Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
06-28-2019, 01:58 PM,
#21
RE: Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
अपने पति के तेवर देख कर वो तुरंत चुप हो जाती है और नाश्ता बनाने में लग जाती है और धीरे से नेहा से कहती है अब जा न यहां से और जल्दी से तैयार हो कर आ, क्या दोपहर का खाना भी बनवायेगी क्या? नेहा ने मुस्कुराते हुए अपनी सास को जल्दी जल्दी सब सामान कहां पडे़ है बताया और किचन से बाहर निकल गई।

वो तेजी से अपने रुम की तरफ़ जा रही थी और नाश्ते की टेबल पर बैठा सनी उसकी बड़ी बड़ी गांड़ को हुलते देख कर आंहे भर रहा था।

अभी नेहा को उपर गये मुश्किल से पांच मिनट ही हुए थे कि उसकी मां फ़िर बड़्बड़ाने लगी और बाहर आ कर चिल्लाकर पूछने लगी कि बेसन का डब्बा कहां रखा है नेहा? लेकिन वो शायद अपने कमरे में जा चुकी थी इसलिये शायद वो सुन नहीं पाई

सो उसकी मां को कई जवाब नही मिला। उसने दो तीन बाहर जोर से चिल्लाया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला तो उसने झुंझलाते हुए सनी को कहा जा तो बेटा उपर जा कर तेरी भाभी से पूछ कर बता बेसन का डिब्बा कहां रखा है उसने ? "दिया" तो थी एक नंबर की आलसी सीढी चढना तो जैसे उसके लिये सजा से कम नहीं था सो ये काम तो सनी को ही करना था।

अब सनी उपर जाता है और भाभी के कमरे बाहर से उन्हें पुकारता है, भाभी। लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता वो फ़िर उसी तरह फ़िर से दो तीन बार चिल्लाता है लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता तो उसे काफ़ी आश्चर्य होता है और वो दरवाजे को धक्का दे कर अंदर जाता है।

लेकिन वहां नेहा तो थी ही नहीं वो फ़िर कहता है ,भाभी ! लेकिन वो वहां होती तो जवाब देती न। अब वो भाभी के कमरे के पिछले दरवाजे के परदे को हटा कर बाल्कनी में जाता है लेकिन भाभी वहां भी नहीं थी। वो सोच ही रहा था कि आखिर ये गई कहां?

तभी नेहा कमरे में आती है और जल्दी से कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर देती है।
वो बाहर निकलना चाहता ही था कि उसे नेहा की चूड़ीयों की आवाज सुनाई देने लगती है खन खन खन खन , अनुभवी सनी तुरंत समझ जाता है कि उसकी भाभी अब अपने कपड़े उतार रही है और अब बाथरुम में जा कर नहायेगी। छत में कूलर के छेद से वो कई बार अपनी भाभी को कपड़े
बदलते हुए देख चुका था और इस दौरान होने वाली उसकी चूड़ियों की अवाज को अच्छी तरह से पहचानता था। सनी के रोम रोम में नेहा समा चुकी थी।

नेहा का नंगा बदन उसकी आंखों के आगे घूमने लगा और नंगी नेहा की कल्पना कर के ही उसका लंड़ बुरी तरह से खड़ा हो गया। वो चाहता तो तुरंत बाहर कर भाभी को रोक सकता था और कमरे से बाहर जा सकता था लेकिन एक ही कमरें दोनों के होने और उसके सामने ही नेहा के कपड़े बदले जाने से सनी की अपनी भाभी के रसीले बदन को चोदने की तमन्ना के कारण वो ऐसा नहीं कर सका .

और आज तो हद ही हो गई देवर,भाभी दोनों एक ही कमरे में और भाभी एक्दम नंगी . सनी के लिये तो जैसे तमाम परिस्थिति उसके हाथ में थी जिस मौके को बनाने के लिये वो योजना बना रहा था वो तो उसे इतनी जल्दी मिल गया इसकी तो उसने कल्पना भी नहीं की थी। इसीलिये उसने रुम में पड़े रहने में ही अपना फ़ायदा नजर आया।
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06-28-2019, 01:58 PM,
#22
RE: Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
सनी भूल गया कि वो उपर क्यों आया था अब वो भाभी के पूरी तरह से नंगी हो कर बाथरुम में जाने का इंतजार करने लगा। दर असल नेहा उपर आ कर सीधे छत में चली जाती है कपड़े उठाने के लिये कल की व्यस्तता की वजह से वो कपड़े उटाना भूल गई थी वो जल्दी से कपड़े उठाकर अपने कमरे में आती है और उसके कपड़े उठाने के दौरान ही सनी उसे पूछने के लिये उसके कमरे में आता है और उसे नहीं पा कर वो उसे देखने बाल्कनी में चला जाता है।

ये सब इतनी तेजी से हुआ कि न तो नेहा को सनी के आने का पता चला और न ही सनी को नेहा के रुम से बाहर निकलने का मौका मिला।

तभी सनी को बाथरुम के नल के चालू होने की आवाज आई वो समझ गया कि मेंरी गुलबदन नेहा बाथरुम में चली गई है। उसने हौले से परदा हटाया और वो रुम में आ गया . अंदर दृष्य सनी को काफ़ी उत्तेजित करने वाला था .

कमरे में एक तरफ़ नेहा की उतारी हुई साडी बिखरी पडी थी तो दूसरे टेबल पर नेहा की अंड़रवियर , ब्रा , लहंगा और साड़ी पड़े थे। इसका मतलब साफ़ था कि नेहा नहाने के बाद कपड़े बाथरुम में पहनने के बदले अपने कमरे में ही पहनती थी , याने के बाद वो नंगी ही कमरे में आती थी।

उसे किसी बात का ड़र भी नही था क्यों कि उसका अपना कमरा था और किसी के भी वहां आने का कोई खतरा नहीं था।

सनी समझ गया कि नेहा नहाने के बाद नंगी बाहर आयेगी, और उसने सोच लिया कि उसे अब क्या करना है?

नेहा के स्वभाव और अब तक उसने जो कुछ किया था उसके साथ उस आचरण को देखते वो ज्यादा भयभीत नहीं था लेकिन फ़िर भी दिल में एक धुक्धुकी मची हुई थी जो कि स्वाभाविक था। लेकिन उसने सोच लिया था कि यदि इसे चोदना है तो कभी न कभी तो इसके सामने खुलना ही पड़ेगा और हिम्मत तो झुटाने ही पड़ेगी ही तो आज ही क्यों नहीं? इससे अच्छा मौका कहां मिलेगा? वो चाहता तो भी ऎसा मौका नहीं बना सकता था।

अब सनी को फ़िर से बाथरुम के अंदर चूड़ियों की अवाज सुनाई देने लगी वो समझ गया कि नेहा अब पूरी तरह से नंगी हो रही है। थोड़ी ही देर मे उसे पानी के खड़्खड़ाने की अवाज आने लगी याने उसने नहाना चालू कर दिया था। तभी नेहा ने अंदर शावर चालू कर दिया और फ़ौवारे का मजा लेने लगी .

