Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
03-31-2019, 03:14 PM,
#91
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
बुआ कूल रहते हुए बोली, “शरमाओ मत राज. अब हम दोनो समझदार अडल्ट्स हैं.” ऐसा कहते हुए बुआ ने वो तौलिया अपने शरीर पर बाँध ली, इस बीच, इस से पहले कि वो छिप पाते, एक बार फिर से मुझे उनके डार्क ब्राउन निपल्स की एक झलक मिल गयी. बुआ ने रूम में लगे बड़े से शीशे की तरफ जाकर, अपने गीले बालों में कंघी करते हुए बताया, “भाभी ने तो मुझको डॉली वाले रूम में रहने के लिए कहा था, लेकिन जब मैं डॉली के रूम में गयी, तो वहाँ पर बहुत सारे कोकरोच थे. मुझे दुनिया में अगर किसी चीज़ से सबसे ज़्यादा डर लगता है, तो कोकरोच से. इसलिए मैं तुम्हारे रूम में आ गयी. तुमको कोई प्राब्लम तो नही है ना, अगर मैं तुम्हारे साथ इस रूम में रुक जाऊ तो?”

मैने बिना कुछ सोचे बोला, “मुझे क्या प्राब्लम होगी बुआ? यू आर मोस्ट वेलकम, इस रूम में बहुत जगह है, मैं तो अपना एक फोल्डिंग बेड लगा लूँगा, आप आराम से मेरे ही रूम में रहें.”

बुआ खुश होते हुए बोली, “ओके तो फिर ठीक है, आज भैया और भाभी तो कहीं बाहर जा रहे हैं.” आगे एक रहस्य भरी आवाज़ में मुझसे पूछा, “एनी प्लॅन्स?”

"नो...नो प्लॅन्स." अभी भी मैं अंजाने में, रूम में घुसकर बुआ को नंगा देखने के बाद थोड़ा शरमा रहा था. और मेरा चेहरा अभी भी लाल था. मैने कुछ हकलाते हुए बोला, “आप कहो तो पिज़्ज़ा या कुछ और ऑर्डर कर देते हैं...” मैने शीशे में बुआ के चेहरे को देखा, बुआ मुझे देख रही थी, और मुस्कुरा रही थी. 

“गुड आइडिया, और वैसे भी भाभी बता रही थी, तुमको मुझसे बहुत सारी बातें करनी हैं,” बुआ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ कहा. शीशे के सामने से घूमते हुए, बुआ ने पास आते हुए, हम दोनो के बीच की दूरी को कम कर दिया.

"हे भगवान! तुम तो बहुत बड़े हो गये हो!" मेरे बिल्कुल पास आते हुए बुआ ने कहा. “लास्ट टाइम जब मैने तुमको चेक किया था, तब तुम्हारी हाइट मेरे बराबर थी, 5 फुट 4 इंच. अब तो तुम मुझसे पूरा 6 इंच लंबे हो गये हो.”

बुआ ने अपने पंजों की उंगलियों पर उँचा होते हुए, बस अपने पुर शरीर पर तौलिया लपेटे हुए, मेरे कंधे से कंधा मिला कर हाइट को फिर से चेक किया. मैं शायद इस वजह से कुछ ज़्यादा ही मर्दाना फील करते हुए, घमंड भरे अंदाज में कहा, “पूरे 5 फुट 10 इंच.” बुआ ने मुझे एक किस किया, और फिर से दूर हो गयी.

"ठीक है, अब मुझको कपड़े पहन लेने चाहिए" बुआ ने थोड़ा रुकते हुए मेरी तरफ देखते हुए कहा. बस एक पल लिए मुझे लगा कि बुआ अपनी टवल हटाने वाली है.

"ओह हां,मुझे भी तो नहाना है." मैने मासूम बनते हुए कहा, फिर मन ही मन सोचा, बच्चू, अगर इतने भोले भाले होते तो शुरू में ही ना रूम से बाहर चले गये होते.

"ठीक है राज, आल्मिराह में से अपने कपड़े निकाल लो, और नहा लो, ये तुम्हारा ही रूम हैं, जब तक तुम नहा कर आते हो, मैं भी अपने कपड़े निकाल के पहन लेती हूँ. मैने बुआ की बात मानते हुए आल्मिराह से अपने कपड़े निकाले, और बाथरूम में नहाने चला गया. 

जब मैं नहा के अपने रूम में लौट के आया, तो मैने पाया कि रूम अंदर से लॉक नही है. मैने धीरे से दरवाजे को धक्का दिया तो वो खुल गया. अंदर देखा, तो बुआ बेड पर नंगी बैठ कर अपनी झान्टो को रेज़र से सॉफ कर रही थी. मैं काफ़ी देर तक बिना कोई आवाज़ किए, बुआ को अपनी झान्टे सॉफ करते देखता रहा, बुआ भी इतनी मगन थी, की उनको होश ही नही था कि मैं रूम में दाखिल हो चुका हूँ.

कुछ देर बाद, जब बुआ ने सिर उठा के डोर की तरफ देखा, तो मुझे वहाँ देख कर बोली, "ओह शिट! सॉरी राज, मुहे पता ही नही चला, तुम कब आ गये!"

बुआ ने बिल्कुल नॉर्मल रहते हुए कहा, “बहुत दिनों से इनको सॉफ नही किया था, आज तुम्हारे इस मिरर में देखा, तो लगा कि इनको सॉफ कर लेना चाहिए.” 

मैं बुआ के नंगे मम्मों को घूरे जा रहा था, बुआ की डार्क ब्राउन निपल्स टाइट होकर खड़े हो चुके थे, और बस कुछ ही दूरी पर मेरे सामने मेरी बुआ ने नंगे मम्मे मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे.

मुझको अपने मम्मों की तरफ घूरता हुआ पाकर, बुआ ने पूछा, “ तान्या के तो तुमने देखे होंगे.” इस से पहले कि मैं कुछ सोच के जवाब दे पाता, बुआ ने रेज़र रख दिया, और अपनी ब्रा, पैंटी और सलवार सूट पहन लिया. 

मुन्नी बुआ कपड़े पहन के नीचे ड्रॉयिंग हॉल में चली गयी, कुछ देर इस घटना के बारे में सोचता हुआ मैं अपने रूम में बेड पर लेटकर सोचता रहा. कुछ देर बाद, फिर मैं भी नीचे ड्रॉयिंग हॉल में आ गया, वहाँ मुन्नी बुआ और पापा आपस में बातें कर रहे थे.

"मम्मी कहाँ है?" मैने ड्रॉयिंग हॉल में दाखिल होते हुए पूछा.

"बस अभी आ ही रही होगी." पापा बोले. "गॉड, आइ हेट दीज़ बिज़्नेस डिन्न्स," पापा ने थोड़ा असहज होते हुए कहा, उतना ही असहज, जितना कि मैं अपने आप को फील कर रहा था. बुआ ने मेरी तरफ मजाक मे आँख मारी, तभी मम्मी भी आ गयी.

"भाभी, इस ड्रेस में बहुत अच्छी लग रही हो!" मुन्नी बुआ ने मम्मी की तारीफ़ करते हुए कहा. और वाकई में मम्मी उस ड्रेस में कमाल लग रही थी. बहुत दिनों के बाद मैने मम्मी को इतना सज़ा सँवरा, इतनी बढ़िया ड्रेस में देखा था. और मुझे भी अपने आप पर विश्वास नही हुआ, जब मैने मम्मी के उस ड्रेस के बड़े गले में से दिख रहे दोनो मम्मों के बीच की दरार, जिसको अँग्रेज़ी में क्लीवेज कहते हैं, उस क्लीवेज को देखकर मेरी नज़र वहाँ से हट ही नही रही थी.

"मुझे विश्वास नही होता, तुम मुझे ऐसी ड्रेस पहले तो खरीदवाते हो, और फिर बिज़्नेस पार्टीस में पहनने के लिए भी फोर्स करते हो," मम्मी ने पापा को कहा. लेकिन वाकई में मम्मी उस ड्रेस में कमाल लग रही थी, और मुन्नी बुआ ने मेरे दिमाग़ में चल रही बात को बोल दिया.

"भैया, भाभी पर पार्टी में नज़र रखना" बुआ ने पापा को चेतावनी देते हुआ कहा. “आज तो पार्टी में सबकी नज़र भाभी पर ही रहेगी, सारे मर्द झाँक झाँक कर कोशिश करेंगे, की सामने से थोड़ा सा और दिख जाए!” ये सोच कर कि आज मम्मी को कितनी अटेन्षन मिलने वाली है, पापा का चेहरे खुशी से चमक रहा था.

“ओके, ठीक है, तो फिर हम उनको देखने के लिए कुछ और इंतज़ाम कर देते हैं” पापा ने अपने कोट की जेब में से एक मखमली छोटा लंबा सा बॉक्स निकालते हुए कहा. और मुस्कुराते हुए पापा ने उस बॉक्स को मम्मी के हाथों में रख दिया, और बोले, “लो इसको पहन लो.” मम्मी ने उस छोटे लंबे से बॉक्स को खोला, और एक सोने की चैन में लटके सिंगल डाइमंड पेंडेंट को निकाल लिया. वो डाइमंड वाकई बहुत खूबसूरत था, और जो भी देखता बस देखता ही रह जाता.

“ये तुमने अच्छा किया भैया!” बुआ बोली. “लेकिन अब सारे मर्दों के साथ औरतें भी ईर्ष्या की नज़रों से भाभी को देखेंगी. मर्दों की नज़र भाभी की क्लीवेज पर होगी तो औरतों की डाइमंड पर.” मेरे सिवाय, वो तीनों ज़ोर ज़ोर से इस बात पर हँसने लगे, मैं चुप चाप खड़ा हुआ हैरत से उनकी बातों को सुन कर, अपने कानों पर विश्वास नही कर पा रहा था.

“बस अब एक अच्छी से एअर रिंग्स की कमी है,” बुआ बोली. “लो, ये तुम मेरी पहन लो.” बुआ ने अपने कानों में पहनी हुई एअर रिंग्स को उतारते हुए कहा. मैने बुआ को जब एअर रिंग्स उतारते हुए देखा, तब मैने गौर किया, कि वो एअर रिंग्स भी डाइमंड की थी.

"ओह दीदी! सच में? आप मुझे क्या सच में आज शाम को इतने सुंदर एअर रिंग्स पार्टी में पहनने के लिए दे रही हो?" मम्मी ने एग्ज़ाइटेड होते हुए पूछा.

"हां, क्यों नही...इनको तुम ही रख लो, मुझे तो ये राजीव के पापा ने दिलवाए थे." बुआ ने वो एअर रिंग्स अपने कानों में से उतार कर, मम्मी के कानों में पहना दिए.

“नही, मैं इनको रखूँगी नही, लेकिन आज पार्टी में पहनने के लिए देने के लिए, सच में थॅंक यू, दीदी.” मम्मी ने खुश होते हुए कहा. मम्मी ने तुरंत उनको पहनकर शीशे में अपने आप को निहारा, और गले में लटके डाइमंड को देख कर मन्त्र मुग्ध हो गयी, क्योंकि वो उनके मम्मों को और ज़्यादा सेक्सी लुक दे रहा था. “अब चलो भी, मैं तो तय्यार हूँ,” मम्मी ने शॉल ओढाते हुए कहा. मैने देखा, जाने से पहले मम्मी ने झुक कर बुआ के कानों में कुछ कहा. उसके बाद बुआ ने मेरी तरफ देखा, और फिर कुछ जवाब में मम्मी के कानों में दिया.

"ओके, तुम दोनो मस्ती करो. और अगर ज़्यादा ड्रिंक कर लो, तो वहीं उसी होटेल मे रूम लेकर रुक जाना, ड्राइव करने की कोई ज़रूरत नही है." बुआ ने हिदायत देते हुए मम्मी पापा को कहा.

