थोड़ा ज़्यादा जाग गयी. मैने फिर से दोहराया, इस बार उसने सुन लिया, लेकिन अभी वो पूरी तरह से जागी नही थी. 

दीदी ने धीरे से कहा, ओके. दीदी ने अपनी आँखें मसली, वो जाग गयी थी लेकिन अभी भी पूरी तरह नही. कुछ देर बाद दीदी ठीक से जागी कर अपने होश में आई और मेरी तरफ देख के स्माइल किया. फिर बोली, तो तुम मुझसे मिलने आए हो, मैं भी तुमको मिस कर रही थी, यहाँ बैठो ना.

मैने दीदी का कहना मानते हुए उनके बेड के किनारे पर बैठ गया. दीदी ने आराम से हमारी डेट के बारे में पूछा और मेरी सारी बात को जाग कर देर तक सुनती रही. 




मैने दीदी से पूछा कि उनका दिन कैसा बीता, तो दीदी ने दिन भर में हुई दो तीन बातें बताईं, बताते बताते अब वो पूरी तरह जाग चुकी थी.

दीदी ने धीरे से पूछा, तो फिर क्या रिलॅक्स होने में कुछ हेल्प चाहिए? मैने हां में सिर हिलाया. दीदी ने एक छोटी से जमहाई ली और बोली, मेरा बेड से उतरने का मन नही कर रहा, आओ तुम ही उपर आ जाओ, चादर के अंदर, ठीक है?

ठीक है दीदी, मैं बोला. मैं दीदी के चादर के अंदर घुस गया और बेड शीट में से आ रही किसी पर्फ्यूम की खुश्बू को सूंघने लगा. वो खुश्बू दीदी के शरीर की खुसबु से बेहद मिलती थी, ये सोच के ही मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. मैं ये जंग हार चुका था.

दीदी आप ठीक हो ना, ऐसे कोई दिक्कत तो नही है आपको? दीदी ने बस म्मह... ही आवाज़ निकाली और खिसक कर अपनी पीठ मेरे और पास कर ली. दीदी अपना मूँह बंद कर हल्के हल्के हंस रही थी, तभी उसने मेरा खड़ा लंड अपनी गान्ड के उपर महसूस किया.

दीदी ने पूछा, अगर हम इस दानव को शांत कर दें तो तुम रिलॅक्स हो जाओगे?

हां दीदी... 

दीदी ने सुझाव देते हुए कहा, ऐसा करो तुम अपना शॉर्ट्स उतार दो. दीदी फुसफुसाकर बोली, मानो ऐसा करने से जो कुछ हम कर रहे थे वो और ज़्यादा गोपनीय हो जाएगा.

मैने बिना कुछ सोचे अपने शॉर्ट्स और टी-शर्ट को निकाल के फेंक दिया. और करवट लेकर दीदी की पीठ की तरफ मूँह कर के लेट गया. दीदी खिसक कर मेरे पास आई, और मुझे मेरी बाहें दीदी के गिर्द लपेटने का इशारा किया, मैने डरते हुए अपनी बाहों में दीदी को ले लिया. मैने अपनी बाहें दीदी की पतली कमर के गिर्द लपेट ली, जहाँ मेरा हाथ दीदी के पेट को छू रहा था, वहाँ दीदी ने अपना हाथ मेरे हाथ के उपर रख दिया. चादर के अंदर नंगे लेटे हुए दीदी को इस तरह पकड़े हुए, मेरे शरीर में 440 वॉल्ट का करेंट दौड़ने लगा.

कुछ आगे करो राज, दीदी फुसफुसाई
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03-31-2019, 03:06 PM,
#58
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
कुछ आगे करो राज, दीदी फुसफुसाई

मैं अपने लंड को उपर की तरफ धकेलने लगा, और दीदी की गान्ड पर घिसने लगा. दीदी ने मेरे हाथ को ज़ोर से पकड़ लिया था, लेकिन अब भी वो शांत थी. मैने अपने आप को थोड़ा पीछे किया और फिर ज़ोर से एक उपर की तरफ झटका मारा. दीदी का नाइट्गाउन गान्ड के बीच घुस गया था और मेरा लंड बीच के दरार में फँस गया था. दीदी को ज़ोर से पकड़ के लंड से दीदी की गान्ड पर उपर नीचे झटके मारने लगा. 

थोड़ी देर ऐसे ही करने के बाद, हम दोनो के शरीर अब गरम होने लगे थे, और थोड़ा पसीना भी आने लगा था. दीदी की गान्ड पे मेरा लंड टिका हुआ था, और नाइट्गाउन के कपड़े के उपर से घिस्से मार रहा था. जब मैं ज़ोर से झटका मारता तो दीदी अपने हाथ से मेरी बाँह को ज़ोर से पकड़ लेती. यकायक दीदी ने करवट लेनी शुरू की और अपने शरीर को घुमाने लगी, दीदी ने मेरी बाँह को पकड़ रखा था इसलिए मैं दीदी के साथ साथ दीदी के उपर आ गया, अब दीदी पेट के बल लेटी हुई थी, और मैं दीदी के उपर था, दीदी थोड़ा कराही. दीदी ने मेरे हाथ पकड़ के अपने हिप्स पर रख दिए और अपने दोनो हाथ खुद के सिर के नीचे. जब मैं झटके मारने शुरू किए तो दीदी खुशी से करहाने लगी.