अब सनी हौले से अपने सर कॊ थोड़ा सा तिरछा करते हुए अंदर झांकने की कोशीश की .

बाथरुम में पानी भरने के कारण उसके टाईल्स एक प्रकार से मिरर का काम कर रहे थे और नेहा की नंगी छाया उसमें साफ़ दिखाई दे रही थी। अब तक सनी काफ़ी सहज हो चुका था और उसका सारा भय समाप्त हो चुका था और वो पूरी तरह से वासना की गिरफ़्त में आ चुका था। उसने देखा नेहा अपने शरीर पर साबुन लगा चुकी है उसका पूरा शरीर उअके झाग से भरा हुआ है, अब वो अपने चेहरे साबुन लगा रही थी और उसकी आंखे बंद थी और वो इस पूरी तरह से बेखबर थी कि सनी उसे घूर रहा है वो शायद इस बात कि कल्पना ही नहीं कर सकती थी कि कभी ऎसा भी हो सकता है।

जैसे ही सनी ने देखा कि वो अपने चेहरे में साबुन लगा रही है और उसकी आंखें बंद है वो तुरंत बाथरुम के दरवाजे के सामने आ गया और अपने सामने ही भाभी के नंगे बदन को घूरने लगा। पूरी तरह से साबुन लगा चुकने के बाद वो अब अपनी पीठ और कुल्हों पर साबुन लगाने लगी। सनी का कलेजा बाहर आने लगा उसे खुद पर नियंत्रण करना संभव नहीं लग रहा था

लेकिन उसने थोड़ा और इंतजार करना ठीक समझा। अब उसने अपने पूरे शरीर पर हाथ घुमाया और हाथों को साबुन वाला कर के उसे अपनी चूत में लगा दिया और अपनी चूत में साबुन लगाने लगी।
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06-28-2019, 01:58 PM,
#23
RE: Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
वो धीरे धीरे अपनी चूत को सहला रही थी और अंदर तक साबुन लगा कर उसे साफ़ कर रही थी। अब तक उसकी आंखें बंद ही थी क्योंकि साबुन उसके चेहरे पर लगा हुआ था और सनी उसी तरह बेखौफ़ नेहा के नंगे बदन को घुरते रहा . उसने देखा अब नेहा कुछ ज्यादा ही जोर से अपनी चूत को मसल रही थी शायद उसे ऐसा करने में मजा आ रहा था।

अब उसने अपनी उंगली को हल्का सा साबुन वाला कर के उसे अपनी चूत के अंदर डाल दिया और उसे अंदर तक साफ़ करने लगी और धीरे धीरे उसे अंदर बाहर करने लगी।

स्त्री की योनी की बनावट ही ऎसी होती है कि उसे अपनी योनी की सफ़ाई पर खास ध्यान देना होता है अन्यथा उसके संक्रमित होने का खतरा बना रहता है और उसे यूरिन इन्फ़ेक्शन का खतरा हो सकता है।लेकिन सनी को ऐसा लगा कि नेहा चूत की सफ़ाई के अलावा भी कुछ और कर रही है। बेचारी बिना पति के आखिर करे भी क्या? लेकिन उसका नितांत गोपनीय रहस्य भी अब सनी के सामने उजागर हो गया।

अंदर तक उंगली ड़ालने के कारण कई बार उसके मुंह से एक हल्की सी आह निकल जाती जिसे उसके एक्दम सामने खड़े सनी को साफ़ सुनाई दे रही थी। कभी कभी उसके मुंह से सी सी की अवाज भी निकल जाती थी। सनी इन बातों क मतलब अच्छी तरह्से समझता था। कुछ देर तक इसी तरह से अपनी चूत की सफ़ाई करने के बाद अब वो शावर चालू करने के लिये उसकी चकरी ढूंढने लगती है . आंखे बंद किये हुए वो दिवाल के पास हाथ को इधर उधर धूमाने लगती है और कुछ ही क्षणों में वो शावर की चकरी को पकड़ कर उसे घुमाने लगती है और शावर चालू हो जाता है और उसका पानी उसके चेहरे में पड़्ने लगता है और वो अपना मुंह से साबुन साफ़ कर लेती है।

मुंह से साबुन निकलते ही नेहा फ़िर से अपनी आंख खोल देती है और जैसे वो अपनी आंख खोलती है सनी तत्काल वहां से हट कर थोड़ा आगे चला जाता है और बाथरुम की दिवार से सट कर बांए तरफ़ चिपक कर खड़ा हो जाता है। अब यदी नेहा बाहर आती तो उसे तुरंत सनी दिखाई नही देता लेकिन कपड़े के पास आते ही उनका सामना होना तय था। अब सनी उसके बाहर आने का इंतजार करने लगा।

लग्भग दो तीन मीनट के इंतजार के बाद बाथरुम के अंदर सारी अवाजें बंद हो गई और बाल्टियों और मग्गे को किनारे रखने की अवाज आई। अब सनी एकदम सतर्क हो गया क्योंकि उसके जीवन का वो स्वर्णिम क्षण आने वाला था जिसके उसे काफ़ी लंबे समय से इंतजार था और अगले कुछ पलों के बाद होने वाली घटनाएं उन दोनों के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाली थी।

सनी को पता था कि या तो वो वो सब कुछ हासिल कर लेगा जो वो पाना चाहता है या फ़िर हमेशा के लज्जित या तिरकृत जीवन जीने के लिये मजबूर हो सकता था। लेकिन सनी ने तय कर लिया था कि वो खतरा मोल लेगा चाहे नतीजा कुछ भी हो।

औरते आम तौर पर रोज सर नहीं धोती केवल हफ़्ते में एकध बार ही धोती हैं क्योंकि बाल लंबे होने के कारण उन्हें बनाने में उन्हें काफ़ी वक्त लगता है, सो जब वे अपना सर नहीं धोती तो नहाते समय अक्सर अपने सर टावेल से बांध लेती हैं ताकि बाल गीले न हो और उन्हें बनाने में उनका वक्त जाया न हो।

नेहा के सर पर टावेल बंधा हुआ था और बाकी तमाम बदन नंगा था। वो बेखौफ़ थी क्योंकि किसी के कमरे में होने का उसे अनुमान ही नही था। और हो भी क्यों?