"हां, हो सकता है, हम वहीं पर रुक जाए!" पापा अपने चेहरे पर कुटिल मुस्कान लाते हुए बोले. "वैसे ज़्यादा पीने की वजह से नही, किसी और वजह से भी!" पापा ने किसी षड्यंत्र भरे अंदाज में कहा. मम्मी ने पापा के कंधे पर प्यार में एक घूँसा मार दिया.

"इस उमर में तो सुधर जाओ, बच्चे बड़े हो गये हैं. एक डाइमंड क्या दिलवा दिया, जाने अब मुझसे क्या क्या चाहते हैं!" मम्मी ने बनावटी गुस्से में कहा.
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03-31-2019, 03:14 PM,
#92
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मैं बुआ के पास खड़े होकर, मम्मी पापा को बाहर जाकर कार में बैठते हुए देखता रहा. “फिर, पिज़्ज़ा का क्या हुआ?” मुन्नी बुआ ने पूछा.

मैने पिज़्ज़ा के साथ बियर ली और बुआ ने एक कम आल्कोहॉल वाली बियर पी. बुआ को 2 बियर पीने के बाद थोड़ा सा सुरूर हो गया. बुआ ने घड़ी की तरफ देखे हुए कहा, “अभी तो बस 9 ही बजे है, चलो थोड़ी देर बाहर टहल कर आते हैं.” मुझे भी बुआ का आइडिया अच्छा लगा, और मैं अपने रूम में चेंज करने को चल दिया. “कहाँ जा रहे हो राज,” बुआ ने पूछा.

"ट्रॅक सूट पहनने!"मैने बिना कुछ सोचे जवाब दिया.

“ओके, मैं भी ट्रॅक सूट पहन लेती हूँ, बाहर थोड़ी ठंड होगी” बुआ ऐसा कहते हुए मेरे पीछे पीछे मेरे रूम में आ गयी. रूम में आकर, जब मैं आल्मिरान में से अपना ट्रॅक सूट निकाल रहा था, बुआ ने अपने सलवार सूट का कुर्ता अपने गले में से निकाल दिया, उन्होने नीचे ब्रा भी नही पहनी हुई थी. मेरी नज़र तो सारी शाम, बुआ के मम्मों पर टिकीई रही थी. लेकिन मन ही मन, अपनी बुआ के मम्मे घूरते हुए ताकना एक चीज़ है, और असलियत में उनको देखना, एक अलग चीज़ है.

"बुआ! ये आप क्या कर रही हो?" मैने थोडा घबराते हुए पूछा. "अगर कोई आ गया तो?"

"कौन आएगा? तुम्हारी गर्लफ्रेंड?" बुआ चिढ़ाते हुए बोली." भैया भाभी तो पार्टी में गये ही हैं, और मुझे नही लगता, वो आज रात लौटेंगे. बुआ ने बेफिक्री से अपना कुर्ता, पास रखी चेर पर फेंक दिया, और अपनी सलवार का नाडा खोलने लगी. थोड़ी देर में मुन्नी बुआ बस मेरे सामने, एक ब्लू कलर की पैंटी में खड़ी थी. "चलो, अब तुम भी जल्दी से चेंज कर लो, फिर टहलने चलते हैं," बुआ ने अधिकार पूर्वक कहा. 

"कौन सी गर्लफ्रेंड की बात कर रही हो बुआ आप?" मैने बहुत देर बाद पूछा. बुआ ने शरारती आदाज़ में मेरी थोड़ी पर अपनी उंगली को चलाते हुए थोड़ा बहकते हुए कहा, “वो तान्या, तुम्हारी होने वाली बीवी, अभी तो गर्लफ्रेंड ही है ना.” 

"मुझे सब पता है, क्या क्या गुल खिला चुके हो तुम," बुआ ने इस अंदाज में पूछा मानो उनको बहुत चढ़ गयी हो.

"मुन्नी बुआ!" मैं ज़ोर से चिल्लाया. मैने पहली बार उनको नाम लेकर पुकारा था, शायद उनके एक वाक्य ने मुझे सर्प्राइज़, गुस्सा और परेशान कर दिया था.

हम दोनो अब अपने अपने ट्रॅक सूट पहन चुके थे. "क'मोन राज – थोड़ा टहल के आते हैं,, बियर और पिज़्ज़ा डाइजेस्ट तब भी हो जाएगा!" ऐसा बोलते हुए, बुआ ने चाबियों का गुच्छा उठाया, और मेरी गान्ड पर एक हल्का सा थप्पड़ मारते हुए, हंसते हुए जल्दी से बाहर पोर्च से निकालकर, बाहर लोहे वाले गेट से भाग कर, दौड़ते हुए बाहर निकल गयी. मैं भी बदला लेने के लिए उनके पीछे दौड़ा, तभी बुआ ने मेरी तरफ चाबी उछालते हुए कहा, “लॉक लगा दो.”

मैने चाबी के गुच्छे को एक हाथ से कॅच किया, और बाहर से दोनो गेट में ताले लगा दिए. बुआ कोई गाना गुनगुना रही थी, और मेरे आगे आगे चल रही थी. पीछे घूमकर मेरी तरफ देख के बीच बीच में मुस्कुरा जाती. बुआ के बालों का हाल ही में बनाया हुआ पोनीटेल, उनके जल्दी जल्दी चलने के कारण बार बार उछल रहा था.

"चाबियाँ तो अच्छी कॅच कर लेते हो! कितनी लड़कियाँ को अब तक कॅच कर चुके हो! बुआ आगे चलते हुए कुछ कुछ बोले जा रही थी. मैं पीछे चलते हुए, उनके पोनीटेल, और ट्रॅक पॅंट में छुपी हुई उनकी भारी गान्ड को देख रहा था. 

मैं जल्दी जल्दी कदम बढ़ाते हुए, बुआ के पास पहुँचा, और उनकी हिप्स पर एक थोड़ा ज़ोर से थप्पड़ मार दिया. बुआ की गान्ड बहुत भारी थी, और उनके हिप्स बहुत भारी थे. बुआ ने गुस्से में मेरी तरफ देखा, “आउच, बहुत ज़ोर से मार दिया.” फिर हम दोनो तेज तेज चलने लगे. कुछ दूर चलने के बाद, सड़क थोड़ा सूनी हो गयी. बुआ ने चारों तरफ देखा, और बोली, “मुझे सूसू आ रहा है.”

बुआ इतना बोल कर रोड के साइड में लगे एक पेड़ के पीछे जाने लगी, और मुझे अपने पीछे आने का इशारा किया. फिर वो पेड़ के पीछे छिप गयी. जैसे ही मैं उस जगह पहुँचा, जहाँ मेन रोड से कुछ दिखाई नही दे रहा था, मैने आस पास नज़र दौड़ाई. वहाँ एक आधी जली हुई लकड़ी पड़ी थी, कुछ खाली कोल्ड ड्रिंक्स की प्लास्टिक बॉटल्स, कुछ बियर के कॅन्स, और सिगरेट के फिल्टर पड़े हुए थे. और एक यूज़ किया हुआ कॉंडम भी पड़ा था, और उसके पास की फटा हुआ ड्यूर्क्स का पॅकेट.

बुआ ने अपने ट्रॅक पॅंट को नीचे खिसकाया, और थोड़ी सॉफ सी जगह बैठ कर सूसू करने लगी.

बुआ के सूसू के ज़मीन पर गिरने की आवाज़ मुझे पागल कर रही थी. कुछ सेकेंड देखने के बाद, मैने भी अपने ट्रॅक पॅंट को नीचे किया, और बॉक्सर्स में से अपना लंड बाहर निकाल के मैं भी पेशाब की धार निकालने लगा. तभी बुआ उठ के खड़ी हुई, उनकी ट्रॅक पॅंट अभी भी घुटनों तक नीचे खिसकी हुई थी, वो मेरे पीछे आकर खड़ी हो गयी, और मुझे पेशाब करते देखने लगी. 

जब मैं फारिग हुआ, तो मैने अपने लंड को हिलाकर, बॉक्सर के अंदर डाल लिया, और ट्रॅक पॅंट उपर कर ली, मुझे ऐसे करते देख, बुआ ने भी अपनी पॅंट उपर कर ली, और हम दोनो फिर से मेन रोड पर आ गये.

"बुआ, आप वो गर्लफ्रेंड के बारे में क्या पूछ रही थी?" मैने हिम्मत करते हुए पूछा. 

“तुम पिछले कुछ महीनों से जो कुछ कर रहे हो, उसके बारे मीं तुम्हारी मम्मी ने मुझे सब कुछ बता दिया है.” बुआ ने मेरी तरफ आँख मारते हुए कहा. चलो अब ठंड बढ़ती जा रही है, जल्दी से घर चलते हैं. ये सुनकर मेरी तो गान्ड ही फट गयी, कहीं मम्मी को मेरे और दीदी की चुदाई के खेल के बारे में मालूम तो नही चल गया?

जब हम दोनो घर पहुच गये, तो दोनो फिर से मेरे रूम में कपड़े चेंज करने के लिए पहुँच गये. इस बार हम दोनो के बीच कोई शरम नही थी, दोनो ने एक दूसरे के सामने ट्रॅक सूट उतार दिया. बुआ को सिर्फ़ पैंटी में देखने का मुझे एक और मौका मिल गया. 

"मम्मी ना जाने क्या सोच रही हैं, लेकिन मैने ऐसा वैसा कुछ नही किया है," मैने अपनी सफाई देते हुए कहा. बुआ ने मेरे को एक अपराधी की तरह देखा, लेकिन मैने कोई प्रतिक्रिया नही दी. “सच में बुआ, आप विश्वास करो, अगर मैने कुछ किया होता, तो सब से पहले मैं आप को ही बताता.” मुझे लगा बुआ मेरी बात मान गयी, और मुझ पर विश्वास कर लिया.

"कुछ नही किया?"

"हां, बुआ कुछ नही किया!"

"लेकिन कुछ भी क्यों नही किया?" बुआ के इस सवाल का मेरे पास कोई जवाब नही था. मेरा चेहरा लाल हो गया, और मैने अपनी गर्दन नीचे झुका ली. नज़रें नीची करने के बाद भी, मैं बुआ की पैंटी और गोरी गोरी नंगी जाघो को देख रहा था. 

"राज, यहाँ बेड पर बैठ जाओ, आइ प्रॉमिस, मैं किसी को कुछ नही बताउन्गि, मुझे सब कुछ सच सच बताओ,” बुआ ने मुझे समझाते हुए कहा.
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03-31-2019, 03:14 PM,
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RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
मैं अपनी घर में पहनने वाली शर्ट को उठाने लगा, तभी बुआ बोली, “अभी कपड़े मत पहनो, ऐसे ही अच्छा लग रहा है, और अगर तुम पहनोगे तो मुझे भी पहनने पड़ेंगे. मैने नज़रें उठा के बुआ की तरफ देखा, एक बार फिर से मेरी नज़रें बुआ के मस्त मम्मों पर अटक गयी.


"मुझे विश्वास नही होता, कि तुमने कुछ नही किया होगा," बुआ ने कुछ देर सोच के बोला.

"ऐसा नही है बुआ, कि कुछ नही किया, लेकिन....." मैं थोड़ा सावधान होते हुए बोल रहा था, क्यों कि मुझे मालूम था, कि मैं जो कुछ बुआ को बताउन्गा, वो पहले मम्मी और फिर मम्मी से पापा को पता चल ही जाएगा. अब मुझे इस तरह बुआ से बातें करते हुए उतना असहज महसूस नही हो रहा था.

मैने कुछ देर सोच के बुआ से पूछा, “मम्मी ने आपको क्या क्या बताया है.”