दीदी के उपर जिस तरह मैं चढ़ा हुआ था, उस एग्ज़ाइट्मेंट औट थ्रिल की वजह से मेरे को कुछ समझ नही आ रहा था. मेरा लंड दीदी की गान्ड की गोलाईयों के बीच घुस के, उपर नीचे होकर घिस्से मारने में व्यस्त था. मुझे विश्वास नही हो रहा था कि हम ऐसा कुछ कर रहे हैं. मुझे विश्वास नही हो रहा था दीदी ने मुझे अपने उपर खींच लिया है. दीदी की करहाना बता रहा था कि दीदी ने मुझे अपने शरीर को जैसे मैं चाहूं वैसे उसे करने की अनुमति दे दी थी. दीदी भी उतना ही एग्ज़ाइटेड थी जितना कि मैं.

मेरे दिमाग़ में आया कि कहीं ऐसा मौका फिर मिले या ना मिले, मैने दीदी के हिप्स को कस के पकड़ के ज़ोर ज़ोर से झटके लगाने शुरू कर दिए. मेरा लंड गान्ड की गोलाईयों के बीच अंदर तक घुस के नाइट्गाउन के उपर से घिस्से मार रहा था. ओढी हुई चादर मेरी पीठ के उपर चिपक के मेरे झटकों के साथ साथ आगे पीछे हो रही थी. दीदी ने एक ज़ोर की साँस ली और फिर अपने हिप्स को थोड़ा उपर उठा लिया, जिस से उनकी गान्ड पर मेरी पहुँच ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ सके. मैं इशारा समझ के लंड को सही तरह से उस जगह पर फिक्स करके झटके मारने लगा, चाँदनी की रोशनी में दीदी की स्माइल मैं देख पा रहा था. मैने अपने हाथ को थोड़ा उपर कर के दीदी की पंसलियों तक ले गया, दीदी के उरोजो से बस थोड़ा नीचे, मेरे हाथ दीदी की चूंचियों को बस थोड़ा सा छू रहे थे. दीदी फिर खुशी से कराही. दीदी ने अपने पैर थोड़ा और ज़्यादा फैला दिए. मेरे कुछ समझ में नही आ रहा था, मैं और ज़ोर से गान्ड की गोलाईयों के बीच झटके मारने लगा. हर बार जब मैं पीछे होता तो अगली बार लंड के सुपाडे को और ज़्यादा अंदर तक घुसाने का प्रयास करता. जवाब में दीदी ने भी अब अपने घुटनों पर ज़ोर डाल के अपनी गान्ड को और उपर उठा लिया था. 

हम दोनो अब इस खेल में पूरी तन्मयता से डूबे हुए थे. हम दोनो ने फील किया कि नाइट्गाउन थोड़ा उपर चढ़ गया था और उसके किनारे में से नीचे घुस के मेरा लंड अब दीदी की पैंटी के उपर से घिस्से लगा रहा था. मेरे लंड का सुपाड़ा दीदी की गान्ड के निचले हिस्से की दरार में घुस रहा था, लेकिन अब ऐसा कोई तरीका नही था जिस से मैं नाइट्गाउन को चुपचाप नीचे कर सकता. मैं फिर से झटके मारने लगा, और गान्ड के उपर से अपने लंड को दबा दबा के घिसने लगा, दीदी भी मेरे जितना ही नर्वस थी लेकिन उन्होने मुझे रोका नही. दीदी ने अपनी पैंटी के उपर से अपने छोटे भाई को अपनी गान्ड के उपर लंड दबा के घिस्से मारने दिए. 

मैं पैंटी के उपर से, उस दरार में अपना लंड घुसाने लगा. हर छोटे झटके के साथ मैं महसूस कर रहा था कि दीदी का शरीर कितना सॉफ्ट है. मैने अपने आँखें बंद कर ली, और दीदी के हिप्स को पकड़ के धीरे धीरे झटके मारने लगा.

दीदी थोड़ा हिली और फिर थोड़ा रुकी. दीदी अपने हाथ अपनी कमर पर ले गयी, और जब तक मैं कुछ समझ पाता कि वो क्या कर रही है, मुझे लगा दीदी ने अपनी पैंटी नीचे कर दी, मेरा लंड अब दीदी की नंगी गान्ड की दारर में घुसा हुआ था. दीदी अब काँप रही थी, वो अपनी नंगी गान्ड की गोलाईयों को मेरे लंड के उपर दबा रही थी.

मेरा शरीर अब गरम हो चुका था और मुझे कुछ दिखाई नही दे रहा था. मेरा शरीर दीदी की नंगी त्वचा का स्पर्श पाकर रोमचित हो रहा था. दीदी के शरीर की गर्माहट को महसूस करते हुए मैं वैसे ही दीदी के उपर लेटा रहा. दीदी की गान्ड की दरार में अपना लंड घुसा के अब मैं आसानी से झटके मार के लंड को घिस रहा था. अब लंड को घिस्से मारने में कोई दिक्कत नही हो रही थी. कुछ पलों के बाद मेरा लंड गान्ड की गोलाईयों के बीच घुस के मज़े ले रहा था.