नग्न नेहा बाथरुम से बाहर निकलती है और सीधे अपने कपड़ों के पास जा कर खड़ी हो जाती है।
जैसे ही वो अपने कपड़ों के पास पहुंचती है उसे अपनी आंख की कोर से बाथरुम की दिवार के पास किसी के खड़े होने का अहसास होता है। वो तुरंत उधर देखती है।

बहां नजर पड़्ते ही उसकी आंखे फ़ट जाती है और वो फ़टी फ़टी निगाहों से टक्टकी लगाकर सनी की तरफ़ देखने लगती है। उसके पूरे बदन में एक ठंड़ी सी सिहरन पैदा होती है। और उसके पांव थरथराने लगते है। उसका चेहरा भय से पीला पड़ जाता है और मुंह खुला का खुला रह जाता है। उसे अपनी आंखों के सामने अंधकार दिखाई देने लगता है, और उसे ऐसा लगता है कि वो अभी गश खा कर गिर जायेगी। जो कुछ वो अपने सामने देख रही थी उस पर उसे सहज विश्वास नहीं हो रहा था।

ठंड़े पानी से नहा कर निकलने के बावजूद उसे पसीना आने लगता है और उसे ऐसा लगता है कि उसके दिल की धडकन अचानक बढ़ गई है .
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06-28-2019, 01:58 PM,
#24
RE: Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
उस एक क्षण में ही नेहा के चेहरे में क्रोध,भय और आश्चर्य के तमाम भाव आ गए और वो जड़वत खड़ी रह जाती है। वो एक पत्थर की मूर्ति की भांती स्थिर हो जाती है उसे ऐसा लगा मानो किसी ने उसके शरीर की सारी ताकत निचोड़ दी हो और उसका शरीर मानों निष्प्राण हो गया हो। क्रोध,भय और आश्चर्य की वजह से वो इतनी बदहवास हो जाती है कि वो ये भी कुछ क्षण के लिये भूल जाती है कि वो अपने देवर के सामने पूर्णत: नग्न खड़ी है।

कुछ क्षणों के बाद जब उसे अपनी स्थिति का भान होता कि वो तो पूरी नंगी खड़ी है और उसका देवर उसे घूर रहा है तो वो अन्यन्त लज्जा का अनुभव करती है और तुरंत हरकत में आती है और कपड़ो की तरफ़ तेजी से भागती है। इधर सनी भी उसके नंगे शरीर को देखते हुए इतना मुग्ध हो जाता है कि उसे भी कुछ होश नहीं रहता और वो एक्टक नेहा के नंगे बदन को घूरते रहता है। लेकिन जैसे ही नेहा अपने कपड़ों की तरफ़ भागती है तो सनी भी जैसे किसी सम्मोहन से जागा हो वैसे होश में आता है और नेहा की तरफ़ दौड़ता है।

वो तेजी से भाभी और उसके कपड़ों के बीच में आ कर खड़ा हो जाता है . उसने ठान लिया था कि या तो तुझे आज मैं सदा सदा के लिये अपनी बना लुंगा और जीवन भर तेरे रसीले बदन से तेरी जवानी का रस चूसूंगा और तुझे अपनी मर्जी के मुताबिक चोदूंगा या जीवन भर के लिये बदनामी के गर्त में चला जाउंगा।

नेहा का मन चित्कार उठता है , वो अपार लज्जा का अनुभव कर रही थी . लेकिन उसे ये भी अहसास हो रहा था कि ये आज आसानी से उसे कपड़े नहीं पहनने देगा।

नेहा को इस तरह देख वो काफ़ी रोमांचित था और उसने ठान लिया था कि बस अब आज तुझे कपड़े तब तक नहीं पहनने दूंगा जब तक तेरी चूत में मेंरा लण्ड़ घुस नहीं जाता या तेरा थप्पड़ मेंरे गालों में नहीं पड़ जाता।

उसने बातचित शुरु करने गरज से कहना शुरु किया "भाभी दर असल मुझे मम्मी ने उपर भेजा था, उसे किचन में बेसन नहीं मिल रहा था उसने नीचे से काफ़ी अवाज लगाई लेकिन आपने कोई जवाब नहीं दिया तो उसने मुझे उपर भेजा पूछने के लिये। आपको मैने काफ़ी अवाज लगाई लेकिन रुम के अन्दर से कोई अवाज नही आई तो मैं अन्दर चला आया लेकिन रुम आपको मैने यहां भी नही पाया तो मैने सोचा कि शायद आप बाल्कनी में होंगी तो मै वहां गया लेकिन आप तो वहां भी नही थी न सो जैसे ही मैं बाहर निकलने वाला था कि तुम रुम के अन्दर आ गई और आते ही अपने कमरे का दरवाजा बंद कर कपड़े उतारने लगी।

मैने सोचा कि जब आप बाथरुम में चली जायेंगी तो मै चुपचाप बाहर चला जाउंगा लेकिन आप तो दरवाजा खुला कर नहाने लगी सो मै थोड़ी देर और रुक गया और जैसे ही मुझे मौका मिला मै बल्कनी से बाहर निकल कर दरवाजा खोलने ही वाला था कि पहले "दिया" आ गई और दरवाजा खटखटाने लगी और फ़िर मम्मी आ गई। अब तुम ही बताओ नेहा यदि उनके सामने मैं कमरे के बाहर निकलता तो वे क्या सोचती तुम्हारे और मेंरे बारे में।

उसने नेहा ड़राने के उद्देश्य से ही जानबूझ कर मां और "दिया" वाली झूठी कहानी सुना दी। दरअसल वो अप्रत्यक्ष रुप से ये समझाने की कोशीश कर रहा था कि इस बात का पता यदि घर में किसी को भी चल जाय तो सनी के साथ उसकी भी इज्जत चली जायेगी। और शायद नेहा पर इस बात का असर भी पड़ा था।

नेहा ने उसकी बातों को लग्भग अन्सुना सा करते हुए अपने सर पर बंधा टावेल खोल लिया और झट से अपने बदन पर लपेट लिया . पहाड़ की चोटीयों की तरह तने हुए उसके विशाल स्तन और उसकी बड़ी बड़ी गांड़ो को छुपाने में वो नन्हा टावेल समर्थ नहीं था बल्कि उसकी मादकता को और भी बढा रहा था लेकिन फ़िर भी नंगी होने से तो ये अच्छा ही था।
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06-28-2019, 01:59 PM,
#25
RE: Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
उस एक क्षण में ही नेहा के चेहरे में क्रोध,भय और आश्चर्य के तमाम भाव आ गए और वो जड़वत खड़ी रह जाती है। वो एक पत्थर की मूर्ति की भांती स्थिर हो जाती है उसे ऐसा लगा मानो किसी ने उसके शरीर की सारी ताकत निचोड़ दी हो और उसका शरीर मानों निष्प्राण हो गया हो। क्रोध,भय और आश्चर्य की वजह से वो इतनी बदहवास हो जाती है कि वो ये भी कुछ क्षण के लिये भूल जाती है कि वो अपने देवर के सामने पूर्णत: नग्न खड़ी है।