बुआ शायद इस सवाल के लिए तय्यार थी, “राज, तुम्हारी मम्मी बहुत समझदार हैं, वो इस उमर में लड़कों की शारीरिक ज़रूरतों को समझती हैं. तुम्हारी मम्मी और डॉली बहुत क्लोज़ थी, और एक दूसरे से कोई बात नही छुपाती थी. तान्या और तुम्हारे बीच सेक्स को छोड़ के जो कुछ भी हुआ है, उसका तुम्हारी मम्मी को पता है. डॉली ने तुम्हारे और तान्या के बीच जो कुछ हुआ है वो मम्मी को बता रखा है. लेकिन तुम दोनो ने इतने दिनों तक केवल टच और मास्टरबेशन तक अपने आप को कैसे सीमित रखे हुए हो, मुझे विश्वास नही होता.”

यका यक, मेरे दिमाग़ की बत्ती जल गयी, मैं समझ गया कि मेरे और तान्या के बीच जो कुछ भी हो रहा था, उसके बारे में तो मम्मी को मालूम है, लेकिन दीदी ने मेरी और तान्या की चुदाई के बारे में कुछ नही बताया है, और ना ही मम्मी को मेरी और दीदी की करतूतों के बारे में कुछ पता है. सब कुछ अब मेरे दिमाग़ में सॉफ होने लगा था.

“लेकिन तान्या के घर पर तो तुम 2 या 3 रात रुके हो, क्या उसको अभी तक नही चोद पाए,” बुआ ने फिर से सवाल दागा.

“बुआ, आप को मालूम ही है, आज कल की ये पढ़ी लिखी लड़कियाँ कितनी तेज हैं, शादी से पहले चुदाई को तय्यार ही नही होती, कहती हैं, बस उपर उपर से ही कर लो,” किसी तरह मैने असलियत छुपाने की कोशिश की.

“उपर उपर से मतलब,” बुआ ने ख़ुफ़िया लहजे में पूछा.

“मतलब, मैने उसकी चूंचियाँ दबाई हैं, उसको केवल पैंटी में देखा है, लेकिन अभी तक उसके अंदर नही घुसाया है. वो अपने कपड़े उतार के, मेरे लंड को हिला हिला के इसका पानी निकालती है,” मैने विस्तार में बुआ को समझाया.

कुछ देर हम दोनो के बीच खामोशी छा गयी.

"क्यों राज, वो सालों पुरानी यादें ताज़ा हो गयी, जब हमने ऐसी बातें की थी?" बुआ ने मेरा हाथ अपने हाथों के बीच दबाते हुए पूछा, और फिर बोली, “कितने सालों के बाद हमको इस तरह अपनी बातें एक दूसरे को बताने का मौका मिला है.


"अच्छा बुआ, अब आप अपने बारे में बताओ, आपने अभी तक अपने बारे में कुछ नही बताया है, आप का कैसे चल रहा है.” मेरी भी बियर के नशे में सारी झिझक खुल गयी थी. 

मेरे इस सवाल ने बुआ को थोड़ा सोचने पर मजबूर कर दिया.

"क्या तुम सच में असलियत सुनना चाहोगे?" बुआ ने मुझसे पूछा. मैने हां में सिर हिला दिया, मुझे नही मालूम था, कि बुआ क्या बताने जा रही हैं.

"मैने तुम्हारे फूफा जी को किसी दूसरी औरत के साथ चुदाई करते हुए पकड़ा था.” बुआ ने बताना शुरू किया. “शायड उन दोनो का पिछले बहुत महीनों से अफेर था, मुझे ही इतने दिनों बाद पता चला था."

"लेकिन फूफा जी ने ऐसा क्यों किया?" मैने पूछा, लेकिन फिर तुरंत मुझे एहसास हुआ, कि मुझे इस तरह नही पूछना चाहिए थे. ऐसा लगा मानो बुआ अभी रो देंगी. 

"क्यों कि वो मेरे से आधी उमर की कच्ची कली थी, उसकी उमर के हिसाब से बहुत बड़ी बड़ी चूंचियाँ थी, और सबसे बड़ी बात वो हमारे ही एक ग़रीब मजदूर की बेटी थी. अपनी ग़रीबी से तंग आकर वो माँ बाप अपनी बेटी को तुम्हारे फूफा जी से चुदवाते थे. रोज रात को ये शराब पीकर, अपनी जीप निकालते, और उस की झोंपड़ी में जाकर उसके माँ बाप के सामने उसकी चुदाई करते. जिस रात इनका आक्सिडेंट हुआ, उस रात भी ये कुछ ज़्यादा शराब पीकर, उस लड़की को ही चोदने जा रहे थे, लेकिन जीप पर कंट्रोल नही कर पाए, और तेज रफ़्तार में जीप एक पेड़ से टकरा गयी थी,” बुआ ने मुझे बताया. मैने देखा ये सब बताते बताते रोने लगी थी.

"ओह शिट बुआ...आइ'म सॉरी, रियली." मेरे कुछ समझ में नही आ रहा था, कि और क्या कहूँ, और कहीं बिना सोचे हुए, नशे की इस हालत में कहीं कुछ ग़लत ना बोल दूं. फिर बुआ थोड़ा संभाली, और बोली, “चलो जो होता है, अच्छा ही होता है, मैं अपने रहते वो सब देख भी नही सकी थी. मुझे छोड़ कर वो किसी और की चुदाई करें. क्यों राज, कौन औरत बर्दाश्त करेगी?”

मैने इस तरह के सवाल के लिए बिल्कुल तय्यार नही था, मैने एकदम सकपका कर पूछा, “क्या बुआ?”

बुआ ने हंसते हुए कहा, “चुदाई और क्या?” बुआ का इतना कहते ही हम दोनो हँसने लगे. हम दोनो हंसते हंसते पास आ गये, हमारे शरीर एक दूसरे को छूने लगे, मुझे लगा मुझे थोड़ा दूर हो जाना चाहिए, बुआ की चूंची मेरी बाहों को छू रही थी, और थोड़ा दब भी रही थी. लेकिन मैं उसी पोज़िशन में बैठा रहा, और उस उत्तेजक एहसास अक आनंद लेता रहा, बुआ के निपल्स अब खड़े होने लगे थे, और मेरी स्किन को छू रहे थे. मेरे अंदर बहुत तरह की फीलिंग्स आ रही थी, उतेजक, लंड भी थोड़ा थोड़ा खड़ा हो रहा था, थोड़ी शरम भी आ रही थी, थोड़ा नशा भी चढ़ा हुआ था, और थोड़ा डर भी लग रहा था.

मुन्नी बुआ बेड पर खिसक कर मेरे और ज़्यादा पास आ गयी, और मेरे चेहरे की तरफ देखने लगी. 

मैने भी बुआ की तरफ देखा, और स्लो मोशन में, उनको अपने पास आता महसूस कर रहा था. बुआ के खुले हुए होंठ, मुझे मानो आमंत्रित कर रहे हो. तभी मैने बुआ को मेरे करीब आते हुए महसूस किया, तो मेरे होंठ अपने आप खुल गये, और बुआ ने जैसे ही अपने होंठों को मेरे होंठों पर दबाया, मेरे होंठों ने उनको तुरंत स्वीकार कर लिया.


"मुझे तुम्हारी ज़रूरत है, राज." मुन्नी बुआ बोली. और उस वक़्त मुझे भी, इस से ज्याद और कुछ नही चाहिए था.

"मुझे भी." बस मैं इतना ही बोल पाया. लेकिन इतना कहना ही बहुत था. मुन्नी बुआ ने मेरे बॉक्सर में हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया.

"सच में आज तक किसी ने इसको नही चूसा है?" मुन्नी बुआ ने पूछा. मेरे दिमाग़ में डॉली दीदी और तान्या के मेरे लंड चूसने की तस्वीरें घूम गयी, लेकिन मैने अपने आप को संयत रखा.

"आह... नही, बुआ कभी नही." मेरे मूँह से किसी तरह ये शब्द बाहर निकले, तभी बुआ ने मेरे लंड को अपने मूँह में भर लिया.

“ओह... बेहनचोद ! बुआ !” बहुत दिनों के बाद मुझे ये सुख मिल रहा था. मुन्नी बुआ के मूँह का एहसास, प्यार से चूमना, चूसना और लंड को सहलाना, इसका आनंद ही कुछ और था. "ओह, प्लीज़...बुआ, रुक जाओ प्लीज़!" मैने मानो चेतावनी देते हुए कहा. आज पहली बार मैं इतना जल्दी झड़ने वाला था, ना जाने बुआ के मूँह और जीभ में क्या जादू था. “बुआ... बुआ! रूको! रूको! मैं बस झड़ने ही वाला हूँ!” मैने गुर्राते हुए कहा. टट्टों के अंदर गोलियाँ टाइट होकर उपर चढ़ने लगी थी, सुपाडे के छेद में से जैसे ही लावा फुट कर बाहर निकला, उसने बुआ के मूँह को भर दिया, बुआ लंड को चूसे जा रही थी, और ज़्यादा से ज़्यादा माल निकालने की कोशिश कर रही थी. मैं तो मानो जन्नत में पहुँच चुका था, बुआ के नंगे शरीर को अपने पास लेटा देख, अपने आप पार काबू करना बहुत मुश्किल था. क्या खूबसूरत शरीर की मालकिन थी मेरी बुआ, हर जगह सही अनुपात में माँस चढ़ा हुआ था, बिल्कुल हार्ट का शेप लिए हुए उनकी गान्ड. बुआ अब भी मेरे पास लेटे हुए, मेरे लंड को चाट और चूसे जा रही थी, और ये सुनिश्चित कर रही थी, कि वीर्य की एक भी बूँद, उनकी जीभ के चाटने से ना रह जाए. मैने अपनी आँखें खोली, मुन्नी बुआ अब भी मेरे लंड के सुपाडे को सॉफ्टी आइस क्रीम के कोन के माफिक चाट रही थी.
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03-31-2019, 03:14 PM,
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RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
"ऐसा मज़ा पहले कभी नही आया, हुह?" बुआ ने मुस्कुराते हुए कहा, उनकी आँखे बता रही थी, कि उनके शरीर के अंदर अभी भी बहुत आग और गर्मी बाकी है. मैं कुछ नही बोला, मेरे दिमाग़ में तरह तरह के ख्याल चल रहे थे. अभी अभी बुआ ने मेरे लंड को चूस कर मेरे माल निकाला है, ये बात मेरे दिमाग़ में चल रही थी, साथ ही साथ, ये बात भी चल रही थी कि मैं बुआ को जल्द से जल्द चोदना चाहता हूँ.

"मैं भी सूसू करके आता हूँ...." ऐसा कहते हुए, मैं रूम से बाहर निकलने ही वाला था, तभी मुन्नी बुआ मुझे जाते देख, एक शरारत भरी मुस्कान अपने चेहरे पर ले आई. जैसे ही मैं उठ कर खड़ा हुआ, बुआ बोली, “जल्दी वापस आ जाओ, अभी तुम्हे मेरी चूत का स्वाद भी चखना है... पहले चाटी है, कभी किसी की चूत?”

“नही... बुआ, आज से पहले किसी ने ऐसा मौका ही नही दिया, आप बता देना कैसे क्या करना है.” मैने एक बार फिर से झूठ बोला. बुआ अब भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी. 

"डॉन'ट वरी, मैं तुम को सब सिखा दूँगी. फिर कहीं तान्या को विश्वास ही नही होगा, कि तुमने ये सब कहाँ से सीखा!" मुन्नी बुआ बोली. ऐसी बातें सुनकर, मेरा लंड जो कुछ मिनिट्स पहले ही माल निकालकर ठंडा पड़ा था, फिर से खड़ा होने लगा. मुझे सूसू बड़ी ज़ोर से लगी थी, मैं जल्दी से लंड को हाथ में पकड़ कर बाथरूम की तरफ चल दिया... 