दीदी के कराहने की आवाज़ मुझे एनकरेज कर रही थी, मैने दीदी के चेहरे की तरफ देखा, दीदी की गान्ड की गोलाईयों के बीच मेरा लंड फँसा हुआ था. मैने अपनी लटकते हुए टट्टों को भी दीदी की गान्ड के स्पर्श को महसूस करने दिया, दीदी मज़े से कराह रही थी. दीदी की स्किन का स्पर्श मुझे आनंदित कर रहा था, दीदी की गान्ड कितनी चिकनी और गरम थी.

मैं अब जोश में ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा, गान्ड की दरार में हर झटके के साथ दीदी के मूँह से हल्के हल्के गुर्राने की आवाज़ निकलने लगी. दीदी के पसीने और मेरे प्रेकुं ने उस जगह में काफ़ी चिकनाहट कर दी थी, मैं इस चीज़ का पूरा मज़ा ले रहा था. अंधेरे में हम दोनो भाई बेहन, चादर के अंदर मस्ती कर रहे थे. मैने दीदी की छाती पर हाथ ले जाकर उनको ज़ोर से पकड़ा और अपने शरीर का पूरा दबाव दीदी के नाज़ुक शरीर पर डाल दिया. लग रहा था के मैं बस छूटने ही वाला हूँ, मैं पूरी तरह दीदी के उपर आ गया, और दीदी के हान्फ्ते हुए चेहरे के पास ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने लगा.

अंत में मैने दीदी के हिप्स को टाइट पकड़ लिया, और अपने लंड के सुपाडे को, जो कि घिस्से मार मार के जबरदस्त फूल गया था, आगे बढ़ बढ़ के दरार में ज़्यादा से ज़्यादा घुसाने की कोशिश करने लगा. मेरे टट्टों में गोलियाँ उपर चढ़ आई थी, और मैने गुर्राते हुए दीदी की गान्ड की गोलाईओं के बीच अपना गरम गरम वीर्य उंड़ेलना शुरू कर दिया. कुछ पिचकारी दीदी की पीठ पर भी गिरी, और पानी लुढ़क के दोनो हिप्स के बीच की दारर में बहने लगा.

मैं दीदी के उपर हान्फ्ते हुए लेटा रहा, दीदी मेरे नीचे लेटी थी, मेरी बाहों पर अपने हाथ फेर रही थी, और अपनी गान्ड की गोलाअयों को मेरे लंड पर घिस रही थी. मैने टिश्यू पेपर लेकर दीदी की पीठ और गान्ड की दरार के बीच जमा अपने पानी को सॉफ किया. ये हम दोनो के बीच एक नाज़ुक पल था. दीदी मेरे सामने बिल्कुल निढाल पड़ी थी, और ये वो पल थे जो किसी भी पति पत्नी के बीच बहुत प्राइवेट होते हैं.
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03-31-2019, 03:07 PM,
#59
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
दीदी की आँखों में एक अलग ही चमक थी.

दीदी के रूम से अपने रूम में आने के बाद मैं सारी रात ये ही सोचता रहा.

सॅटर्डे सुबह मैं सो कर काफ़ी लेट उठा, सूरज की किरणों ने मेरे रूम को रोशन कर रखा था, मैने फिर से चादर ओढ़ ली. बड़ी ज़ोर से आ रही पेशाब ने मुझे बेड से निकलने पर मजबूर कर दिया, मैं बाथरूम में जाके फ्रेश हुआ, और अपने बाल थोड़े ठीक किए, दाँतों को ब्रश किया, फिर किचन में हल्का सा ब्रेकफास्ट करने को चल दिया.

घर में बड़ी शांति थी, मैने बाहर झाँक के देखा, बाहर पापा की कार नही थी, फिर मुझे याद आया मम्मी पापा को आज हमारे किसी रिश्तेदार के गृह प्रवेश में जाना था. दीदी का पता नही चल रहा था, वो कहाँ है, ये ढूँढने के लिए मैं सभी रूम देख चुका था, जब मैं अंडरग्राउंड स्टोर रूम की तरफ गया तो देखा कि वहाँ की लाइट जल रही है. मैं नीचे जाने के लिए सीढ़ियों पर उतरने लगा, मैने देखा दीदी पुराने कपड़ों को फोल्ड कर रही थी. 

दीदी ने मुझ को देख के कहा, तो उठ गये महाराज...

मैने अपनी आँखें मसल्ते हुए कहा... हां उठ गया....

दीदी चुटकी लेते हुई बोली... बड़ी बढ़िया नींद आई होगी आज तो....

मैने भी शरारती लहजे में जवाब दिया... हां एक दम मस्त नीद आई आज...