कुछ क्षणों के बाद जब उसे अपनी स्थिति का भान होता कि वो तो पूरी नंगी खड़ी है और उसका देवर उसे घूर रहा है तो वो अत्यंत लज्जा का अनुभव करती है और तुरंत हरकत में आती है और कपड़ो की तरफ़ तेजी से भागती है। इधर सनी भी उसके नंगे शरीर को देखते हुए इतना मुग्ध हो जाता है कि उसे भी कुछ होश नहीं रहता और वो एक्टक नेहा के नंगे बदन को घूरते रहता है। लेकिन जैसे ही नेहा अपने कपड़ों की तरफ़ भागती है तो सनी भी जैसे किसी सम्मोहन से जागा हो वैसे होश में आता है और नेहा की तरफ़ दौड़ता है।

वो तेजी से भाभी और उसके कपड़ों के बीच में आ कर खड़ा हो जाता है . उसने ठान लिया था कि या तो तुझे आज मैं सदा सदा के लिये अपनी बना लुंगा और जीवन भर तेरे रसीले बदन से तेरी जवानी का रस चूसूंगा और तुझे अपनी मर्जी के मुताबिक चोदूंगा या जीवन भर के लिये बदनामी के गर्त में चला जाउंगा।

नेहा का मन चित्कार उठता है , वो अपार लज्जा का अनुभव कर रही थी . लेकिन उसे ये भी अहसास हो रहा था कि ये आज आसानी से उसे कपड़े नहीं पहनने देगा।

नेहा को इस तरह देख वो काफ़ी रोमांचित था और उसने ठान लिया था कि बस अब आज तुझे कपड़े तब तक नहीं पहनने दूंगा जब तक तेरी चूत में मेंरा लण्ड़ घुस नहीं जाता या तेरा थप्पड़ मेंरे गालों में नहीं पड़ जाता। उसने बातचित शुरु करने गरज से कहना शुरु किया "भाभी दर असल मुझे मम्मी ने उपर भेजा था, उसे किचन में बेसन नहीं मिल रहा था उसने नीचे से काफ़ी अवाज लगाई लेकिन आपने कोई जवाब नहीं दिया तो उसने मुझे उपर भेजा पूछने के लिये। आपको मैने काफ़ी अवाज लगाई लेकिन रुम के अन्दर से कोई अवाज नही आई तो मैं अन्दर चला आया लेकिन रुम आपको मैने यहां भी नही पाया तो मैने सोचा कि शायद आप बाल्कनी में होंगी तो मै वहां गया लेकिन आप तो वहां भी नही थी न सो जैसे ही मैं बाहर निकलने वाला था कि तुम रुम के अन्दर आ गई और आते ही अपने कमरे का दरवाजा बंद कर कपड़े उतारने लगी। मैने सोचा कि जब आप बाथरुम में चली जायेंगी तो मै चुपचाप बाहर चला जाउंगा लेकिन आप तो दरवाजा खुला कर नहाने लगी सो मै थोड़ी देर और रुक गया और जैसे ही मुझे मौका मिला मै बल्कनी से बाहर निकल कर दरवाजा खोलने ही वाला था कि पहले "दिया" आ गई और दरवाजा खटखटाने लगी और फ़िर मम्मी आ गई। अब तुम ही बताओ नेहा यदि उनके सामने मैं कमरे के बाहर निकलता तो वे क्या सोचती तुम्हारे और मेंरे बारे में।
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06-28-2019, 01:59 PM,
#26
RE: Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
उसने नेहा ड़राने के उद्देश्य से ही जानबूझ कर मां और "दिया" वाली झूठी कहानी सुना दी। दरअसल वो अप्रत्यक्ष रुप से ये समझाने की कोशीश कर रहा था कि इस बात का पता यदि घर में किसी को भी चल जाय तो सनी के साथ उसकी भी इज्जत चली जायेगी। और शायद नेहा पर इस बात का असर भी पड़ा था।

नेहा ने उसकी बातों को लग्भग अन्सुना सा करते हुए अपने सर पर बंधा टावेल खोल लिया और झट से अपने बदन पर लपेट लिया . पहाड़ की चोटीयों की तरह तने हुए उसके विशाल स्तन और उसकी बड़ी बड़ी गांड़ो को छुपाने में वो नन्हा टावेल समर्थ नहीं था बल्कि उसकी मादकता को और भी बढा रहा था लेकिन फ़िर भी नंगी होने से तो ये अच्छा ही था।

अब नेहा ने पिछले कई महीनों से चले आ रहे सनी के इस खेल के खिलाफ़ बोलने का साहस जुटाया और तनिक धीमी अवाज में उससे कहा "ये क्या तरिका है आपका? पिछले कई महिनों से मैं आपको नजर अंदाज करती आ रही हूं शायद इसी लिये आपको मेंरे बारे में काफ़ी गलत फ़हमी हैं। मैं आपके बड़े भाई की ब्याहता बीवी हूं कोई इस घर की रखैल नहीं कि जिसके साथ जिसे जो मर्जी आये वो करता रहे। अगर तुम्हारे अंदर जरा सी तहजीब होती, शर्म होती तो तुम मेंरे कमरे में आते ही बाहर आ सकते थे, क्या इतना इंतजार करना जरुरी था? जाहिर है तुम्हारी नीयत में खोट है। अगर मैं ये सब बातें तुम्हारे भाई को बता दूं तो क्या इज्जत रहेगी तुम्हारी उनके सामने और इस घर में?