जब मैं पेशाब कर के अपने रूम में पहुँचा, मुन्नी बुआ अपनी दोनो टाँगें खोल के लेटी हुई थी, और मेरा इंतेजार कर रही थी. मैं दरवाजे में से मुन्नी बुआ को अपने आप से खेलते हुए देखा, “हे भगवान...... मुन्नी बुआ!” बस ये ही मेरे मूँह से निकला.

"यहाँ आओ," बुआ बोली. "कभी किसी लड़की की चूत देखी है?" 

मैने ना में सिर हिलाया. मेरा गला सूखने लगा था और मैं अपना होश खोने लगा था. 

"तो फिर तुमको सीख लेना चाहिए," बुआ ने अपनी टाँगों को और ज़्यादा फैलाते हुए कहा. 

मैं बुआ की तरफ फेस करके, उनकी दोनो टाँगों के बीच चमक रही गीली चूत को देखते हुए, बेड के किनारे पर बैठ गया. मुन्नी बुआ अपनी चूत को अपने हाथों से फैलाते हुए, मुझे अपनी गीली चूत के दोनो फांकों के बीच उपर उस गुलाबी दाने को दिखाने लगी. 

"मैं इसको चूत का निपल कहती हूँ," बुआ ने उसको सहलाते हुए दोस्ताना अंदाज में समझाते हुए कहा. "जब मैं अपने निपल्स छूती हों, तो यहाँ खुजली होने लगती है,” बुआ ने चूत के दाने पर उंगली घुमाते हुए नशीले अंदाज में कहा . “और जब मैं इस चूत के दाने पर अपनी उंगली फिराती हूँ, इस तरह.... तो मेरे निपल्स खड़े हो जाते हैं. और अगर कोई इस पर अपने जीभ फिराए तो और ज़्यादा अच्छा लगता है. याद है, मैं जब तुम्हारे लंड को चूस रही थी, तब कैसा लग रहा था? मूठ मारने से ज़्यादा मज़ा आ रहा था ना?” मैं बस चुप चाप बैठे हुए, हां में गर्दन ही हिला पाया. “ठीक उसी तरह, मुझे भी अच्छा लगता है, जब कोई मेरे साथ उस तरह करता है. तो फिर राज, अब तुम सीखना चाहोगे, कैसे करते हैं?”

"ओह हां बुआ!" मैं एक गहरी साँस लेते हुए कहा. "दिखाओ बुआ, दिखाओ मुझे!" मैने उत्सुकता से पूछा. मैं बुआ की दोनो टाँगों के बीच आराम से बैठ गया. बुआ की चूत मेरे चेहरे से बस कुछ इंच दूर थी, मैं सब कुछ अपने अंदर समाहित कर रहा था, बुआ की चूत की खुश्बू, चुदाई से पहले हवस की महक, जो बहुत मादक थी, और मैं बुआ को चोदने की हवस के नशे में डूबता जा रहा था. 

"बस वैसा ही करते रहो, जैसा मैं तुम से कहूँ," बुआ फुसफुसाते हुए बोली. "मैं तुम्हे आज ऐसा चूत चाटना सिखाउन्गि, कि लड़कियाँ तुम्हारे से चूत चटवाने का इंतेजार किया करेंगी."

मैने अपने सिर पर बुआ के हाथ का हल्का सा दबाव महसूस किया, वो मुझे अपनी गरम गरम चूत की तरफ गाइड कर रही थी. अपने आप, मैने अपनी जीभ को नुकीला करके, जीभ के टिप को चूत के दाने को छेड़ दिया. “धीरे धीरे” मुन्नी बुआ ने सिखाते हुए कहा. “अपनी जीभ को एक पंख की तरह समझो. और उसको इस तरह घिसो जैसे मेरी चूत को कोई पंख फिरा कर छेड़ रहे हो.” मैने वैसा ही किया, और जान बूझकर जीभ ज़्यादा दबाव नही डाला, और किसी तरह का घर्षण नही होने दिया.

”हां राज, ऐसे ही, बहुत बढ़िया, बस ऐसे ही करते रहो मेरी जान, बससस्स आईसीई हीईिइ!” मैने चूत के दाने को हल्के से छेड़ा, और फिर कुछ मिनिट्स तक, बस ज़रा सा उसको छूता रहा. “थोड़ा अपनी जीभ को घुमा सकते हो?” बुआ ने पूछा. 

मैने हां में सिर हिलाते हुए, बुआ की पूरी चूत को चाट लिया. 

बुआ खिलखिला उठी. “बढ़िया. तुम्हे मालूम है, कैसे लगा था जब मैने तुम्हारे लंड के निचले हिस्से को चाटा था?” मैने फिर हन में सिर हिलाया, और फिर से पूरी छूट को चाट लिया, और मेरी जीएभ छूट के स्पर्श का आनंद लेने लगी. 

बुआ फिर से खिलखिल्ला उठी, “व्हूफ...जान, बहुत मज़ा आ रहा है, लेकिन इसको बाद के लिए बचा के रखो,” बुआ ने मुझसे सीख दी. “मैं चाहती हूँ कि तुम अपनी जीभ को घुमा कर, मेरी चूत के दाने को उसमे लपेट लो, और फिर उसको फँसा के थोड़ा उपर नीचे करो... एक बार फिर से... धीरे हल्के से.”

मैने वैसे ही किया, अपनी जीभ से उस चूत के दाने के संवेदनशील हिस्से को चोदने लगा. 

बुआ अब ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने लगी, और खुश होकर मीठी मीठी आहे भरने लगी. “ऐसे ही चोद दो मेरी जान, ऐसे ही, पर्फेक्ट!” बुआ धीरे से करहाई. “अब ऐसा करो, तुम थोड़ा उपर आ जाओ और अपने हाथों से मेरे निपल्स से खेलना शुरू कर दो, और नीचे वैसे ही अपनी जीभ से करते रहो.” 

मैने अपने दोनो हाथ उपर की तरफ बढ़ा कर, बुआ के दोनो मम्मों को अपनी हथेलियों में भर लिया, और फिर मज़े से उनकी सॉफ़टनेस्स्स और फर्मनेस का अंदाज़ा लगाने लगा, और फिर उनको दबाने, मींजने लगा, और अपनी उंगलियों को उनके उपर घुमा घुमा कर, बुआ के हार्ड निपल्स, जो खड़े हो चुके थे, उनको उंगली और अंगूठे से उत्तेजित होकर उत्सुकता में मींजने लगा, जिस से वो और ज़्यादा खड़े होने लगे.

मुन्नी बुआ अब और ज़ोर से साँसें ले रही थी, और बीच बीच में उनकी साँस फूल भी जाती थी, मैं अब भी बुआ की चूत के दाने को अपने जीभ से छू छू कर छेड़ रहा था.

“ओके राज... अब चूसना शुरू करो. इस चूत के दाने को अपने मूँह मे ले लो, और फिर आराम से इसको चूसना शुरू करो.”
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03-31-2019, 03:15 PM,
#95
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
जैसा बुआ ने कहा था, मैने वैसा ही किया, मैने उनके चूत के दाने को अपने होंठों के बीच लेकर, जैसा उन्होने कहा था कि ये दाना उनकी चूत का निपल है, ऐसा इमॅजिन करते हुए, मैं उसको ऐसे चूसने लगा, मानो मैं उनके मम्मों के निपल को चूस रहा हूँ. मेरा चेहरा उनकी चूत पर धंसा हुआ था, उनकी चूत से निकल रहे लिसलिसे पानी की खुश्बू मेरे नाथूनों में भर रही थी. मैं चूस रहा था, चूसे जा रहा था, चाट रहा था, और अपने होंठों से चूत के दाने को मसल रहा था. मुन्नी बुआ अब गुर्राने की आवाज़ निकालने लगी थी, और अब बोल कर कोई इन्स्ट्रक्षन नही दे रही थी. बुआ की आहें, कराहें, और गुर्राने की आवाज़ मुझे बता रही थी, कि उनको क्या चीज़ अच्छी लग रही है, और उनको किस चीज़ की ज़रूरत है. मैं बीच बीच में अपनी जीभ की हरकत बदल रहा था, उनकी चूत के दाने को जीभ के नुकीले टिप से जीभ को लहराकर छेड़ता, तो कभी जीभ से चूत के दाने को पूरी तरह से चाट लेता, मानो किसी स्त्री के चूत रूपी खेत, जिसकी गीली ज़मीन पर अपनी जीभ से हल चला रहा हूँ, बुआ की चूत पर बार बार ढेर सारा रस जमा हो जाता, उसको मैं फिर से चाट लेता, चाट कर सब कुछ सॉफ कर देता और एक बार फिर से इस प्रक्रिया को शुरू कर देता. मैने बुआ के हाथ को अपने सिर पर महसूस किया, उनकी उंगलिया मेरे बालों में कंघी कर रही थी, और मेरे चेहरे को अपनी चूत की तरफ इतना धक्का दे रही थी, कि मुझे साँस बड़ी मुश्किल से आ रही थी. मुन्नी बुआ गुर्राई, इस बार थोड़ा ज़्यादा ज़ोर से. एक बार फिर से गुर्रायि.. और फिर जल्दी जल्दी साँसें लेकर हाँफने लगी.

"राज अब! अब! मुझे अपनी जीभ से चोद दो! चोद दो राज! चूसो, और ज़ोर से चूसो! चोद दो! राज चोद दो! निकाल दो मेरा पानी!” मुन्नी बुआ चीखते हुए बोली.

मैं थोडा अचकचाया. मुझे विश्वास नही हुआ कि कोई चुदाई के आनंद में इतना ज़ोर से चीख कर दूसरे के कान भी फाड़ सकता है. मुन्नी बुआ मेरे बालों को पकड़ के खींचने लगी, इतना ज़ोर से, कि मुझे दर्द भी हुआ; मैने महसूस किया कि बुआ के दोनो पैर मेरे को जकड रहे हैं, मेरा चेहरा मानो उनकी जांघों के बीच, और सिर उन दोनो पैरो के बीच फँस गया हो. जिस तरह से बुआ की चूत ने ढेर सारा चूत का पानी मेरे चेहरे पर छोड़ा, उसकी मुझे बिल्कुल उम्मीद नही थी. मैं तो जैसे डूब रहा था... डूबे जा रहा था, और इस बेशक़ीमती लम्हे का आनंद ले रहा था... 

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मैं अपनी पीठ के बल सीधा लेट गया, मुन्नी बुआ मेरी कमर पर सवारी करते हुए बैठ गयी. मुझे चूमते हुए, बुआ ने पहले मेरे होंठ, नाक और यहाँ तक कि आँखों के पास लगे अपनी चूत के पानी को चाट कर सॉफ किया. मैं बुआ की चूत की महक में खोया हुआ था, उनकी चूत के रस की महक ने मेरे सारे चेहरे को अपनी चूत की पानी रूपी क्रीम लगाकर महका रखा था.

“आप इतना ज़्यादा कैसे छोड़ सकती हो?” मैने किसी तरह पूछा, मुझको खुद पर विश्वास नही हो रहा था , जो कुछ मैने देखा था. ये बात सुनकर बुआ ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी.