दीदी मुस्कुराइ और फिर कपड़े फोल्ड करती रही. मैं दीदी को कुछ मिनटों तक देखता रहा और मन ही मन सोचता रहा कि दीदी कपड़े पहन कर भी कितनी सुंदर लगती है, दीदी ने सफेद पॅंट-शर्ट पहना हुआ था और अपने बालों का पोनीटेल बना रखा था. दीदी ने मेरी तरफ देखा और मुझे अपनी तरफ देखते हुए पाकर थोडा मुस्कुराइ, फिर कपड़े फोल्ड करने शुरू कर दिए. वो कुछ और कपड़े उठाने के लिए थोड़ा झुकी, मैं दीदी को देखता रहा.

मैं थोड़ा पास आकर वहाँ रखे एक बॉक्स पर बैठ गया.

दीदी सीधी खड़ी होकर अपनी एक पुरानी वाइट ब्रा को फोल्ड कर रही थी. मैने देखा कि वाइट ब्रा के कप्स पर छोटे छोटे पिंक फ्लवर बने हुए थे. मैने गुस्ताख़ी करते हुए पूछा, दीदी आपकी ब्रा का साइज़ कितना है? दीदी ने अचंभित होते हुए मेरी तरफ देखा, मुझे एहसास हुआ दीदी ठीक वैसे ही देख रही थी जैसे उसने 1-2 महीने पहले, यानी कि ये सब कुछ शुरू होने से पहले देखा होता, यदि मैने इस तरह को कोई सवाल पूछ होता.

दीदी फिर थोड़ा मुस्कुराइ और शरमाते हुए बोली, पता नही मुझे शरम क्यों आ रही है...

वाउ.., तुमको शरम आ रही है... मैने मुस्कुराते हुए कहा. दीदी ने मुझे शरमाते हुए देखा और फिर अपना मूँह दूसरी तरफ फेर लिया.

दीदी ने हंसते हुए अपना चेहरा अपने हाथों से छिपा लिया और फिर मेरी तरफ देखा. दीदी दो कदम मेरे पास आई , और वो ब्रा मेरे हाथ में दे दी. मैने वो ब्रा हाथ में पकड़ ली, दीदी वहीं पर खड़ी रही, मैने ब्रा के पीछे हुक्स के पास लगे छोटे से टॅग को देखा, उस पर लिखा था साइज़ 34.

साइज़ 34 , ठीक है बढ़िया है, क्यों दीदी? मैने उपर दीदी की तरफ देखते हुए पूछा.

दीदी ने अपनी भोहें चढ़ा कर मेरे हाथ से ब्रा ले ली, और बोली... ठीक है या नही ... तुम बताओ?

कुछ सेकेंड की शांति के बाद मैने दीदी की तरफ देखा, कुछ पल के बाद दीदी ने फिर से अपनी भोहें चढ़ा ली, शायद वो मेरे जवाब का इंतेजार कर रही थी.

सॉरी, मैने सोचा तुम.... मैं बोला

कुछ पल के बाद दीदी कन्फ्यूज़ होकर बोली... क्या सोचा?

राज : मैने सोचा कि आप मुझे वो खोल के दिखाओगी

दीदी के गाल गुलाबी हो गये और वो बोली, राज तुम पहले भी देख चुके हो...

राज: तो आप नही दिखाओगी?

दीदी ने थोड़ा झिझकते हुए इंतेजार किया, तब तक, जब तक लगे कि उनकी भी कुछ समझ में नही आ रहा. फिर दीदी ने एक लंबी गहरी साँस ली, और फिर अपनी शर्ट को उपर कर दिया. दीदी ने अपनी शर्ट अपनी चूंचियों से भी उपर चढ़ा ली. दीदी ने अंदर ब्रा नही पहन रखी थी, दीदी की नंगी चूंचियाँ देख के मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. दीदी की चून्चियो को जैसे ही आज़ादी मिली तो दीदी के निपल्स खड़े होकर एक दम तन गये. दीदी ने फिर अपनी शर्ट नीचे कर ली.

हालाँकि दीदी की आँखों में चमक थी, लेकिन उनको जो कुछ हो रहा था उस का एहसास था, दीदी ने पूछा, तो ठीक है राज? 

मैने दीदी की तरफ देखा और एक गरम मुस्कुराहट के साथ जोश में बोला, दीदी आप बहुत सुंदर हो, आप के वो दोनो एक दम पर्फेक्ट हैं.

दीदी मुस्कुराइ और फिर कुछ पुराने कपड़ों को फोल्ड करने लगी, फिर बोली, थॅंक्स राज, कितना अच्छा होता अगर भगवान मेरा सब कुछ ऐसा ही सुंदर बनाता.

मैने पूछा, दीदी आप कहना क्या चाहती हो?

दीदी ने बिना मेरी तरफ देखे हुआ कपड़े फोल्ड करते हुए बोला, मेरा मतलब था कि कितना अच्छा होता अगर मेरा पूरा शरीर ही सुंदर होता.

मैने एक पल दीदी की तरफ देखा और फिर धीरे से बोला, दीदी मैं आपका सब कुछ देख चुका हूँ, और आपका सब कुछ बहुत सुंदर है.