जवान लड़्कियों को नंगा देखने का बहुत शौख है न तुम्हें, क्या इस घर में मैं ही अकेली जवान लड़की हूं ? तुम्हारी बहन भी तो खासी जवान है कभी उसके बाथरुम में भी जाकर देखा करो उसकी जवानी को। उसने आगे कहा " अब चुपचाप जिस तरह दबे पांव यहां आये थे उसी तरह दबे पांव निकल जाओ और दोबारा ऐसी गलती मत करना वर्ना तुम काफ़ी तकलिफ़ में पड जाओगे।

सनी इस प्रकार की तमाम बातों के लिये पहले से तैयार था, ओर नेहा की जवानी से खेलने के लिये तो वो अपने घर में भी बदनाम होने के लिये तैयार बैठा था। सो उसे नेहा के इस तरह बड़्बड़ाने से कोई फ़र्क पड़ता नहीं दिखा। बल्कि सनी ने एक बात साफ़ नोटिस किया की वो नारजगी जरुर दिखा रही है और भाषा भी भले ही तल्ख हो लेकिन उसकी आवाज काफ़ी धीमी है।

मतलब साफ़ था उसे भी अपनी बदनामी का ड़र था।उसने इस बात का पूरा का प्रयास किया था कि उसकी अवाज इस रुम से बाहर ना जाने पाये।

अब सनी ने बोलना चालू किया वो बिल्कुल भी भयभीत नहीं था बल्कि वो तनिक जोर से ही बोलने लगा . दर असल वो ये देखना चाहता था कि उसकी तेज अवाज जब बाहर तक जाती है तो उसका नेहा पर क्या असर होता है? क्या वो वाकई आज बगावत के मूड़ में है या खाली गीदड़ भभकी दे रही है।

उसने बोलना चालू किया "नेहा ये सच है कि तुम इस घर की ब्याहता हो लेकिन जिसकी तुम पत्नि हो उसे तुम्हारी कितनी चिंता है कभी उसने तुम्हें अपने पास बुलाया कभी वो तुमसे मिलनेके लिये आया? अरे नौकरी सभी करते हैं लेकिन कोई अपनी इतनी सुंदर बीबी को भी भूल सकता है क्या? नेहा उसे तुम्हारी जरा भी परवाह नहीं है उसे तुमसे ज्यादा अपनी नौकरी और तरक्की की पड़ी है और वो इसके लिये किसी भी हद तक जा सकता है। वो तुमसे जीवन भर ऐसे ही व्यहार करता रहेगा जीवनभर . उसने जानबूझ कर सनी के खिलाफ़ उसके कान भरना चालू रखा।

उसने आगे बोलना जारी रखा "और जहां तक तमीज, तहजीब और शर्म की बात है न तो नेहा मैं तुमसे ये बात साफ़ कह देना चाहता हूं कि प्यार और जंग मे सब जायज है। नेहा मैं तो अपना दिल कब से तुमसे हार चुका हूं , मैं तो बस मौके का इंतजार कर रहा था और देखो आज मुझे मौका मिल गया। और दूसरी जवान लड़्कियो की बात जो तुमने की न तो मैं केवल इतना चाहता हूं कि मुझे केवल तुम में रुचि है और किसी में नहीं मेंरा दिल तुम पर आया है किसी और पर नहीं। मैं केवल तुमसे प्यार करता हूं किसी और से नहीं . जब से तुम इस घर में आई हो तभी से मैं तुम्हें अपनी बाहों मे लेकर तुम्हारे होठों का रस पीना चाहता हूं।सनी जानबूझ ऐसी बात कर रहा था ताकि उसकी प्रतिक्रिया जान सके।

उसने आगे बोलना जारी रखा " केवल तुम्हारे प्यार की खातिर ही मैंने नीता से रिश्ते की बात स्वीकार कर ली है वरना मुझे उसमें कोई रुचि नहीं हैं। नेहा जिन रिश्ते में प्यार नहीं ऐसे बनावटी रिश्ते
का क्या लाभ? शायद ये बात तुमसे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता। वो जान बूझ कर उसके मन में "संजय" के प्रति नफ़रत के बीज बो रहा था।
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06-28-2019, 01:59 PM,
#27
RE: Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
नेहा का चेहरा नीचे की तरफ़ झुका हुआ था वो पूरी तरह से शर्मसार थी और बेबसी के मारे उसकी आंखॊं से आंसू निकल आये थे लेकिन सनी उसकी बेबसी और उसके मौन संघर्ष को अपनी विजय मान रहा था और बेहद खुश हो रहा था और अत्यन्त कामुक भी इतने लंबे इंतजार के बाद आज उसकी गदराई हसीना उसके सामने बिल्कुल नंगी और बेबस जो खड़ी थी।

अब वो नेहा के बेहद करीब चले जाता है और उसके नंगे बदन से लगभग चिपक जाता है , नेहा को अपनी लजा बचाने का एक ही उपाय सूझता है कि वो बैठ जाय और वो अपने पैरों को ढीला छोड़ देती है जिसके सनी के लिये उसे खड़ा रखना संभव नहीं रह पाता अब नेहा जमीन पर बैठ जाती है तो सनी भी उसके सामने उकड़ू बैठ जाता है।

वो उसके हाथों को छोड़ देता है नेहा दोनों हथों के अजाद होते ही अपने हाथों को अपने सीने से लगा देती है और अपने स्तनों को छुपाने का असफ़ल प्रयास करती है वो अपने दोनों पैरों को सिकोड़ लेती है और अपना सर घुटनों में दबा कर अपना मुंह छुपाने का प्रयास करती है। नेहा को इस मुद्रा में देख कर सनी को करीब करीब ये अंदाज तो हो ही जाता है कि अब इसका समर्पण लग्भग हो चुका है।

अब वो नेहा के दांए तरफ़ बैठ जाता है और उसके दांए पैर को पकड़ कर सीधा कर देता है और उसके घुटनों पर अपना घुटना रख देता है और धीरे धीरे उसकी चिकनी जांघ को सहलाने लगता है। नेहा उसी तरह अपना चेहरा घुटनों छुपाए हुए सनी से कहती है "आप जो भी कर रहे हैं वो बहुत गलत है भाभी तो मां के समान होती है, प्लीज मुझे छोड़ दिजिये मैं आपके हाथ जोड़ती हूं। अपनी मां समान भाभी को ऐसे बेईज्जत मत किजिये।

सनी पूरी तरह वासना की तरंग में झूम रहा था और इस तरह से नेहा को अनुनय करते देख उसकी उत्तेजना और बढ़ जाती है। अब वो नेहा के बगल में बैठ जाता है और उसको बांए कंधो से पकड़ कर अपनी तरफ़ खींच लेता है और अपनी गोद में उसका सर रख लेता है और उसके दोनों हाथों को पकड़ कर फ़िर से उसके सर के उपर कर लेता है। और उसके विशाल स्तन फ़िर से सनी के सामने झूलने लगते हैं।