"ओह.. राज, आज ना जाने कितने सालों के बाद, इतना अच्छी वाली हुई हूँ, मैं तो जैसे भूल ही गयी थी,” बुआ ने मेरे उपर निढाल होकर लेटते हुए कहा. मैं बुआ के मम्मों का दबाव अपनी छाती पर महसूस कर रहा था. मैं बुआ के तेज़ी से धड़कते हुए दिल की धड़कन को महसूस कर रहा था, मैने हाथ बढ़ाकर बुआ की गान्ड की गोलाईयों को हथेलियों में कस के पकड़ लिया, और उनको दबाने और मसल्ने लगा. जब मैं थोड़ा खिसका, तो ऐसा लगा जैसे मेरा लंड बुआ की चूत के छेद को छू रहा है. बुआ के अभी अभी झड़ने के कारण, चूत बेहद गीली थी, चूत का पानी मेरे लंड को भी गीला कर रहा था, जैसे ही मैने उपर की तरफ एक झटका मारा, मैने अपने लंड को बुआ की चूत के बाहरी होंठों के बीच घुसता हुआ महसूस किया.

"नही, अभी नही," मुन्नी बुआ फुसफुसाते हुए बोली, हालाँकि वो भी अपनी गान्ड को हिला के, अपनी चूत को मेरे लंड के उपर घुमा रही थी, उनकी चूत मेरे लंड को चूम रही थी, और चूत के होंठ मेरे लंड को जैसे चूस रहे हो. "मेरे इन मम्मों को चूसो राज. मेरे इन निपल्स को चूसो, मेरी जान," बुआ ने भीख माँगते हुए कहा. 

मैने बुआ के मम्मों को पकड़ कर, मैं उनकी मालिश करने लगा, उनको सहलाने लगा और उनके मस्त खड़े निपल्स के साथ खेलने लगा. और मम्मों को अपने होंठों से दबाने लगा, मैं हर एक निपल को होंठों के बीच दबा कर चूसने लगा, और कभी उसको मूँह के अंदर घुमाने लगा, फिर उस पर जीभ फिराने लगा. मैं इस आनंद का भरपूर मज़ा ले रहा था, क्या मस्त मज़ा आ रहा था, मैं बस बुआ के मम्मों को अपने मूँह में भरने का आनंद ले रहा था. तभी बुआ फिर से थोड़ा हिली, मैं इस के लिए बिल्कुल तय्यार नही था. मेरा लंड थोड़ा टेढ़ा होकर झुक गया. मैने बुआ की चूत की फांकों को खुलता हुआ महसूस किया, और मेरे लंड को निगलते हुए, बस एक पल को ऐसा लगा, जैसे ये ही जन्नत है, बुआ ने झुक कर, लंड को पूरा गहराई तक अंदर ले लिया.

"बेहनचोद!" मेरे मूँह से अपने आप निकला. "बेहन की चूत!"

मैं एक बार को बुआ के मम्मों के बारे में एक दम भूल गया, मैं अपने आप को भूल गया. उस समय बस मुझे बुआ की चूत ही मेरे अस्तित्व का सवाल बन चुकी थी, मानो चूत से निकला मर्द, चूत में अपने लंड को डालने के लिए पागल हुआ जा रहा हो. मेरा लंड बुआ की गरम गरम चूत में आराम से घुसा हुआ था, मुन्नी बुआ भी अपनी चूत की हवालात में बंद लंड जैसे क़ैदी को गिरफ्तार करके बहुत खुश हो रही थी. “ज़ोर से चोदो राज ! चोद दो ! चोद दो! चोद दो राज ! बुआ चीखते हुए बोली.

नीचे से चूत में उपर की तरफ धक्कों का बुआ भरपूर सहयोग दे रही थी, और मेरे हर झटके का चूत को कभी जकड के, और कभी फैला के ढीला छोड़ते हुए, अपनी गान्ड को हिला हिला कर भरपूर सहयोग दे रही थी. मैं उपर की तरफ झटके मार मार के अपने लंड को ज़्यादा से ज़्यादा बुआ की चूत के अंदर पेलने का प्रयास कर रहा था.

"चोद दो राज!" बुआ बार बार चीख चीख के बोल रही थी. मेरा लंड बुआ की चूत में पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था, बुआ पागल होकर, अपनी गान्ड को कभी साइड में तो कभी उपर नीचे, कभी आगे पीछे उछाल कर मेरे लंड पर उछल रही थी. जिस तरह से बस की चूत मेरे लंड को चूस रही थी, उनकी चूत से निकली चिकनाहट ने मेरे लंड पर एक परत चढ़ा दी थी, जिस के कारण, मेरे टट्टों की गोलियों में से पानी उपर चढ़कर निकलने को बेताब हो रहा था, मैं इस अपार आनंद, खुशी और उतेजना में सब कुछ भूल चुका था. 

”हां, राज, हो जाओ... निकाल दो अपना पानी !” बुआ ने चीखते हुए कहा, वो मेरे चरम पर पहुँचने को मेरे से पहले ही पहचान गयी थी. “भर दो मेरी चूत को अपने वीर्य के पानी से, भर दो... भर दो मेरी चूत को..!” मैं अपने सुपाडे के छेद में से पानी की धार को निकलता हुआ महसूस कर रहा था. एक, दो , तीन जोरदार पिचकारियों के साथ मैं वीर्य की धार बुआ की चूत में निकाल कर चरम पर पहुँच गया, और बुआ की चूत को अपने वीर्य के पानी से भर दिया.


"ओह हां...हां! हां!" मुन्नी बुआ ने चीखते हुए कहा. मैं बुआ की चूत में गहराई तक लंड को घुसाए हुए था, और चूत को सिंकूड़ते हुए, छोटा होते हुए महसूस कर रहा था. मैं अपनी पिचकारियों को लंड की नोंक पर बने छेद में से निकलता हुआ महसूस कर ही रहा था, तभी बुआ की चूत से निकले उस अमृत जैसे पानी के दरिया को महसूस किया, और मेरे लंड के वीर्य के पानी और बुआ की चूत से निकले हुए पानी एक दूसरे में मिल गये, और एक झरने की तरह, चूत में से एक झाग वाला, थोड़ा गाढ़ा, चिपचिपा, वो मिश्रण, जो हम दोनो के च्ररम पर पहुँचने का गवाह था, चूत के मूँह में से बहकर नीचे गिरने लगा.

एक बार फिर से बुआ, मेरे उपर गिर कर लेट गयी. मुझे उनके शरीर का बोझ, बिल्कुल महसूस नही हो रहा था. मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा चुका था, बुआ के मूँह से निकल रही संतुष्टि भरी आहें, मुझे बेहोशी जैसी हालत में कहीं से आती हुई सुनाई दे रही थी.....
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03-31-2019, 03:15 PM,
#96
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
मैं सुबह काफ़ी लेट सो कर उठा, वैसे भी आज सनडे था. मैने सोचा चलो अच्छा है आज कॉलेज तो नहीं जाना. लेकिन मुझे दोपहर में अपनी नयी नयी लगाई हुई फॅक्टरी पर तो जाना ही था. सारी रात मुन्नी बुआ ने मेरे साथ बिताई थी. मुझे सब कुछ याद आ रहा था. बुआ मेरे पास से कब चली गयी, मुझे पता भी नही चला. अब जब मैं सो के उठा था, तब मुझे मालूम पड़ा, कि बुआ मेरे पास नही है. किसी तरह आलस में मैं उठ कर बैठा, और अपने लंड को अचरज से देखने लगा. और मन ही मन अपने लंड से पूछने लगा. “क्यों, मज़ा आया ना कल रात?” मेरा लंड उन यादों को ताज़ा करते हुए फिर से खड़ा होने लगा. मेरे दिमाग़ में एक दम ख्याल आया, “बुआ कहाँ है?” 

मैं बेड से उतर कर, वैसे ही नंगे पैर, बाथरूम की तरफ चल पड़ा, वहाँ पहुँच कर इंग्लीश स्टाइल की सीट की लिड को उपर उठाते समय मुझे याद आया, कल ही तो बुआ इस पर बैठकर सूसू कर रही थी. बस इतना सा ख्याल मेरे दिमाग़ में आते ही, मेरा लंड फुल फॉर्म में आ गया. जब लंड खड़ा हुआ हो तो, सूसू करना कितना मुश्किल होता है, केवल मर्द ही समझ सकते हैं. किसी तरह बहुत देर तक पतली सी धार मार कर, मैने अपने आप को रिलीव किया. फिर अपने बेडरूम में आकर मैने एक शॉर्ट्स पहना, बिना किसी बॉक्सर या अंडरवेर के, और बिना टी-शर्ट पहने मैं नीचे किचन की तरफ चल दिया. किचन में से मुझे आलू की परान्ठे की खुश्बू आ रही थी. मुझे ज़ोर की भूख भी लगी थी, मैं तुरंत किचन में घुस गया. उनकी पीठ मेरी तरफ थी; मैने पीछे से जाकर उनके मम्मों को अपने हाथों में कस के दबा लिया, और साथ ही साथ उनकी गर्दन को चूमने लगा.

"राज? ये तुम क्या कर रहे हो?" मम्मी ने एक दम चौंकते हुए कहा.

मैं एक झटके में पीछे हट गया. एक दम बद-हवास, घबराया हुआ, और सकते में. मैं बस वहाँ से भागने ही वाला था. तभी वो हँसी... वो मेरी मम्मी की हँसी नही थी... बल्कि मुन्नी बुआ की थी. मैं मम्मी और मुन्नी बुआ के बात करने के लहजे में, एक हल्के से फ़र्क को समझ चुका था. लेकिन मम्मी और मुन्नी बुआ एक दूसरे की नकल एक दम हू-बहू उतार लेती थी. लेकिन जिस तरह से वो एक दम अलग-अलग पर्सन होते हुए एक दूसरे की इतनी अच्छी नकल उतार लेती थी और वैसी ही आवाज़ निकाल लेती थी, वाकई में अविश्वसनीय था, और उसी धोखे में कुछ देर पहले मैं फँस चुका था.

“बहनचोद... आगे से ऐसा कभी मत करना!” मैने किसी तरह कहा, मेरे पैर अभी भी काँप रहे थे, मैं वहीं पर किचन में रखी एक चेयर पर धम्म्म्म से बैठ गया. मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था. मेरा चेहरा लाल हो चुका था, किसी तरह मैं होश में आने का प्रयास कर रहा था, और मुन्नी बुआ मेरे को देख के ज़ोर ज़ोर से हंस रही थी.

“एक चीज़ तो तुम को समझ में आ गयी होगी, कि थोड़ी सावधानी बरता करो,” बुआ ने मुझे समझाते हुए कहा. “मान लो अगर मैं सही में तुम्हारी मम्मी होती तो? फिर क्या होता?” बुआ ने पूछा, बुआ सही कह रही थी, और ये बात मेरे भी समझ में आ रही थी.

"आइ'म सॉरी, आप सही कह रही हो बुआ. मुझे ऐसा नही करना चाहिए था,” बुआ की मुस्कुराहट ने मेरी सारी घबराहट को दूर कर दिया.

"चलो कोई बात नही," बुआ ने बोलना सुरू किया, "लेकिन राज, मैं जब तक यहाँ रुकी हुई हूँ, हम को कोई ऐसा काम नही करना चाहिए, जिंदगी में वैसे ही बहुत परेशानियाँ हैं, मैं नही चाहती कि मेरे और तुम्हारी मम्मी के बीच कोई प्राब्लम खड़ी हो जाए. जो कुछ हम ने किया, उसमें मुझे तो बहुत मज़ा आया, यदि हम आगे भी वो करते रहना चाहते हैं, तो हम को सब कुछ बहुत सावधानी के साथ करना होगा. हम को बहुत, बहुत ज़्यादा सावधान रहना होगा.

”एक बार फिर....आइ’म सॉरी बुआ, ऐसा फिर कभी नही होगा.” बुआ को अपने आगे लगे बटन वाले नाइट गाउन के बटन को खोलते हुए मैं देखने लगा. बुआ ने शायद बस ये ही पहन रखा था.