दीदी ने एक दम कपड़े फोल्ड करने बंद किए, और मेरी तरफ देखा.

दीदी: राज, तुम्हारे जैसा भाई अभी तक किसी बेहन को नही मिला होगा.

मैं मुस्कुराया और अविश्वास में अपने कंधे उँचका दिए.


दीदी कपड़ों को हाथ में लेकर बोली, पता नही क्यों आज सुबह जब मैं उठी तभी से मैं कुछ उदास थी. मैं अपने आप के बारे में मोटी, बदसूरत और ना जाने क्या क्या सोच रही थी. तुम्हारी बातों से मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा है, दीदी ने स्माइल करते हुए कहा. हालाँकि एक बात बता दूं कि तुमने मेरा सब कुछ अभी इतने गौर से नही देखा है.

मैं पिछले कुछ हफ्तों की रील अपने दिमाग़ में चलाने लगा, मेरे समझ में नही आया कि दीदी क्या कह रही है, मैने ऐसा क्या नही देखा है?

डॉली दीदी बिल्कुल चुप थी.

राज: दीदी बताओ ना, प्लीज़ घबराओ नही सब ठीक है

दीदी अपना होंठ दाँतों से काटते हुए उस बॉक्स के पास आई जहाँ पर मैं बैठा हुआ था. दीदी एक पल के लिए मेरे सामने खड़ी हो गयी, फिर अपने हाथ के अंगूठे को अपनी पॅंट की एलास्टिक में फन्साते हुए उसे धीर धीरे नीचे करने लगी. दीदी की पॅंट के साथ उनकी ब्लू पैंटी भी नीचे आ रही थी, दीदी की झान्टे अब दिखने लगी थी, अब पॅंट और पैंटी वहाँ पर आ चुकी थी जहाँ से जांघें शुरू होती हैं.

दीदी: मुझे नही मालूम...... दीदी थोड़ा हक्लाई और फिर जिस तरह वो मेरे सामने खड़ी थी थोड़ा नर्वस भी थी, क्यों कि दीदी की झान्टे अब सॉफ दिखाई दे रही थी. दीदी ने हिम्मत कर के पूछा, क्या मेरा ये सब भी उतना ही सुंदर है, उतना जितनी की मेरी बाकी शरीर.

मेरे को विश्वास नही हो रहा था कि दीदी ऐसे मुझे अपने प्राइवेट पार्ट्स दिखाएगी. मैं इस दृश्य को अपने दिमाग़ में संजोए जा रहा था, और मेरे दिमाग़ में इसकी वीडियो तय्यार हो रही थी. जो कुछ मैं देख रहा था, दीदी की हल्की हल्की झान्टे, और वो दोनो टाँगों के बीच झान्टो से सज़ा हुआ छोटा सा त्रिकोण. दीदी की दोनो टाँगों के बीच, चूत का आकार लेने को बेकरार नीचे के वो आउटर लिप्स, दीदी की स्किन जो क्रीस बनाकर चूत कर रूप ले रही थी, उस को देख रहा था, वो फूली हुई चूत और वो चूत के बाहर वाले लिप्स जो दीदी को एक बेहद आस्कर्षक लड़की बना रहे थे. दीदी की नाभि से थोड़ा नीचे से शुरू हुई झान्टे चूत को एक ट्राइंगल बना के ढकने का प्रयास कर रही थी, और फिर नीचे कुछ इंच की एक लकीर बना रही थी. दीदी ने अपनी झान्टे ट्रिम कर रखी थी, उनको एक जंगल का रूप देने से पहले ही काट दिया गया था, लेकिन चूत की वो लकीर झान्टो के बीच शुरू होती हुई सॉफ नज़र आ रही थी, लग रहा था कि वो कितनी सॉफ्ट है. दीदी के शरीर से निकलती हुई मादक गंध मुझे पागल कर रही थी.
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03-31-2019, 03:07 PM,
#60
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
दीदी ने होश में आते हुए धीरे से कहा: राज....

मैने दीदी की तरफ देखा और बोला: दीदी आप का सब कुछ बहुत सुंदर है, सच में. मैं उस नशे में बोले जा रहा था.

मैं खड़ा हुआ और दीदी की आँखों में आँखें डालकर दीदी की तरफ आगे बढ़कर दीदी को अपनी बाहों में भर लिया. दीदी ने भी अपनी पॅंट की परवाह ना करते हुए मुझ को बाहों में ले लिया, और मेरे कान के पास ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने लगी. मैं दीदी की पीठ पर हाथ फिरा रहा था. मेरा लंड दीदी की चूत के अगले नंगे भाग पर दबाव बना रहा था, दीदी की पैंट और पैंटी अभी भी नीचे खिसकी हुई थी. 