इतनी खूबसूरत नंगी लड़्की को अपनी गोद में पाकर सनी तो जैसे पागल हो जाता है और वो पागलों की तरह से उसके चेहरे को चूमने लगता है और अपने एक हाथ को उसके स्तन पर रख उसे मसलना चालू कर देता है। वो नेहा के कानों के पास अपना मुंह ले जा कर धीरे से बोलता है " तू ठीक बोलती है कि भाभी मां के समान होती है लेकिन तब जब वो ४५ या फ़िर ५० साल की हो लेकिन जानम तुम तो मेंरे से भी एक साल छोटी हो मैं २४ साल का हूं और तू तो २३ साल की ही है तो फ़िर तू मेंरी मां कैसे हो सकती है? जानेमन तू मेंरे लिये "मां" समान नही बल्कि "माल" के समान है। और वो अपने गोद में निढाल पड़ी नेहा के स्तनों में हाथ घुमाने लगता है फ़िर वो अपना हाथ उसके पेट में घुमाते हुए उसकी बिना बालों वाली चिकनी चूत में रख देता है।

अपनी नरम चूत पर सनी का हाथ लगते ही नेहा चिहुंक उठती है और सनी हौले हौले उसे सहलाने लगता है, और बड़े ही बेशर्म तरिके से और कामुक अंदाज में उससे कहता है आज इसके अंदर अपना ड़ालूंगा और इसको खूब प्यार करुंगा। आज से ये मेंरी है। बोल जानम देगी न मुझे इसके अंदर अपना लंबा वाला ड़ालने के लिये।

सनी कहना जारी रहता है "ऐसा मैंने सुना है कि शर्म किसी भी औरत का आभूषण होता है लेकिन नेहा मै इसमें आगे और एक बान जोड़्ना चाहता हूं कि नग्नता किसी भी खूबसूरत औरत का सबसे बढिया बस्त्र होता है। और आज तूने अपना सबसे अच्छा बस्त्र पहना है मेंरे सामने। नेहा तू सदा इसी वस्त्र में आना मेंरे सामने मैं तुझे इसी बस्त्र में देखना चाहता हूं।

अब सनी अपनी बातों में भी हल्कापन ले आता है उससे हल्के स्तर की सेक्सी बातें करने लगता है। वो कहने लगता है तू नंगी बहुत अच्छी लगती है नेहा, तू सदा मेंरे सामने नंगी ही रहना। तेरे इस खूबसूरत नंगे बदन को देख कर मुझे बड़ा सकून मिल रहा है।
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06-28-2019, 01:59 PM,
#28
RE: Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
सनी की बातों से उसे बड़ी लज्जा आ रही थी उसने उसकी बातों को सुन कर बेचैनी से अपना पहलू बदलने का प्रयास किया और तिरछी नजर से सनी की तरफ़ देखा। उसकी नजर उससे मिल गई उसने देखा सनी बड़े कामुक अंदाज में उसके शरीर का मुआयना कर रहा है। सनी से नजर मिलते ही वो मुस्कुरा दिया और फ़िर से उसे चूमते हुए उससे पूछने लगा "ड़ालने दोगी न?" दर असल अब वो पूरी तरह से नेहा का मजा ले रहा था और केवल शारीरिक रुप से ही नहीं बल्की मान्सिक रुप से और अपनी बातों से भी वो उसको ये जता देना चाहता था कि तू पूरी तरह से मेंरे जाल मे फ़ंस चुकी है और मुझे तेरी खुशी और रजामंदि की कोई परवाह नहीं है। और ना ही मुझे किसी को पता चल जाने की कोई चिंता है। क्योंकि पता चल जाने पर भी नुकसान तो सबसे ज्यादा तेरा ही होना है।

कुछ देर तक इसी तरह से अपने पैरों पर पड़ी नेहा के नंगे बदन का मन भर के मुआयना करने और हल्की कामुक बातें करने के बाद अब सनी अत्यंत गरम हो चुका था और उसके सब्र का बांध टूट
चुका था उसके लिये खुद को रोक पाना संभव नहीं था। लंड़ उसका इतना कड़क हो चुका था कि अब वो दुखने लगा था जिसे बर्दाश्त करना अब सनी के बस में नहीं था। और फ़िर अपनी योजना के मुताबिक
वो संजय के आने के पहले नेहा की चूत में अपना लंड़ डाल कर उसकी सेक्स की भूख को जगा देना चाहता था,ताकि संजय के वापस जाने के बाद वो उसे अराम से जी-भर के चोद सके और उसके नंगे जिस्म से अपनी मर्जी के मुताबिक खिलवाड़ कर सके।वो उसके अंदर महिनों से दबी पड़ी कामवासना को जगा देना चाहता था। उसे पता था कि उसका बाकि काम उसका निकम्मा भाई उसके लिये आसान बना देगा।

अब उसने फ़िर से उसके नंगे जिस्म पर हाथ घुमाना चालू कर दिया और वो उसके विशाल स्तनों को मसलने लगा। कुछ देर तक उसके दोनों स्तनो को मसलने के बाद सनी बेकाबू होने लगा और उसने एक हाथ से उसके स्तन को मसलना जारी रखा और दूसरा हाथ उसकी चूत पर रख दिया और धीरे धीरे उसे मसलने लगा। नेहा लाख चाहे कि उसे सनी के साथ संबंध नही बनाना है लेकिन एक मर्द के इस तरह उसके नंगे बदन पर बार बार हाथ लगाने और उसके उत्तेजक अंगो को सहलाते रहने के कारण उसका शरीर धीरे धीरे गरम होने लगा। और उसे अपने अंग में अजिब सी सिहरन मह्सूस होने लगी। ना चाहते हुए भी उसे पुरुष के स्पर्श का आनंद तो मिल ही रहा था। और उसे ड़र था कि कहीं वो बहक ना जाय इसलिये वो छटपटा रही थी कि किसी तरह से वो उसके चंगुल से अजाद हो जाय तो खुद पर काबू कर ले लेकिन सनी की मजबूत पकड़ से निकलना उसके लिये संभव नहीं था।

ईश्वर ने स्त्री को रुप,यौवन आदि दे कर उसे बड़ा वरदान दिया है जिसके बल पर वो पुरुषों पर बहुत इतराती है लेकिन एक अन्याय भी कर दिया है उसके साथ कि उसे शक्ति नहीं प्रदान की अपने यौवन की रक्षा के लिये और पुरुषों की किस्मत में ना स्त्रीयों की तरह ना रुप ना यौवन लेकिन उसे शक्ति और अधीरता प्रदान कर दी। और वही पुरुष जब अधीर हो कर किसी स्त्री के यौवन को हासिल करने के लिये जब अपनी शक्ति का प्रयोग करता तो स्त्री के लिये अपने यौवन को बचा पाना संभव नहीं होता।शायद ये स्त्री को उसके रुप पर घमंड़ करने की सजा है। नेहा की हालत भी ऐसी ही थी उसके यौवन में और उसके गदराए बदन में वो ताकत तो थी कि वो सनी जैसे मर्दों को आकर्षित कर अपने पास बुला ले लेकिन उसे दूर करने की शक्ति उसमें नहीं थी। नतिजा सामने था जिस तरह चंदन के वृक्ष पर सांप लिपटे रहते हैं उसी तरह नेहा नंगे जिस्म पर सनी लिपट चुका था।