"एहितियात के तौर पर, आगे से, हमेशा मैं तुम्हारे पास आया करूँगी,” बुआ ने प्रपोज़ किया. इस तरह, कोई रिस्क भी नही रहेगा... और आज जैसा तुमने किया, इस तरह के आक्सिडेंट होने की संभावना भी ख़तम हो जाएगी. ठीक है?” बुआ ने गाउन को उतारते हुए कहा, मैं बुआ के गाउन को ज़मीन पर गिरते हुए और बुआ के नग्न शरीर को निहारने लगा.

"ठीक है," मैं थोड़ा शरमाते हुए अपनी ग़लती मानते हुए बोला.

"अभी.... भूख लगी है क्या?" बुआ ने पूछा. "कुछ खाने को चाहिए?" किचन में पड़ी दूसरी चेयर को खींच कर, बुआ ने अपना एक पैर, घुटने पर से मॉड्कर, अपनी टाँगें फैलाए हुए, उस पर रखते हुए पूछा.

"बहुत भूख लगी है!" मैं बुआ की चूत को चाटने के लिए झुकते हुए बोला. ब्रेकफास्ट तो बाद में भी कर लेंगे, ब्रेकफास्ट की माँ की चूत.

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03-31-2019, 03:15 PM,
#97
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
मैं उस दिन फॅक्टरी से जल्दी घर आ गया. मम्मी पापा की कार, पोर्च के नीचे खड़ी थी, मैने अपनी कार उनकी कार के पीछे खड़ी कर दी. “चलो अच्छा है, कम से कम पता तो चल गया कि मम्मी पापा आ गये हैं,” मैने सोचा, और मेन डोर की तरफ चल दिया. मेन डोर एक दम, अचानक से खुल गया. जैसे ही मैने डोर खुला, पापा हाथ में सूटकेस पकड़े हुए, बाहर निकलते हुए दिखाई दिए, मैने उनके पीछे आती मम्मी से पूछा, “पापा कहाँ जा रहे हैं?” 

मैने जान बूझकर पापा से नही पूछा था, क्योंकि हमारे घर में ये मान्यता है कि यदि कोई घर से बाहर जा रहा हो, तो उसको टोकते नही हैं. सवाल तो मैने मम्मी से पूछा था, लेकिन जवाब पापा ने दिया, तुम्हारी नयी फॅक्टरी के लिए जो मशीन जर्मनी से इम्पोर्ट करनी थी, उसकी इम्पोर्ट लाइसेन्स इश्यू हो गया है. लेकिन एक बार मैं जर्मनी में खुद जाकर मशीन को और सेल्लर को देखकर और मिलकर तसल्ली कर लेना चाहता हूँ, इसीलिए फ्रॅंकफर्ट जा रहा हूँ. 10 दिनों में लौट आउन्गा. “मेरे पीछे से इस घर में तुम ही अकेले मर्द होगे, तो अपनी मम्मी और मुन्नी बुआ का ध्यान रखना,” पापा ने मुस्कुराते हुए कहा.

“ओके पापा, आप चिंता ना करें, हॅव आ सेफ जर्नी,” मैने मन ही मन खुश होते हुए कहा.

पापा की हाइट मुझ से ज़्यादा थी, उन्होने जाने से पहले प्यार में, मेरे सिर पर मेरे बालों को तितर बितर करते हुए, हाथ फिरा दिया, मानो कह रहे हो, तुम अब बड़े हो गये हो, मुझे चिंता करने की कोई ज़रूरत नही.

पापा के कार गेट से बाहर निकालने के बाद, जब मैं गेट को बंद कर के लौटा, तो देखा मम्मी और बुआ, ड्रॉयिंग हॉल में बैठ कर बातें कर रही थी. जैसे ही मैं दाखिल हुआ, वो दोनो चुप हो गयी. ये बात मुझे अच्छी नही लगी, इसका मतलब वो दोनो मेरे बारे में बातें कर रही थी, और चाहती थी, कि मैं उन बातों को ना सुनूँ. मैने एक झलक में दोनो की तरफ देखा, और फिर ध्यान से बुआ को देखा, लेकिन उनके एक्सप्रेशन बिल्कुल नॉर्मल थे.

"आओ राज, बैठो, कैसा रहा आज का दिन?" मम्मी ने पूछा. मैने गौर किया, कि सवाल पूछते समय, मम्मी के गाल थोड़े लाल हो गये थे. फिर मुझे होश आया, कि मुझे सवाल का जवाब देना है. लेकिन एक बार फिर, मम्मी ने बुआ की तरफ देखते हुए बस हल्का सा मुस्कुरा दिया, उस प्यार भरे अंदाज में जैसा वो हमेशा करती थी.

"सब ठीक रहा मम्मी. मैं उपर वाले बाथरूम में." मैने बुआ की तरफ देखते हुए कहा, वो थोड़ा परेशान सी लगी, लेकिन इसकी कोई वजह नही थी. मुझे उनका ऐसे देखना, ठीक उसी तरह लगा, जैसे उन्होने सुबह, मेरे से उनको मम्मी समझने की ग़लती करने के बाद, मुझे बुआ ने देखा था. 

"जाओ नहा लो, हम यहाँ पर बैठ कर बातें कर रहे हैं," बुआ ने ज़ोर देते हुए बोला, और बस एक वाक्य में ही बहुत कुछ बोल गयी.

" राज, मैं पास की ग्रोसरी शॉप से कुछ सामान लेने जा रही हूँ, तुमको खाने के लिए कुछ मंगाना तो नही है?" मम्मी ने पूछा. 

"नही मम्मी, मुझे कुछ नही मंगाना है, आज सुबह वैसे ही कुछ ज़्यादा खा लिया था,” मैने बोलते हुए बुआ की तरफ देखा. बुआ ने गुस्से में मेरी तरफ देखा, और ऐसा लगा जैसे वो कह रही हो, कि अगर मैने कुछ ना बोला होता तो बेहतर होता. तभी उसी वक़्त मुझे पछतावा भी हुआ, कि शायद मैने अपना गुस्सा और झुंझलाहट बुआ पर बेकार में उतार दी थी, लेकिन इस बात की संभावना बिल्कुल नही थी कि जो कुछ मैं इशारों में बोल गया था, वो मम्मी के समझ में आया हो. 

"ओह...इस से पहले की मैं भूल जाऊं, ये लो अपने एअर रिंग्स वापस ले लो,” मम्मी ने बुआ के वो एअर रिंग्स उतारते हुए हंसते हुए कहा, “और थॅंक यू मुझे एक रात उधार देने के लिए.”

मैं घूमकर, सीढ़ियों की तरफ चल दिया, और एक बार में दो-दो सीढ़ियों पर छलाँग लगाते हुए अपने रूम में पहुच गया. और फिर अपने सारे पहने हुए कपड़ों को उतार के, उछालकर एक कोने में फेक दिया. बस अंडरवेर पहने हुए, मैं तौलिया उठाकर, बातरूम में घुस गया. फिर इंग्लीश स्टाइल की टाय्लेट सीट पर बैठकर, लंड को सहलाते हुए, उसे खड़ा करके, मूठ मारने की तय्यारी करने लगा...

जब मैं नहाकर बाहर निकला तो मैं बिल्कुल फ्रेश फील कर रहा था. सिर्फ़ तौलिया लपेटे हुए जब मैं अपने रूम में घुसा तो बेड पर मुन्नी बुआ नीचे पैर लटका कर बैठी हुई थी, और शायद मेरा इंतेजार कर रही थी. बुआ को अकेले वहाँ मैने बैठा देखा, मैने वो टवल भी हाथ से छोड़ कर, उसे नीचे सरक कर, गिर जाने दिया. मैने जान बूझकर, बुआ से पूछा, “मम्मी कहाँ है?”

"पास से ही शॉपिंग करने गयी है. लेकिन पहले तुम ये बताओ, कि वो सब तुम क्या बोल रहे थे?” मुन्नी बुआ ने अपनी पहली उंगली मेरी तरफ करते हुए पूछा. मैने शरम से अपने ग़लती स्वीकार करते हुए, अपना सिर नीचे झुका लिया.

"आइ'म सॉरी. लेकिन शायद मुझे पसंद नही आयी कि कोई पीठ पीछे मेरे बारे में बातें करे," मैने सीधा सपाट उत्तर दिया.

"तुम पता नही क्या ऊट पटांग सोच रहे हो, कि ना जाने हम दोनो तुम्हारे बारे में क्या क्या बातें कर रहे थे? कि कैसे मैने कल तुम्हारे लंड को चूसा? या कैसे कल तुमने पहली बार मेरी चुदाई की? क्या तुम ये सोच के परेशान हो?" बुआ ने ऊँची आवाज़ में पूछा.

"नही... बुआ ऐसा कुछ नही... मैं ऐसा कुछ नही सोच रहा. मैं इतना बेवकूफ़ भी नही हूँ!" मैं ये बोलते हुए अपने मन ही मन रीयलाइज़ भी कर रहा था, कि शायद मैं थोड़ा बेवकूफ़ सही में हूँ. बस मुझे इसी बात की चिंता थी, कि जो कुछ मैने मुन्नी बुआ के साथ शेयर किया है, वो मम्मी को उसमे से कितना बता रही हैं.

" राज तुम एक बात सुनो, और समझ लो, कि तुम्हारी मम्मी, किसी भी और माँ की तरह, तुम्हारे बारे में चिंता करती हैं. वो तुमको प्यार करती हैं... ये तुमको भी पता है. और तुम को ये भी पता है कि वो तुम्हारे लिए हमेशा भला ही चाहती है.
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03-31-2019, 03:15 PM,
#98
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
"हां, वो तो मुझे मालूम है." मैने नीचे, अपने पैरों की तरफ देखते हुए बोला, मैं बुआ की आँखों में आँखें डाल कर बात करने की हिम्मत नही जुटा पा रहा था. “लेकिन... आपने उनको क्या क्या बताया?” मैने पूछा, मुझे ये जाने बिना चैन नही पड़ रहा था कि उन दोनो में मेरे बारे में क्या क्या बातें हुई. ये सुनकर मुन्निी बुआ हँसने लगी.

"ठीक है, मैं बताती हूँ, तुम्हारी मम्मी बस ये जानना चाहती थी कि क्या तुमने कभी किसी लड़की को चोदा है, या बस अभी तक उपर उपर तक ही सीमित हो. उन्होने मुझसे बस ये पूछा था.”

"आप मज़ाक कर रही हो? क्या सच में उन्होने ऐसा पूछा था? लेकिन क्यों?"

"क्यों कि उनको पता है कि तुम बहुत सीधे हो, और लड़कियों के साथ ज़्यादा कंफर्टबल फील नही करते हो. वो तुमको बचपन से जानती हैं. और उनको ये भी पता है, कि बहुत दिनों से तुम तान्या से मिलजुल भी नही रहे हो. उनको शायद लगा होगा, कि हम दोनो एक दूसरे से सारी बातें कर लेते हैं, तो हो सकता है तुमने मुझे कुछ बताया हो.”

"आपने मम्मी को क्या बताया?" मैने पूछा. मुन्नी बुआ एक कुटिल मुस्कान की शरारत से मुस्कुराइ. 

"बस वो ही जो वो सुनना चाहती थी. मैने बताया कि मुझे नही लगता कि तुमने आज तक एक भी लड़की ना चोदि हो."

"क्या? आपने ये कह दिया?"

"ओह... बात को समझो राज, मैने पक्के तौर पर कुछ नही कहा. बस ये कहा कि मुझे शक़ है, कि तुम चुदाई कर चुके हो. मैने ऐसा कुछ डीटेल में नही बताया कि तुम किस लड़की को कब और कहाँ चोद चुके हो. लेकिन मैने ये ज़रूर बता दिया, कि सेक्स के मामले में तुम उस्ताद हो, उस एरिया में तुम्हारी मम्मी को चिंता करने की कोई ज़रूरत नही है. 