डॉली दीदी ने मेरी कमर पर हाथ रखा और मेरे से चिपक गयी. मैं दीदी के बालों में कहीं खो गया और दीदी के पूरे शरीर पर हाथ फेरने लगा. दीदी ने मुझे धकेलते हुए बॉक्स के उपर लिटा दिया, अब मेरे पैर बॉक्स के नीचे और शरीर का बाकी हिस्सा बॉक्स के उपर था. दीदी ने मेरी तरफ देखे बिना, बॉक्स के दोनो तरफ अपने पैर कर लिए और मेरे चेहरे के उपर दोनो पैर फैला के खड़ी हो गयी. मैने तुरंत दीदी के एक पैर को थोड़ा उठा के, और अपना सिर उँचा कर अपना मूँह दीदी की चूत पर रख दिया. मेरा चेहरा अब चूत के अगले भाग में घुसा हुआ था और दीदी ने मुझे कस के पकड़ रखा था. दीदी की पैंट और पैंटी हालाँकि काफ़ी नीचे थी, लेकिन मैने उन दोनो को उंगली फँसा के थोड़ा और नीचे कर दिया. दीदी की चूत अब सॉफ दिखाई दे रही थी, और दीदी अपनी झान्टो से धकि चूत को मेरे चेहरे पर रगड़ रही थी. मेरी नाक और मूँह दीदी की चूत से निकलती मादक सुगंध से भर चुके थे, और आग में घी का काम कर रहे थे. जैसे ही मैने अपने मूँह के होंठ खोले तो दीदी की झान्टो को अपनी जीभ पर घिसते हुए महसूस किया , और दीदी की हल्की हल्की सिसकियाँ सुनाई देने लगी. दीदी अपनी गान्ड को हिला रही थी, और अपनी चूत को मेरे उपर घिस रही थी. मैं चाहता था कि दीदी की पॅंट को पूरा उतार दूं जिस से मैं दीदी को ठीक तरह से टच कर सकूँ, चूत का स्वाद ले सकूँ, और अपने होंठों से दीदी की टाँगों के बीच चूस सकूँ. जिस तरह से दीदी अपने आप को मेरे सामने प्रेज़ेंट कर के ये सब ऑफर कर रही थी, मुझे अपने आप पर कंट्रोल नही हो रहा था. मेरे हाथ दीदी के हिप्स पर थे, और दीदी की पैंट को नीचे कर रहे थे, दीदी ने ऐसा करने से बिल्कुल नही रोका.

तभी उपर किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी, हम दोनो घबरा गये. दीदी तुरंत मेरे उपर से हटी और अपने कपड़े और बाल ठीक किए. सीढ़ियों पर किसी के बेसमेंट की तरफ उतरने की आवाज़ सुनाई दी, जहाँ कि हम दोनो थे, मैं भी उठकर अपने कपड़े ठीक करने लगा, और अपने मूँह पर लगे माय्स्चर को सॉफ कर के नॉर्मल होने की कोशिश करने लगा. दीदी पुराने कपड़ों के खुले हुए बॉक्स के पास चली गयी और हाथ में एक शर्ट उठा के उसको फोल्ड करने लगी, तभी मम्मी अंदर आ गयी.

मम्मी : गुड मॉर्निंग, बच्चों, अर्रे वाह डॉली, ये पुराने कपड़ों को फोल्ड कर रही हो. मम्मी ने हम दोनो की तरफ देखा और फिर पूछा, सब ठीक तो है ना?

हां मम्मी, बस थोड़ी देर पहले ही मैं उठा हूँ... मैने कहा

डॉली दीदी ने मम्मी की तरफ देखते हुए बोला, हां मम्मी मैं सोच रही थी कि राज यहाँ से जाए तो मैं अपने ये सारे कपड़े तसल्ली से फोल्ड कर लूँ. दीदी ने मुझ पर गुस्सा होते हुए दिखाने का नाटक किया.

मैने उठ के जाते हुए कहा, सॉरी दीदी, लेकिन ऐसा नही है कि आज से पहले मैने कोई ब्रा देखी ही ना हो...

मम्मी: दोनो अपना अपना काम करो, और फिर से लड़ाई मत करो, मम्मी ने प्यार से डाँटते हुए कहा

मैने भगवान का शुक्रिया अदा किया और वहाँ से चल दिया, वो दोनो बातें कर रही थी, मैं उपर अपने रूम में आ गया. मैने खिड़की में से पापा को कार का बॉनेट उठा कर कुछ चेक करते हुए देखा..

मैने नहा के अपने कपड़े चेंज कर लिए, और थोड़ी देर बाद जब डॉली दीदी से मिला, तो हम दोनो ने एक दूसरे को बताया कि हम कितना डर गये थे जब मम्मी वहाँ पर एक दम आ गयी थी.

दीदी: सॉरी राज, लगता है मैं कुछ ज़्यादा ही भावनाओं में बह गयी थी, दीदी ने फुसफुसाते हुए कहा. हम दोनो डाइनिंग टेबल पर बैठ के खाना खा रहे थे और मम्मी पापा दोनो किचन में थे.

राज: दीदी, मेरे से किस बात का सॉरी कह रही हो? वो तो बस मम्मी पापा....मेरा मतलब...