अब धीरे धीरे सनी ने उसकी चूत की दरार में अपनी उंगली ड़ाल दि और वो उसकी चूत के अंदर हिलाने लगा। नेहा बुरी तरफ़ तडफ़ उठी . सनी ने उसकी चूत में उंगली रगड़ने की गती जरा तेज कर दी . अब तो नेहा के लिये खुद पर काबू रखना काफ़ी मुश्किल हो रहा था।
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06-28-2019, 02:00 PM,
#29
RE: Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
सनी नेहा की चूत में उंगली अब कुछ ज्यादा ही तेजी से रगड़ने लगा, नेहा भी अब अपने आपे से बाहर होते जा रही थी। तभी सनी ने नेहा की चूत के दरारों पर उंगली रगड़्ना बंद कर दिया और धीरे से वो उसकी चूत का वो हसीन छेद तलाशने लगा जिसे पाना और उसका भोग करना हर कामुक मर्द की हसरत होती है। आखिर सनी ने नेहा की चूत के छेद पर उंगली रख दी और फ़िर हौले से उसे धक्का लगाते हुए उसने अपनी उंगली एक पोर उसमें ड़ाल दिया और धीरे धीरे उसे अंदर बाहर करने लगा।

नेहा के लिये ये एक विचित्र अनुभव था हालांकि शादि के बाद संजय के साथ उसके कुछेक बार शारीरिक संबंध बने जरुर थे लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया उसके था। उसने कभी नेहा को उत्तेजित करने की जरुरत नहीं समझी थी या शायद उसे ये पता ही नहीं था कि सेक्स केवल खुद के मजा लेने का नाम नहीं है बल्कि अपने साथी को भी चरम सुख तक पहुंचाने का नाम है। वही सेक्स सच्चा सेक्स होता है जिसमें दोनों परमसुख की प्राप्ति कर सके। अगर एक भी पक्ष नासमझ हो खासकर पुरुष तो फ़िर वो सेक्स ना हो कर केवल एक नीरस शारीरिक क्रिया मात्र रह जाती है। संजय इस मामले में फ़िसड्डी साबित हुआ था।

इस तरह उंगली के अंदर बाहर होने से ना चाहते हुए भी नेहा की चूत गीली होने लगी और उसमें से एक चिकना पदार्थ बाहर आने लगा जिससे सनी और भी असानी से अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगा। तभी अचानक नेहा की कमर ने एक हल्का सा झटका लगाया। ये नेहा ने नहीं लगाया था लेकिन काम की अधिकता से अपने आप ही हो गया था जो अत्यंत स्वाभाविक था।तुषार ने भी इसे साफ़ महसूस किया और समझ गया कि अब मेंरी रानी वासना के समुंदर मे गोते लगाने के लिये तैयार हो चुकी है। उसने उसी तरह बैठे हुए पूछा " मजा आ रहा है जान, पूरी उंगली ड़ाल दूं क्या तेरी चूत में? अब सनी ने नेहा से सभ्य भाषा में बात करना छोड़ ही दिया था और वो उससे अश्लील भाषा का ही प्रयोग करने लगा था। ऐसा करने से उसे नेहा की नंगी जवानी पर पूर्ण विजय और अधिकार का अहसास जो होता था।

अब सनी ने उसकी चूत में अपनी उंगली और गहराई तक घुसा दी और उसे और भी तेजी से अंदर बाहर करने लगा . अब तो नेहा का अपने शरीर से नियंत्रण खतम होने लगा और उसकी कमर उसकी इच्छा के विरुद्द झटके देने लगी। वो बड़ी लज्जित थी और शर्म के मारे उसने अपनी आंखे बंद कर ली थी। वो शुरु से सनी से हर क्षेत्र में लगातार हार ही रही थी और आज भी उसके सामने पूरी तरह से बेनकाब हो गई और अपनी इसी झेंप को मिटाने के लिये वो आंखे बंद किये हुए अपना सर दांए बांए घुमा रही थी और बड़बड़ाते जा रही थी " नहीं प्लीज छोड़ दो मुझे , बस अब नहीं आह मैं मर जाउंगी मेंरा सर चकरा रहा है मुझे छोड़ दो। नेहा बोले जारही थी लेकिन सनी के उपर इसका कोई असर नहीं हो रहा था बल्कि वो तो और भी उत्तेजित हो रहा था।

सनी अब और तेज गति से उसकी चूत में उंगली ड़ाल रहा था और नेहा अब उत्तेजना के मारे अब अपनी कमर को जोर जोर से उपर तक उछालने लगी और बोलने लगी " पागल हो जाउंगी मैं मुझे छोड़ दो" लेकिन सनी ने उसकी चूत को जो से भीच लिया और धीरे से बोला मैं तुम्हें अभी छोड़ दुंगा लेकिन तुम वादा करो कि तुम अपनी चूत में मुझे अपना लंड़ ड़ालने दोगी और वो भी आज ही , तुम बोलो तो मैं तुम्हें छोड़ देता हूं लेकिन आज रात मैं तुझे जी भर के चोदुंगा। बोल है मंजूर ? नेहा ने बला टालने की गरज से कह दिया ठीक है अभी छोड़ दो। लेकिन सनी भी कम नहीं था उसने तुरंत कहा यदि धोखा दिया तो? परिणाम पता है न? उसने कहा अगर धोखा दिया याद रखना तेरी बहन के सगाई के साथ का प्रोग्राम केंसल .