"लेकिन वैसे, मम्मी को मेरी सेक्स लाइफ के बारे में चिंता करने की क्या ज़रूरत है?" 

"ज़रूरत है, क्यों कि वो नही चाहती कि तुम्हारी जिंदगी में कुछ भी ग़लत हो, जिसके लिए बाद में पछताना पड़े,” मुन्नी बुआ ने अनुभवी अंदाज में कहा. कुछ देर तक हम दोनो में से कोई कुछ नही बोला, रूम में शांति छा गयी. लेकिन मुझे पता था, कि वो बहुत कुछ मम्मी को बता चुकी है, बहुत कुछ.

"आपने और क्या क्या बातें की?" मैने पूछा.

"तुमको तो मालूम ही है राज, मैं किस हाल में अकेलेपन से बोर होकर जी रही हूँ. लेकिन पता नही मुझे तुमको ये बताना चाहिए या नही, लेकिन सच ये है कि तुम्हारे पापा भी दूध के धुले हुए नही हैं!"

"आप कहना क्या चाहती हो बुआ?"

"मैं ये कहना चाहती हूँ कि.... तुम्हारी मम्मी को तुम्हारे पापा के किसी औरत के साथ चल रहे चक्कर के बारे में पिछले एक साल से मालूम है."

"पापा...?" 

मुन्नी बुआ ने हताशा में अपना सिर हिलाया.

"इसी वजह से कुछ दिनों के लिए मैं यहाँ पर रहने के लिए आई थी, राज. ऐसा नही है कि मैं घूमने या चेंज के लिए यहाँ पर आई थी. सच में, मैने इस बारे में बहुत सोचा, और कोई रास्ता ढूँढने की कोशिश की. और जिस तरह से तुम्हारी मम्मी इस दौर से गुजर रही थी, उसको भी किसी के साथ की ज़रूरत थी.”

"लेकिन वो दोनो तो एक दूसरे के साथ हमेशा बहुत खुश रहते हैं, आपने तो देखा ही था कल रात. आप को नही लगता, वो दोनो या तो जबरदस्त आक्टिंग कर रहे हैं, या फिर बहुत खुश हैं. मेरे तो कुछ समझ में नही आ रहा.”

“हां, तुम सही कह रहे हो राज, तुम्हारी मम्मी के मुताबिक, पिछले एक साल में पहली बार उन्होने आपस में इस तरह का व्यवहार किया है. और जहाँ तक तुम्हारी मम्मी को हाल फिलहाल की याद है, शायद पहली बार तुम्हारे पापा ने उनको कोई ऐसा गिफ्ट दिया है. तुम्हारी मम्मी के अनुसार, डाइमंड का प्रेज़ेंट तो एक तरह से "आइ'म सॉरी" प्रेज़ेंट था. और शायद था भी. हो सकता है, उनकी मॅरीड लाइफ में सब खुशियाँ लौट आयें, और हो सकता है, कि शायद कभी ना लौटें. इस दुनिया में कोई पर्फेक्ट नही है, ना तो तुम्हारे मम्मी पापा. ना ही तुम...ना ही मैं. और शायद कोई नही!"

"आप सही कह रही हो बुआ, मैं भी इस बात को मानता हूँ," मैं बुआ से बोला. "लेकिन आप जैसा बता रही हैं, ऐसा कैसे हो सकता है कि मम्मी और पापा ने पिछले एक साल से सेक्स किया ही ना हो?”

"तुम्हारी मम्मी ने तो मुझे ऐसा ही बताया राज, और साथ में कुछ और भी. तुम को तो शायद मालूम ही है कि तुम्हारी मम्मी आज भी कितनी कामुक और सेक्सी हैं, और अगर नही मालूम तो सुन लो कि तुम्हारी मम्मी को भी अपने शरीर की आग को ठंडा करने के लिए वो सब चाहिए, जो कि मुझे चाहिए. 

तुम्हारी मम्मी की भी ज़रूरतें हैं, ख्वाहिश हैं, मैं इस बात को बेहतर समझ सकती हूँ, हम दोनो की एज में ज़्यादा डिफरेन्स भी नही है. वो ना जाने कितने दिनों से अपने आप पर काबू रखे हुए हैं, लेकिन अगर उनके सब्र का बाँध टूट गया, और उसने किसी और के साथ संबंध बना लिए, फिर सब कुछ हाथ से निकल जाएगा. तुम समझ रहे हो मैं क्या कह रही हूँ?”
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03-31-2019, 03:15 PM,
#99
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
मैं समझ रहा था. लेकिन जो कुछ मैने सुना, मुझे अपने कानों पर विश्वास नही हो रहा था. मैं सपने में भी नही सोच सकता था, कि मेरी मम्मी किसी और के साथ संबंध बनाएगी. मेरी मम्मी उस तरह की नही थी, और ना ही उनका स्वाभाव और कॅरक्टर उस तरह का था. मैने ये सब बातें जब मुन्नी बुआ को बोली, तो थोड़ी देर बुआ सुनती रही, फिर बोली, “राज, तुम्हारी मम्मी की जिस्मानी जारूरतें जो कि पूरी नही हो रही हैं, किसी भी और नॉर्मल औरत की ही तरह हैं.” 

“अब हम बेकार में टाइम वासे कर रहे हैं, तुम्हारी मम्मी ना जाने कब शॉपिंग से लौट कर आ जायें. अब बिना टाइम वेस्ट किए, तुम यहाँ आओ, मैं तुम्हारे लंड को चूस लेती हूँ.” बुआ तो जैसे वियाग्रा की तरह थी, अभी थोड़ी देर पहले तो मैं मूठ मार के आया था, लेकिन जैसे ही उन्होने मुझे अपने मम्मे दिखाए, मेरा लंड फिर तन के खड़ा हो गया, मानो मैने शिलाजीत खा रखी हो.

बुआ बेड के किनारे पर बैठे हुए, मेरे लंड पर अपनी जीभ फिरा कर उसे गीला करने लगी, और फिर अपनी जीभ लंड के सुपाडे पर फिराने लगी, मैने देखा बुआ ने वो डाइमंड के एअर रिंग्स पहन रखे थे. “बुआ, हम क्यों ना एक तरकीब निकालें, जिस से ग़लती होने की संभावना बिल्कुल ना रहे?” मैने पूछा.

“कैसी तरकीब? तुम कहना क्या चाहते हो?” मेरे लंड को अपने मूँह में घुसाए हुए ही बुआ ने पूछा.

“आपके ये एअर रिंग्स. मैं आप के इन एअर रिंग्स को देख के आप को पहचान लूँगा, कि ये आप ही हो.” 

बुआ लंड को चूस्ते हुए, हंस को बोली, ये तो बहुत इंट्रेस्टिंग है.

"ठीक है, मैं हमेशा इन एअर रिंग्स को पहने रहूंगी, जिस से ये ख़तरा तो नही रहेगा, कि ग़लती से तुम पीछे से जाकर अपनी मम्मी के मम्मों को ही ना दबाने लगो.”

"बुआ, विश्वास करो, ऐसा फिर कभी नही होगा,"मैने कॉन्फिडेंट्ली कहा. "मुझसे ऐसी ग़लती फिर कभी नही होगी."

“ऐसी ग़लती अब करना भी मत, अब बहुत बातें हो गयी. तुम क्या चाहते हो मैं क्या इसको चूसति ही रहूं?” बुआ ने कामुक अंदाज में कहा. मैने अपने मूँह पर ताला लगा लिया, और अपने हाथ नीचे ले जाकर, बुआ के मम्मों को दबाने और मसल्ने लगा. आअहह... मम्मों को दबाने का मज़ा ही कुछ और है, मैने मन ही मन सोचा. “बक्चोदि से ये लाख गुना बेहतर है.....!”

अगले कुछ दिनों तक मैने और बुआ ने, जो भी मौका मिला उसका भरपूर फ़ायदा उठाया. हालाँकि मैं बुआ से ज़्यादा एक्सपीरियेन्स्ड था, लेकिन फिर भी मैने बुआ से बहुत कुछ सीखा. तान्या से अब फोन पर बातें होने लगी थी, वो भी फिर से मेरे साथ फ्लर्ट करने लगी थी. मैं हमेशा बुआ से के साथ ज़्यादा से ज़्यादा टाइम बिताने का प्रयास करता. 

उस दिन मैं जब घर लौटा तो शाम के 7 बज रहे थे. जैसे ही मैं घर के अंदर घुसा, मैने देखा, कि पापा की कार वहाँ नही थी, मैं जल्दी से मेन डोर से अंदर दाखिल हुआ, मैं सोच रहा था, शायद पापा किसी डिन्नर पार्टी में गये हैं. भूख तो मुझे भी लग रही थी, मैं जल्दी से किचन में घुसा, घुसते हुए मैं किसी से बस टकराते टकराते बचा, मैने सोचा शायद मम्मी से टकराया हूँ, तभी मेरी नज़र उन डाइमंड एअर रिंग्स पर पड़ी. “मुन्नी बुआ!” “आपको पता है मम्मी पापा कहाँ गये हैं?” 

मैने पूछा. बुआ कुटिल मुस्कान के साथ बोली, “तुम्हारे पापा मुंबई किसी बिज़्नेस ट्रिप पर गये हैं. तुम्हारी मम्मी उनको एरपोर्ट तक छोड़ने गयी हैं. बस थोड़ी देर पहले आ जाते तो तुम्हारी मुलाकर हो जाती.” 

"मम्मी कब तक लौट कर आएँगी?" मैने शरारात भरे लहजे में पूछा.

"उनको तो अभी 2-3 घंटे लगेंगे,” मुन्नी बुआ ने जब ये बोला यो उनकी आँखों में चमक आ गयी. बुआ ने मेरी तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा “चलो आज तुम्हारे मम्मी पापा के बेड पर करते हैं, जिस से कुछ अलग स्पेशल लगेगा, फिर जानें हम कब मिलें?.”

मैने पूछा, “क्यों बुआ, इतनी जल्दी, क्या हुआ?”

बुआ ने थोड़ा उदास होते हुए बताया, “राजीव क्रिस्मस की छुट्टियों पर घर आ रहा है.”

"शिट." मैं कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से बोल गया, मुझे अपनी फीलिंग्स को इस तरह एक्सप्रेस नही करना चाहिए था. “मैं आप को बहुत मिस करूँगा बुआ,” मैं बुआ का हाथ पकड़ते हुए बोला. फिर हम दोनो मम्मी पापा के बेडरूम में चले गये.

बेडरूम में पहुँच कर मैं बोला, “तो फिर आज की इस शाम को यादगार बना देते हैं.” मुन्नी बुआ थोड़ा मुस्कुराइ, लेकिन मैं देख रहा था, वो थोड़ा परेशान और नर्वस थी.

" राज, चिंता मत करो, थोड़े दिनों में तुम्हारी शादी हो जाएगी, सब ठीक हो जाएगा. और वैसे भी मैं इस बार की तरह कभी इतने ज़्यादा दिनों तक यहाँ रुकने वाली नही हूँ. कुछ साल बाद जब तुम्हारे बच्चे हो जाएँगे तो वो मुझे दादी-दादी बुलाया करेंगे, जैसे तुम मुझे बुआ-बुआ बुलाते थे.

"तो ठीक है फिर... तो आज की ये शाम हम दोनो के लिए बहुत ज़्यादा स्पेशल है !” मैने बुआ का हाथ फिर से अपने हाथों में लेते हुए कहा. फिर बुआ ने अपना गाउन उतारना शुरू कर दिया. मुझे बिल्कुल सर्प्राइज़ नही हुआ, कि बुआ ने गाउन के नीचे कुछ भी नही पहना हुआ था. मैने भी जल्दी जल्दी अपने कपड़े उतारे और बुआ के साथ बेड पर लेट गया.