डॉली दीदी: जो कुछ मैने किया उस से तुम को बुरा तो नही लगा ना. मैं तो इसी बात से परेशान थी

राज: अर्रे नही दीदी, मेरे को क्यों बुरा लगेगा, बिल्कुल नही दीदी, मैने दीदी का हाथ अपने हाथ में लेकर दबा दिया.

दीदी मुस्कुराइ और मेरे हाथ को दबाते हुए बोली, मैं ये बात याद रखूँगी...

अगले एक डेढ़ हफ्ते मैं काफ़ी बिज़ी रहा. असाइनमेंट्स, कुछ और काम, और तान्या के साथ कभी कभार डेट्स, इन सब में इतना बिज़ी रहा कि ज़्यादातर मैं घर से दूर ही रहा. अगर डॉली दीदी ने अगले फ्राइडे को मेरे घर से निकलने से पहले वो बात ना बोली होती तो अब तक मैं काफ़ी परेशान हो चुका होता. हम दोनो एक दूसरे को बता रहे थे कैसे हम इतना ज़्यादा बिज़ी हैं और स्ट्रेस में भी हैं (दीदी भी काफ़ी बिज़ी थी इस बीच). हम दोनो इस बात से सहमत थे कि कैसे काम के प्रेशर ने हमारे मूड और हमारी दोस्ती और पास आने पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है. दीदी मेरे पास आई और उसने हंसते हुए कहा, मुझे लगता है हम को कुछ स्पेशल करना चाहिए. मैने पूछा ऐसा क्या स्पेशल कर सकते हैं? दीदी ने अपना होंठ काटते हुए कहा, क्यों ना हम दोनो नंगे होकर बिना एक दूसरे को टच किए मस्ती करें? मुझे ऐसी परिस्तिथि में कोई रास्ता नज़र नही आ रहा था. मैने बस हां में अपनी गर्दन हिला दी.

ये सोच सोच के कि हम ने क्या करने का डिसाइड किया था, इंतेजार करना मुश्किल होता जा रहा था. हालाँकि 2 हफ्ते बीत चुके थे लेकिन ना तो मैने पॉर्न देखी थी और ना मूठ मारी थी, तान्या एक महीने के बाद भी अपनी चूत देने को तय्यार नही थी. तो उस फ्राइडे की रात को जब मम्मी पापा सोने के लिए अपने बेडरूम में जा चुके थे और हम दोनो ड्रॉयिंग रूम में मूवी देख रहे थे, मैने दीदी की तरफ देखा, हम दोनो एक दूसरे को देख के मुस्कुराए. दीदी उठ के मेरे पास 3 सीटर सोफे पर बैठ गयी, मैने दीदी की फैली हुई बाँह पर अपना सिर रख दिया और दीदी को अपनी दोनो बाहों में भर लिया. हम उस डिसिशन लेने के कारण, दोनो आज कुछ ज़्यादा ही प्यार और केर दिखा रहे थे. हम आज से पहले कभी ऐसे नही बैठे थे, इस तरह मैने दीदी को कभी बाहों में नही भरा था, दीदी का सिर मेरी छाती पर टिका था, लेकिन आज ये सब उचित लग रहा था.

थोड़ी देर बाद हम ड्रॉयिंग रूम से उठ के टीवी बंद करके बेडरूम में जाने लगे. बिना कुछ बोले हम अपने ड्यूप्लेक्स घर की सीढ़ियों पर उपर चढ़ के मेरे बेडरूम तक पहुँचे, और डोर को अपने पीछे बंद कर लिया. दीदी मेरी तरफ देख के स्माइल करते हुए पास आई और मेरी एक झप्पी ले ली. मैने भी दीदी को अपनी बाहों में लेते हुए दीदी को अपने और पास कर लिया. कुछ देर हम एक दूसरे को आँखों में आँखें डाल के देखते रहे और मुस्कुराते रहे. दीदी अपना होंठ दाँतों से काट रही थी और अपनी आइब्रोज को चढ़ा रही थी. हम थोड़ा हट के कुछ फुट की दूरी पर खड़े हो गये.

मैने पूछा, तो फिर तय्यार हो दीदी? दीदी जैसे पहले से तय्यार थी उसने एग्ज़ाइटेड होकर तुरंत हां में अपनी गर्दन हिला दी.

हम एक साथ अपने कपड़े उतारने लगे. मैं जब अपनी टी-शर्ट उतार रहा था तब दीदी अपनी पॅंट के बटन खोल के नीचे खींच रही थी. हम थोड़ा रुके, और एक दूसरे को थोड़ा नर्वस्ली लेकिन एग्ज़ाइटेड हो के देखा, हम दोनो अंडरवेर पहने खड़े थे. थोड़ा ज़्यादा ही मस्ती में दीदी ने अपनी ब्रा का हुक खोला और उसे धीरे धीरे उतार के दूर फेंक दिया, दीदी की मस्त मस्त चूंचियाँ अब मेरे सामने थी. ब्रा से आज़ाद होने के बाद दीदी के निपल खुली हवा मिलते ही थोड़ा कड़क होना शुरू हो गये.