सनी के मुंह से ऐसी बातें सुन कर नेहा ने चौंक कर उसकी तरफ़ देखा लेकिन सनी हंस रहा था उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान थी। नेहा के इस तरह चौंकने से वो ये समझ गया कि उसका तीर निशाने पर लगा है।

नेहा ने प्रत्युत्तर में कहा तुम्हें जो करना है वो करो मुझे क्या? और नीता के लिये कोई लड़्को की कोई कमी नहीं है , वो नही मरे जा रही है तुमसे शादी करने के लिये तुम्हारी माँ ही पीछे पड़ी थी इस रिश्ते के लिये। और क्या इस तरह से ब्लेकमेल कर के शादी करोगे? अरे तुम क्या केंसल करवाओगे इस सगाई को तुम देखना मैं खुद ही केंसल करवाउंगी इस रिश्ते को और तुझे बेनकाब करवाउंगी सबके सामने। अच्छा हुआ तेरी सच्चाई सामने आ गई। तुझ जैसे से शादी करने से तो अच्छा है कि वो जीवन भर कुंवारी ही रह जाय।

अपनी मां और अपना अपमान सनी सहन नहीं कर पाया और वो क्रोध में पागल हो उठा उसने अपने एक हाथ से नेहा के बाल जोर से पकड़ लिये और दूसरे हाथ से उसकी चूत को बुरी तरह से रगड़ दिया , नेहा के मुंह से आह निकल गई साथ ही साथ उसे ये भी अहसास हो गया कि वो कुछ ज्यादा ही बोल गई है .
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06-28-2019, 02:00 PM,
#30
RE: Bhabhi ki Chudai कमीना देवर
अब सनी ने बोलना चालू किया "साली मादरचोद कभी घर में खाने के ठिकाने नहीं थे यहां खा खा कर गांड़ मोटा गई है तेरी, शादी के लिये तन ढकने के लिये दो कपड़े देते की हैसियत भी तो है नहीं तुम्हारे परिवार की और बोलती है कि उसके लिये लड़्कों की कमी नहीं है , कौन करेगा तुम जैसे भुख्खड़ भिखारियों से रिश्ता? जा, कर के देख तब पता चलेगा कैसे तय होते है रिश्ते? और मेंरी जिस मां के बारे में तू कह रही है कि वो पिछे पड़ी है इस रिश्ते के लिये तो सुन साली मादरचोद मेंरी उसी मां की बदौलत ही तू इस घर में है . ये उसी के विचार है कि तू गरीब परिवार की होने बाद भी हमरे घर की बहू है समझी।

सनी अभी भी तनिक क्रोधित ही था उसने धक्का दे कर उसे अपने से दूर कर दिया . और नेहा अब उससे एक हाथ की दूरी पर जमीन पर नंगी बैठी थी उसकी तफ़ पीठ किये हुए और वो उसे घूर रहा था। नेहा ने अपना चेहरा अपने हाथों से छुपा लिया और सुबकने लगी।

ठुकराया जाना किसी भी स्त्री के लिये सबसे बड़ा अपमान होता है, सनी ने जब नेहा को धक्का दे कर दूर हटा दिया तो उसके मन में एक अघात सा लगा . एक जवान खुबसुरत औरत पूर्णत: नग्न किसी मर्द के सामने हो और वो उसे ठुकरा दे ये तो किसी भी स्त्री के लिये बड़ी शर्मनाक बात होती है और खतरे की घंटी भी। स्त्री के जिस नग्न रुप को देखने और पाने के लिये पुरुष तरह तरह की कवायदें करता है उसी स्त्री को यदि कोई पुरुष नंगी करके ठुकरा दे ये तो उसके लिये बलात्कार से भी बड़ा अपमान होता है।

सनी की बातों का असर नेहा पर हुआ जरुर लेकिन थोड़ी देर के बाद और दोनों की आपस में नोंक झोंक औत तू तू मैं मैं के बाद। अब जमीन पर अपने पांव मोड़ कर बैठी नंगी नेहा सोचने लगी कि यदि इसने सचमुच नीता के साथ सगाई से मना कर दिया तो? मेंरा परिवार नाहक ही बदनाम हो जायेगा . और फ़िर पता नहीं सनी क्या कारण बतायेगा सगाई न करने के लिये? अब उसे कुछ घबराहट होने लगी , उसकी स्थिती सांप छछूंदर वाली हो गई थी न उगलते बन रहा था और ना ही निगलते।

नेहा की स्थिती बड़ी ही दुविधा वाली हो गई थी , इधर कुंआ तो उधर खाई . सनी की शर्त ही ऐसी थी यदि नीता के साथ सगाई करवानी है तो उसे अपनी बुर चुदवानी होगा सनी के लंड़ से और यदि सनी कि बात ना मानी तो सनी चोदेगा उसके परिवार की इज्जत को पूरे समाज के सामने। आपनी स्थिती पर खुद नेहा को ही तरस आ रहा था लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था उसे इस विकट परिस्थिती से बाहर आने के लिये। वो सनी को इतना ज्यादा बोल चुकी थी कि अब उससे वापस होने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता था क्योंकि अपनी बात वापस लेने या उसके सामने विनम्र होने का मतलब था उसके सामने समर्पण करना, सो उसने उसका हिम्मत से सामना करने का निश्चय किया।

नेहा लगभग पिछले २० मीनट से सनी के सामने नंगी पड़ी थी सो अब शर्म जैसी बात काफ़ी खतम हो चुकी थी . जिस शरीर को छुपाने में स्त्री अपना सर्वस्व लगा देती है उसे यदि सनी ने देख लिया है तो थोडी देर और सही देख जितना देख सकता है फ़िर तो इसे कभी मेंरी परछाई भी देखने को नसीब नहीं होने वाली ऐसा सोच कर नेहा पलटी और सनी को बोली " सुन अब ना तो मैं यहां रहने वाली हूं और ना ही मुझे इस बात से कोई मतलब कि तुम क्या फ़ैसला लेते हो मेंरी नजर में तुम्हारी जो इज्जत थी वो खतम हो चुकी है और मैं ये बात अपने दिल से कह रही हूं कि यदि तुम्हारे साथ नीता की सगाई ना हो तो नीता से ज्यादा कोई भाग्यवान नहीं होगा, लेकिन तुम यदि ये सोच रहे हो कि अपनी गंदी
मानसिकता और हरकतों से अपने और खासतौर मेंरे परिवार को जिस मुसीबत में ड़ालने की सोच रहे हो तो मैं तुम्हारे मंसूबे कभी भी पूरे नहीं होने दूंगी। उसने बोलना जारी रखा "यदि तुमने सगाई तोड़ने की कोशीश भी की तो मैं तुम्हारी सच्चाई तुम्हारे घर वालों को बता दूंगी और यदि जरुरत पड़ी तो तुम्हारे खिलाफ़ F.I.R. भी लिखवाउंगी। उसने सनी को धमकाते हुए कहा तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम नीता से बिना शर्त सगाई कर लो वर्ना इसका अंजाम बहुत बुरा होगा . और फ़िर मेंरी बातों से तुम्हारे परिवार की जो बेईज्जती होगी और मम्मी,पापा,दिया और संजय को तकलिफ़ होगी उसका जिम्मेंदार केवल तू होगा सनी। अब नेहा ने भी उसके साथ सभ्यता से बात करना छोड़ दिया और वो उससे तू तड़ाक की भाषा बोलने लगी।
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