"मुझे प्यार करो राज...बहुत देर तक, धीरे धीरे. मैं इसको अपने आंदार बहुत दिनों तक समेटे रखूँगी, मुझे इसकी बहुत ज़रूरत पड़ने वाली है.” मैं समझ रहा था बुआ क्या कहना चाह रही हैं; उनको किसी मर्द के साथ सेक्स करने का सुख ना जाने अब कब मिलने वाला था, मैं ये बात जानता था.

"ठीक है, तो फिर मैं आज आपको वो सब दिखाता हूँ जो कुछ पिछले कुछ दिनों में, सच में मैने बस आप से ही सीखा है, “ मैं बोला. फिर कामुक, हवस भरे अंदाज में बोला, “पहले मैं थोड़ी आपकी छूट चाट लेता हूँ.” 

"ओह राज...बहुत मज़ा आएगा," मुन्नी बुआ बोली. "हां, प्लीज़...आ जाओ तो फिर!" मैं बुआ की दोनो टाँगों के बीच घुस गया, और बुआ ने किस तरह उनकी चूत को मज़ा देना सिखाया था, उसको याद करने लगा. मुन्नी बुआ कराह रही थी, आहें भर रही थी, और उनका पेट उपर नीचे हो रहा था, वो अपनी गान्ड उपर की तरफ उठा रही थी. बुआ बहुत ज़्यादा गरम हो गयी थी, जल्दी ही बुआ मेरे मस्त चूसने से अच्छी वाली झाड़ के दो बार पानी छोड़ गयी. फिर बुआ मेरे लंड को चूस ने लगी, मैं सातवें आसमान पर पहुँच गया, बहुत मज़ा आ रहा था, मेरे लंड को बुआ बहुत अच्छी तरह चूस रही थी. फिर मैने बुआ के उपर आते हुए, अपने फन्फनाते लंड को बुआ की गीली चूत में घुसा दिया, हम दोनो के शरीर इस तरह रिक्ट कर रहे थे, मानो हम कितने सालों से एक दूसरे के साथ चुदाई कर रहे हो. हम दोनो करीब 2 घंटे तक मम्मी पापा के बेड पर चुदाई करते रहे. तभी गेट खुलने और कार की आवाज़ सुनाई दी, हम दोनो सतर्क हो गये, और समझ गये कि हमारा तिलिस्मी साथ अब शायद ख़तम हो चुका है. हम दोनो ने फटाफट अपने अपने कपड़े संभाले. 
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03-31-2019, 03:15 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai भाभी का बदला
“तुम जल्दी से अपने रूम में जाओ, और वहाँ पर जाकर अपने कपड़े पहन लेना, थोड़ी देर मैं तुम्हारी मम्मी को बातों में उलझाती हूँ, इस से तुम को थोड़ा टाइम मिल जाएगा, और फिर ऐसे बहाना मारते हुए नीचे आना, जैसे अभी सो कर उठे हो” बुआ ने अपना गाउन पहनते हुए कहा. मैने वैसा ही किया, और थोड़ी देर बाद, मैं नीचे उतर के आया, मम्मी और बुआ किचन में खड़े होकर चाइ पीते हुए बातें कर रही थी. 

"बुआ कल सुबह जा रही हैं," मम्मी बोली.

"हां, बुआ मुझे बता रही थी," मैने उबासी लेते हुए कहा. "बुआ आप कितने बजे जाओगी, मैं टॅक्सी वाले को फोन कर देता हूँ?"मैने पूछा. मुझे मालूम था कि कल मेरी कॉलेज में एक अर्ली क्लास है, जहाँ तक होगा, बुआ मेरे कॉलेज जाने के बाद ही जाएगी.

"जल्दी ही निकलुन्गि, मैने टॅक्सी वाले को फोन कर दिया, उसी टॅक्सी वाले को जो छोड़ने आया था, सुबह 10 बजे वो आ जाएगा. तुम कॉलेज कितने बजे जाओगे? बुआ ने पूछा. मैने बताया मैं तो कल सुबह 11 बजे जाउन्गा, फिर तो आप मेरे कॉलेज जाने से पहले, आप को गुड बाइ तो कर ही दूँगा. मैने आगे बढ़ कर एक मासूम सी पप्पी बुआ के गालों पर दे दी.

"आइ'ल्ल मिस यू," मैने अपने दिल से निकलती हुई आवाज़ में बोला.

"आइ'ल्ल मिस यू टू," बुआ बोली, और ये कहते हुए उनकी आँखों से आँसू की बूँद उनकी आँखों के किनारों पर आ गयी. "लेकिन चिंता मत करो, मैं तुम लोगों से मिलने फिर से जल्दी हो आउन्गि, रियली बहुत जल्दी" बुआ वादा करते हुए बोली.

मम्मी और बुआ के गालों पर एक एक पप्पी लेकर मैने दोनो को गुडनाइट विश किया, और उपर अपने रूम में जाकर सो गया.

सुबह उठने और फ्रेश होने के बाद मैने बुआ के साथ करीब आधा घंटा बिताया. हम दोनो ने एक आख़िरी सुबह की चाइ साथ साथ पी, फिर मैं अपने कॉलेज चला गया. जाने से पहले, जब मम्मी किचन में थी, मैं बुआ से धीरे से बोला "थॅंक यू फॉर एवेरितिंग". तभी बाहर टॅक्सी के आने की आवाज़ सुनाई दी. मैने बुआ के दोनो सूटकेस टॅक्सी में ले जाकर रख दिए.

जाने से पहले मैने बुआ के गाल की हर बार से थोड़ी लंबी पप्पी ली, फिर मम्मी और बुआ ने एक दूसरे को हग किया, और बुआ टॅक्सी में जाकर बैठ गयी. मम्मी मेरे पास आकर खड़ी हो गयी, और मेरी कमर में हाथ डाल कर, टॅक्सी को दूर जाते हुए देखने लगी. जैसे ही मैने मम्मी की तरफ देखा, मैने गौर किया, मम्मी बे मुन्नी बुआ की डाइमंड एअर रिंग्स पहन रखी थी.

"आपने ये एअर रिंग्स क्यों पहन रखी हैं?" मैने उत्सुकता में पूछा.

"ओह. मुन्नी बुआ चाहती थी कि मैं ही इनको पहनूं, वो जाने से पहले मुझे कुछ स्पेशल देना चाहती थी.."

"वाउ, मुझे तो लगता है, उन्होने आपको अपनी बहुत स्पेशल चीज़ दी है, जिसे वो बहुत प्यार करती थी."

"इसको तुम नही समझोगे राज ,शायद कभी नही, या पता नही कब......."

बुआ के जाने के बाद, बस मैं और मम्मी घर में अकेले रह गये, पापा को मुंबई ट्रिप को 10 दिन हो चुके थे, लेकिन सब कुछ फाइनल करने में, अभी कुछ दिन और लगने वाले थे. मम्मी रोज सुबह 7 बजे मुझे मेरे रूम में चाइ का कप लेकर आती, और मुझे उठाती, और फिर वहीं बेड के किनारे पर बैठ जाती. और मुझे अपने हाथों से झकज़ोर्ते हुए कहती “इतना बड़ा हो गया है, अभी भी इसको माँ उठाने आए, उठ जा अब, 7 बज गये हैं.” रोजाना, वो ही टाइम, सेम रुटीन हो गया था.

"हे मोम." मैं कंबल के नीचे, पलटी मार लेटा जब मम्मी मेरे को कंधे से पकड़ के हिलाती, मेरे हिप्स पर चपत लगाती और मेरी गर्दन पर पप्पी लेती. “बस मम्मी थोड़ी देर और... “ रोजाना का ये ही नाटक था.

"ठीक है," मम्मी बोलती. "तुम आज कॉलेज लेट ही जाना. अगर टाइम पर कॉलेज नही जाना तो फिर अड्मिशन ही क्यों लिया था?"

"क्या ये रोजाना सुबह सुबह."मैं उबासी लेते हुए, अपने बॉक्सर्स को पहने बिस्तर से उठता, चाइ पीता, और सीधा बाथरूम में घुस जाता. रोजाना का मानो ये एक नियम बन चुका था.

कुछ हफ्ते पहले एक रात, मम्मी को किसी ज़रूरी फॅमिली फंक्षन में जाना था. जैसे ही मम्मी शाम को गयी , मैने तान्या को फोन मिलाया, और उसे मेरे घर आने के लिए मिन्नतें की, किसी तरह वो तय्यार हुई. मैं बाजार से अपने लिए स्ट्रॉंग बियर और तान्या के लिए ब्रीज़ेर खरीद लाया था. जब वो शाम को आ गयी तो पहले हम दोनो ने बातें करते हुए बियर और ब्रीज़ेर पी, और फिर मेरे रूम में सेक्स किया. जब वो चली गयी, तो मैं नशे में अपने बेड पर सो गया, मुझे मालूम था कि मम्मी के पास डोर की ड्यूप्लिकेट कीस हैं.

जब मुझे होश आया, मुझे सुनाई दिया, “राज, अब उठ भी जाओ!!”

"बहनचोद...." अभी भी थोड़ा हॅंगओवर बाकी था.

"उठ जाओ, राज, उठो." उन्होने अपना एक हाथ से मेरे कंधे हिलाए और दूसरे हाथ से मेरे हिप्स, और फिर मुझे ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी.

"ओके, उठ गया मम्मी, उठ गया!" जैसे ही मैं कंबल हटा के उठ के खड़ा हुआ, मम्मी थोड़ा पीछे हट गयी. मैने मम्मी को ज़ोर से साँस लेते हुए सुना, मैने उनकी तरफ देखा. वो मेरे लंड की तरफ देख रही थी. मैने नीचे देखा. शिट ! तान्या के जाने के बाद, मैं नंगा ही सो गया था. और अब मैं, सुबह सुबह के हार्ड ऑन के साथ उनके सामने नंगा खड़ा था; पूरा 7 इंच का लंड उनकी तरफ पॉइंट कर रहा था. मैं एक दम मूर्ति बन गया, मम्मी की नज़र मेरे लंड पर से हट ही नही रही थी.

"शिट, मम्मी, आइ'म सॉरी!" मैं जल्दी से बेड पर चढ़ा और अपने उपर कंबल ओढ़ लिया.

"यह क्या?" मम्मी एक दम हिल ही नही रही थी. वो मानो किसी और ही दुनिया में पहुँच चुकी थी.

"मुझे याद ही नही रहा कि मैने कपड़े नही पहन रखे हैं."

"अच्छा..." वो मानो फिर से याकायक होश में आई, और मेरे पास बेड पर बैठ गयी. उन्होने अपना हाथ मेरे पेट पर रख दिया- मेरे खड़े हुए लंड के बहुत पास. “राज, मैने जो कुछ तुम्हारी देखने वाली चीज़ थी, वो सब देख ली है..., और वो भी थोड़ी देर तक नही, बहुत देर तक. तुम वाकई में बहुत बड़े हो गये हो. इसमे शरमाने की कोई बात नही है.

"ईईहह, मम्मी, मुझे इस बात की शरम आ रही है कि मैं आपके सामने खड़ा था, जब मेरा वो खड़ा हुआ था.

"बेटा, ऐसा होना तुम्हारी उमर में नॉर्मल बात है. मैं तुम्हारी मम्मी हूँ, मैं तुमको बहुत प्यार करती हूँ, और तुम को मुझसे शरमाने की कोई ज़रूरत नही है. उन्होने मुझे के छोटी सी झप्पी दी, और फिर खड़ी हो गयी. “चलो, बेटा अब नहा लो.” वो बेड से थोड़ा दूर खड़ी हो गयी, और इंतेजार करने लगी.
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