दीदी ने ब्रा फेंकने के बाद मुझे आशा भरी निगाहों से देखा. मैं कुछ देर के लिए संकोच करने के बाद अपने बॉक्सर को नीचे करने लगा, दीदी ये सब देख रही थी. मैने बॉक्सर्स में से अपने पैर निकाले और फिर सीधा खड़ा हो गया, मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था, और उपर दीदी की तरफ पॉइंट कर के सलामी दे रहा था. दीदी उसे कुछ देर देखती रही, और फिर मुझे देख के मुस्कुराइ. दीदी नीचे झुकी और पैंटी नीचे करके दीदी ने मेरे उपकार का बदला दे दिया, दीदी ने जब अपनी पैंटी को नीचे की तरफ सरकाया तो दीदी की मस्त मखमली त्वचा और वो हल्की हल्की ट्रिम की हुई झान्टे जो दीदी के दोनो पैरों के बीच घुस रही थी, उनका दीदार हो गया. दीदी फिर सीधा हुई और अपने पोनीटेल में बँधे बालों को ठीक किया, मेरी तरफ स्माइल किया, मुझे अपने सुंदर नग्न शरीर की तरफ देखता हुआ पाकर, संकोच में अपने होंठो को दाँतों से काटने लगी.

दीदी वाकई में बहुत सुंदर थी, उनका शरीर एक दम गठीला और बेदाग था, दीदी के उभार लाजवाब थे. मेरे को ये सोच के बड़ा अजीब लगा कि मैं अपने शरीर की तुलना दीदी से कर रहा हूँ, दीदी की कोमल त्वचा, एक जैसे कंधे, और एक जैसी मसल टोन. दीदी भी मेरे नंगे शरीर को देख रही थी, और मेरे खड़े लंड पर उसका विशेष ध्यान था. दीदी ने अपनी आँखों में आए किसी आइब्रो के बाल को निकाला, फिर मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी.

दीदी ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा, ऐसा लगता है कि तुम पूरी तरह तय्यार हो. तुम चाहो तो मैं और ज़्यादा झुक के थोड़ी जगह बना देती हूँ?

राज: हां दीदी, भगवान के लिए प्लीज़.....

दीदी मुस्कुराइ और मेरे बेड पर उल्टी होकर लेट गयी, और अपने दोनो हाथ बेड पर अपने सिर की तरफ रख दिए. अपना एक घुटना उपर उठा के, मेरी तरफ अपने कंधे के उपर से पीछे घूम के देखा. दीदी की चूत अब पूरी तरह से दिखाई दे रही थी. दीदी ने मुझे पास आने के लिए एनकरेज किया, मैं अब दीदी के पीछे करीब 4 फुट की दूरी पर खड़ा था, दीदी देख रही थी मैं कैसे अपना लंड हिला रहा हूँ. मैं दीदी के गान्ड की गोलाईयों को घूर के देख रहा था, और उनके बीच अंदर की तरफ धन्से छिपे हुए गान्ड के छेद को, मैं दीदी की चूत के दोनों होठों को घूरे जा रहा था. मैं कल्पना कर रहा था कि चूसने पर इनका स्वाद कैसा होगा, वो छूने पर कैसी लगेंगे, और साथ साथ मूठ भी मारता जा रहा था.

तुम होने वाले हो क्या राज? दीदी ने धीरे से पूछा. जब मैने हां में सिर हिलाया तो दीदी ने कहा, अभी नही, थोड़ा रूको, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है, ऐसा बोल के दीदी खड़ी होने लगी.

मैं रुक गया और लंड को अपने हाथ से छोड़ दिया, थोड़ा अजीब लगा लेकिन मुझे दीदी पर विश्वास था. दीदी बेड पर पहले मेरी तरफ मूँह कर के बैठ गयी, और फिर घूम के बेड पर पीठ के बल लेट गयी. दीदी ने मेरी बाँह पकड़ी और अपनी तरफ खींचा, और फिर अपनी नशीली आँखों से मेरी तरफ देखने लगी.

हम एक दूसरे को टच नही करेंगे.... लेकिन तुम मेरे उपर तो आ जाओ?

मैं बिना एक पल गँवाए, अपने चारों हाथ पैरों पर बेड पे सरकने लगा. मेरा लंड अब भी क़ुतुब मीनार के माफिक खड़ा था, लेकिन मैं इस चीज़ का ध्यान रखे हुआ था कि कहीं वो दीदी को ग़लती से भी टच ना कर ले. दीदी ने अपने दोनो घुटने थोड़ा उपर किए और टाँगों को थोड़ा फैला दिया, जिस से मैं दीदी के और पास जा सका, और अपने दोनो हाथ गद्दे पर दीदी की छाती के दोनो तरफ रख दिए. एक पल के संकोच के बाद मैं थोड़ा और आगे खिसका, अब मेरी दोनो जांघें दीदी की जांघों के बीच थी और मेरा लंड दीदी के पेट के उपर फनफना रहा था. हम ने एक दूसरे की तरफ थोड़ा घबराते हुए देखा. मैने दीदी की चूंचियों पर एक नज़र दौड़ाई और फिर दीदी की तरफ स्माइल करने का साहस किया. दीदी ने भी स्माइल किया.
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